झारखंड

Chatra Terror Funding Case: 12 Convicts Sentenced to 5–10 Years

चतरा टेरर फंडिंग केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 12 दोषियों को 5 से 10 साल तक की सजा

kalpana अगस्त 19, 2026 0
NIA Special Court in Jharkhand delivering a verdict in the Chatra terror funding case
Chatra Terror Funding Case: NIA Court Sentences 12 Convicts to Up to 10 Years

रांची/चतरा: झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में लेवी वसूली और प्रतिबंधित टीपीसी के लिए फंड जुटाने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 12 आरोपियों को 5 से 10 साल तक की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इनमें पांच दोषियों को 10 साल, छह को 8 साल और एक दोषी को 5 साल की सजा दी गई है.

कोयला कारोबारियों से लेवी वसूली का था आरोप

मामला चतरा के अम्रपाली-मगध कोयला क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप था कि कोयला कारोबारी, ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और अन्य व्यवसायियों से लेवी की वसूली की जाती थी. इस रकम का इस्तेमाल प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) की गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया जाता था.

एनआईए की जांच में सामने आया कि संगठन से जुड़े सदस्य और कैडर स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन से जुड़े लोगों से रकम वसूलते थे. आरोपियों पर कोयला खदानों से खनन और उसके परिवहन को जारी रखने के बदले लेवी वसूलने की व्यवस्था में शामिल होने का आरोप था.

12 दोषियों को मिली सजा

अदालत ने बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा समेत 12 आरोपियों को दोषी ठहराया.

इनके अलावा विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां भी दोषियों में शामिल हैं. अदालत ने दोषियों को मामले में उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई.

टीपीसी और माओवादी कनेक्शन की भी हुई जांच

जांच के दौरान एनआईए ने पाया कि प्रतिबंधित टीपीसी के सदस्य और कैडर कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा थे. जांच एजेंसी के अनुसार, टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी संगठन से भी जुड़े हुए थे.

एनआईए ने यह भी जांच की कि स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए कोयला खनन और परिवहन की गतिविधियों को संचालित करने के बदले लेवी वसूली जाती थी.

21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट

इस मामले में एनआईए ने कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गयी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया.

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 119 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Food safety officials inspecting peda shops during the Shravan Mela in Basukinath
बासुकीनाथ में मिलावटखोरों पर शिकंजा, 69 किलो खराब पेड़ा नष्ट; दुकानदारों पर लगा 25 हजार का जुर्माना

बासुकीनाथ: श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. मंगलवार को बासुकिनाथ मंदिर क्षेत्र और चूड़ी गली स्थित पेड़ा दुकानों में विशेष जांच अभियान चलाया गया. इस दौरान 18 दुकानों में पेड़ा के 45 नमूनों की मौके पर ही जांच की गयी. मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब की मदद से की गयी जांच में कई पेड़ा मानकों के अनुरूप नहीं मिले. इसके बाद खाद्य सुरक्षा टीम ने 69 किलो खराब पेड़ा मौके पर ही नष्ट करा दिया. साथ ही संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. 18 दुकानों में 45 नमूनों की हुई जांच श्रावणी मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बासुकिनाथ पहुंच रहे हैं. इसे देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार खाद्य दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है. मंगलवार को टीम ने बाबा मंदिर क्षेत्र और चूड़ी गली में स्थित पेड़ा दुकानों को जांच के दायरे में लिया. मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के माध्यम से पेड़ा के नमूनों की ऑन द स्पॉट जांच की गयी. अधिकारियों ने दुकानदारों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने और स्वच्छता के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया. खराब पेड़ा मिलते ही मौके पर कराया गया नष्ट जांच के दौरान मानकों के अनुरूप नहीं पाये गये कुल 69 किलो पेड़ा को जब्त कर मौके पर ही नष्ट कराया गया. इसके अलावा संबंधित कारोबारियों पर कुल 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया. कार्रवाई की खबर फैलते ही पेड़ा कारोबारियों में हड़कंप मच गया. खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. मेला क्षेत्र में अमानक, मिलावटी या अस्वच्छ खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कार्रवाई की जाएगी. दुकानदारों को साफ-सफाई रखने की हिदायत अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने दुकानदारों को कई जरूरी निर्देश भी दिये. खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, दुकान और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखने तथा खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन करने को कहा गया. अधिकारियों ने बताया कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी लगातार जारी रहेगी. आने वाले दिनों में भी पेड़ा समेत अन्य खाद्य सामग्री की जांच की जाएगी. टीम में ये अधिकारी रहे मौजूद जांच अभियान में एफएसओ सुबीर रंजन, अंजना रानी मिंज और डेजी नीलिमा तिग्गा के अलावा जरमुंडी थाना पुलिस बल मौजूद रहा. मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब की ओर से जूनियर एनालिस्ट शुभम कुमार और लैब अटेंडेंट सुधांश कुमार ने नमूनों की जांच में सहयोग किया. विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता के मामले में किसी तरह की लापरवाही की अनुमति नहीं दी जाएगी.  

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छाताबाद में फिर भू-धंसान का खतरा, 200 से ज्यादा घरों पर मंडरा रहा संकट; 1000 लोग कर चुके पलायन

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सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लगी इंडोस्कोपी-यूएसजी मशीन, जल्द शुरू होगी मुफ्त जांच सुविधा

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झारखंड के मत्स्य पालकों को मिलेगा बीमा का सुरक्षा कवच, रांची में दो दिवसीय जागरूकता शिविर शुरू

रांची: झारखंड के मत्स्य पालकों को जलीय कृषि में होने वाले संभावित नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से धुर्वा स्थित मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, शालीमार में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत दो दिवसीय बीमा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से आये मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के सदस्य और मत्स्य विभाग की योजनाओं से जुड़े सैकड़ों लाभुक शामिल हुए. इस दौरान मत्स्य पालकों को बीमा योजना की जानकारी देने के साथ इसके लिए पंजीकरण कराने की प्रक्रिया भी समझायी गयी. जलीय कृषि में नुकसान से बचाएगा बीमा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने कहा कि जलीय कृषि में कई तरह के जोखिम और नुकसान की आशंका बनी रहती है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लागू बीमा योजना मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करेगी. उन्होंने मत्स्य पालकों से योजना का लाभ लेने और बीमा के महत्व को समझने की अपील की. अधिकारियों ने बताया कि बीमा से जुड़कर किसान अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं. NFDP पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने अधिक से अधिक पात्र मत्स्य किसानों से NFDP पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराने की अपील की. मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने कहा कि बीमा योजना से जुड़ने से मत्स्य पालकों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है. उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि राज्य का कोई भी पात्र मत्स्य किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए निदेशालय स्तर से आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र मत्स्य कृषकों को योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाना विभाग की प्राथमिकता है. विशेषज्ञों ने बीमा योजना की पूरी प्रक्रिया समझायी दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में एनएफडीबी, हैदराबाद और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी, रांची के विशेषज्ञों ने मत्स्य पालकों को जलीय कृषि बीमा योजना की विस्तृत जानकारी दी. विशेषज्ञों ने किसानों को बीमा की प्रक्रिया, योजना के लाभ और इससे जुड़ी जरूरी औपचारिकताओं के बारे में बताया. साथ ही किसानों की ओर से पूछे गये सवालों और उनकी शंकाओं का भी समाधान किया गया. अधिकारियों और बीमा प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा कार्यक्रम में उप सचिव राजीव रंजन तिवारी, संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय गुप्ता, उप निदेशक शंभु प्रसाद यादव, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की क्षेत्रीय प्रबंधक आशा प्रसाद और उप प्रबंधक मनीषा टोप्पो समेत विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे. जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य पालकों को बीमा योजना से जोड़ने के साथ उन्हें जलीय कृषि में आने वाले जोखिमों के प्रति जागरूक करना है, ताकि नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना कम करना पड़े.  

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Heavy rain and rising water levels in rivers and streams disrupt life and coal production in Khelari, Ranchi
खलारी में बारिश का कहर: नदियां-नाले उफान पर, जनजीवन प्रभावित; कोयला उत्पादन 70% घटा

रांची (खलारी)। खलारी प्रखंड में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. तेज बारिश के कारण क्षेत्र की नदियों और पहाड़ी नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. सपही, दामोदर और सोनाडुबी नदियां उफान पर हैं. कई इलाकों में जलजमाव और कीचड़ की स्थिति बन गयी है, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है. वहीं, लगातार बारिश का सीधा असर कोयला उत्पादन पर भी पड़ा है. सीसीएल एनके एरिया की विभिन्न परियोजनाओं में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक कम कोयला उत्पादन हुआ है. कॉलोनियों में घुसा बारिश का पानी, लोगों की बढ़ी परेशानी लगातार बारिश के कारण सीसीएल की कई कॉलोनियों में नालियों की गंदगी और पानी सड़कों पर बहने लगा. कई जगह बारिश का पानी क्वार्टरों में भी घुस गया. इससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. जलजमाव के कारण सड़क पर चलना भी मुश्किल हो गया है. वहीं, पतरातू-मैक्लुस्कीगंज मार्ग पर चूरी गांव के समीप अधूरी सड़क के गड्ढों में पानी और कीचड़ जमा हो गया है. इस कारण इस मार्ग पर आवागमन जोखिमपूर्ण हो गया है. खलारी से बाजारटांड़ जाने वाले मार्ग पर भी कई स्थानों पर जलजमाव और फिसलन की स्थिति बनी हुई है. बारिश के कारण स्कूली बच्चों और अभिभावकों को भी काफी दिक्कत हुई. नदियां और पहाड़ी नाले उफान पर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण सपही, दामोदर और सोनाडुबी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. इसके अलावा पहाड़ी नालों में भी तेज बहाव देखने को मिल रहा है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है. कोयला उत्पादन में 70 प्रतिशत तक गिरावट बारिश का सबसे बड़ा असर खलारी के कोयला उत्पादन पर पड़ा है. सीसीएल एनके एरिया की डकरा, केडीएच और रोहिणी परियोजनाओं में लगातार बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है. सामान्य दिनों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक कम कोयला उत्पादन दर्ज किया गया है. हाल रोड पर अत्यधिक फिसलन होने के कारण हालपैक डंपरों का परिचालन भी रोक दिया गया है. इससे ओपनकास्ट परियोजनाओं में कोयले के उत्पादन और परिवहन पर असर पड़ा है. मशीनों को सुरक्षित स्थान पर किया जा रहा शिफ्ट ओपनकास्ट खदानों के निचले हिस्सों में पानी भरने के कारण वहां लगे मोटर और पंपों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है. अधिकारियों को मशीनों और अन्य उपकरणों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है. प्रबंधन की ओर से जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है. हालांकि, चूरी भूमिगत खदान में स्थिति सामान्य बतायी गयी है और वहां कामकाज जारी है. रेलवे रैक के परिचालन पर ज्यादा असर नहीं बारिश के बावजूद साइडिंग से कोयला लदे रेलवे रैक के परिचालन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. रेल यातायात निरीक्षक उमेश कुमार के अनुसार, केडीएच और डकरा साइडिंग से पहले की तरह सप्ताह में एक-एक रैक निकल रहा है. आरसीएम राय साइडिंग पहले से बंद है, जबकि राजधर और बचरा साइडिंग से सामान्य से एक-एक रैक कम निकला है. लगातार बारिश जारी रहने पर खलारी में जलजमाव, सड़क संपर्क और कोयला उत्पादन की स्थिति और प्रभावित होने की आशंका है.  

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