Bihar Education

Maithili Thakur meets Bihar CM Samrat Choudhary to seek a degree college and more doctors for Alinagar.
सीएम सम्राट चौधरी से मिलीं मैथिली ठाकुर, अलीनगर के लिए डिग्री कॉलेज और अस्पतालों में डॉक्टरों की मांग

बिहार के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा और जल्द समाधान की मांग की। मैथिली ठाकुर ने खास तौर पर घनश्यामपुर प्रखंड में सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना और अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया। घनश्यामपुर में डिग्री कॉलेज की मांग मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री को बताया कि घनश्यामपुर प्रखंड में फिलहाल कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। इसके कारण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों या जिलों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बाहर जाकर पढ़ाई करना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। वहीं छात्राओं के सामने आवागमन और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी रहती हैं। इन परिस्थितियों के कारण कई मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। विधायक ने मुख्यमंत्री से घनश्यामपुर में सरकारी डिग्री महाविद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान करने की मांग की, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े। अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का मुद्दा बैठक के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घनश्यामपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारडीह और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कैथवार, कुर्सों नादियामी तथा पुतई में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। इन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर, जीएनएम, एएनएम, स्टाफ नर्स, ड्रेसर और फार्मासिस्ट जैसे पद लंबे समय से रिक्त बताए गए हैं या उपलब्ध कर्मियों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम है। विधायक के अनुसार इसका सीधा असर ग्रामीण आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने में परेशानी होती है। तीनों प्रखंडों के अस्पतालों में नियुक्ति की मांग मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री से अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंडों—अलीनगर, तारडीह और घनश्यामपुर—के अस्पतालों में आवश्यक संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति करने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सरकार के सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार से स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिलेगा। मुलाकात के दौरान कम दिखी मुस्कान, विधायक ने खुद बताई वजह मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मैथिली ठाकुर के चेहरे पर सामान्य दिनों की तुलना में मुस्कान कुछ कम नजर आई। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा हो सकती थी, लेकिन विधायक ने खुद इसकी वजह स्पष्ट कर दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले उन्होंने अपने दांतों का इलाज कराया था। दांत में दर्द के कारण वह ठीक से मुस्कुरा नहीं पा रही थीं। इसी वजह से उनके चेहरे पर मुस्कान सामान्य से कम दिखाई दे रही थी। मैथिली ठाकुर की मुख्यमंत्री से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अलीनगर क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्थानीय जरूरतों को सरकार के सामने रखने की कोशिश की जा रही है। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Bihar government plans student welfare directorate and education reforms to improve student services, exams and online learning.
Bihar Education News: चार विभागों के लिए बनेगा छात्र कल्याण निदेशालय, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी

पटना: बिहार में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई अहम पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने युवाओं को बिहार के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार की नई पहल में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियों का गठन, चार विभागों से जुड़ी छात्र कल्याण योजनाओं को एक मंच पर लाने के लिए छात्र कल्याण निदेशालय की स्थापना और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए हर महीने सहयोग शिविर आयोजित करने जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन फैसलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक सुविधाओं और परीक्षा से जुड़ी सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है। चार विभागों को जोड़कर बनेगा छात्र कल्याण निदेशालय बिहार सरकार शिक्षा से जुड़े चार विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए छात्र कल्याण निदेशालय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस प्रस्तावित निदेशालय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करना है। अलग-अलग विभागों में बंटी छात्र कल्याण संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किए जाने से छात्रों को योजनाओं का लाभ लेने में आसानी हो सकती है। नई व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं को चिन्हित करने, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहने की संभावना है। हर महीने आयोजित होंगे छात्र सहयोग शिविर सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए हर महीने सहयोग शिविर आयोजित करने की योजना भी बना रही है। इन शिविरों में छात्र अपनी समस्याएं सीधे संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। छात्रवृत्ति, प्रमाणपत्र, परीक्षा, शैक्षणिक सुविधाओं या अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उनके समाधान की कोशिश की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों और सरकारी तंत्र के बीच संवाद को बेहतर बनाना है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो विद्यार्थियों को अपनी शिकायतों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है। रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा बिहार में ऑनलाइन शिक्षा को भी नई व्यवस्था के तहत बढ़ावा देने की तैयारी है। छात्रों को रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई करने के लिए अतिरिक्त समय देना है। खासकर वे विद्यार्थी जो दिन के समय स्कूल, कॉलेज, कोचिंग या अन्य जिम्मेदारियों के कारण ऑनलाइन शैक्षणिक सामग्री का इस्तेमाल नहीं कर पाते, उन्हें इससे फायदा मिल सकता है। हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता ऑनलाइन कंटेंट की गुणवत्ता, इंटरनेट सुविधा और विद्यार्थियों तक इसकी पहुंच पर निर्भर करेगी। शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए दो कमेटियां मुख्यमंत्री ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियों के गठन की घोषणा की है। इन समितियों के जरिए मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद कमेटियां सुधार के लिए जरूरी सुझाव सरकार को देंगी। परीक्षाओं में समयबद्धता, पारदर्शिता, बेहतर प्रबंधन और विद्यार्थियों का भरोसा बनाए रखना इस प्रक्रिया के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताओं पर फोकस बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर छात्रों की ओर से पारदर्शिता, परीक्षा कार्यक्रम, परिणाम और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे माहौल में परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए राज्यस्तरीय कमेटियों का गठन महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। यदि कमेटियां जमीनी समस्याओं की पहचान कर व्यावहारिक सुझाव देती हैं और उन पर समयबद्ध तरीके से अमल होता है, तो परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में ठोस बदलाव संभव है। सरकार के सामने लागू करने की बड़ी चुनौती छात्र कल्याण निदेशालय, सहयोग शिविर और ऑनलाइन शिक्षा जैसी योजनाओं की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इनके प्रभावी क्रियान्वयन का है। नई व्यवस्था का लाभ तभी व्यापक स्तर पर छात्रों तक पहुंचेगा, जब विभागों के बीच समन्वय मजबूत हो, शिकायतों का समय पर समाधान हो और विद्यार्थियों को योजनाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने युवाओं को बिहार के भविष्य की ताकत बताया है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे इन बदलावों का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को कितनी तेजी से समझती और उनका समाधान करती है। आने वाले समय में दोनों राज्यस्तरीय कमेटियों की सिफारिशें और छात्र कल्याण निदेशालय की कार्यप्रणाली बिहार की शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा तय कर सकती है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Bihar government school students undergo face scanning for digital midday meal attendance monitoring
बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे-मील की बदलेगी व्यवस्था, अब बच्चों का होगा फेस स्कैन; 11 बजे तक डेटा नहीं दिया तो कार्रवाई

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे-मील यानी पोषाहार की निगरानी अब पहले से ज्यादा डिजिटल और सख्त होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष एप के नए वर्जन 3.6.0 के जरिए ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जिसमें स्कूलों में मौजूद बच्चों की संख्या दर्ज करने के लिए फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पोषाहार वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जी छात्र संख्या दिखाकर अतिरिक्त राशन लेने की संभावना कम करना और सरकारी संसाधनों की निगरानी को मजबूत करना है। अब सिर्फ रजिस्टर में बच्चों की संख्या दर्ज कर देने से काम नहीं चलेगा। स्कूल में वास्तव में कितने बच्चे मौजूद हैं और कितने बच्चों ने भोजन किया, इसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। 1.09 करोड़ बच्चों के भोजन का डिजिटल रिकॉर्ड बिहार के सरकारी स्कूलों में करीब 1.09 करोड़ बच्चों को पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है। अब इन बच्चों की उपस्थिति और मिड डे-मील से जुड़ी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगी। स्कूल खुलने के बाद प्रधानाध्यापक को निर्धारित जानकारी सुबह 11 बजे तक ई-शिक्षाकोष एप पर अपलोड करनी होगी। इसमें छात्रों की उपस्थिति, भोजन करने वाले बच्चों की संख्या और भोजन की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी शामिल होगी। इस व्यवस्था के जरिए विभाग को रोजाना यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस स्कूल में कितने बच्चे मौजूद थे और उनके लिए कितना भोजन तैयार किया गया। बच्चों की संख्या के लिए फेस स्कैन और वीडियो रिकॉर्डिंग नई व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा बच्चों की वास्तविक संख्या का डिजिटल सत्यापन है। इसके लिए ई-शिक्षाकोष के नए संस्करण में फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल में मौजूद बच्चों की संख्या और रिकॉर्ड में दर्ज संख्या के बीच बड़ा अंतर न हो। यानी केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर पोषाहार की मात्रा तय करने के बजाय वास्तविक उपस्थिति को डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। जितने बच्चे, उसी हिसाब से राशन नई डिजिटल व्यवस्था का सीधा असर पोषाहार के लिए मिलने वाले राशन के हिसाब पर पड़ेगा। वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर भोजन की जरूरत का आकलन किया जाएगा। इससे अधिक बच्चों की संख्या दिखाकर अतिरिक्त राशन या राशि लेने की संभावना कम हो सकती है। साथ ही सरकारी स्तर पर राशन की खपत का बेहतर हिसाब रखा जा सकेगा। फर्जी छात्र संख्या पर लगेगी रोक मिड डे-मील व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती उन मामलों की होती है, जहां वास्तविक उपस्थिति से ज्यादा बच्चों की संख्या रिकॉर्ड में दर्ज कर दी जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी स्कूल में 50 बच्चे मौजूद हैं, लेकिन रिकॉर्ड में 100 बच्चों की संख्या दिखाई जाती है, तो उसी अनुपात में भोजन और राशन की जरूरत दिखाई जा सकती है। नई व्यवस्था में डिजिटल उपस्थिति और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए ऐसे अंतर को पकड़ना आसान हो सकता है। हालांकि, तकनीकी व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, यह उसके जमीनी स्तर पर सही क्रियान्वयन और निगरानी पर निर्भर करेगा। सुबह 11 बजे तक डेटा अपलोड करना अनिवार्य प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। हर दिन सुबह 11 बजे तक छात्रों की उपस्थिति और मिड डे-मील से संबंधित जरूरी जानकारी एप पर अपलोड करनी होगी। तय समय तक डेटा अपलोड नहीं करने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इससे स्कूलों को रोजाना रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा। वीडियो रिकॉर्डिंग से विभाग की निगरानी मजबूत होगी ई-शिक्षाकोष के नए वर्जन में वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा का इस्तेमाल छात्रों की वास्तविक संख्या दर्ज करने के लिए किया जाएगा। इससे विभाग के पास स्कूल स्तर पर पोषाहार वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। भविष्य में किसी स्कूल में राशन की खपत, छात्रों की संख्या या भोजन वितरण को लेकर सवाल उठने पर डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा सकेगी। इससे निरीक्षण और जवाबदेही की प्रक्रिया भी मजबूत होने की उम्मीद है। भोजन की गुणवत्ता की जानकारी भी होगी दर्ज नई व्यवस्था सिर्फ छात्रों की संख्या तक सीमित नहीं है। एप के माध्यम से भोजन करने वाले बच्चों की संख्या और भोजन की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इससे पोषाहार व्यवस्था के दो अहम पहलुओं पर एक साथ निगरानी रखने की कोशिश होगी—पहला, कितने बच्चों को भोजन दिया गया और दूसरा, उन्हें किस गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराया गया। सरकार के लिए क्यों अहम है यह बदलाव? मिड डे-मील योजना सीधे बच्चों के पोषण और स्कूलों में उनकी उपस्थिति से जुड़ी है। ऐसे में इस योजना में राशन की बर्बादी या रिकॉर्ड में गड़बड़ी का सीधा असर सरकारी संसाधनों और बच्चों को मिलने वाली सुविधा पर पड़ सकता है। डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य यही है कि रजिस्टर आधारित व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा जाए और वास्तविक आंकड़ों के आधार पर राशन की जरूरत तय हो। हालांकि, फेस स्कैन और वीडियो आधारित निगरानी के साथ डेटा सुरक्षा, इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी गड़बड़ी और स्कूलों में इसके व्यावहारिक इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में सिस्टम सुचारू रूप से चले, यह इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा। अब निगाहें जमीनी क्रियान्वयन पर बिहार शिक्षा विभाग का यह कदम मिड डे-मील व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है। अगर डिजिटल रिकॉर्डिंग, फेस स्कैनिंग और समयबद्ध डेटा अपलोड की व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो फर्जी छात्र संख्या और राशन संबंधी गड़बड़ियों पर नियंत्रण मजबूत हो सकता है। लेकिन असली परीक्षा जमीनी स्तर पर होगी। तकनीक के साथ-साथ स्कूलों की जवाबदेही, नियमित निरीक्षण और डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था से सरकारी पोषाहार योजना में कितनी वास्तविक पारदर्शिता आती है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Student checking Bihar ITI CAT 2026 Round 1 seat allotment result and downloading allotment letter online.
Bihar ITI CAT 2026: पहली सीट आवंटन सूची जारी, 13 जुलाई तक पूरा करें एडमिशन और दस्तावेज सत्यापन

बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा बोर्ड (BCECEB) ने Bihar ITI CAT 2026 के पहले चरण की सीट आवंटन सूची जारी कर दी है। काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थी अब आधिकारिक वेबसाइट से अपना Seat Allotment Result और Allotment Letter डाउनलोड कर सकते हैं। जिन उम्मीदवारों को सीट आवंटित हुई है, उन्हें 13 जुलाई 2026 तक संबंधित संस्थान में रिपोर्ट कर दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इन आधारों पर तैयार हुई पहली सीट आवंटन सूची बोर्ड ने सीट आवंटन प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण मानकों को ध्यान में रखा है। इनमें शामिल हैं— ITICAT 2026 में अभ्यर्थी की रैंक काउंसलिंग के दौरान भरे गए कॉलेज और ट्रेड विकल्प उपलब्ध सीटों की संख्या आरक्षण नियमों के अनुसार पात्रता इन्हीं मानकों के आधार पर उम्मीदवारों को संस्थान और ट्रेड आवंटित किए गए हैं। सीट मिलने के बाद क्या करना होगा? पहले चरण में चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित आईटीआई संस्थान में उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उम्मीदवारों को: 13 जुलाई 2026 तक संस्थान में रिपोर्ट करना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा। प्रवेश से जुड़ी औपचारिकताएं समय पर पूरी करनी होंगी। यदि कोई उम्मीदवार तय समय के भीतर रिपोर्ट नहीं करता है, तो उसकी आवंटित सीट निरस्त हो सकती है। आवंटन पत्र में मिलेगी ये महत्वपूर्ण जानकारी डाउनलोड किए गए Allotment Letter में अभ्यर्थियों को कई जरूरी जानकारियां उपलब्ध होंगी, जैसे— उम्मीदवार का नाम आवंटित संस्थान आवंटित ट्रेड श्रेणी (Category) रिपोर्टिंग की अंतिम तिथि प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक निर्देश अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि रिपोर्टिंग से पहले आवंटन पत्र में दर्ज सभी विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच कर लें। दस्तावेज सत्यापन के लिए रखें ये जरूरी कागजात दाखिले के समय उम्मीदवारों को मूल दस्तावेजों के साथ उनकी स्वप्रमाणित फोटोकॉपी भी साथ ले जानी होगी। आवश्यक दस्तावेज इस प्रकार हैं— ITICAT 2026 प्रवेश पत्र प्रथम चरण का सीट आवंटन पत्र ITICAT 2026 रैंक कार्ड (यदि लागू हो) कक्षा 10वीं की अंकतालिका एवं प्रमाणपत्र जन्म तिथि प्रमाणपत्र चरित्र प्रमाणपत्र निवास प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) आय प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) आधार कार्ड या अन्य वैध फोटो पहचान पत्र पासपोर्ट आकार के नवीनतम फोटो BCECEB द्वारा मांगे गए अन्य आवश्यक दस्तावेज 18 जुलाई को जारी होगी दूसरी सीट आवंटन सूची बोर्ड के कार्यक्रम के अनुसार दूसरे चरण की सीट आवंटन सूची 18 जुलाई 2026 को जारी की जाएगी। जिन उम्मीदवारों को पहले चरण में सीट नहीं मिली है या जो सीट अपग्रेडेशन का विकल्प चाहते हैं, उनके लिए दूसरा राउंड महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे डाउनलोड करें Bihar ITI CAT 2026 Seat Allotment Letter उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपना आवंटन पत्र डाउनलोड कर सकते हैं— BCECEB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। "Bihar ITI CAT Round-1 Seat Allotment 2026" लिंक पर क्लिक करें। अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड दर्ज करें। लॉगिन करने के बाद सीट आवंटन परिणाम स्क्रीन पर दिखाई देगा। Allotment Letter डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखें।

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Students exploring career options after Class 12 with information on healthcare, IT, agriculture, hospitality, and vocational courses.
12वीं के बाद क्या करें? बिहार-झारखंड में इन कोर्सेज की बढ़ी डिमांड, शानदार करियर और बेहतर नौकरी के मिल सकते हैं अवसर

नई दिल्ली: 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे बेहतर करियर और अच्छी नौकरी के अवसर मिल सकें। पहले जहां अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल या सामान्य ग्रेजुएशन को ही प्राथमिकता देते थे, वहीं अब बदलते समय के साथ रोजगार का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हेल्थकेयर, आईटी, कृषि, हॉस्पिटैलिटी और स्किल-बेस्ड इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में कई ऐसे प्रोफेशनल कोर्स सामने आए हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इनमें रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं। अगर आपने 12वीं पास कर ली है और अपने भविष्य को लेकर सही फैसला लेना चाहते हैं, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. पैरामेडिकल कोर्स: हेल्थ सेक्टर में बढ़ रही मांग देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। बिहार और झारखंड में भी नए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डायग्नोस्टिक सेंटर खुलने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। 12वीं (साइंस) के बाद छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) एक्स-रे टेक्नोलॉजी रेडियोलॉजी ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन फिजियोथेरेपी इन कोर्सों के बाद सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों, लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों में नौकरी के अच्छे अवसर मिलते हैं। 2. आईटी और कंप्यूटर कोर्स: डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे अवसर डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण आईटी सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है। अगर आपकी रुचि कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में है, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं— BCA डेटा एनालिटिक्स साइबर सिक्योरिटी वेब डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट क्लाउड कंप्यूटिंग इन क्षेत्रों में देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। 3. एग्रीकल्चर और फूड टेक्नोलॉजी: कृषि आधारित राज्यों में बेहतर भविष्य बिहार और झारखंड मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य हैं। ऐसे में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में छात्र निम्नलिखित कोर्स कर सकते हैं— B.Sc Agriculture फूड टेक्नोलॉजी डेयरी टेक्नोलॉजी हॉर्टिकल्चर इन कोर्सों के बाद सरकारी विभागों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और एग्री-बिजनेस सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। 4. होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म: सर्विस सेक्टर में बढ़ते अवसर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग लगातार विकसित हो रहा है। होटल, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसी, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बनी रहती है। 12वीं के बाद छात्र इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं— होटल मैनेजमेंट ट्रैवल एंड टूरिज्म फूड प्रोडक्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट इस क्षेत्र में देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। 5. नर्सिंग और हेल्थकेयर: हमेशा बनी रहती है डिमांड हेल्थकेयर ऐसा क्षेत्र है जहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता कभी कम नहीं होती। छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— B.Sc Nursing GNM ANM बिहार और झारखंड में नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के खुलने से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं। 6. स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स: कम समय में रोजगार की तैयारी हर छात्र लंबी अवधि की पढ़ाई नहीं करना चाहता। ऐसे छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं— इलेक्ट्रिशियन फिटर वेल्डर ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग सोलर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स आईटीआई और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के ये कोर्स कम समय में रोजगार योग्य कौशल प्रदान करते हैं और उद्योगों में इनकी अच्छी मांग रहती है। कोर्स चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? विशेषज्ञों के अनुसार केवल ट्रेंड देखकर कोर्स का चयन नहीं करना चाहिए। छात्रों को अपनी रुचि, योग्यता, भविष्य में रोजगार की संभावनाएं, कोर्स की गुणवत्ता और संस्थान की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। सही कोर्स का चुनाव न केवल बेहतर नौकरी दिला सकता है, बल्कि लंबे समय में सफल करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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