अगर आप अपनी पुरानी कार बेचने या नई कार के लिए उसे एक्सचेंज करने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन 7 फैक्टर्स को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।
कार की बाहरी और अंदरूनी स्थिति उसकी कीमत पर सीधा असर डालती है। बॉडी पर बड़े डेंट, पेंट खराब होना, इंटीरियर में ज्यादा घिसावट या किसी पार्ट का खराब होना कार की रीसेल वैल्यू कम कर सकता है।
वहीं, साफ-सुथरी और अच्छी तरह मेंटेन की गई कार खरीदार के बीच ज्यादा भरोसा पैदा करती है। इसलिए कार बेचने से पहले छोटी-मोटी कमियों को ठीक कराना और वाहन को अच्छी तरह साफ रखना फायदेमंद हो सकता है।
कार की नियमित सर्विसिंग केवल उसके रखरखाव के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि रीसेल वैल्यू के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
अगर आपके पास सर्विस रिकॉर्ड मौजूद है और कार की सर्विस अधिकृत सर्विस सेंटर या भरोसेमंद वर्कशॉप से हुई है, तो खरीदार को वाहन की मेंटेनेंस हिस्ट्री समझने में आसानी होती है। इससे कार की विश्वसनीयता बढ़ सकती है।
माइलेज कार की कीमत तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। सामान्य तौर पर ज्यादा चली हुई कार की रीसेल वैल्यू पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि केवल कम माइलेज होना ही पर्याप्त नहीं है। अगर कार का नियमित रखरखाव हुआ है, तो अपेक्षाकृत ज्यादा माइलेज के बावजूद उसकी अच्छी कीमत मिल सकती है। इसलिए खरीदार माइलेज के साथ कार की पूरी कंडीशन भी देखता है।
किसी कार की रीसेल वैल्यू इस बात पर भी निर्भर करती है कि बाजार में उस मॉडल की मांग कितनी है। लोकप्रिय मॉडल और ऐसे वाहन जिनकी सेकेंड-हैंड मार्केट में मांग बनी रहती है, उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर कीमत मिल सकती है।
SUV, बेहतर सेफ्टी फीचर्स और आधुनिक तकनीक वाले मॉडल खरीदारों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि अंतिम कीमत वाहन की वास्तविक स्थिति और उस समय की बाजार मांग पर निर्भर करती है।
कार पहले किसी बड़े हादसे का शिकार हुई है या नहीं, यह भी वैल्यूएशन में अहम भूमिका निभाता है।
अगर वाहन में गंभीर दुर्घटना के बाद स्ट्रक्चरल रिपेयर हुआ है, तो उसकी बाजार कीमत प्रभावित हो सकती है। वहीं, कार की रिपेयर हिस्ट्री पारदर्शी हो और वाहन को सावधानी से इस्तेमाल किया गया हो, तो खरीदार का भरोसा बढ़ सकता है।
आज के खरीदार कार खरीदते समय केवल इंजन और माइलेज पर ध्यान नहीं देते। सेफ्टी और कंफर्ट फीचर्स भी काफी मायने रखते हैं।
वेंटिलेटेड सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, बेहतर इंफोटेनमेंट सिस्टम, एयरबैग और आधुनिक ड्राइविंग-सुरक्षा तकनीक जैसी सुविधाएं कार की अपील बढ़ा सकती हैं। हालांकि इन फीचर्स की वास्तविक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कार बेचने से ठीक पहले ही उसकी कीमत जानना जरूरी नहीं है। अगर आप समय-समय पर अपनी कार की अनुमानित बाजार कीमत चेक करते रहते हैं, तो आपको उसके मूल्य में हो रहे बदलाव का अंदाजा मिलता रहता है।
ऑनलाइन कार-वैल्यूएशन प्लेटफॉर्म के जरिए भी अनुमानित बाजार कीमत पता की जा सकती है। इससे कार बेचने, एक्सचेंज करने या नई कार खरीदने का फैसला लेते समय बेहतर तैयारी की जा सकती है।
पुरानी कार की कीमत केवल उसकी उम्र से तय नहीं होती। उसकी कंडीशन, सर्विस रिकॉर्ड, माइलेज, बाजार में मांग, एक्सीडेंट हिस्ट्री और फीचर्स जैसे कई पहलू मिलकर वास्तविक वैल्यू तय करते हैं।
इसलिए कार बेचने से पहले जल्दबाजी में कीमत तय करने के बजाय इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखें। सही जानकारी और बाजार के मौजूदा ट्रेंड को समझकर आप अपनी कार के लिए बेहतर डील हासिल करने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: पुरानी कार बेचते समय सबसे बड़ी चुनौती होती है उसकी सही कीमत तय करना। अक्सर लोग कार की उम्र या खरीद मूल्य के आधार पर उसकी कीमत का अंदाजा लगा लेते हैं, लेकिन वास्तविक बाजार मूल्य कई दूसरे महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है। कार की मौजूदा कंडीशन, सर्विस हिस्ट्री, माइलेज, मॉडल की डिमांड, एक्सीडेंट रिकॉर्ड और फीचर्स जैसे पहलू मिलकर तय करते हैं कि आपकी कार बाजार में कितनी कीमत हासिल कर सकती है। अगर आप अपनी पुरानी कार बेचने या नई कार के लिए उसे एक्सचेंज करने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन 7 फैक्टर्स को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। 1. कार की ओवरऑल कंडीशन कार की बाहरी और अंदरूनी स्थिति उसकी कीमत पर सीधा असर डालती है। बॉडी पर बड़े डेंट, पेंट खराब होना, इंटीरियर में ज्यादा घिसावट या किसी पार्ट का खराब होना कार की रीसेल वैल्यू कम कर सकता है। वहीं, साफ-सुथरी और अच्छी तरह मेंटेन की गई कार खरीदार के बीच ज्यादा भरोसा पैदा करती है। इसलिए कार बेचने से पहले छोटी-मोटी कमियों को ठीक कराना और वाहन को अच्छी तरह साफ रखना फायदेमंद हो सकता है। 2. सर्विस हिस्ट्री से बढ़ता है भरोसा कार की नियमित सर्विसिंग केवल उसके रखरखाव के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि रीसेल वैल्यू के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अगर आपके पास सर्विस रिकॉर्ड मौजूद है और कार की सर्विस अधिकृत सर्विस सेंटर या भरोसेमंद वर्कशॉप से हुई है, तो खरीदार को वाहन की मेंटेनेंस हिस्ट्री समझने में आसानी होती है। इससे कार की विश्वसनीयता बढ़ सकती है। 3. माइलेज भी तय करता है कीमत माइलेज कार की कीमत तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। सामान्य तौर पर ज्यादा चली हुई कार की रीसेल वैल्यू पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि केवल कम माइलेज होना ही पर्याप्त नहीं है। अगर कार का नियमित रखरखाव हुआ है, तो अपेक्षाकृत ज्यादा माइलेज के बावजूद उसकी अच्छी कीमत मिल सकती है। इसलिए खरीदार माइलेज के साथ कार की पूरी कंडीशन भी देखता है। 4. बाजार में मॉडल की मांग किसी कार की रीसेल वैल्यू इस बात पर भी निर्भर करती है कि बाजार में उस मॉडल की मांग कितनी है। लोकप्रिय मॉडल और ऐसे वाहन जिनकी सेकेंड-हैंड मार्केट में मांग बनी रहती है, उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर कीमत मिल सकती है। SUV, बेहतर सेफ्टी फीचर्स और आधुनिक तकनीक वाले मॉडल खरीदारों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि अंतिम कीमत वाहन की वास्तविक स्थिति और उस समय की बाजार मांग पर निर्भर करती है। 5. एक्सीडेंट और रिपेयर हिस्ट्री कार पहले किसी बड़े हादसे का शिकार हुई है या नहीं, यह भी वैल्यूएशन में अहम भूमिका निभाता है। अगर वाहन में गंभीर दुर्घटना के बाद स्ट्रक्चरल रिपेयर हुआ है, तो उसकी बाजार कीमत प्रभावित हो सकती है। वहीं, कार की रिपेयर हिस्ट्री पारदर्शी हो और वाहन को सावधानी से इस्तेमाल किया गया हो, तो खरीदार का भरोसा बढ़ सकता है। 6. फीचर्स और टेक्नोलॉजी आज के खरीदार कार खरीदते समय केवल इंजन और माइलेज पर ध्यान नहीं देते। सेफ्टी और कंफर्ट फीचर्स भी काफी मायने रखते हैं। वेंटिलेटेड सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, बेहतर इंफोटेनमेंट सिस्टम, एयरबैग और आधुनिक ड्राइविंग-सुरक्षा तकनीक जैसी सुविधाएं कार की अपील बढ़ा सकती हैं। हालांकि इन फीचर्स की वास्तविक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 7. सही समय पर कराएं कार का वैल्यूएशन कार बेचने से ठीक पहले ही उसकी कीमत जानना जरूरी नहीं है। अगर आप समय-समय पर अपनी कार की अनुमानित बाजार कीमत चेक करते रहते हैं, तो आपको उसके मूल्य में हो रहे बदलाव का अंदाजा मिलता रहता है। ऑनलाइन कार-वैल्यूएशन प्लेटफॉर्म के जरिए भी अनुमानित बाजार कीमत पता की जा सकती है। इससे कार बेचने, एक्सचेंज करने या नई कार खरीदने का फैसला लेते समय बेहतर तैयारी की जा सकती है। सिर्फ उम्र देखकर तय न करें कार की कीमत पुरानी कार की कीमत केवल उसकी उम्र से तय नहीं होती। उसकी कंडीशन, सर्विस रिकॉर्ड, माइलेज, बाजार में मांग, एक्सीडेंट हिस्ट्री और फीचर्स जैसे कई पहलू मिलकर वास्तविक वैल्यू तय करते हैं। इसलिए कार बेचने से पहले जल्दबाजी में कीमत तय करने के बजाय इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखें। सही जानकारी और बाजार के मौजूदा ट्रेंड को समझकर आप अपनी कार के लिए बेहतर डील हासिल करने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब सिर्फ बैटरी से चलने वाली कारों तक ही सीमित नहीं रही। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में अब सोलर एनर्जी से लैस इलेक्ट्रिक कारें भी अपनी पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में Solarky Mobility Technologies की कॉम्पैक्ट 4-सीटर SunV Solar Electric Car चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसकी एडवांस सोलर रूफ टेक्नोलॉजी है, जो धूप में खड़ी रहने पर बैटरी को स्वतः चार्ज करती है और रोजाना लगभग 50 से 55 किलोमीटर तक अतिरिक्त ड्राइविंग रेंज उपलब्ध कराती है। फिलहाल इस कार की बिक्री कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शुरू हो चुकी है। हालांकि भारत में इसकी लॉन्चिंग को लेकर कंपनी ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। शहरों के लिए तैयार की गई कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक कार Solarky SunV को विशेष रूप से शहरी उपयोग और रोजमर्रा की छोटी दूरी की यात्राओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसका कॉम्पैक्ट आकार इसे भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक और संकरी गलियों में आसानी से चलाने योग्य बनाता है। कार की लंबाई लगभग 10.3 फीट और चौड़ाई 4.9 फीट है। वहीं इसमें 190 मिमी (7.5 इंच) का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है, जिससे सामान्य भारतीय सड़क जैसी परिस्थितियों में भी इसे चलाना आसान हो सकता है। एल्युमीनियम चेसिस और हल्की प्लास्टिक बॉडी के कारण इसका कुल वजन सिर्फ 660 किलोग्राम है, जिससे इसकी ऊर्जा दक्षता बेहतर होती है। सोलर रूफ से मिलेगी रोजाना अतिरिक्त फ्री रेंज इस कार की सबसे बड़ी विशेषता इसकी फोल्डेबल सोलर रूफ है। कार चलते समय छत पर लगे सोलर पैनल लगभग 17.2 वर्ग फीट क्षेत्र में रहते हैं, जबकि पार्क करने पर ये खुलकर लगभग 34.4 वर्ग फीट तक फैल जाते हैं। पर्याप्त धूप मिलने पर यह सिस्टम करीब 300 वॉट तक बिजली उत्पन्न कर सकता है। कंपनी का दावा है कि यदि कार को दिनभर धूप में पार्क किया जाए तो केवल सोलर एनर्जी की मदद से प्रतिदिन लगभग 50 से 55 किलोमीटर तक अतिरिक्त ड्राइविंग रेंज प्राप्त की जा सकती है। इसका मतलब है कि कई लोगों की रोजमर्रा की यात्रा बिना अतिरिक्त बिजली खर्च किए पूरी हो सकती है। बैटरी और कुल ड्राइविंग रेंज SunV में 10.2 kWh की Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरी दी गई है। यह बैटरी एक बार फुल चार्ज होने पर लगभग 150 किलोमीटर तक की रेंज देती है। यदि रात में बैटरी पूरी तरह चार्ज की जाए और दिनभर कार सोलर चार्जिंग प्राप्त करती रहे, तो इसकी कुल ड्राइविंग रेंज लगभग 200 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। मोटर, स्पीड और चार्जिंग इस इलेक्ट्रिक कार में 15 kW की रियर-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो लगभग 63 lb-ft टॉर्क उत्पन्न करती है। कार की अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो शहरों में रोजमर्रा के उपयोग के लिए पर्याप्त मानी जाती है। चार्जिंग की बात करें तो इसे सामान्य घरेलू बिजली के सॉकेट से भी चार्ज किया जा सकता है। पूरी तरह खाली बैटरी को फुल चार्ज होने में लगभग 8 घंटे का समय लगता है। केबिन और आधुनिक फीचर्स छोटे आकार के बावजूद SunV में चार लोगों के बैठने की सुविधा दी गई है। सीटों पर सिंथेटिक लेदर फिनिश दी गई है, जिससे केबिन प्रीमियम महसूस होता है। कार में 10.3 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, की-लेस एंट्री, रियर व्यू कैमरा, पार्किंग सेंसर और ऊर्जा बचाने के लिए Super Eco Mode जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं। स्टोरेज के लिहाज से पीछे 70 से 80 लीटर का बूट स्पेस मिलता है, जिसे पीछे की सीटें फोल्ड करने पर लगभग 800 लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। कीमत और उपलब्धता SunV Solar Electric Car को सबसे पहले थाईलैंड में लगभग 7,950 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹7.64 लाख) की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया था। इंडोनेशिया में इसका उत्पादन MAB ब्रांड के तहत शुरू हो चुका है। कंपनी भविष्य में दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के कई अन्य देशों में भी इस कार को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। हालांकि भारत में इस सोलर इलेक्ट्रिक कार की लॉन्चिंग और कीमत को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। क्या सोलर इलेक्ट्रिक कारें भविष्य हैं? बढ़ती ईंधन कीमतों, पर्यावरण संरक्षण और कम ऑपरेटिंग कॉस्ट को देखते हुए सोलर इलेक्ट्रिक कारें भविष्य की मोबिलिटी का अहम हिस्सा बन सकती हैं। यदि ऐसी तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में लोगों की चार्जिंग पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है और इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयोगिता पहले से कहीं अधिक बढ़ सकती है।
Hatchback Sales June 2026: जून 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए कुल मिलाकर अच्छा महीना रहा, लेकिन हैचबैक सेगमेंट की कुछ लोकप्रिय कारों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और हुंडई की तीन प्रमुख हैचबैक कारों Tata Altroz, Hyundai i20 और Maruti Celerio की बिक्री में सालाना आधार (YoY) पर बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का तेजी से कॉम्पैक्ट एसयूवी और अन्य सेगमेंट की ओर रुख करना माना जा रहा है। Tata Altroz की बिक्री में करीब 39% की गिरावट टाटा मोटर्स की प्रीमियम हैचबैक Tata Altroz जून 2026 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। जून 2026 बिक्री: 2,426 यूनिट जून 2025 बिक्री: 3,974 यूनिट सालाना गिरावट: 38.95% कमी: 1,548 यूनिट प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता का असर इसकी बिक्री पर साफ दिखाई दिया। Hyundai i20 की बिक्री में सबसे बड़ी गिरावट हुंडई की फीचर-लोडेड प्रीमियम हैचबैक Hyundai i20 को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। जून 2026 बिक्री: 1,828 यूनिट जून 2025 बिक्री: 3,785 यूनिट सालाना गिरावट: 51.70% यानी पिछले साल के मुकाबले इसकी बिक्री आधी से भी कम रह गई। बदलती ग्राहक पसंद और कड़े मुकाबले को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। Maruti Celerio की बिक्री भी घटी मारुति सुजुकी की लोकप्रिय फैमिली हैचबैक Celerio की बिक्री भी जून 2026 में कमजोर रही। जून 2026 बिक्री: 1,261 यूनिट जून 2025 बिक्री: 2,038 यूनिट सालाना गिरावट: 38.13% हालांकि सेलेरियो लंबे समय से बजट ग्राहकों की पसंद रही है, लेकिन अब इस सेगमेंट में भी मांग कमजोर पड़ती दिख रही है। बिक्री की तुलना कार जून 2026 जून 2025 YoY बदलाव Tata Altroz 2,426 3,974 ▼ 38.95% Hyundai i20 1,828 3,785 ▼ 51.70% Maruti Celerio 1,261 2,038 ▼ 38.13% क्यों घट रही है हैचबैक कारों की मांग? ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, ग्राहक अब पारंपरिक हैचबैक की बजाय कॉम्पैक्ट एसयूवी, माइक्रो एसयूवी और क्रॉसओवर वाहनों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस, आधुनिक फीचर्स, मजबूत रोड प्रेजेंस और प्रतिस्पर्धी कीमतें एसयूवी की मांग को लगातार बढ़ा रही हैं। जून 2026 की बिक्री रिपोर्ट भी इसी बदलाव की पुष्टि करती है। हालांकि हैचबैक सेगमेंट की टॉप 10 में शामिल 7 कारों की बिक्री में सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन Altroz, i20 और Celerio जैसी लोकप्रिय कारों की गिरती बिक्री वाहन निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।