भारतीय दोपहिया बाजार में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। Yezdi Motorcycles ने अपनी अपकमिंग बाइक को लेकर बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने सोशल मीडिया पर एक टीजर जारी कर संकेत दिया है कि नई बाइक 23 अप्रैल 2026 को लॉन्च की जाएगी। टीजर के बाद ऑटो सेक्टर में इस मॉडल को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है।
यह बाइक Classic Legends के तहत तैयार की जा रही है, जो पहले से ही प्रीमियम सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है।
टीजर में क्या मिला खास संकेत?
कंपनी ने टीजर के साथ एक दिलचस्प कैप्शन दिया-“Well, at least it’s not 69 days to go.”
यह ‘69’ आंकड़ा Yezdi की मौजूदा Yezdi Roadster और Yezdi Adventure से जुड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नई बाइक में मौजूदा 334cc इंजन नहीं होगा, बल्कि कुछ नया और ज्यादा पावरफुल देखने को मिल सकता है।
Scrambler सेगमेंट में हो सकती है एंट्री
ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नई बाइक Scrambler सेगमेंट में आ सकती है। खास बात यह है कि उसी दिन BSA Scrambler 650 भी भारत में लॉन्च होने वाली है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि Yezdi भी इसी सेगमेंट में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है।
क्या मिलेगा नया इंजन?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर यह बाइक BSA Scrambler 650 के प्लेटफॉर्म पर आधारित होती है, तो इसमें दमदार फीचर्स मिल सकते हैं, जैसे:
यह सेटअप मौजूदा मॉडल्स की तुलना में काफी ज्यादा पावरफुल हो सकता है।
Scrambler का अपडेटेड अवतार?
फिलहाल Yezdi के पोर्टफोलियो में Yezdi Scrambler, Roadster और Adventure शामिल हैं। जहां Roadster और Adventure को हाल ही में अपडेट मिला है, वहीं Scrambler को लंबे समय से कोई बड़ा अपडेट नहीं मिला। ऐसे में संभावना है कि कंपनी इस मॉडल को नए अवतार में पेश करे।
23 अप्रैल का लॉन्च Yezdi के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। अगर कंपनी ज्यादा पावरफुल इंजन और नए डिजाइन के साथ बाइक पेश करती है, तो यह मिड-साइज प्रीमियम सेगमेंट में कड़ी टक्कर दे सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय टू-व्हीलर बाजार में प्रीमियम मैक्सी स्कूटर सेगमेंट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ऐसे ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है जो स्कूटर में बाइक जैसी परफॉर्मेंस, लंबी दूरी की आरामदायक राइड और आधुनिक तकनीक चाहते हैं। इसी मांग को देखते हुए होंडा, यामाहा और टीवीएस आने वाले समय में अपने नए मैक्सी स्कूटर लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इन मॉडलों के आने से प्रीमियम स्कूटर बाजार में प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प हो जाएगी। क्या होते हैं मैक्सी स्कूटर? मैक्सी स्कूटर सामान्य स्कूटरों की तुलना में आकार में बड़े, अधिक पावरफुल और लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर माने जाते हैं। इनमें बड़ी सीट, विशाल अंडर-सीट स्टोरेज, बेहतर विंड प्रोटेक्शन, ज्यादा फ्यूल क्षमता और हाईवे पर बेहतर प्रदर्शन मिलता है। यही कारण है कि ये शहर के साथ-साथ टूरिंग के लिए भी पसंद किए जाते हैं। Honda ADV160 सबसे पहले देगा दस्तक होंडा का ADV160 सबसे पहले लॉन्च होने वाला मॉडल माना जा रहा है। इसमें 155cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन मिलेगा, जो 15.78 हॉर्सपावर और 14.7 Nm टॉर्क पैदा करेगा। स्कूटर में 5-इंच TFT टचस्क्रीन, नेविगेशन, कॉल और मैसेज अलर्ट, म्यूजिक कंट्रोल, USB Type-C पोर्ट और 30 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलेगा। इसकी संभावित कीमत 1.55 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Yamaha NMax 155 टूरिंग प्रेमियों के लिए खास यामाहा NMax 155 को लंबी दूरी की यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 155cc लिक्विड-कूल्ड इंजन, LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, कीलेस इग्निशन और ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। इसकी संभावित कीमत 1.50 लाख रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है। TVS का 160cc मैक्सी स्कूटर भी तैयार टीवीएस भी इस सेगमेंट में नया 160cc मैक्सी स्कूटर लाने की तैयारी कर रही है। इसमें लिक्विड-कूल्ड इंजन, बड़ी विंडस्क्रीन, फुल LED लाइटिंग, ट्रैक्शन कंट्रोल, ABS और बड़ा कनेक्टेड डिस्प्ले मिलने की संभावना है। इसकी संभावित कीमत करीब 1.40 लाख रुपये हो सकती है। ग्राहकों को मिलेगा फायदा इन नए मॉडलों के आने से ग्राहकों को अधिक विकल्प, आधुनिक तकनीक, बेहतर स्टोरेज और आरामदायक लंबी दूरी की राइडिंग का अनुभव मिलेगा। साथ ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा कीमतों को भी संतुलित रखने में मदद कर सकती है।
भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल आउटलेट पर राजधानी के पहले E85 फ्यूल पंप का उद्घाटन किया। इसके साथ ही दिल्ली में हाई-इथेनॉल ईंधन की व्यावसायिक शुरुआत हो गई है। E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये सस्ता दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। यह मौजूदा E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है। उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रम की स्थिति से बचाने के लिए पेट्रोल पंप पर E85 के लिए अलग डिस्पेंसर और स्पष्ट लेबलिंग की व्यवस्था की गई है। यह पहल सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। क्या है E85 फ्यूल? जहां E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, वहीं E85 में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और केवल 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। E85 के फायदे पेट्रोल पर निर्भरता कम होती है। क्रूड ऑयल की खपत घटती है। घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। ईंधन की लागत कम हो सकती है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। क्या हर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है? नहीं। E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस इंजन की आवश्यकता होती है, जो हाई-इथेनॉल मिश्रण को संभालने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए जाते हैं। कौन-सी गाड़ियां E85 सपोर्ट करती हैं? भारत में फिलहाल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या सीमित है। इनमें शामिल हैं— Hero Splendor+ Flex Fuel Hero HF Deluxe Flex Fuel Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel (लॉन्च की तैयारी में) आने वाले समय में कई अन्य कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतार सकती हैं। देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि E85 जैसे वैकल्पिक ईंधन भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही इससे किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से कृषि आधारित फसलों से किया जाता है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने वाली Tata Sierra एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह इसकी बिक्री या फीचर्स नहीं, बल्कि इसका शानदार मॉडिफाइड अवतार है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में Tata Sierra को ऑफ-रोड स्टाइल व्हील्स और टायर्स के साथ देखा जा सकता है, जिसने SUV के लुक को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि भारत में वाहन मॉडिफिकेशन को लेकर कानूनी सीमाएं हैं, लेकिन कार प्रेमी अपनी गाड़ियों को अलग पहचान देने के लिए कस्टमाइजेशन करवाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि Tata Sierra का यह नया अवतार इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। ऑफ-रोड लुक ने बढ़ाया दमदार अंदाज इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में Tata Sierra अपने सिग्नेचर Andaman Adventure येलो कलर में नजर आ रही है। पहली नजर में SUV का आकर्षक रंग ध्यान खींचता है, लेकिन असली बदलाव इसके व्हील्स और टायर्स में दिखाई देता है। जहां कंपनी स्टॉक मॉडल में 19-इंच ड्यूल-टोन मशीन-कट अलॉय व्हील्स देती है, वहीं इस मॉडिफाइड Sierra में आफ्टरमार्केट ऑफ-रोड स्टाइल अलॉय व्हील्स और मोटे टायर्स लगाए गए हैं। सिर्फ इस बदलाव ने SUV के पूरे व्यक्तित्व को बदल दिया है। अब यह पहले से ज्यादा मस्क्युलर, एडवेंचर-रेडी और सड़क पर मजबूत उपस्थिति वाली दिखाई देती है। क्या दिया गया है सस्पेंशन लिफ्ट? वीडियो को ध्यान से देखने पर ऐसा लगता है कि नए और बड़े टायर्स को फिट करने के लिए SUV में हल्का सस्पेंशन लिफ्ट भी दिया गया हो सकता है। व्हील आर्च और टायर के बीच कम गैप इस ओर इशारा करते हैं कि चौड़े टायर्स को आराम से फिट करने के लिए कुछ तकनीकी बदलाव किए गए होंगे। हालांकि इस मॉडिफिकेशन की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन लुक के लिहाज से यह बदलाव काफी प्रभावशाली नजर आ रहा है। फीचर्स के मामले में भी शानदार है Sierra Tata Motors ने Sierra को प्रीमियम फीचर्स से लैस किया है। SUV में मिलने वाले प्रमुख फीचर्स: बड़ा पैनोरमिक सनरूफ ट्रिपल-स्क्रीन डैशबोर्ड सेटअप प्रीमियम लेदराइट सीट्स वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स इलेक्ट्रिक एडजस्टेबल सीट्स मेमोरी फंक्शन फ्लोटिंग सेंटर कंसोल एक्सटेंडेबल अंडर-थाई सपोर्ट ये सभी फीचर्स इसे अपने सेगमेंट की सबसे आधुनिक और प्रीमियम SUVs में शामिल करते हैं। तीन इंजन विकल्पों के साथ उपलब्ध Tata Sierra को कंपनी ने कई इंजन विकल्पों के साथ पेश किया है। 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल 105 bhp पावर 145 Nm टॉर्क मैनुअल और DCA गियरबॉक्स विकल्प 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल 160 PS पावर 255 Nm टॉर्क टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन 1.5-लीटर टर्बो डीजल 116 bhp पावर 260 Nm टॉर्क मैनुअल और ऑटोमैटिक विकल्प कीमत कितनी है? Tata Sierra की एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹11.49 लाख से शुरू होकर ₹21.29 लाख तक जाती है। अपने आकर्षक डिजाइन, प्रीमियम फीचर्स और मल्टीपल इंजन विकल्पों की वजह से यह SUV ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वायरल हो रहे इस मॉडिफाइड मॉडल ने यह भी दिखा दिया है कि सही कस्टमाइजेशन के बाद Tata Sierra का लुक किसी अंतरराष्ट्रीय ऑफ-रोड SUV से कम नहीं लगता।