पटना, एजेंसियां। पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड सरकारी आवास खाली करवाने और लालू-राबड़ी सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर आज मीडिया से बातचीत के दौरान राजद सुप्रीमो लालू यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। मीडिया द्वारा इन मुद्दों पर जब सवाल पूछा गया तो लालू यादव ने कहा- “हां, हमारी सुरक्षा हटा ली गई है। सब कुछ नीतीश कुमार करवा रहे हैं।"
हालांकि इससे पहले सिंगापुर से लौटते वक्त दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया बाइट में उन्होंने सुरक्षा घटाने और बंगला खाली करवाने को लेकर कहा था कि “सब पागल हो गए हैं, घृणा कर रहे हैं। मुझे उन लोगों से कोई फर्क नहीं पड़ता।“
बीते दिनों बिहार सरकार की तरफ से आवास खाली करवाने को लेकर दिए गए 15 दिनों की मोहल्लत खत्म हो गई है। इसे लेकर राबड़ी देवी ने पत्र लिखकर राज्य सरकार से कुछ दिनों की और समय मांगी है। राबड़ी का कहना है कि अभी लालू यादव के तबीयत खराब होने के कारण आवास खाली नहीं कर पाएंगी। लालू के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उन्हें अलग कमरे में शिफ्ट किया गया है। राबड़ी देवी ने कहा कि अभी पटना के कौटिल्य नगर स्थित घर में काम चल रहा है। माना जा रहा है कि काम खत्म होते ही पूरा परिवार वहां शिफ्ट हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार पुलिस ने यातायात व्यवस्था और वाहन जांच को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नए निर्देश के अनुसार अब सिपाही और सहायक अवर निरीक्षक (ASI) वाहन रोककर जांच नहीं कर सकेंगे। वाहन रोकने, दस्तावेजों की जांच करने और मौके पर ई-चालान जारी करने का अधिकार सब-इंस्पेक्टर (SI) और उससे ऊपर के अधिकारियों को दिया गया है। यह निर्देश बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी किया गया है। सिपाही और ASI की भूमिका होगी अलग नए नियम के तहत सिपाही और ASI अब वाहन जांच करने के बजाय यातायात नियंत्रण और वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने की जिम्मेदारी संभालेंगे। यदि कोई सिपाही या ASI आदेश का उल्लंघन करते हुए वाहन की जांच करता पाया गया, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। SI और वरिष्ठ अधिकारी ही काट सकेंगे ई-चालान नई व्यवस्था में मौके पर ई-चालान जारी करने का अधिकार भी SI या उससे ऊपर के अधिकृत अधिकारियों को दिया गया है। इसका उद्देश्य वाहन जांच की प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना है। पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य यातायात ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा इस्तेमाल करना अनिवार्य किया गया है। ड्यूटी के दौरान कैमरा चालू रहना चाहिए। यदि कैमरा बंद पाया जाता है और वाहन चालक या आम नागरिक के साथ विवाद होता है, तो संबंधित पुलिसकर्मी से इसका कारण पूछा जाएगा और विभागीय समीक्षा की जाएगी। डिजिटल दस्तावेज भी होंगे मान्य नई व्यवस्था के तहत DigiLocker में उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इसके अलावा यातायात पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरा, रिफ्लेक्टिव जैकेट, लाइट बैटन, सीटी और हेलमेट जैसी जरूरी सुरक्षा सामग्री के साथ ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतों के निपटारे के लिए बनेगी व्यवस्था पुलिस चेकिंग, अतिक्रमण, वर्दी से जुड़े उल्लंघन, ड्यूटी में लापरवाही, मोबाइल के गलत इस्तेमाल, अवैध वसूली या दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतों के लिए समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। बिहार पुलिस का कहना है कि नई व्यवस्था से यातायात प्रबंधन में जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार के 54 शहरों में शहरी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹968 करोड़ की विकास योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत अलग-अलग नगर निकायों में सड़क, नाला, जलनिकासी, पेयजल, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम होगा। सरकार का लक्ष्य शहरों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ नागरिकों को बेहतर शहरी माहौल उपलब्ध कराना है। 54 शहरों में होंगे विकास कार्य ₹968 करोड़ की योजना के तहत राज्य के 54 शहरी क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार विकास परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इसमें सड़क निर्माण और मरम्मत, नालियों का निर्माण, जलनिकासी व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे काम शामिल किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य खास तौर पर उन इलाकों में सुविधाएं बढ़ाना है, जहां आबादी बढ़ने के साथ मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा है। सड़क और जलनिकासी पर विशेष जोर शहरों में जलजमाव की समस्या को कम करने के लिए नाला और ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही खराब सड़कों की मरम्मत और नई सड़कों के निर्माण से आवागमन को सुगम बनाने की योजना है। बारिश के मौसम में जलजमाव से प्रभावित होने वाले शहरी इलाकों में बेहतर जलनिकासी व्यवस्था को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। पेयजल और स्वच्छता सुविधाएं होंगी मजबूत योजना के तहत नागरिकों को बेहतर पेयजल और स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा। कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं को व्यवस्थित करने के लिए भी आवश्यक परियोजनाएं लागू की जा सकती हैं। छोटे शहरों में भी बढ़ेंगी आधुनिक सुविधाएं बिहार के बड़े शहरों के साथ छोटे और मध्यम नगरों में भी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। विकास योजनाओं के पूरा होने के बाद इन शहरों में सड़क, जलनिकासी, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। विकास कार्यों से स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा ₹968 करोड़ की परियोजनाओं के तहत निर्माण और आधारभूत ढांचे से जुड़े बड़े पैमाने पर काम होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार की कोशिश है कि शहरी विकास के साथ नागरिक सुविधाओं में सुधार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दोनों एक साथ हासिल हों।
सुपौल, एजेंसियां। बिहार के सुपौल जिले में कोसी नदी का कटाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। किशनपुर अंचल की मौजहा पंचायत के पचगछिया गांव के वार्ड नंबर 14 में नदी की तेज धारा आबादी की ओर बढ़ रही है। शुक्रवार को कटाव की चपेट में आने से जल नल योजना की मिनी पानी टंकी और उससे जुड़ा भवन नदी में समा गया। प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 15 घर भी कोसी की धारा में विलीन हो चुके हैं। आबादी की ओर बढ़ रही कोसी की धारा पचगछिया गांव में पिछले कई दिनों से कोसी नदी लगातार जमीन काट रही है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी का रुख आबादी की ओर बढ़ने से लोगों में दहशत है। कटाव की चपेट में आने से घरों के साथ-साथ कृषि भूमि और सरकारी संपत्तियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। पानी टंकी और भवन नदी में समाए शुक्रवार को रामविलास कुमार के घर के समीप जल नल योजना के तहत स्थापित मिनी पानी टंकी और उससे जुड़ा चदरायुक्त भवन कटाव की जद में आ गया। जमीन तेजी से कटने के बाद पूरी संरचना नदी में समा गई। घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल और बढ़ गया है। 15 घर पहले ही हो चुके हैं नदी में विलीन किशनपुर के प्रभारी अंचलाधिकारी जियाउल कमर के अनुसार, अब तक कटाव के कारण 15 घर नदी में समा चुके हैं। प्रभावित परिवारों का प्रतिवेदन तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटाव की रफ्तार नहीं रुकी तो आने वाले दिनों में और घर तथा बड़ी मात्रा में कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों ने तत्काल कटावरोधी काम की मांग की ग्रामीणों के अनुसार जल संसाधन विभाग के अधिकारी कटाव स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कटावरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तत्काल बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है, ताकि आबादी और बची हुई जमीन को नदी की तेज धारा से बचाया जा सके।