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HTET 2026 रिजल्ट जारी

HTET 2026 का रिजल्ट जारी, PRT, TGT और PGT उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड उपलब्ध

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
HTET 2026 रिजल्ट और स्कोरकार्ड
HTET 2026 PRT TGT PGT रिजल्ट

HTET 2026 का रिजल्ट जारी, PRT, TGT और PGT उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड उपलब्ध

चंडीगढ़, एजेंसियां। हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा (BSEH) ने परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए परिणाम ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया है। अभ्यर्थी अब अपने PRT, TGT और PGT स्तर के स्कोरकार्ड ऑनलाइन चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।

 

तीनों स्तरों का परिणाम जारी

 

 

HTET 2026 का परिणाम लेवल-1 PRT, लेवल-2 TGT और लेवल-3 PGT के लिए जारी किया गया है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने संबंधित स्तर का परिणाम लॉगिन करके देख सकते हैं।

 

HTET हरियाणा में शिक्षक पदों के लिए पात्रता निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल है। इसलिए रिजल्ट जारी होने के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण अपडेट है।

 

स्कोरकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध

 

 

उम्मीदवार अपना HTET 2026 स्कोरकार्ड आधिकारिक परिणाम पोर्टल पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें लॉगिन से जुड़ी आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी। स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के बाद अभ्यर्थियों को अपना नाम, रोल नंबर, स्तर, विषय और प्राप्त अंकों समेत सभी विवरण ध्यान से जांच लेने चाहिए।

 

 

ऐसे चेक करें HTET 2026 रिजल्ट

 

 

HTET 2026 का रिजल्ट देखने के लिए उम्मीदवार परिणाम पोर्टल पर जाएं। इसके बाद HTET Result 2026 लिंक पर क्लिक करके मांगी गई लॉगिन जानकारी दर्ज करें। लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर स्कोरकार्ड दिखाई देगा। उम्मीदवार इसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।

 

 

2.33 लाख से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल

 

 

रिपोर्ट के अनुसार HTET 2026 में 2.33 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे। अब रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपनी योग्यता स्थिति और प्राप्त अंकों की जांच कर सकते हैं।

 

HTET रिजल्ट के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर पात्रता प्रमाणपत्र और आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी सूचनाओं पर रहेगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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HTET 2026 का रिजल्ट जारी, PRT, TGT और PGT उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड उपलब्ध

HTET 2026 का रिजल्ट जारी, PRT, TGT और PGT उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड उपलब्ध चंडीगढ़, एजेंसियां। हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा (BSEH) ने परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए परिणाम ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया है। अभ्यर्थी अब अपने PRT, TGT और PGT स्तर के स्कोरकार्ड ऑनलाइन चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।   तीनों स्तरों का परिणाम जारी     HTET 2026 का परिणाम लेवल-1 PRT, लेवल-2 TGT और लेवल-3 PGT के लिए जारी किया गया है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने संबंधित स्तर का परिणाम लॉगिन करके देख सकते हैं।   HTET हरियाणा में शिक्षक पदों के लिए पात्रता निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल है। इसलिए रिजल्ट जारी होने के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण अपडेट है।   स्कोरकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध     उम्मीदवार अपना HTET 2026 स्कोरकार्ड आधिकारिक परिणाम पोर्टल पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें लॉगिन से जुड़ी आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी। स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के बाद अभ्यर्थियों को अपना नाम, रोल नंबर, स्तर, विषय और प्राप्त अंकों समेत सभी विवरण ध्यान से जांच लेने चाहिए।     ऐसे चेक करें HTET 2026 रिजल्ट     HTET 2026 का रिजल्ट देखने के लिए उम्मीदवार परिणाम पोर्टल पर जाएं। इसके बाद HTET Result 2026 लिंक पर क्लिक करके मांगी गई लॉगिन जानकारी दर्ज करें। लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर स्कोरकार्ड दिखाई देगा। उम्मीदवार इसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।     2.33 लाख से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल     रिपोर्ट के अनुसार HTET 2026 में 2.33 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे। अब रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार अपनी योग्यता स्थिति और प्राप्त अंकों की जांच कर सकते हैं।   HTET रिजल्ट के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर पात्रता प्रमाणपत्र और आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी सूचनाओं पर रहेगी।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) में MBA और अन्य प्रबंधन पाठ्यक्रमों में दाखिले का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। Common Admission Test (CAT) 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। IIM इंदौर की ओर से आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिए उम्मीदवार 3 अगस्त 2026 से 15 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।   29 नवंबर को होगी CAT 2026 परीक्षा     CAT 2026 परीक्षा का आयोजन 29 नवंबर 2026 को किया जाएगा। परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और तीन सत्रों में आयोजित की जाएगी। CAT स्कोर के आधार पर उम्मीदवार देश के विभिन्न IIM के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख बिजनेस स्कूलों में मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।   परीक्षा में तीन प्रमुख सेक्शन होंगे—Verbal Ability and Reading Comprehension (VARC), Data Interpretation and Logical Reasoning (DILR) और Quantitative Ability (QA)। प्रत्येक सेक्शन के लिए निर्धारित समय में उम्मीदवारों को प्रश्न हल करने होंगे।   15 सितंबर तक भर सकेंगे आवेदन फॉर्म     CAT 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए आधिकारिक CAT पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। फॉर्म भरते समय व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी सावधानी से दर्ज करनी होगी।   आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आखिरी समय की तकनीकी परेशानी से बचने के लिए समय रहते फॉर्म जमा करने की सलाह दी गई है।   IIM में MBA दाखिले का प्रमुख रास्ता है CAT     CAT भारत की सबसे प्रमुख मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इसके स्कोर का इस्तेमाल IIM के विभिन्न MBA/PGP और अन्य प्रबंधन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है। इसके अलावा देश के कई अन्य प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल भी CAT स्कोर स्वीकार करते हैं।   उम्मीदवारों के लिए यह परीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि CAT में बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में दाखिले का अवसर मिल सकता है। ऐसे में परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अब आवेदन प्रक्रिया के साथ-साथ अपनी तैयारी को भी अंतिम चरण में पहुंचाने का समय है।

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