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SC Relief for UPSC OBC Candidates

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केवल आय के आधार पर तय नहीं होगा OBC क्रीमी लेयर, UPSC उम्मीदवारों को राहत

surbhi मार्च 12, 2026 0
Supreme Court of India building during hearing on OBC creamy layer rule affecting UPSC candidates
Supreme Court OBC Creamy Layer Verdict

 

Supreme Court of India ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर निर्धारण से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का निर्णय केवल उसके माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में माता-पिता के पद और सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

जस्टिस P. S. Narasimha और न्यायमूर्ति R. Mahadevan की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जो हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ दायर की गई थीं। इस फैसले से कई Union Public Service Commission (UPSC) उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद नियुक्ति नहीं दी गई थी।

 

उम्मीदवारों को क्यों नहीं मिली थी नौकरी

दरअसल, कुछ अभ्यर्थियों के माता-पिता सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), बैंकों और अन्य संस्थानों में कार्यरत थे। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आय में जोड़कर उन्हें क्रीमी लेयर में शामिल कर दिया था। इस कारण वे OBC आरक्षण के लाभ से वंचित हो गए और नियुक्ति नहीं मिल पाई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने उम्मीदवारों को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत मानदंड अपनाया था। न्यायमूर्ति R. Mahadevan ने अपने फैसले में कहा कि क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय के आधार पर नहीं किया जा सकता।

 

1993 के आदेश का दिया हवाला

अदालत ने 1993 के उस सरकारी आदेश का भी उल्लेख किया, जो ऐतिहासिक Indra Sawhney case के बाद लागू हुआ था। इस आदेश में स्पष्ट किया गया था कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता के पद-जैसे ग्रुप ‘A’ या ग्रुप ‘B’ अधिकारी-को प्रमुख आधार माना जाएगा।

इसके तहत वेतन और कृषि आय को आय/संपत्ति परीक्षण में शामिल नहीं किया जाता।

 

2004 के स्पष्टीकरण को कोर्ट ने नहीं माना आधार

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 2004 में जारी एक स्पष्टीकरण पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता। अदालत ने पाया कि सरकारी कर्मचारियों और PSU कर्मचारियों के बीच अलग-अलग मानदंड अपनाना समानता के अधिकार के खिलाफ है।

 

सरकार को 6 महीने में पुनर्विचार का आदेश

अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रभावित उम्मीदवारों के मामलों की 6 महीने के भीतर दोबारा समीक्षा करे। जरूरत पड़ने पर इन उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने पर भी विचार करने को कहा गया है।

इस फैसले को OBC आरक्षण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता माना जा रहा है, जिसका असर भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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UPSC 2027 exam calendar displaying Civil Services, NDA, CDS and CAPF examination schedules for aspirants.
UPSC 2027 का कैलेंडर जारी, जानें IAS, NDA, CDS और CAPF परीक्षाओं की तारीखें

देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। Union Public Service Commission यानी UPSC ने साल 2027 का परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है। आयोग की ओर से जारी इस शेड्यूल में सिविल सर्विस, NDA, CDS, CAPF, इंजीनियरिंग सर्विस और अन्य प्रमुख परीक्षाओं की तारीखें घोषित की गई हैं। अब उम्मीदवार पहले से अपनी तैयारी की रणनीति तय कर सकते हैं और परीक्षा के हिसाब से स्टडी प्लान बना सकते हैं। कब होगी UPSC Civil Services Exam 2027? UPSC Civil Services Examination 2027 की प्रारंभिक परीक्षा 23 मई 2027 को आयोजित की जाएगी। यही परीक्षा IAS, IPS, IFS और अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में चयन का रास्ता खोलती है। वहीं Civil Services Main Examination 20 अगस्त 2027 से शुरू होगी। यह परीक्षा कुल 5 दिनों तक आयोजित की जाएगी। जनवरी में आएगा नोटिफिकेशन UPSC कैलेंडर के मुताबिक सिविल सर्विस परीक्षा 2027 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जनवरी 2027 में जारी किया जाएगा। इसके साथ ही आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। NDA और CDS परीक्षा की तारीखें देश की सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए NDA और CDS परीक्षा बेहद अहम मानी जाती है। NDA और NA Examination (I) परीक्षा तिथि: 11 अप्रैल 2027 NDA और NA Examination (II) परीक्षा तिथि: 19 सितंबर 2027 इसके अलावा Combined Defence Services Examination यानी CDS परीक्षा का शेड्यूल भी UPSC कैलेंडर में जारी किया गया है। CAPF और अन्य परीक्षाओं की तारीखें भी घोषित CAPF Assistant Commandant Examination 2027 की परीक्षा 4 जुलाई 2027 को आयोजित होगी। इस परीक्षा के जरिए Border Security Force, Central Reserve Police Force, Central Industrial Security Force और Indo-Tibetan Border Police जैसी केंद्रीय सुरक्षा बलों में अधिकारी बनने का मौका मिलता है। इसके अलावा: Combined Geo-Scientist Preliminary Exam – 10 जनवरी 2027 Combined Geo-Scientist Main Exam – 19 जून 2027 ऐसे चेक करें UPSC 2027 Calendar उम्मीदवार UPSC का पूरा कैलेंडर देखने के लिए UPSC Official Website पर विजिट कर सकते हैं। स्टेप्स: वेबसाइट के होमपेज पर जाएं Examination सेक्शन खोलें UPSC 2027 Calendar लिंक पर क्लिक करें स्क्रीन पर पूरा एग्जाम शेड्यूल दिखाई देगा भविष्य के लिए PDF डाउनलोड कर सेव कर लें तैयारी शुरू करने का सही समय UPSC परीक्षाओं को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी तैयारी शुरू करने वाले उम्मीदवारों को बेहतर रणनीति बनाने का फायदा मिलता है।  

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Indian Institute of Technology Roorkee ने Joint Entrance Examination – Advanced 2026 के पेपर 1 और पेपर 2 के प्रश्नपत्र जारी कर दिए हैं। परीक्षा खत्म होते ही लाखों छात्र अपने जवाबों का मिलान करने और संभावित स्कोर का अंदाजा लगाने में जुट गए हैं। इस बार भी परीक्षा का स्तर चुनौतीपूर्ण माना गया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मैथ्स सेक्शन को लेकर हो रही है। छात्रों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक मैथ्स काफी लंबा और कैलकुलेटिव रहा, जिसने टाइम मैनेजमेंट को बेहद मुश्किल बना दिया। कैसा रहा JEE Advanced 2026 का पेपर? विशेषज्ञों के अनुसार: फिजिक्स में कॉन्सेप्चुअल और ट्रिकी सवाल पूछे गए केमिस्ट्री का स्तर मिक्स्ड रहा मैथ्स सबसे ज्यादा समय लेने वाला सेक्शन साबित हुआ पेपर 1 की तुलना में पेपर 2 को ज्यादा कठिन माना जा रहा है। जिन छात्रों की कॉन्सेप्ट्स पर मजबूत पकड़ थी, उनके लिए पेपर हल करना संभव था, लेकिन सीमित समय में सवाल पूरे करना बड़ी चुनौती बन गया। जल्द जारी होगी Answer Key क्वेश्चन पेपर जारी होने के बाद अब छात्रों को प्रोविजनल आंसर की का इंतजार है। IIT रुड़की जल्द ही ऑफिशियल वेबसाइट पर Answer Key अपलोड करेगा। इसके बाद छात्रों को ऑब्जेक्शन दर्ज करने का मौका मिलेगा। अगर किसी सवाल या उत्तर को लेकर आपत्ति होती है, तो निर्धारित फीस जमा कर उसे चैलेंज किया जा सकेगा। फाइनल Answer Key के बाद ही रिजल्ट तैयार किया जाएगा। इस बार कितनी जा सकती है कटऑफ? कटऑफ हर साल पेपर के कठिनाई स्तर और परीक्षार्थियों की संख्या पर निर्भर करती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि: मैथ्स कठिन होने की वजह से कुल कटऑफ थोड़ी प्रभावित हो सकती है Subject-wise cutoff भी अहम भूमिका निभाएगी पेपर 2 के कठिन स्तर का असर रैंकिंग पर दिख सकता है IIT में सीट पाने के लिए छात्रों को: कुल कटऑफ पार करनी होगी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में अलग-अलग न्यूनतम अंक भी लाने होंगे रिजल्ट के बाद शुरू होगी JoSAA Counseling रिजल्ट जारी होने के बाद सफल छात्रों को AIR यानी ऑल इंडिया रैंक दी जाएगी। इसके बाद Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी। इसी प्रक्रिया के जरिए तय होगा कि किस छात्र को कौन-सी IIT और कौन-सी ब्रांच मिलेगी। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि छात्र अभी से अपनी पसंदीदा IITs और कोर्सेज की सूची तैयार कर लें। छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के बाद का समय मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। ऐसे में: सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट की जानकारी पर भरोसा करें सोशल मीडिया अफवाहों से बचें स्कोर कम आने पर निराश न हों इंजीनियरिंग में IIT के अलावा भी कई बेहतरीन संस्थान और करियर विकल्प मौजूद हैं। JEE Advanced 2026: एग्जाम पैटर्न विषय विवरण परीक्षा का नाम JEE Advanced 2026 आयोजन संस्थान IIT रुड़की परीक्षा मोड कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) कुल पेपर पेपर 1 और पेपर 2 (दोनों अनिवार्य) अवधि प्रत्येक पेपर 3 घंटे भाषा हिंदी और अंग्रेजी विषय फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स प्रश्न प्रकार MCQ, न्यूमेरिकल, मैचिंग मार्किंग स्कीम नेगेटिव मार्किंग लागू

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Students preparing for NEET UG 2026 after NTA announced re-exam date for June 21
NEET UG 2026: नई परीक्षा तारीख घोषित, 21 जून को होगा री-एग्जाम, लाखों छात्रों के लिए अहम अपडेट

NTA ने जारी किया आधिकारिक शेड्यूल, अफवाहों से बचने की अपील देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम की नई तारीख घोषित कर दी है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 (रविवार) को आयोजित की जाएगी। सरकारी मंजूरी के बाद जारी इस अपडेट के साथ ही लाखों छात्रों की तैयारी की दिशा एक बार फिर तय हो गई है। NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिए MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला मिलता है। क्या है नया शेड्यूल? NTA के अनुसार: परीक्षा तिथि: 21 जून 2026 (रविवार) परीक्षा: NEET UG री-एग्जाम उम्मीदवार: देशभर के लाखों छात्र एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी है। छात्रों के लिए NTA की सलाह NTA ने अभ्यर्थियों से कहा है कि अब समय कम है, इसलिए: रिवीजन पर विशेष ध्यान दें नियमित मॉक टेस्ट दें पुराने प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें किसी भी अनऑफिशियल सूचना पर भरोसा न करें हेल्पलाइन और संपर्क जानकारी परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए NTA ने हेल्पलाइन और ईमेल जारी किए हैं: ईमेल: neet-ug@nta.ac.in हेल्पलाइन: 011-40759000 हेल्पलाइन: 011-69227700 परीक्षा विवाद और री-एग्जाम का कारण रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा के बाद कुछ अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, जिसके चलते जांच प्रक्रिया शुरू की गई। मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (Central Bureau of Investigation) को सौंपी गई थी। इसके बाद परीक्षा से जुड़े कई सवाल उठे और री-एग्जाम का निर्णय लिया गया। परीक्षा से जुड़ा पिछला विवरण NEET UG 2026 परीक्षा: आयोजित हुई थी: 3 मई 2026 परीक्षा केंद्र: भारत के 551 शहर और विदेश के 14 शहर कुल रजिस्ट्रेशन: लगभग 22.79 लाख छात्र उपस्थित उम्मीदवार: 22,05,035 छात्रों के लिए अहम संदेश री-एग्जाम की तारीख घोषित होने के बाद अब छात्रों पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय अंतिम चरण की तैयारी का है, जिसमें केवल रिवीजन और प्रैक्टिस पर फोकस करना चाहिए।  

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