ऑटोमोबाइल

MG IM6 Electric SUV India Launch: 555KM Range & 800V Fast Charging

MG IM6 इलेक्ट्रिक SUV इस साल भारत में होगी लॉन्च, 555KM रेंज और 800V फास्ट चार्जिंग के साथ आएगी प्रीमियम EV

surbhi मार्च 7, 2026 0
MG IM6 electric SUV with sleek coupe-SUV design and futuristic interior in India
MG IM6 Electric SUV India Launch 2026

 

MG Select नेटवर्क के तहत लॉन्च होगी नई इलेक्ट्रिक SUV

ब्रिटिश मूल की कार निर्माता MG Motor इस साल भारत में अपनी नई प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV IM6 लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मॉडल कंपनी के प्रीमियम रिटेल नेटवर्क MG Select के तहत पेश किया जाएगा।

अनुमान है कि यह SUV अक्टूबर 2026 के आसपास भारतीय बाजार में आएगी और इसकी कीमत करीब 60 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के आसपास हो सकती है। इसे भारत में फुली इम्पोर्टेड मॉडल के तौर पर लाया जाएगा।

 

IM ब्रांड के तहत तैयार की गई खास इलेक्ट्रिक कार

IM6, दरअसल SAIC Motor द्वारा स्थापित इलेक्ट्रिक वाहन ब्रांड IM (Intelligent Mobility) का हिस्सा है। यह ब्रांड 2020 में Alibaba और Zhangjiang Hi-Tech के सहयोग से शुरू किया गया था और यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्रित है।

इस SUV को भारत में पहली बार Auto Expo 2025 में शोकेस किया गया था, जहां इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

 

बैटरी, पावर और रेंज

अंतरराष्ट्रीय बाजार में IM6 कई दमदार स्पेसिफिकेशन के साथ आती है। इसके मुख्य फीचर्स इस प्रकार हैं:

  • 100kWh बैटरी पैक
  • एक बार चार्ज करने पर 555 किमी तक की WLTP रेंज (RWD)
  • 800V इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर
  • 396kW DC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट
  • 30% से 80% चार्ज सिर्फ 15 मिनट में

 

पावरट्रेन विकल्प:

  • RWD वर्जन: 408hp और 500Nm टॉर्क
  • AWD वर्जन: 778hp और 802Nm टॉर्क

 

स्पीड के मामले में:

  • RWD वर्जन: 0-100 किमी/घंटा 5.4 सेकंड
  • AWD वर्जन: 0-100 किमी/घंटा 3.4 सेकंड

हालांकि भारत में कौन-सा वर्जन आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

 

डिजाइन और इंटीरियर

डिजाइन की बात करें तो IM6 पारंपरिक SUV जैसी नहीं दिखती, बल्कि इसका स्टाइल कूपे-SUV क्रॉसओवर जैसा है। इसमें स्मूद और एयरोडायनामिक बॉडी पैनल दिए गए हैं।

मुख्य डिजाइन हाइलाइट्स:

  • बड़े L-शेप LED हेडलैंप
  • पीछे फुल-वाइड LED लाइट बार
  • स्पोर्टी और फ्यूचरिस्टिक लुक

 

इंटीरियर में मिलते हैं:

  • 26.3-इंच पैनोरमिक स्क्रीन सेटअप
  • अतिरिक्त 10.5-इंच वर्टिकल डिस्प्ले
  • LiDAR टेक्नोलॉजी
  • NVIDIA का Orin X चिप
  • Qualcomm का Snapdragon 8295 प्रोसेसर

 

किन कारों से होगी टक्कर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह SUV कई प्रीमियम इलेक्ट्रिक मॉडलों को टक्कर देती है, जिनमें शामिल हैं:

  • Tesla Model Y
  • BYD Sealion 7
  • Hyundai Ioniq 5
  • Kia EV6

 

MG की भारत में आगे की योजना

JSW MG Motor India आने वाले समय में भारतीय बाजार के लिए कई नए मॉडल तैयार कर रही है। IM6 के बाद कंपनी एक नई SUV भी लॉन्च करेगी, जो Mahindra XUV 7XO की प्रतिद्वंद्वी होगी।

यह मॉडल इंडोनेशिया में बिकने वाली Wuling Starlight 560 पर आधारित होगा और भारत की पहली मास-मार्केट प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) SUV बन सकती है।

इसके अलावा कंपनी Astor और ZS EV के लिए नई जनरेशन मॉडल भी तैयार कर रही है, जिन्हें 2027 तक लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

ऑटोमोबाइल

View more
Fuel station dispensing ethanol-blended petrol as India plans higher ethanol blend fuels like E21 and E25.
E20 के बाद अब E21 और E25 पेट्रोल की तैयारी, 2029 तक चरणबद्ध लागू करने पर विचार कर रही सरकार

E20 पेट्रोल पर जारी बहस के बीच सरकार बना रही अगला रोडमैप देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद केंद्र सरकार अब ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 2027 तक E21 पेट्रोल और 2029 तक E25 पेट्रोल लागू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। हालांकि, यह बदलाव एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय मिल सके। चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा एथेनॉल मिश्रण सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सरकार सीधे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर जाने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, 2027 में E21 पेट्रोल और उसके दो साल बाद 2029 में E25 पेट्रोल पेश किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार E25 को मौजूदा नीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की अधिकतम सीमा बनाने पर भी विचार कर रही है। ऑटो उद्योग को मिलेगा तैयारी का समय सरकार का मानना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो पार्ट्स उद्योग, ईंधन आपूर्ति नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार होने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। एक अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव इस तरह किया जाएगा कि इंजन तकनीक, सप्लाई चेन और फ्यूल वितरण व्यवस्था बिना किसी बड़े व्यवधान के नए मानकों के अनुरूप ढल सके। E20 को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताओं पर भी नजर देशभर में E20 पेट्रोल उपलब्ध होने के बावजूद कई वाहन मालिकों ने माइलेज, इंजन प्रदर्शन और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर सवाल उठाए हैं। सरकार इन चिंताओं से भी अवगत है और इसी वजह से अगले चरण की योजना को धीरे-धीरे लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के मालिकों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण उनके वाहन के प्रदर्शन और रखरखाव लागत को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की बड़ी रणनीति भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की मांग बढ़ाना है। सरकार ने E20 पेट्रोल की देशव्यापी उपलब्धता अपने मूल 2030 के लक्ष्य से लगभग पांच वर्ष पहले हासिल कर ली है, जिसे इस कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत का दावा सरकारी अनुमान के अनुसार, 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से भारत हर वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत कर रहा है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का बोझ भी कम हुआ है। हालांकि, भविष्य में E21 और E25 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले सरकार उद्योग की तैयारी, तकनीकी क्षमता और उपभोक्ताओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Maruti Suzuki Victoris SUV showcased with updated pricing on premium petrol variants in India.

Maruti Suzuki ने सस्ती की Victoris SUV, चुनिंदा वेरिएंट्स पर ₹38,900 तक की कटौती

Yamaha YZF-R2

अगले माह लॉन्च होगी नई Yamaha R2 स्पोर्ट्स बाइक, जानें क्या है खास ?

Electric scooters from leading brands displayed as India’s electric two-wheeler market records strong sales growth in 2026.

TVS फिर बनी नंबर-1, Bajaj ने बढ़ाई टक्कर, 6 महीने में बिके 9.7 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर; Ola अब भी वापसी की राह पर

Electric scooter charging at home with battery, range, and service checklist before making an EV purchase.
EV स्कूटर खरीदने से पहले जरूर जान लें ये 5 बातें, सिर्फ रेंज देखकर फैसला किया तो हो सकता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का विकल्प चुन रहे हैं। बाजार में 80 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले कई इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध हैं, जिनमें लंबी रेंज, स्मार्ट फीचर्स और आकर्षक डिजाइन का दावा किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कंपनी द्वारा बताई गई रेंज, कीमत या फीचर्स के आधार पर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना सही फैसला नहीं है। कई खरीदार बाद में बैटरी, चार्जिंग, सर्विस और ऐप सपोर्ट जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च और असुविधा बढ़ सकती है। अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन पांच महत्वपूर्ण बातों पर जरूर ध्यान दें। 1. कंपनी की बताई रेंज पर पूरी तरह भरोसा न करें अधिकांश कंपनियां इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज नियंत्रित परीक्षण (Test Conditions) के आधार पर बताती हैं। वास्तविक परिस्थितियों में ट्रैफिक, सड़क की स्थिति, मौसम, वाहन पर लोड और ड्राइविंग स्टाइल के कारण यह रेंज काफी कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी स्कूटर की आधिकारिक रेंज 120 किलोमीटर बताई गई है, तो सामान्य उपयोग में वह लगभग 75 से 90 किलोमीटर तक ही चल सकता है। इसलिए स्कूटर खरीदने से पहले वास्तविक उपयोगकर्ताओं के अनुभव पढ़ें, वीडियो रिव्यू देखें और संभव हो तो मौजूदा मालिकों से बात करें। 2. बैटरी वारंटी की शर्तें ध्यान से पढ़ें बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक स्कूटर का सबसे महंगा हिस्सा होती है। कई कंपनियां 3 से 5 वर्ष तक की वारंटी देती हैं, लेकिन हर वारंटी की अपनी अलग शर्तें होती हैं। खरीदने से पहले यह जरूर जान लें कि किन परिस्थितियों में बैटरी मुफ्त बदली जाएगी और किन मामलों में वारंटी लागू नहीं होगी। इससे भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से बचा जा सकता है। 3. घर पर चार्जिंग की सुविधा पहले जांच लें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके घर या अपार्टमेंट में सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। पुराने मकानों या कुछ सोसायटी में बिजली की वायरिंग, लोड क्षमता या चार्जिंग की अनुमति से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। यदि सही चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध नहीं होगा, तो रोजाना स्कूटर चार्ज करना मुश्किल हो सकता है। फ्लैट में रहने वाले लोगों को सोसायटी के नियम भी पहले से जान लेने चाहिए। 4. नजदीकी सर्विस सेंटर की उपलब्धता जरूर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर की मरम्मत हर सामान्य मैकेनिक नहीं कर सकता। इसके लिए कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर की जरूरत होती है। यदि सर्विस सेंटर आपके घर से काफी दूर है, तो छोटी-सी तकनीकी खराबी में भी समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। खरीदारी से पहले कंपनी की वेबसाइट या डीलर से अपने शहर के सर्विस नेटवर्क की पूरी जानकारी जरूर लें। 5. कंपनी और उसके मोबाइल ऐप की विश्वसनीयता जांचें आज के अधिकांश इलेक्ट्रिक स्कूटर मोबाइल ऐप से जुड़े होते हैं। इन ऐप्स के जरिए वाहन की लोकेशन, बैटरी स्टेटस, लॉक- अनलॉक, डायग्नोस्टिक्स और कई स्मार्ट फीचर्स का उपयोग किया जाता है। यदि भविष्य में कंपनी ऐप का सपोर्ट बंद कर दे या नियमित अपडेट न दे, तो कई स्मार्ट सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए यह भी देखें कि कंपनी कितने समय से बाजार में मौजूद है, उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, सर्विस नेटवर्क कितना मजबूत है और ऐप को नियमित अपडेट मिलते हैं या नहीं। सिर्फ रेंज नहीं, पूरी तस्वीर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना एक लंबी अवधि का निवेश है। ऐसे में केवल अधिक रेंज या कम कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अगर आप रेंज के साथ बैटरी की गुणवत्ता, वारंटी, चार्जिंग सुविधा, सर्विस नेटवर्क और कंपनी की विश्वसनीयता जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखेंगे, तो भविष्य में होने वाली परेशानियों और अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला न केवल आपके पैसे बचाएगा बल्कि बेहतर ओनरशिप अनुभव भी देगा।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
VinFast upcoming electric scooter featuring premium styling, LED lighting, smart features and a claimed 150 km riding range for India.

OLA, TVS और Bajaj की बढ़ सकती है चुनौती! VinFast ला रही नया इलेक्ट्रिक स्कूटर, 150Km तक की रेंज और प्रीमियम फीचर्स का दावा

Maruti Suzuki Ertiga ZXi 7-seater MPV highlighting premium features, spacious cabin, and value-for-money pricing.

₹11 लाख के बजट में 7-सीटर खरीदने की सोच रहे हैं? Maruti Suzuki Ertiga ZXi क्यों है सबसे वैल्यू फॉर मनी वेरिएंट

2026 Maruti Brezza facelift SUV showcasing updated design, ADAS technology and turbo petrol engine

2026 Maruti Brezza Facelift: टर्बो इंजन, ADAS और प्रीमियम फीचर्स के साथ आ सकती है नई ब्रेजा, लॉन्च से पहले बड़े खुलासे

Vintage truck with black tape on headlights, showing an old road safety practice.
पुरानी गाड़ियों की हेडलाइट पर क्यों लगाई जाती थी काली पट्टी? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

आज की आधुनिक कारों और ट्रकों में एडवांस LED और प्रोजेक्टर हेडलाइट्स देखने को मिलती हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब सड़कों पर चलने वाले कई ट्रकों, बसों और कारों की हेडलाइट पर काली पट्टी लगाई जाती थी। नई पीढ़ी के लिए यह सिर्फ एक अजीब डिजाइन लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सड़क सुरक्षा, तकनीकी सीमाएं और ऐतिहासिक कारण जुड़े हुए थे। तेज रोशनी से बचाने के लिए अपनाया जाता था यह तरीका पहले के दौर में वाहनों में आधुनिक हेडलाइट तकनीक उपलब्ध नहीं थी। अधिकांश गाड़ियों में साधारण बल्ब आधारित हेडलाइट्स लगी होती थीं, जिनमें रोशनी को नियंत्रित करने के लिए बेहतर फोकसिंग सिस्टम नहीं होता था। ऐसे में हाई बीम की तेज रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों में पड़कर दुर्घटना का कारण बन सकती थी। इसी समस्या से बचने के लिए कई ड्राइवर हेडलाइट के ऊपरी हिस्से पर काली पट्टी या काला रंग लगा देते थे। इससे रोशनी का कुछ हिस्सा अवरुद्ध हो जाता था और प्रकाश सड़क पर अधिक केंद्रित रहता था, जिससे सामने वाले वाहन चालक को कम ग्लेयर महसूस होता था। द्वितीय विश्व युद्ध से भी जुड़ा है इसका इतिहास हेडलाइट पर काली पट्टी लगाने का चलन केवल आम वाहनों तक सीमित नहीं था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई देशों की सैन्य गाड़ियों में भी हेडलाइट्स को आंशिक रूप से ढंका जाता था। इसका उद्देश्य दुश्मन को वाहन की सटीक स्थिति और दिशा का अंदाजा लगाने से रोकना था। रात में सीमित रोशनी के साथ वाहन चलाना उस समय सैन्य रणनीति का हिस्सा माना जाता था। इसलिए हेडलाइट की चमक को नियंत्रित करना आवश्यक समझा जाता था। भारतीय ट्रक ड्राइवरों का लोकप्रिय जुगाड़ भारत में 1970 से 1990 के दशक के बीच ट्रक और बस चालकों के बीच यह तरीका काफी लोकप्रिय था। कई ड्राइवर अपने अनुभव के आधार पर हेडलाइट पर तिरछी काली पट्टी लगाते थे। उनका मानना था कि इससे सामने वाले वाहन चालक को कम चकाचौंध होती है और रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका घट जाती है। दिलचस्प बात यह है कि यह किसी सरकारी नियम या कानून का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह ड्राइवरों के अनुभव और व्यवहारिक समझ पर आधारित एक देसी जुगाड़ था। अब क्यों नहीं दिखाई देती काली पट्टी? समय के साथ वाहन तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। आज की कारों और ट्रकों में लो बीम और हाई बीम सिस्टम अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। LED, प्रोजेक्टर और मैट्रिक्स हेडलाइट्स रोशनी को अधिक सटीक दिशा में भेजती हैं। कई आधुनिक वाहनों में ऑटोमैटिक हाई-बीम कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में हेडलाइट पर काली पट्टी लगाने से चालक की अपनी विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसकी जरूरत लगभग खत्म हो चुकी है। तकनीक ने बदल दी पुरानी परंपरा जिस समस्या का समाधान कभी ड्राइवर काली पट्टी लगाकर करते थे, आज वही काम आधुनिक हेडलाइट तकनीक आसानी से कर रही है। हालांकि पुराने ट्रकों और बसों की तस्वीरों में दिखाई देने वाली यह काली पट्टी आज भी ऑटोमोबाइल इतिहास की एक दिलचस्प याद के रूप में देखी जाती है।  

surbhi जून 24, 2026 0
Popular electric scooters with low seat height designed for comfortable riding and easy handling in city traffic.

कम हाइट वाले लोगों के लिए बेस्ट हैं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर्स, ट्रैफिक और पार्किंग में मिलेगी आसान राइड

Modern motorcycle with self-start system highlighting the absence of a traditional kick starter.

क्या आपकी बाइक में नहीं है किक स्टार्ट? जानिए सेल्फ स्टार्ट की वो कमजोरियां, जो मुश्किल समय में बढ़ा सकती हैं परेशानी

New 2026 Citroen eC3 X electric SUV showcased with modern styling and EV features.

नई Citroen eC3 X खरीदने का प्लान है? जानिए कौन-सा वेरिएंट है सबसे ज्यादा वैल्यू फॉर मनी

0 Comments

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?