भारतीय टू-व्हीलर बाजार में TVS Apache RTR 160 4V का 2026 मॉडल लॉन्च हो गया है। TVS Motor Company ने इस अपडेटेड वर्जन में डिजाइन और फीचर्स को बड़ा अपग्रेड दिया है, जिससे यह 160cc सेगमेंट में और भी मजबूत दावेदार बनकर उभरी है।
नई Apache RTR 160 4V के कई वेरिएंट्स में अब प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं, जो पहले केवल टॉप मॉडल तक सीमित थे।
ये अपडेट्स राइडिंग एक्सपीरियंस को ज्यादा आरामदायक और सेफ बनाते हैं।
टॉप वेरिएंट में पहले की तरह हाई-एंड फीचर्स मौजूद हैं:
अब इनमें से कुछ फीचर्स को निचले वेरिएंट्स में भी शामिल किया गया है, जिससे यह बाइक ज्यादा वैल्यू-फॉर-मनी बनती है।
नई Apache RTR 160 4V में 160cc का इंजन दिया गया है, जो 17.55 bhp की पावर जनरेट करता है।
इसमें तीन राइडिंग मोड्स-Sport, Urban और Rain-दिए गए हैं, जिससे अलग-अलग रोड कंडीशन्स में बेहतर कंट्रोल मिलता है।
2026 Apache RTR 160 4V की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹1,25,440 रखी गई है। यह बाइक देशभर में डीलरशिप्स पर उपलब्ध है।
इस अपडेट के साथ Apache RTR 160 4V अब न केवल ज्यादा फीचर-लोडेड हो गई है, बल्कि अपने सेगमेंट में बेहतर टेक्नोलॉजी और परफॉर्मेंस का संतुलन भी पेश करती है। यह युवाओं और डेली राइडर्स दोनों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत में बाइक खरीदते समय ज्यादातर लोग इंजन, माइलेज और लुक्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन छोटे कद के राइडर्स के लिए सबसे अहम चीज होती है सीट हाइट। कई बार बाइक पसंद आने के बावजूद सीट ऊंची होने की वजह से राइडिंग असहज हो जाती है। इसी समस्या को देखते हुए बाजार में अब कई ऐसी मोटरसाइकिलें मौजूद हैं जो कम सीट हाइट के साथ बेहतर संतुलन, स्टाइल और परफॉर्मेंस देती हैं। TVS Raider 125: शुरुआती राइडर्स के लिए आसान बाइक TVS Raider 125 कम सीट हाइट और हल्के वजन की वजह से नए राइडर्स के बीच काफी लोकप्रिय है। इसकी सीट हाइट लगभग 780 mm है, जिससे छोटे कद के लोग भी इसे आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। 124.8cc इंजन के साथ यह बाइक शहर की रोजमर्रा की राइडिंग के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है। इसकी शुरुआती कीमत करीब ₹82,860 (एक्स-शोरूम) है। Royal Enfield Hunter 350: भारी बाइक की आसान राइडिंग Royal Enfield Hunter 350 ने कंपनी की पारंपरिक छवि को बदल दिया है। 790 mm सीट हाइट और कॉम्पैक्ट डिजाइन इसे शहर में चलाने के लिए काफी आसान बनाते हैं। पहले जहां Royal Enfield को भारी और ऊंची सीट वाली बाइक माना जाता था, अब Hunter 350 ने छोटे कद के राइडर्स के लिए भी इसे एक प्रैक्टिकल विकल्प बना दिया है। इसकी कीमत करीब ₹1.38 लाख (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है। Guerrilla 450: पावरफुल इंजन, आसान कंट्रोल Royal Enfield Guerrilla 450 में 452cc का दमदार इंजन दिया गया है, लेकिन सीट हाइट केवल 780 mm है। यह फीचर इसे खास बनाता है क्योंकि इसमें पावर और कंट्रोल दोनों का संतुलन मिलता है। यह बाइक उन लोगों के लिए बेहतर है जो एडवेंचर और परफॉर्मेंस दोनों चाहते हैं। इसकी कीमत लगभग ₹2.49 लाख (एक्स-शोरूम) है। TVS Ronin: आराम और स्टाइल का कॉम्बिनेशन TVS Ronin की सीट हाइट लगभग 795 mm है, जो सूची में थोड़ी ज्यादा है, लेकिन इसकी सीटिंग कम्फर्ट और रिलैक्स राइडिंग पोजिशन इसे काफी लोकप्रिय बनाती है। 225.9cc इंजन वाली यह बाइक उन लोगों के लिए बेहतर है जो रोजाना इस्तेमाल के साथ प्रीमियम फील चाहते हैं। इसकी कीमत करीब ₹1.29 लाख से शुरू होती है। Jawa 42 Bobber: सबसे कम सीट हाइट वाली बाइक Jawa 42 Bobber इस सूची में सबसे कम सीट हाइट वाली बाइक है, जो लगभग 740 mm है। इसका लो-स्लंग डिजाइन छोटे कद के राइडर्स के लिए इसे बेहद आसान और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बनाता है। यह बाइक स्टाइल और आराम दोनों का बेहतरीन मेल मानी जाती है। इसकी शुरुआती कीमत करीब ₹2.04 लाख (एक्स-शोरूम) है। क्यों जरूरी है सही सीट हाइट? सीट हाइट सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यह तय करती है कि राइडर ट्रैफिक में रुकने, पार्किंग या टर्न लेते समय कितना सुरक्षित और कॉन्फिडेंट महसूस करेगा। आज भारतीय बाजार में कंपनियां सिर्फ पावर और डिजाइन ही नहीं, बल्कि हर तरह के राइडर्स के लिए बेहतर एर्गोनॉमिक्स पर भी ध्यान दे रही हैं।
भारतीय ऑटो बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन तकनीक की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए Tata Motors आने वाले समय में अपनी कार लाइनअप को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2026 में कई नई इलेक्ट्रिक और स्मार्ट कारें लॉन्च कर सकती है, जिनमें EV, Flex Fuel और फेसलिफ्ट मॉडल शामिल होंगे। इन अपकमिंग मॉडल्स में Tata Sierra EV, Tata Safari EV, Tata Avinya EV, Tata Punch Flex Fuel और Tata Tiago फेसलिफ्ट जैसे नाम शामिल हैं। Tata Sierra EV: क्लासिक नाम, इलेक्ट्रिक अवतार Tata Sierra EV को कंपनी की सबसे चर्चित आने वाली कारों में गिना जा रहा है। यह मॉडल पुराने Sierra से प्रेरित डिजाइन के साथ नए इलेक्ट्रिक अवतार में पेश किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें: 500KM से ज्यादा ड्राइविंग रेंज डेडिकेटेड EV प्लेटफॉर्म प्रीमियम इंटीरियर कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी क्लोज्ड फ्रंट पैनल डिजाइन जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। इसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹18 लाख (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Tata Safari EV: फैमिली SUV का इलेक्ट्रिक वर्जन कंपनी अपनी लोकप्रिय SUV Safari को भी इलेक्ट्रिक वर्जन में ला सकती है। Tata Safari EV मौजूदा ICE मॉडल जैसा डिजाइन रख सकती है, लेकिन इसमें EV-स्पेशल बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसमें क्लोज्ड ग्रिल, एयरोडायनामिक अलॉय व्हील्स और एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स दिए जा सकते हैं। यह SUV खास तौर पर बड़े परिवारों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। संभावित शुरुआती कीमत: लगभग ₹26 लाख (एक्स-शोरूम) Tata Avinya EV: Tata की सबसे प्रीमियम EV Auto Expo 2022 में पेश की गई Tata Avinya EV पहले ही अपने फ्यूचरिस्टिक डिजाइन के कारण काफी सुर्खियां बटोर चुकी है। यह मॉडल कंपनी की मौजूदा EVs से बिल्कुल अलग हो सकती है। इसमें: मिनिमलिस्ट इंटीरियर लाउंज जैसी सीटिंग सस्टेनेबल मटेरियल अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग ADAS सेफ्टी फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है। इसकी संभावित कीमत लगभग ₹30 लाख (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Tata Punch Flex Fuel: वैकल्पिक ईंधन पर बड़ा दांव Tata Punch का नया Flex Fuel वर्जन भी 2026 में लॉन्च हो सकता है। यह कंपनी की पहली Flex Fuel टेक्नोलॉजी वाली कार हो सकती है। यह मॉडल एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर चलेगा, जिससे: पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिलेगा हालांकि डिजाइन और फीचर्स मौजूदा Punch जैसे ही रह सकते हैं। Tata Tiago Facelift: नए लुक और फीचर्स के साथ अपडेट Tata Tiago फेसलिफ्ट में कंपनी कई कॉस्मेटिक और टेक्नोलॉजी अपडेट दे सकती है। संभावित बदलाव: नई फ्रंट ग्रिल अपडेटेड बंपर नए अलॉय व्हील्स बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स Tiago फिलहाल पेट्रोल, CNG और EV विकल्पों में उपलब्ध है। फेसलिफ्ट मॉडल की कीमत मौजूदा मॉडल से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। Tata की रणनीति क्या बताती है? इन अपकमिंग मॉडल्स से साफ है कि Tata Motors भारतीय बाजार में EV और वैकल्पिक ईंधन तकनीक पर बड़ा फोकस कर रही है। कंपनी अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों को टारगेट करते हुए प्रीमियम से लेकर अफोर्डेबल सेगमेंट तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
Triumph ने 13वें एडिशन का किया ऐलान ब्रिटिश मोटरसाइकिल कंपनी Triumph Motorcycles India ने भारत में Distinguished Gentleman's Ride (DGR) के 13वें एडिशन की घोषणा कर दी है। यह खास राइड 17 मई 2026, रविवार को देश के 50 से अधिक शहरों में आयोजित की जाएगी। इस ग्लोबल चैरिटी इवेंट का उद्देश्य पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रोस्टेट कैंसर रिसर्च के लिए जागरूकता और फंड जुटाना है। क्लासिक बाइक और फॉर्मल ड्रेस में दिखेंगे राइडर्स इस राइड में हिस्सा लेने वाले बाइकर्स क्लासिक और मॉडर्न-क्लासिक मोटरसाइकिलों के साथ फॉर्मल आउटफिट में नजर आते हैं। सूट, टाई और ट्वीड जैकेट पहनकर राइड करने की यह अनोखी परंपरा DGR को खास बनाती है। इवेंट में सिर्फ Triumph बाइक मालिक ही नहीं, बल्कि किसी भी ब्रांड की क्लासिक या मॉडर्न-क्लासिक बाइक रखने वाले लोग शामिल हो सकते हैं। रजिस्ट्रेशन DGR की आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू हो चुके हैं। मुंबई से बेंगलुरु तक कई बड़े शहर होंगे शामिल इस साल Distinguished Gentleman's Ride देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई और हैदराबाद समेत कई शहरों में आयोजित होगा। पिछले साल भी इस आयोजन में बड़ी संख्या में बाइकर्स ने हिस्सा लिया था। वैश्विक स्तर पर यह इवेंट 100 से ज्यादा देशों में आयोजित किया जाता है और Triumph लंबे समय से इसका आधिकारिक पार्टनर रहा है। प्रतिभागी अपने प्रोफाइल बनाकर फंडरेजिंग कैंपेन में हिस्सा ले सकते हैं और ‘Pay It Forward’ जैसे विकल्पों के जरिए दूसरों की मदद भी कर सकते हैं। 2012 से शुरू हुआ था यह खास अभियान Distinguished Gentleman's Ride की शुरुआत साल 2012 में हुई थी। तब से अब तक दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा राइडर्स इस अभियान का हिस्सा बन चुके हैं। भारत में भी यह आयोजन धीरे-धीरे मोटरसाइकिल कल्चर का अहम हिस्सा बन गया है। Triumph के मुताबिक अब भारतीय सड़कों पर कंपनी की 1 लाख से ज्यादा मोटरसाइकिलें दौड़ रही हैं, जिससे DGR कम्युनिटी लगातार मजबूत हो रही है। फंड जुटाने वालों को मिलेंगे खास इनाम आयोजकों के अनुसार जो प्रतिभागी कम से कम 250 अमेरिकी डॉलर जुटाएंगे, उन्हें खास रिवॉर्ड्स जीतने का मौका मिलेगा। इनमें कस्टम Triumph Speed Twin 1200 Cafe Racer बाइक भी शामिल है। कंपनी ने क्या कहा? Bajaj Auto के प्रो-बाइकिंग प्रेसीडेंट Manik Nangia ने कहा कि Distinguished Gentleman's Ride सिर्फ एक बाइक राइड नहीं, बल्कि एक वैश्विक अभियान है जो बाइकर्स को एक अच्छे उद्देश्य के लिए जोड़ता है। उन्होंने कहा कि इस साल का आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि भारत में Triumph मोटरसाइकिलों की संख्या 1 लाख के पार पहुंच चुकी है। कंपनी ने देशभर के बाइकर्स से इस अभियान में शामिल होकर स्टाइल के साथ राइड करने और पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़े अहम मुद्दों पर जागरूकता फैलाने की अपील की है।