वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ विवाद में फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर प्रस्तावित 50% अतिरिक्त टैरिफ को तीन दिनों के लिए टाल दिया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच अंतिम समय में हुई बातचीत और संभावित समझौते के बाद लिया गया है।
अमेरिका का प्रस्तावित 50% शुल्क बुधवार से लागू होना था। इसके दायरे में कनाडा से आने वाले कई उत्पाद शामिल थे। ट्रंप ने अब इसके क्रियान्वयन को तीन दिनों के लिए रोक दिया है, ताकि दोनों देश समझौते की शर्तों को अंतिम रूप दे सकें।
प्रस्तावित शुल्क से शराब, डेयरी उत्पाद, फर्नीचर, कपड़े, सीमेंट, हॉकी उपकरण और कई अन्य कनाडाई उत्पाद प्रभावित हो सकते थे। कनाडाई कारोबारी संगठनों ने चेतावनी दी थी कि इतने ऊंचे शुल्क से कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।
टैरिफ लागू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बातचीत हुई। कनाडा ने अमेरिकी बाजार के साथ व्यापारिक संबंधों को सामान्य रखने के लिए कई मुद्दों पर रियायतों पर चर्चा की है। दोनों पक्ष व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने संभावित समझौते के बीच कीस्टोन XL तेल पाइपलाइन परियोजना को फिर से शुरू करने का संकेत भी दिया है। यह परियोजना पहले रद्द हो चुकी थी। यदि दोनों देशों के बीच समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे ऊर्जा और व्यापार संबंधों में भी नई दिशा देखने को मिल सकती है।
फिलहाल तीन दिन की रोक को अस्थायी राहत माना जा रहा है। अंतिम समझौता नहीं होने की स्थिति में 50% टैरिफ का मुद्दा फिर से सामने आ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने ब्रिटेन की वित्तीय सेवा कंपनी प्रूडेंशियल कॉरपोरेशन होल्डिंग्स लिमिटेड को भारती लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में 75% हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सौदा करीब 3,500 करोड़ रुपये का है और इससे प्रूडेंशियल की भारत के जीवन बीमा कारोबार में मौजूदगी और मजबूत होगी। 3,500 करोड़ रुपये में खरीदी जाएगी 75% हिस्सेदारी प्रूडेंशियल ने मई 2026 में भारती लाइफ इंश्योरेंस में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया था। प्रस्ताव के तहत कंपनी भारती लाइफ वेंचर्स और 360 ONE समूह से 75% हिस्सेदारी हासिल करेगी। सौदे के पूरा होने पर प्रूडेंशियल भारती लाइफ में बहुमत हिस्सेदार बन जाएगा। प्रूडेंशियल को घटानी होगी ICICI प्रूडेंशियल में हिस्सेदारी इस सौदे के बाद प्रूडेंशियल को ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में अपनी मौजूदा करीब 21.9% हिस्सेदारी घटाकर 10% से नीचे लानी होगी। इसके लिए प्रूडेंशियल को नियामकीय मंजूरियां और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। भारती लाइफ के कारोबार को मिलेगा विस्तार सौदा पूरा होने के बाद प्रूडेंशियल की भारत में बीमा गतिविधियों में भारती लाइफ इंश्योरेंस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। कंपनी भारती एयरटेल और 360 ONE के साथ रणनीतिक वितरण समझौते करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे बीमा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि CCI की मंजूरी के बाद भी सौदा तुरंत पूरा नहीं होगा। इसके लिए IRDAI समेत अन्य लागू नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां हासिल करना जरूरी है।
बेंगलुरु, एजेंसियां। ऑनलाइन फूड और क्विक-कॉमर्स कंपनी स्विगी ने अपने कॉर्पोरेट ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी के शेयरधारकों ने विदेशी हिस्सेदारी को 49.5% तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य स्विगी को भारतीय स्वामित्व वाली और भारतीय नियंत्रण वाली कंपनी (IOCC) का दर्जा हासिल करने में सक्षम बनाना है। विदेशी हिस्सेदारी पर 49.5% की सीमा स्विगी के शेयरधारकों ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत कंपनी में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 49.5% होगी। 6 जुलाई 2026 तक कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी करीब 49.76% थी, जबकि जुलाई की शुरुआत में कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज में भी विदेशी स्वामित्व को 49.89% के आसपास बताया गया था। Instamart के कारोबार में बदलाव का रास्ता साफ इस बदलाव का सबसे बड़ा असर Swiggy Instamart पर पड़ सकता है। IOCC का दर्जा मिलने के बाद Instamart को मौजूदा मार्केटप्लेस मॉडल से आगे बढ़कर इन्वेंट्री-ओनरशिप मॉडल अपनाने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनी अपने क्विक-कॉमर्स कारोबार में परिचालन और रणनीतिक फैसलों पर ज्यादा नियंत्रण हासिल कर सकेगी। पहले प्रस्ताव को नहीं मिली थी मंजूरी स्विगी ने इससे पहले मई 2026 में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उसे 72.36% वोट मिले थे, जबकि विशेष प्रस्ताव पारित करने के लिए 75% समर्थन जरूरी था। इसके बाद कंपनी ने शेयरधारकों के साथ दोबारा काम किया और विदेशी हिस्सेदारी से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। नेतृत्व में भी हालिया बदलाव कॉर्पोरेट पुनर्गठन के बीच स्विगी के वरिष्ठ प्रबंधन में भी बदलाव हुआ है। अमितेश कुमार झा ने Instamart के CEO पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद नंदिता सिन्हा को 3 अगस्त 2026 से Instamart का CEO नियुक्त किया गया। कंपनी के अनुसार यह बदलाव वरिष्ठ प्रबंधन संरचना का हिस्सा है। स्विगी का यह कदम कंपनी के क्विक-कॉमर्स कारोबार, विदेशी निवेश संरचना और भारत में संचालन पर नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों और निवेशकों से भारत में निवेश और कारोबारी साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने भारत को जापानी तकनीक, विशेषज्ञता और पूंजी के लिए एक बड़े अवसर वाला बाजार बताते हुए विनिर्माण, तकनीक, बुनियादी ढांचे और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। भारत-जापान व्यापार में बड़ी संभावनाएं पीयूष गोयल ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.5 अरब डॉलर रहा, लेकिन दोनों देशों की आर्थिक क्षमता को देखते हुए यह आंकड़ा अभी भी संभावनाओं का छोटा हिस्सा है। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से भारत के विकास में भागीदार बनने की अपील की। 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य भारत-जापान आर्थिक साझेदारी के तहत अगले दशक में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। गोयल ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जापानी कंपनियों से भारत में दीर्घकालिक निवेश और साझेदारी बढ़ाने का आग्रह किया। सेमीकंडक्टर से हरित ऊर्जा तक सहयोग केंद्रीय मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा, नई पीढ़ी की मोबिलिटी और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग की बड़ी संभावनाएं बताईं। उन्होंने उत्तर प्रदेश को भी जापानी निवेश के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में पेश किया। 24 अगस्त से जापान जाएंगे पीयूष गोयल पीयूष गोयल ने बताया कि वह 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए उच्चस्तरीय बैठकों में चर्चा होगी। यह दौरा भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।