शिक्षा

AICTE कैलेंडर जारी, 14 सितंबर तक एडमिशन का मौका

AICTE का नया एकेडमिक कैलेंडर जारी, 14 सितंबर तक एडमिशन का मौका; 17 अगस्त से शुरू हुईं प्रथम वर्ष की कक्षाएं

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
AICTE के संशोधित एकेडमिक कैलेंडर 2026-27 में प्रवेश की अंतिम तारीख
AICTE ने 2026-27 का संशोधित एकेडमिक कैलेंडर जारी किया

नई दिल्ली, एजेंसियां। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संशोधित एकेडमिक कैलेंडर जारी किया है। नए कार्यक्रम में तकनीकी और प्रबंधन संस्थानों में प्रवेश तथा कक्षाएं शुरू करने की समयसीमा में बदलाव किया गया है। संशोधित कैलेंडर के अनुसार, प्रथम वर्ष के तकनीकी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं 17 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी हैं, जबकि प्रवेश प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण अंतिम तिथि 14 सितंबर 2026 तय की गई है।

 

14 सितंबर तक प्रवेश का मौका

 

 

AICTE के संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक, AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थानों में खाली सीटों पर प्रवेश की अंतिम तिथि 14 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। यह समयसीमा नियमित प्रवेश के साथ-साथ पात्र मामलों में लेटरल एंट्री पर भी लागू होगी।

 

इस बदलाव से उन विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है जो विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं, काउंसलिंग या सीट आवंटन प्रक्रिया के कारण अभी तक प्रवेश नहीं ले पाए हैं।

 

17 अगस्त से प्रथम वर्ष की कक्षाएं

 

 

AICTE के नए कैलेंडर के अनुसार तकनीकी पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षाएं 17 अगस्त से शुरू हो गई हैं। संस्थानों को नए विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन और शैक्षणिक गतिविधियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

हालांकि, विद्यार्थियों को अपने संबंधित कॉलेज से कक्षा, इंडक्शन कार्यक्रम और विभागीय समय-सारिणी की जानकारी भी लेनी होगी।

 

PGDM और PGCM छात्रों के लिए भी संशोधित कार्यक्रम

 

 

संशोधित कैलेंडर में PGDM और PGCM जैसे प्रबंधन कार्यक्रमों को भी शामिल किया गया है। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश और शैक्षणिक सत्र से जुड़ी समयसीमा भी नए कार्यक्रम के अनुसार तय की गई है।

 

AICTE ने संस्थानों को निर्धारित समयसीमा का पालन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक सत्र में अनावश्यक देरी न हो।

 

विद्यार्थियों के लिए जरूरी सूचना

 

 

AICTE का संशोधित कैलेंडर जारी होने के बाद विद्यार्थियों को अब 14 सितंबर की प्रवेश अंतिम तिथि का विशेष ध्यान रखना होगा। जिन विद्यार्थियों ने अभी तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें संबंधित संस्थान और काउंसलिंग प्राधिकरण से सीटों की उपलब्धता तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी तुरंत लेनी चाहिए।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IIT कानपुर की बड़ी पहल, 3 लाख से ज्यादा छात्रों को हिंदी में पढ़ाया जाएगा साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम

कानपुर, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की आधुनिक शिक्षा देने के लिए IIT कानपुर के C3iHub, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा और विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इसके तहत विश्वविद्यालय से संबद्ध 570 से अधिक कॉलेजों के तीन लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के लिए हिंदी में ऑनलाइन व्यावसायिक साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।   हिंदी में मिलेगा साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण   इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी अपनी भाषा में साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी और व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना है। पाठ्यक्रम में साइबर अपराध, सोशल मीडिया सुरक्षा, पहचान की चोरी, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डार्क वेब, साइबर हमले और इंटरनेट से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियों जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। पाठ्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जाएगा। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय प्रश्नोत्तरी, कार्यशालाओं और वर्चुअल लैब के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।   विश्वविद्यालय में बनेगा साइबर सुरक्षा परामर्श केंद्र   समझौते के तहत विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा परामर्श केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर अपराध से बचाव, डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन खतरों के प्रति जागरूक करना होगा। IIT कानपुर का C3iHub अपने शोध और प्रशिक्षण अनुभव के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करेगा और इसके संचालन में सहयोग देगा, जबकि विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन प्रशासनिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।   तीन लाख से ज्यादा छात्रों को मिलेगा फायदा   इस साझेदारी का सबसे बड़ा लाभ इसका व्यापक दायरा है। आगरा विश्वविद्यालय से जुड़े 570 से अधिक कॉलेजों के तीन लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं इस पहल से लाभान्वित हो सकते हैं। खासतौर पर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए हिंदी में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण उपयोगी माना जा रहा है। IIT कानपुर पहले से ही साइबर सुरक्षा शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सक्रिय है। संस्थान ने 2026 में साइबर सुरक्षा से संबंधित नए शैक्षणिक कार्यक्रम भी शुरू किए हैं, जबकि C3iHub साइबर सुरक्षा अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार पर काम करता है।   बढ़ते साइबर खतरों के बीच अहम पहल   डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर साइबर सुरक्षा को व्यावहारिक पाठ्यक्रम के रूप में उपलब्ध कराने से विद्यार्थियों में डिजिटल सुरक्षा की समझ और रोजगार योग्य कौशल विकसित करने में मदद मिल सकती है।

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प्रयागराज में भारी बारिश का असर, कक्षा 1 से 12 तक के स्कूल आज बंद

प्रयागराज, एजेंसियां। लगातार हो रही भारी बारिश और कई इलाकों में जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने 18 अगस्त 2026 को कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में सड़कें, गलियां और अंडरपास पानी से भर गए हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है।   शहर के कई इलाकों में जलभराव     प्रयागराज में लगातार बारिश के चलते स्टेशन रोड, जॉर्ज टाउन, करेली की गड्ढा कॉलोनी और मुंडेरा समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कुछ निचले इलाकों में घरों और अन्य स्थानों तक पानी पहुंचने की खबर है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।     बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए फैसला     बारिश और जलभराव के कारण स्कूली बच्चों को आने-जाने में होने वाली परेशानी और सुरक्षा संबंधी जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने स्कूल बंद रखने का फैसला किया है। यह निर्णय छात्रों को खराब मौसम के बीच घर से स्कूल तक आने-जाने से होने वाली संभावित परेशानी से बचाने के लिए लिया गया है।     गंगा-यमुना के जलस्तर पर भी नजर     भारी बारिश के बीच प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दारागंज सहित निचले इलाकों में नदी का पानी पहुंचने की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।   मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर मौसम की स्थिति तथा नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है।

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने NEET-UG अभ्यर्थी के EWS सर्टिफिकेट आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया
NEET-UG अभ्यर्थी को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, EWS सर्टिफिकेट पर तुरंत फैसला लेने का निर्देश

कोलकाता, एजेंसियां। NEET-UG परीक्षा पास कर MBBS में दाखिले की तैयारी कर रहे एक अभ्यर्थी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाने के मामले में अदालत ने उत्तर 24 परगना के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) को अभ्यर्थी के आवेदन पर तुरंत विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थी EWS श्रेणी के लिए निर्धारित सभी पात्रता मानदंड पूरे करता है, तो उसका प्रमाण पत्र तत्काल जारी किया जाए, ताकि MBBS में दाखिले की प्रक्रिया प्रभावित न हो।   SIR के बाद EWS सर्टिफिकेट को लेकर विवाद   मामला NEET-UG सफल अभ्यर्थी प्रियांशु मुखर्जी से जुड़ा है। वह MBBS पाठ्यक्रम में दाखिला लेना चाहते हैं। याचिका के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची में उनकी मां का नाम नहीं होने का हवाला देकर स्थानीय प्रशासन ने उन्हें EWS प्रमाण पत्र जारी नहीं किया। अभ्यर्थी ने इसी फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।   हाईकोर्ट ने क्या कहा?   मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्ण राव के समक्ष हुई। अदालत के सामने यह भी जानकारी आई कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। इसके बाद अदालत ने उत्तर 24 परगना के ADM को निर्देश दिया कि वह अभ्यर्थी के EWS प्रमाण पत्र के आवेदन पर बिना देरी किए नियमानुसार फैसला लें। अदालत ने कहा कि यदि अभ्यर्थी EWS श्रेणी के लिए जरूरी सभी शर्तें पूरी करता है, तो उसे प्रमाण पत्र तत्काल उपलब्ध कराया जाए।   MBBS दाखिले में देरी न हो, इसलिए अदालत का हस्तक्षेप   हाईकोर्ट ने इस मामले में इसलिए भी तेजी दिखाई क्योंकि EWS प्रमाण पत्र की अनुपलब्धता से अभ्यर्थी के MBBS दाखिले की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। अदालत ने प्रशासन को नियमों के तहत आवेदन पर निर्णय लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।

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