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Congress Moves to Curb Trump’s War Powers

अमेरिका में ट्रंप पर लगाम की तैयारी: ईरान पर हमले से पहले US कांग्रेस की मंजूरी जरूरी बनाने का प्रस्ताव

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
congressional proposal to limit presidential war powers against Iran.
US Congress Moves to Limit Trump War Powers

अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां Donald Trump के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने की तैयारी हो रही है। United States Congress में एक प्रस्ताव लाया जा रहा है, जिसके तहत ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति को संसद की मंजूरी लेनी होगी।

डेमोक्रेट्स का बड़ा कदम
डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता Chuck Schumer ने कहा कि मौजूदा हालात में कांग्रेस को अपने संवैधानिक अधिकारों को फिर से लागू करना चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रपति द्वारा बिना अनुमति के युद्ध जैसे फैसले लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

इसी कड़ी में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक नेता Hakeem Jeffries ने भी इस प्रस्ताव पर वोटिंग कराने की मांग की है।

ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता
हाल ही में Iran के साथ तनाव के बीच ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए धमकी दी थी कि अगर Strait of Hormuz नहीं खोला गया तो अमेरिका बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। उनके इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी।

हालांकि बाद में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ, लेकिन ट्रंप की आक्रामक भाषा और नीति को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ है।

संविधान क्या कहता है?
अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध की घोषणा करने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है, न कि राष्ट्रपति के पास। हालांकि, आपातकालीन स्थितियों में राष्ट्रपति सीमित समय के लिए सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।

आरोप है कि ट्रंप इसी प्रावधान का इस्तेमाल कर लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए हैं।

रिपब्लिकन बनाम डेमोक्रेट टकराव
कांग्रेस में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के पास मामूली बहुमत है, जिसके चलते इस तरह के प्रस्ताव पहले भी पारित नहीं हो पाए हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स लगातार इस मुद्दे को उठाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


यह प्रस्ताव सिर्फ ईरान नीति तक सीमित नहीं, बल्कि अमेरिका में राष्ट्रपति और संसद के बीच शक्तियों के संतुलन की बड़ी बहस का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि ट्रंप की सैन्य नीतियों पर लगाम लगती है या नहीं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Security personnel deployed in Janakpur after violence near the India-Nepal border
भारत-नेपाल सीमा पर भड़की हिंसा, एक की मौत के बाद जनकपुर में कर्फ्यू; वीरगंज में भी हाई अलर्ट

India-Nepal Border Violence: भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में हुई हिंसा के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए हैं। स्थिति को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने धनुषा जिले के जनकपुर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है, जबकि पर्सा जिले के वीरगंज में निषेधाज्ञा (प्रोहिबिटरी ऑर्डर) लागू कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सीमा से जुड़े इलाकों में भी हाई अलर्ट जारी कर निगरानी बढ़ा दी गई है। धार्मिक जुलूस के दौरान शुरू हुआ विवाद एएनआई के मुताबिक, सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में दो धार्मिक समुदायों के त्योहार के दौरान विवाद अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और इलाके में तनाव फैल गया। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस की कार्रवाई के दौरान गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। जनकपुर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू हिंसा के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धनुषा जिले के जनकपुर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। वहीं, पर्सा जिले के वीरगंज में भी निषेधाज्ञा लागू कर लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। जनकपुर के सहायक मुख्य जिला अधिकारी चेतराज बराल ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है और लोगों से घरों में रहने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई चौकसी सुनसरी में हिंसा के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या सीमा पार गतिविधि को रोका जा सके। भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है। पहले भी बढ़ चुका है सीमा पर तनाव यह पहली बार नहीं है जब भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में तनाव की स्थिति बनी हो। इससे पहले भी सीमा विवाद, स्थानीय झड़पों और राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई बार दोनों देशों की सीमा पर सुरक्षा बढ़ानी पड़ी थी। वर्ष 2020 में सीमा विवाद के दौरान भी कई संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव देखा गया था, हालांकि बाद में दोनों देशों ने बातचीत के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिश की थी। संसद से लेकर सुरक्षा परिषद तक हलचल हिंसा की घटना के बाद नेपाल की संसद में कई सांसदों ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाकर सुनसरी सहित सीमा से जुड़े जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। सुनसरी जिला भारत के बिहार से सटा हुआ है और व्यापार तथा आवागमन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर दोनों देशों की एजेंसियां लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। शांति बहाली के प्रयास जारी नेपाल प्रशासन ने कहा है कि हिंसा फैलाने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बल पूरी तरह तैनात हैं और शांति बहाल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अफवाहों से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
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Iran-US Conflict: ईरानी मीडिया के 3 दावों को अमेरिका ने बताया गलत, CENTCOM ने जारी किया फैक्ट चेक

Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सूचना युद्ध भी तेज हो गया है। ईरानी सरकारी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से हाल के सैन्य घटनाक्रम को लेकर कई बड़े दावे किए गए, जिन्हें अमेरिकी सेना ने खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीन प्रमुख दावों का फैक्ट चेक जारी करते हुए कहा कि ईरान की ओर से फैलाए जा रहे दावों में सच्चाई नहीं है। दावा 1: होर्मुज स्ट्रेट अब सुरक्षित नहीं ईरानी सरकारी मीडिया और IRGC ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों के लिए समुद्री मार्ग अब सुरक्षित नहीं रहा और वहां गंभीर खतरा बना हुआ है। अमेरिका का जवाब: CENTCOM ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि समुद्री मार्ग के लिए सबसे बड़ा खतरा खुद IRGC की गतिविधियां और उसकी धमकियां हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसकी सैन्य मौजूदगी जारी है और ईरान का दावा भ्रामक है। दावा 2: तीन F-35 लड़ाकू विमान मार गिराए IRGC ने दावा किया कि हालिया हमलों में उसने अमेरिका के तीन F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट और तीन अन्य सैन्य विमानों को नष्ट कर दिया। अमेरिका का जवाब: CENTCOM ने कहा कि किसी भी अमेरिकी लड़ाकू विमान को नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को या तो रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया या वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहे। इसलिए F-35 विमानों को मार गिराने का दावा पूरी तरह गलत है। दावा 3: अमेरिकी नाकेबंदी तोड़कर निकला तेल टैंकर ईरानी मीडिया ने दावा किया कि M/T Nora नाम का तेल टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ते हुए सुरक्षित निकल गया। अमेरिका का जवाब: अमेरिकी सेना ने इस दावे को भी गलत बताया। CENTCOM के अनुसार, संबंधित टैंकर नाकेबंदी पार नहीं कर सका। अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में उसके 20 से अधिक युद्धपोत, सैकड़ों सैन्य विमान और हजारों सैनिक तैनात हैं तथा समुद्री निगरानी और सुरक्षा अभियान पूरी तरह जारी है। लगातार बढ़ रहा है अमेरिका-ईरान तनाव गुरुवार (30 जुलाई) को अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर मिसाइल हमलों का दौर शुरू हो गया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव के क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने की आशंका भी बढ़ रही है। इसी बीच जॉर्डन ने दावा किया कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। वहीं कुवैत में एक हमले में एक व्यक्ति की मौत की भी खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
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New operation theatre at Rapti Eye Hospital in Nepal's Dang district built with Indian assistance
India-Nepal Relations: नेपाल के डांग में भारत की मदद से बना नया ऑपरेशन थिएटर शुरू, आंखों के इलाज की सुविधा होगी बेहतर

India Nepal Relations: भारत और नेपाल के बीच विकास सहयोग को एक और मजबूती मिली है। भारत सरकार की आर्थिक सहायता से नेपाल के लुंबिनी प्रांत के डांग जिले में स्थित राप्ती आई हॉस्पिटल के नए ऑपरेशन थिएटर भवन का उद्घाटन किया गया। इस दो मंजिला भवन का निर्माण हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (HICDP) के तहत किया गया है, जिससे क्षेत्र में नेत्र चिकित्सा सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना का उद्घाटन नेपाल में भारत के दूतावास की काउंसलर गीतांजलि ब्रैंडन और तुलसीपुर उप-महानगरपालिका के मेयर टीकाराम खड़का ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में अस्पताल प्रबंधन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। आंखों के इलाज की सुविधाओं में होगा विस्तार अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि नए ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से डांग जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के हजारों मरीजों को आधुनिक और बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे जटिल आंखों के ऑपरेशन स्थानीय स्तर पर ही किए जा सकेंगे और मरीजों को दूर-दराज के शहरों में जाने की जरूरत कम होगी। यह परियोजना डांग जिले में भारत की सहायता से पूरी हुई सातवीं HICDP परियोजना है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत विकास साझेदारी को दर्शाती है। नेपाल में भारत के लगभग 600 विकास प्रोजेक्ट नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, HICDP कार्यक्रम के तहत भारत सरकार अब तक नेपाल के सभी सात प्रांतों में करीब 600 विकास परियोजनाएं पूरी कर चुकी है। इनमें 66 परियोजनाएं लुंबिनी प्रांत में पूरी हुई हैं, जबकि अकेले डांग जिले में अब तक सात परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। भारत ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी नेपाल को लगातार सहयोग दिया है। लुंबिनी प्रांत को अब तक 169 एंबुलेंस और 59 स्कूल बसें प्रदान की जा चुकी हैं। वहीं, डांग जिले को 19 एंबुलेंस और 8 स्कूल बसें मिली हैं। इससे पहले जनवरी 2022 में राप्ती आई हॉस्पिटल को भी भारत की ओर से एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी। भारत-नेपाल विकास साझेदारी को मिला नया बल भारतीय दूतावास ने कहा कि भारत और नेपाल केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि विकास के भरोसेमंद साझेदार भी हैं। दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (HICDP) नेपाल के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने और स्थानीय विकास को गति देने की भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। नई परियोजना से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि भारत-नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों को भी नई मजबूती मिलेगी।  

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