जमशेदपुर। ‘सुपर 30’ के संस्थापक और प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार ने छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि केवल पढ़ाई को रटने से काम नहीं चलेगा। विद्यार्थियों को इनोवेटिव थिंकिंग विकसित करने के साथ समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता पर भी काम करना चाहिए।
आनंद कुमार रविवार को एक्सएलआरआई के टाटा ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में आयोजित अरका जैन विश्वविद्यालय के दो दिवसीय वार्षिक इंडक्शन समारोह ‘आरंभ-2026’ के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा किए और करियर, संघर्ष तथा कौशल विकास पर बात की।
आनंद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को रटने की आदत छोड़कर नए तरीके से सोचने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान खोजने की क्षमता भविष्य में छात्रों को आगे बढ़ने में मदद करेगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी काम करते समय यह सोच होनी चाहिए कि उसे और बेहतर तरीके से कैसे किया जा सकता है। उनके मुताबिक, सफलता केवल अच्छी नौकरी या बड़ा पैकेज हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार सीखते रहने और कुछ नया करने की सोच भी जरूरी है।
पेपर लीक की घटनाओं पर भी आनंद कुमार ने छात्रों से निराश नहीं होने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण विद्यार्थियों को अपनी तैयारी और लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।
‘आरंभ-2026’ कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने छात्रों की प्रस्तुतियों की सराहना की। इस दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रचनात्मकता और अन्य कौशल विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए अंकों के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन छात्रों ने अपनी उत्तरपुस्तिका की कॉपी प्राप्त कर ली है और उन्हें अंकों को लेकर आपत्ति है, वे दोबारा जांच के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 19 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। 19 अगस्त तक करना होगा आवेदन छात्रों को वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान छात्रों को अपनी Answer Book Application ID, Roll Number, School Number और Centre Number की आवश्यकता होगी। निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए छात्रों को अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करने की सलाह दी जाती है। वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन में क्या अंतर? अंकों का वेरिफिकेशन: इसमें उत्तरपुस्तिका में दिए गए अंकों की दोबारा जांच की जाती है। यह देखा जाता है कि सभी प्रश्नों के अंक सही तरीके से जोड़े गए हैं या नहीं, सभी उत्तरों के लिए अंक दिए गए हैं या नहीं और उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर दर्ज कुल अंक सही हैं या नहीं। री-इवैल्यूएशन: इसमें छात्र किसी विशेष प्रश्न के उत्तर की दोबारा जांच कराने का अनुरोध कर सकता है। इसके लिए संबंधित प्रश्न के आधार पर आवेदन करना होता है। कितनी है फीस? CBSE ने दोनों प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया है। अंकों का वेरिफिकेशन: 300 रुपये प्रति विषय री-इवैल्यूएशन: 100 रुपये प्रति प्रश्न शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। ऐसे करें CBSE 10वीं री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन सबसे पहले CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं। कक्षा 10वीं री-इवैल्यूएशन से संबंधित लिंक पर क्लिक करें। “Click here to apply” विकल्प चुनें। इसके बाद “Apply Class 10 (Verification/Re-Evaluation)” पर क्लिक करें। Answer Book Application ID, Roll Number, School Number और Centre Number दर्ज करें। Proceed पर क्लिक करें। वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन में से संबंधित विकल्प चुनें। निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। आवेदन जमा करने के बाद इसकी जानकारी और भुगतान की रसीद सुरक्षित रख लें। जांच के बाद बदल सकते हैं अंक CBSE छात्रों की ओर से दर्ज आपत्तियों की जांच करेगा। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की गलती सामने आती है, तो आवश्यकता के अनुसार अंकों में बदलाव किया जा सकता है। इसकी जानकारी छात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दी जाएगी। छात्र ध्यान रखें कि आवेदन की अंतिम तारीख 19 अगस्त 2026 है। इसलिए जिन विद्यार्थियों को अपने अंकों के वेरिफिकेशन या किसी विशेष प्रश्न के री-इवैल्यूएशन की जरूरत है, उन्हें समय रहते ऑनलाइन आवेदन कर देना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी घोषणा की। 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात कही। इसके साथ ही अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य भी घोषित किया गया। महंगी कोचिंग से राहत देने की कोशिश पीएम मोदी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। सरकार डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और उपलब्ध शिक्षण संसाधनों का इस्तेमाल करके युवाओं तक मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग पहुंचाने की दिशा में काम करेगी। इससे छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए दूसरे शहरों में जाकर महंगे कोचिंग संस्थानों में रहने और पढ़ने की जरूरत कम हो सकती है। किन परीक्षाओं की तैयारी होगी, अभी स्पष्ट नहीं सरकार की घोषणा में ‘विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं’ के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शुरुआत में UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, JEE, NEET या अन्य किन परीक्षाओं को इस योजना में शामिल किया जाएगा। इसी तरह आवेदन प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, कक्षाओं का प्लेटफॉर्म और मुफ्त कोचिंग शुरू होने की तारीख को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आना बाकी है। इसलिए फिलहाल इसे घोषित पहल के रूप में देखना उचित होगा। एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए तैयार करना और AI के क्षेत्र में भारत की युवा प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। AI प्रशिक्षण के तहत युवाओं को किस स्तर और किन विशेष पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है। युवाओं के लिए रोजगार और कौशल पर जोर स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने युवाओं को AI, स्टार्टअप, हरित अर्थव्यवस्था, रचनात्मक उद्योग, विनिर्माण और अन्य उभरते क्षेत्रों से जोड़ने पर जोर दिया। मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग और बड़े पैमाने पर AI प्रशिक्षण की घोषणाओं को इसी व्यापक युवा-केंद्रित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भोपाल, एजेंसियां। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं की वर्ष 2027 की मुख्य परीक्षाओं का टाइम टेबल जारी कर दिया है। बोर्ड ने यह परीक्षा कार्यक्रम 13 अगस्त 2026 को जारी किया है। छात्र विषयवार डेटशीट MPBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। 12वीं की परीक्षा 17 फरवरी से MP Board कक्षा 12वीं की मुख्य परीक्षा 17 फरवरी 2027 से शुरू होकर 19 मार्च 2027 तक चलेगी। परीक्षा का समय सामान्यतः सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। 10वीं की परीक्षा 24 फरवरी से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी 2027 से शुरू होगी और 18 मार्च 2027 तक चलेगी। बोर्ड ने अलग-अलग विषयों के लिए तारीखें निर्धारित की हैं। आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें डेटशीट छात्र पूरी विषयवार डेटशीट मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। MPBSE ने 2027 की मुख्य एवं द्वितीय परीक्षाओं का पूरा कार्यक्रम PDF में उपलब्ध कराया है।