पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अब पहली बार सीधी हवाई सेवा से जुड़ गए हैं। नई उड़ान सेवा शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया है। पहले यात्रियों को आमतौर पर दूसरे शहर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती थी या लंबी रेल यात्रा करनी पड़ती थी। नई सीधी उड़ान से अब पटना से भोपाल का सफर करीब ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
पटना-भोपाल के बीच यह नई सीधी सेवा एलायंस एयर द्वारा शुरू की गई है। सेवा की शुरुआत अगस्त में हुई है और इसे दोनों राज्यों के बीच हवाई संपर्क मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस सेवा से बिहार और मध्य प्रदेश के यात्रियों को दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य शहर में विमान बदलने की जरूरत कम होगी। इससे यात्रा का समय और कनेक्टिंग फ्लाइट के कारण होने वाली परेशानी दोनों कम होंगी।
भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से एक साथ चार नई सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें भोपाल-पटना, भोपाल-रीवा, रीवा-कोलकाता और जबलपुर-कोलकाता मार्ग शामिल हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों को दूसरे राज्यों से सीधे जोड़ना है।
भोपाल-पटना उड़ान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मध्य प्रदेश और बिहार के बीच पहली सीधी हवाई कनेक्टिविटी स्थापित हुई है।
सीधी उड़ान शुरू होने से पटना और भोपाल के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों का समय काफी बचेगा। कारोबार, नौकरी, शिक्षा और पारिवारिक काम से दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
इसके अलावा इस कनेक्टिविटी से बिहार और मध्य प्रदेश के बीच पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नई उड़ान सेवाओं को क्षेत्रीय हवाई संपर्क मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास तौर पर पटना जैसे बड़े शहर को भोपाल से सीधे जोड़ने से यात्रियों के पास अब एक और तेज परिवहन विकल्प उपलब्ध हो गया है।
इससे बिहार के यात्रियों को मध्य प्रदेश पहुंचने में सुविधा होगी, वहीं भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी पटना और बिहार की यात्रा आसानी से कर सकेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना, एजेंसियां। श्रावणी मेला को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मधुपुर-नरकटियागंज-मधुपुर श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। ट्रेन संख्या 03567/03568 का परिचालन अगस्त में 11, 18 और 25 अगस्त 2026 को दोनों दिशाओं में किया जाएगा। यह ट्रेन अनारक्षित श्रेणी की होगी, जिससे आम यात्रियों को सफर में सुविधा मिलेगी। मधुपुर से नरकटियागंज का समय ट्रेन संख्या 03567 मधुपुर-नरकटियागंज स्पेशल मधुपुर जंक्शन से रात 1 बजे रवाना होगी और उसी दिन दोपहर 12:25 बजे नरकटियागंज पहुंचेगी। रास्ते में ट्रेन जसीडीह, सिमुलतला, झाझा, जमुई, किऊल, लखीसराय, बरहिया, बरौनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मोतीपुर, मेहसी, चकिया, बापूधाम मोतिहारी, सगौली, बेतिया और चनपटिया समेत कई स्टेशनों पर रुकेगी। बेतिया और चनपटिया में भी ठहराव मधुपुर से नरकटियागंज जाने वाली ट्रेन बेतिया स्टेशन पर सुबह 10:55 बजे पहुंचेगी और 10:57 बजे रवाना होगी। इसके बाद चनपटिया में 11:10 से 11:12 बजे तक ठहराव होगा। इसके बाद ट्रेन दोपहर 12:25 बजे नरकटियागंज जंक्शन पहुंचेगी। इससे पश्चिम चंपारण के यात्रियों को भी इस विशेष सेवा का सीधा लाभ मिलेगा। नरकटियागंज से वापसी का समय वापसी में ट्रेन संख्या 03568 नरकटियागंज-मधुपुर स्पेशल नरकटियागंज से दोपहर 1:25 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन चनपटिया, बेतिया, सगौली और बापूधाम मोतिहारी समेत कई स्टेशनों पर रुकेगी। वापसी यात्रा में मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बरौनी और किऊल होते हुए ट्रेन मधुपुर पहुंचेगी। निर्धारित समय के अनुसार यह अगले दिन रात 2:15 बजे मधुपुर पहुंचेगी। सभी कोच होंगे अनारक्षित रेलवे के अनुसार यह स्पेशल ट्रेन अनारक्षित श्रेणी की होगी। इसमें सामान्य यात्रियों के साथ दिव्यांग यात्रियों के लिए निर्धारित श्रेणी के कोच भी उपलब्ध रहेंगे। श्रावणी मेला के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने को देखते हुए इस ट्रेन के परिचालन से झारखंड के मधुपुर से लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, बेतिया और नरकटियागंज तक यात्रियों को अतिरिक्त रेल सुविधा मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अब पहली बार सीधी हवाई सेवा से जुड़ गए हैं। नई उड़ान सेवा शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया है। पहले यात्रियों को आमतौर पर दूसरे शहर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती थी या लंबी रेल यात्रा करनी पड़ती थी। नई सीधी उड़ान से अब पटना से भोपाल का सफर करीब ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा। एलायंस एयर ने शुरू की सीधी उड़ान पटना-भोपाल के बीच यह नई सीधी सेवा एलायंस एयर द्वारा शुरू की गई है। सेवा की शुरुआत अगस्त में हुई है और इसे दोनों राज्यों के बीच हवाई संपर्क मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस सेवा से बिहार और मध्य प्रदेश के यात्रियों को दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य शहर में विमान बदलने की जरूरत कम होगी। इससे यात्रा का समय और कनेक्टिंग फ्लाइट के कारण होने वाली परेशानी दोनों कम होंगी। पटना-भोपाल के अलावा तीन नए हवाई रूट भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से एक साथ चार नई सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें भोपाल-पटना, भोपाल-रीवा, रीवा-कोलकाता और जबलपुर-कोलकाता मार्ग शामिल हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों को दूसरे राज्यों से सीधे जोड़ना है। भोपाल-पटना उड़ान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मध्य प्रदेश और बिहार के बीच पहली सीधी हवाई कनेक्टिविटी स्थापित हुई है। यात्रियों को कितना फायदा होगा सीधी उड़ान शुरू होने से पटना और भोपाल के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों का समय काफी बचेगा। कारोबार, नौकरी, शिक्षा और पारिवारिक काम से दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा इस कनेक्टिविटी से बिहार और मध्य प्रदेश के बीच पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा नई उड़ान सेवाओं को क्षेत्रीय हवाई संपर्क मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास तौर पर पटना जैसे बड़े शहर को भोपाल से सीधे जोड़ने से यात्रियों के पास अब एक और तेज परिवहन विकल्प उपलब्ध हो गया है। इससे बिहार के यात्रियों को मध्य प्रदेश पहुंचने में सुविधा होगी, वहीं भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी पटना और बिहार की यात्रा आसानी से कर सकेंगे।
Bihar New Rail Line Project: बिहार में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और पटना के आसपास बढ़ते रेल यातायात के दबाव को कम करने के लिए बड़े स्तर पर नई रेल लाइनों के निर्माण की योजना तैयार की गई है। करीब 1323 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके तहत बख्तियारपुर से फतुहा, बख्तियारपुर से पुनारख और राजेंद्र नगर से पटना साहिब समेत कई महत्वपूर्ण रेलखंडों पर अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई पटरी बिछाना नहीं है, बल्कि पटना के व्यस्त रेल कॉरिडोर में ट्रेनों के परिचालन की क्षमता बढ़ाना, आउटर पर ट्रेनों के इंतजार को कम करना और भविष्य में बढ़ने वाले यात्री एवं माल यातायात के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना है। पहले फेज में बख्तियारपुर-फतुहा के बीच 24 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना के पहले चरण में बख्तियारपुर और फतुहा के बीच करीब 24 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस काम पर लगभग 931 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह रेलखंड पहले से ही काफी व्यस्त है। नई लाइन तैयार होने के बाद इस रूट पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे मौजूदा ट्रैक पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इस परियोजना के लिए करीब 6.6 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। इसके लिए रेलवे की ओर से मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। दूसरे फेज में बख्तियारपुर-पुनारख रेलखंड पर काम दूसरे चरण में बख्तियारपुर से पुनारख के बीच करीब 30 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना है। इस हिस्से के निर्माण पर लगभग 392 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस रेल लाइन के लिए भी जमीन अधिग्रहण को लेकर रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है। नई लाइन तैयार होने के बाद पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पटना-हावड़ा रूट बिहार के सबसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में शामिल है। इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी संचालन होता है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से भविष्य में परिचालन क्षमता बढ़ाने का रास्ता खुलेगा। तीसरे फेज में पटना के प्रमुख रेलखंडों का विस्तार परियोजना के तीसरे चरण में पटना शहर और आसपास के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत दानापुर से पटना जंक्शन के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना है। इसके बाद राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना साहिब तक तीसरी लाइन तथा पटना साहिब से फतुहा के बीच तीसरी और चौथी लाइन तैयार करने का प्रस्ताव है। इस चरण का सीधा असर पटना के प्रमुख रेलवे स्टेशनों और उनके बीच चलने वाले ट्रेनों के परिचालन पर पड़ सकता है। अतिरिक्त लाइनें उपलब्ध होने से अलग-अलग ट्रेनों के लिए ट्रैक का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। ट्रेनों के आउटर पर खड़े रहने की समस्या हो सकती है कम पटना और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ कई बार ट्रेनों को स्टेशन से पहले आउटर पर रोकना पड़ता है। अतिरिक्त रेल लाइनें तैयार होने के बाद इस तरह की परिचालन संबंधी समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। नई लाइनों से एक ही कॉरिडोर पर अलग-अलग ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे। इसका फायदा लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ स्थानीय यात्रियों को भी मिल सकता है। यात्रियों के साथ मालगाड़ियों को भी मिलेगा फायदा इस परियोजना का लाभ केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा। अतिरिक्त रेल क्षमता बनने से मालगाड़ियों के परिचालन के लिए भी अधिक जगह उपलब्ध हो सकती है। रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के परिचालन को अलग-अलग स्लॉट में अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है। इससे माल ढुलाई की गति और रेल कॉरिडोर की उपयोगिता भी बढ़ सकती है। पटना-हावड़ा रेल मार्ग पर कम होगा दबाव बिहार के लिए पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर लगातार बढ़ता यातायात रेलवे के सामने परिचालन संबंधी चुनौती पैदा करता है। नई रेल लाइनों के निर्माण के बाद ट्रेनों के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होंगे। इससे मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने और ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। औसत गति और परिचालन क्षमता में सुधार की उम्मीद अतिरिक्त रेल लाइनें बनने का एक महत्वपूर्ण फायदा ट्रेनों की परिचालन क्षमता में सुधार हो सकता है। जब ट्रेनों के लिए पर्याप्त ट्रैक उपलब्ध होते हैं, तो एक ट्रेन के पीछे दूसरी ट्रेन को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होती है। इससे ट्रेनों की औसत गति और समयबद्ध परिचालन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि वास्तविक सुधार परियोजना के पूरा होने और परिचालन व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पटना के रेल नेटवर्क के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना? 1323 करोड़ रुपये की यह परियोजना पटना के आसपास रेल बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। शहर की आबादी, यात्री संख्या और आसपास के क्षेत्रों से पटना आने-जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अतिरिक्त रेल लाइनें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। परियोजना के तीनों चरण पूरे होने के बाद पटना के प्रमुख रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों के परिचालन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होंगे। परियोजना की प्रमुख बातें कुल अनुमानित लागत: करीब 1323 करोड़ रुपये परियोजना: तीन फेज में बख्तियारपुर-फतुहा: 24 किलोमीटर बख्तियारपुर-पुनारख: करीब 30 किलोमीटर दानापुर-पटना जंक्शन: तीसरी और चौथी लाइन राजेंद्र नगर-पटना साहिब: तीसरी लाइन पटना साहिब-फतुहा: तीसरी और चौथी लाइन प्रमुख उद्देश्य: रेल यातायात की क्षमता बढ़ाना और ट्रेनों के दबाव को कम करना कुल मिलाकर, बिहार में प्रस्तावित यह रेल विस्तार परियोजना पटना के आसपास रेल नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने की दिशा में अहम कदम हो सकती है। नई लाइनों के निर्माण से यात्रियों को बेहतर परिचालन, कम इंतजार और अधिक कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि परियोजना के वास्तविक फायदे निर्माण पूरा होने और नई लाइनों पर परिचालन शुरू होने के बाद ही पूरी तरह सामने आएंगे।