सिविल सेवा का सपना पूरा करने के लिए कई लोग अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो लाखों युवाओं को नई दिशा देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है Aparajita Singh की, जिन्होंने MBBS डॉक्टर होने के बावजूद डॉक्टरी छोड़कर IAS बनने का सपना पूरा किया।
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली अपराजिता सिंह का जन्म एक डॉक्टर परिवार में हुआ। उनके माता-पिता और भाई भी मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े हैं। ऐसे माहौल में उनका डॉक्टर बनना तय माना जा रहा था और उन्होंने MBBS की पढ़ाई भी पूरी की।
उन्होंने Post Graduate Institute of Medical Sciences Rohtak से MBBS की डिग्री हासिल की और डॉक्टर के रूप में काम करना शुरू कर दिया।
अपराजिता रोज़ाना 8 घंटे की ड्यूटी करती थीं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने Union Public Service Commission की तैयारी शुरू कर दी।
उनका लक्ष्य साफ था-समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करना। इसलिए उन्होंने डॉक्टरी छोड़कर पूरी तरह सिविल सेवा की तैयारी में खुद को झोंक दिया।
दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 82 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। यह उनकी मेहनत, अनुशासन और लगातार सुधार का परिणाम था।
अपराजिता सिंह की सफलता का एक अनोखा राज था-मिरर प्रैक्टिस (शीशे के सामने अभ्यास)
वह रोज़ शीशे के सामने बैठकर इंटरव्यू की तैयारी करती थीं, जिससे:
इसी तैयारी का नतीजा था कि उन्हें इंटरव्यू में 201 अंक मिले।
इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य तक पहुंचीं।
यह कहानी बताती है कि:
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Central Board of Secondary Education ने स्कूलों के लिए एक अहम सर्कुलर जारी करते हुए कक्षा 6 से “तीसरी भाषा (R3)” पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। यह नई व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी। यह फैसला National Education Policy 2020 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाना और उनकी संवाद क्षमता को बेहतर करना है। स्कूलों को 7 दिन में करना होगा लागू CBSE ने साफ निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में अभी तक तीसरी भाषा नहीं पढ़ाई जा रही है, वे इसे 7 दिनों के भीतर लागू करें। बोर्ड ने कहा है कि इस प्रक्रिया में देरी स्वीकार नहीं होगी और सभी स्कूलों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। भाषा चयन में स्कूलों को छूट बोर्ड ने स्कूलों को यह स्वतंत्रता दी है कि वे भारत की किसी भी मान्यता प्राप्त भाषा को तीसरी भाषा के रूप में चुन सकते हैं। स्कूलों को यह जानकारी अपने क्षेत्रीय कार्यालय और OASIS पोर्टल पर अपडेट करनी होगी, ताकि बोर्ड निगरानी कर सके। एक बार चुनी भाषा आगे तक रहेगी जारी सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 6 में चुनी गई तीसरी भाषा कक्षा 9 और 10 तक जारी रहेगी। ऐसे में स्कूलों को भाषा का चयन सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि इसका सीधा असर छात्रों की आगे की पढ़ाई पर पड़ेगा। बच्चों के समग्र विकास पर फोकस तीसरी भाषा का उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं, बल्कि बोलना, समझना और लिखना भी है। इसके तहत छात्रों को रोजमर्रा की बातचीत, कहानी और कविता समझने, सही उच्चारण के साथ पढ़ने और अपने विचार लिखने की ट्रेनिंग दी जाएगी। निगरानी भी करेगा बोर्ड CBSE ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय अधिकारी स्कूलों से जानकारी लेकर यह सुनिश्चित करेंगे कि नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि सही तरीके से लागू भी हों।
उच्च शिक्षा के लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में गिनी जाने वाली Jawaharlal Nehru University (JNU) में एडमिशन अब पूरी तरह एंट्रेंस एग्जाम आधारित और पारदर्शी हो गया है। सही परीक्षा का चयन और अच्छा स्कोर हासिल करके छात्र यहां आसानी से दाखिला पा सकते हैं। NIRF रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन JNU न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी अकादमिक गुणवत्ता और रिसर्च के लिए जानी जाती है। वर्ष 2025 की NIRF रैंकिंग में इसे देश की बेस्ट यूनिवर्सिटी की सूची में दूसरा स्थान मिला है, जो इसकी उत्कृष्टता को दर्शाता है। JNU में उपलब्ध प्रमुख कोर्स यहां कई लोकप्रिय अंडरग्रेजुएट और प्रोफेशनल कोर्स ऑफर किए जाते हैं: BA (Hons) इन फॉरेन लैंग्वेज BSc (आयुर्वेद बायोलॉजी) इंटरनेशनल रिलेशंस (IR) BTech (ड्यूल डिग्री प्रोग्राम) UG कोर्स में एडमिशन कैसे मिलता है? JNU के अधिकतर UG कोर्स में अब एडमिशन Common University Entrance Test (CUET UG) के जरिए होता है। फॉरेन लैंग्वेज और BSc जैसे कोर्स के लिए CUET स्कोर जरूरी कुछ सर्टिफिकेट कोर्स में भी CUET मान्य BTech के लिए Joint Entrance Examination Main (JEE Main) स्कोर जरूरी PG और अन्य कोर्स के लिए पोस्टग्रेजुएट और टेक्निकल कोर्स में एडमिशन के लिए अलग-अलग एग्जाम होते हैं: CUET PG GAT-B CCMT काउंसलिंग एडमिशन की पूरी प्रक्रिया अपने कोर्स के अनुसार सही एग्जाम (CUET/JEE Main) चुनें एग्जाम दें और रिजल्ट का इंतजार करें रिजल्ट के बाद JNU पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लें मेरिट लिस्ट जारी होगी सीट अलॉट होने पर डॉक्यूमेंट्स जमा कर एडमिशन कन्फर्म करें एक नहीं, कई मेरिट लिस्ट JNU एडमिशन प्रक्रिया में केवल एक मेरिट लिस्ट नहीं होती। अलग-अलग चरणों में कई मेरिट लिस्ट जारी की जाती हैं, जिससे छात्रों को एडमिशन पाने के कई मौके मिलते हैं। क्यों खास है JNU? उच्च गुणवत्ता की शिक्षा रिसर्च और इंटरनेशनल एक्सपोजर कम फीस में बेहतरीन सुविधाएं देश-विदेश में मजबूत पहचान
बिहार बोर्ड (BSEB) के तहत 11वीं (इंटर) में एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 10वीं पास छात्र अब Science, Commerce और Arts स्ट्रीम में दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। OFSS सिस्टम की खासियत एक ही फॉर्म से कई स्कूल/कॉलेज का चयन मेरिट के आधार पर सीट अलॉटमेंट पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन शुल्क ₹350 (लगभग) ऑनलाइन फीस पेमेंट ऑनलाइन माध्यम से करना होगा जरूरी डॉक्यूमेंट्स फॉर्म भरते समय आपको ये दस्तावेज अपलोड करने होंगे: 10वीं की मार्कशीट फोटो और सिग्नेचर पहचान पत्र (ID) अन्य जरूरी विवरण मेरिट लिस्ट से होगा एडमिशन 1st, 2nd और 3rd मेरिट लिस्ट जारी होगी जिनका नाम आएगा, उन्हें तय समय में एडमिशन लेना होगा नाम नहीं आने पर स्पॉट एडमिशन का मौका मिलेगा ऐसे करें अप्लाई (Step-by-Step) OFSS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं Common Application Form (CAF) भरें जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें फीस जमा करें पसंद के स्कूल/कॉलेज चुनें फॉर्म सबमिट करें ध्यान रखने वाली बातें सभी जानकारी सही और सावधानी से भरें मेरिट लिस्ट पूरी तरह आपके भरे गए डाटा पर आधारित होगी गलत जानकारी से एडमिशन रद्द हो सकता है