झारखंड

BIT Mesra में अगले सत्र से झारखंड छात्रों के लिए 50% सीटें

BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए फिर 50% सीटें होंगी आरक्षित, अगले सत्र से लागू होगी व्यवस्था

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षण की खबर
BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए फिर 50% सीटें आरक्षित होंगी

रांची। झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए फिर से 50% सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाने की तैयारी है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गई है।

 

अगले सत्र से 50% सीटों पर झारखंड के छात्रों का हक

 

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से BIT Mesra की कुल सीटों में से 50% सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित करना सुनिश्चित करेगी।

सरकार का कहना है कि यह फैसला ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। इस संबंध में सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

 

2026-27 में खत्म हो गया था होम-स्टेट कोटा

 

दरअसल, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए लागू 50% होम-स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद संस्थान में दाखिले ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किए जा रहे हैं।

इससे झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला राज्य कोटा प्रभावित हुआ था।

 

समझौता खत्म होने के बाद बदली व्यवस्था

 

जानकारी के मुताबिक, BIT Mesra और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो साल पहले समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार की ओर से संस्थान को मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी बकाया हो गया।

संस्थान ने समझौते के नवीकरण के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका। इसके बाद 2026-27 सत्र में सभी सीटों पर ऑल इंडिया कोटे के तहत नामांकन लेने का फैसला किया गया।

 

पहले करीब 650 BTech सीटों पर मिलता था लाभ

 

पहले व्यवस्था के तहत BIT Mesra में BTech की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम-स्टेट कोटे का लाभ मिलता था। इसके अलावा BC-I और BC-II वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित थीं।

अब राज्य सरकार के नए फैसले से अगले शैक्षणिक सत्र से झारखंड के विद्यार्थियों को फिर से 50% सीटों का लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

विधायक ने भी मांगी थी जानकारी

 

BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा खत्म किए जाने के मामले में विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी। विभाग की ओर से उन्हें कोटा खत्म होने के कारण और भविष्य की योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

राज्य सरकार के इस फैसले से झारखंड के विद्यार्थियों के लिए BIT Mesra में दाखिले के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Land subsidence affected area near Chhatabad in Katras, Dhanbad, with damaged homes and residents at risk
छाताबाद में फिर भू-धंसान का खतरा, 200 से ज्यादा घरों पर मंडरा रहा संकट; 1000 लोग कर चुके पलायन

कतरास: धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास सात अगस्त को हुई भू-धंसान की घटना के बाद अब एक बार फिर बड़े हादसे की आशंका जतायी गयी है. कतरास थाना प्रभारी ने धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को भेजी रिपोर्ट में प्रभावित इलाके में दोबारा भू-धंसान की प्रबल संभावना बतायी है. रिपोर्ट के अनुसार, यदि रात में या बड़े पैमाने पर दोबारा जमीन धंसती है, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है. पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद एसएसपी ने मामले से जुड़े दस्तावेज धनबाद डीसी आदित्य रंजन को अवलोकन और आगे की कार्रवाई के लिए भेजे हैं. वहीं, प्रभावित इलाके में पुलिस की पैदल गश्ती बढ़ा दी गयी है. पुलिस स्थानीय लोगों से लगातार संपर्क में रहकर हालात पर नजर रख रही है. 200 घरों से करीब 1000 लोगों ने किया पलायन भू-धंसान प्रभावित इलाका बीसीसीएल की न्यू आकाशकिनारी सलानपुर खदान के समीप स्थित है. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, छाताबाद में करीब 500 मीटर के दायरे में लगभग 8 हजार लोग रह रहे हैं. इनमें करीब 200 घरों के लगभग 1000 लोग अपनी सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर चले गये हैं. बीसीसीएल की ओर से भी प्रभावित 12 परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट करने के लिए जिला प्रशासन को सूची उपलब्ध करायी गयी है. कंपनी की रिपोर्ट में करीब 150 मीटर के क्षेत्र को डेंजर जोन बताया गया है. इस इलाके में अभी भी करीब 25 घरों में 200 से अधिक लोगों के रहने की जानकारी है. 20 से 22 फीट नीचे धंसी थी जमीन पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, सात अगस्त को दोपहर करीब 2:30 से 3 बजे के बीच छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास अचानक जमीन करीब 20 से 22 फीट नीचे धंस गयी. भू-धंसान की चपेट में आकर 15 से 20 घर पूरी तरह जमींदोज हो गये, जबकि आसपास के कई मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गयीं. स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से पहले न्यू आकाशकिनारी सलानपुर खदान में कोयला उत्खनन के लिए जोरदार ब्लास्टिंग की गयी थी. ब्लास्टिंग के बाद आसपास के घरों में तेज कंपन महसूस हुआ. इसके कुछ देर बाद तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी. जुमे की नमाज के कारण टला बड़ा हादसा भू-धंसान के वक्त जुमे की नमाज का समय था. इस कारण इलाके के अधिकांश पुरुष घरों से बाहर थे. घरों में मौजूद करीब आठ से 10 बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे मलबे में फंस गये थे. स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी को बाहर निकाला गया और अस्पताल भेजा गया. हादसे में एक महिला और एक बच्चे को अधिक चोट लगी थी. वहीं, कई परिवारों का घरेलू सामान, आभूषण और जरूरी दस्तावेज मलबे में दब गये. पुराने भूमिगत खनन से बढ़ी चिंता भू-धंसान के पीछे पुराने भूमिगत खनन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि प्रभावित इलाके में पहले बीसीसीएल की भूमिगत खदान संचालित थी. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोयला निकालने के बाद भूमिगत हिस्से में पर्याप्त बालू भराई या अन्य सुरक्षा उपाय नहीं किये गये. लोगों के मुताबिक, घटनास्थल से करीब 100 से 150 मीटर दक्षिण कतरास-छाताबाद मुख्य सड़क की दिशा में भी पहले भूमिगत खनन हुआ था. ऐसे में आसपास के दूसरे इलाकों में भी जमीन धंसने का खतरा बना हुआ है. प्रभावित परिवारों में बढ़ रहा आक्रोश हादसे के बाद प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों में बीसीसीएल के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है. प्रभावित परिवारों ने 10 अगस्त को संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन देकर बीसीसीएल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और थाना में धरना दिया था. इसके बाद कतरास थाना में कांड संख्या 213/26 दर्ज किया गया. इससे पहले सात जुलाई की घटना के बाद भी लोगों ने कतरास-भटमुरना मुख्य मार्ग को करीब आठ घंटे तक जाम किया था. उस मामले में कतरास थाना कांड संख्या 185/26 दर्ज किया गया था. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जतायी है कि यदि दोबारा भू-धंसान होता है, तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में कतरास थाना चौक जाम करने या थाना घेराव जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है. जमीन में बदलाव दिखे तो तुरंत रहें सतर्क भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में जमीन का धीरे-धीरे बैठना, मकानों और दीवारों में अचानक नयी दरारें पड़ना, सड़क या आंगन का धंसना और जमीन से पानी निकलना जैसे संकेत खतरे की ओर इशारा कर सकते हैं. पुराने भूमिगत खनन वाले क्षेत्रों में जमीन के नीचे खाली हिस्से कमजोर होने से अचानक धंसाव का खतरा बना रहता है. ऐसे इलाकों में प्रशासन और खनन प्रबंधन की ओर से लगातार निगरानी, असुरक्षित घरों को खाली कराना और जमीन की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है, ताकि दोबारा होने वाली घटना में जान-माल के नुकसान को रोका जा सके.  

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BIT Mesra campus in Ranchi where 50% seat quota for Jharkhand students is expected to return next academic session
BIT Mesra में फिर लागू होगा झारखंड के छात्रों का 50% कोटा, अगले सत्र से मिलेगा आरक्षण

रांची: झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गयी है. पत्र के अनुसार, राज्य सरकार बीआइटी मेसरा की कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित कराने को लेकर आवश्यक कदम उठायेगी. यह निर्णय ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जायेगा. इस संबंध में सम्यक विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जायेगी. 2026-27 में खत्म हो गया था होम स्टेट कोटा बीआइटी मेसरा में फिलहाल झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया है. JoSAA 2026 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संस्थान में नामांकन ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किया जा रहा है. इस बदलाव के बाद झारखंड के विद्यार्थियों को पहले की तरह राज्य कोटे का लाभ नहीं मिल रहा है. इसे लेकर विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी सवाल उठाये गये थे. राज्य सरकार और BIT Mesra के बीच समझौता हुआ था समाप्त विभाग की जानकारी के अनुसार, बीआइटी मेसरा और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो वर्ष पहले समाप्त हो गया था. समझौता समाप्त होने के बाद राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी लंबे समय से बकाया रहा. संस्थान की ओर से समझौते के नवीकरण को लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे गये, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका. इसके बाद संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी सीटों पर ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर नामांकन लेने का फैसला किया. पहले करीब 650 बीटेक सीटों पर मिलता था लाभ पूर्व की व्यवस्था के तहत बीआइटी मेसरा में बीटेक की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम स्टेट कोटा का लाभ मिलता था. इसके अलावा बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित रहती थीं. राज्य में इस कोटे को दोबारा लागू करने की मांग लगातार उठती रही है. अब सरकार के अगले सत्र से 50 प्रतिशत सीट आरक्षित कराने के निर्णय से झारखंड के विद्यार्थियों को बीआइटी मेसरा में नामांकन के लिए फिर से बड़ा अवसर मिलने की उम्मीद है. विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी मांगी थी जानकारी बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा समाप्त किये जाने का कारण और आगे की व्यवस्था को लेकर विधायक सुरेश कुमार बैठा ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी. विभाग की ओर से विधायक को भी इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करायी गयी है. राज्य सरकार के ताजा रुख के बाद अब अगले शैक्षणिक सत्र से बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटों की व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद बढ़ गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
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राढ़ू नदी पर पुल का बीच का हिस्सा धंसा, जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे लोग

NIA Special Court in Jharkhand delivering a verdict in the Chatra terror funding case
चतरा टेरर फंडिंग केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 12 दोषियों को 5 से 10 साल तक की सजा

रांची/चतरा: झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में लेवी वसूली और प्रतिबंधित टीपीसी के लिए फंड जुटाने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 12 आरोपियों को 5 से 10 साल तक की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इनमें पांच दोषियों को 10 साल, छह को 8 साल और एक दोषी को 5 साल की सजा दी गई है. कोयला कारोबारियों से लेवी वसूली का था आरोप मामला चतरा के अम्रपाली-मगध कोयला क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप था कि कोयला कारोबारी, ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और अन्य व्यवसायियों से लेवी की वसूली की जाती थी. इस रकम का इस्तेमाल प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) की गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया जाता था. एनआईए की जांच में सामने आया कि संगठन से जुड़े सदस्य और कैडर स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन से जुड़े लोगों से रकम वसूलते थे. आरोपियों पर कोयला खदानों से खनन और उसके परिवहन को जारी रखने के बदले लेवी वसूलने की व्यवस्था में शामिल होने का आरोप था. 12 दोषियों को मिली सजा अदालत ने बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा समेत 12 आरोपियों को दोषी ठहराया. इनके अलावा विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां भी दोषियों में शामिल हैं. अदालत ने दोषियों को मामले में उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई. टीपीसी और माओवादी कनेक्शन की भी हुई जांच जांच के दौरान एनआईए ने पाया कि प्रतिबंधित टीपीसी के सदस्य और कैडर कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा थे. जांच एजेंसी के अनुसार, टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी संगठन से भी जुड़े हुए थे. एनआईए ने यह भी जांच की कि स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए कोयला खनन और परिवहन की गतिविधियों को संचालित करने के बदले लेवी वसूली जाती थी. 21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट इस मामले में एनआईए ने कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गयी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 119 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
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