Iran Tension

Israeli Air Force fighter jets F-35 and F-15 flying amid rising Middle East tensions
Israel US Fighter Jet Deal: ईरान तनाव के बीच इजराइल ने बढ़ाई ताकत, F-35 और F-15IA फाइटर जेट की बड़ी डील को मंजूरी

तेल अवीव/वॉशिंगटन, 4 मई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Israel ने अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। United States से अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी देते हुए इजराइल ने दो स्क्वाड्रन फाइटर जेट लेने का फैसला किया है, जिसमें F-35 Lightning II और F-15EX Eagle II शामिल हैं। अरबों डॉलर की डील, एयरफोर्स होगी और मजबूत इजराइल के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सौदे के तहत एक स्क्वाड्रन स्टील्थ मल्टी-रोल F-35 Lightning II और एक स्क्वाड्रन एडवांस्ड F-15EX Eagle II खरीदे जाएंगे। इस डील में विमानों के साथ-साथ उनका रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इन विमानों का निर्माण अमेरिकी रक्षा कंपनियां Lockheed Martin और Boeing करेंगी। नेतन्याहू का बड़ा बयान प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस फैसले को इजराइल की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि देश अपनी “हवाई श्रेष्ठता” को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहा है। नेतन्याहू ने जोर देते हुए कहा कि इजराइली वायुसेना पहले ही कई अभियानों में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है और नए विमान उसे किसी भी समय, किसी भी स्थान पर कार्रवाई करने में और सक्षम बनाएंगे। 350 अरब शेकेल का रक्षा निवेश सरकार ने आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में लगभग 350 अरब शेकेल (करीब 118 अरब डॉलर) निवेश करने की योजना भी बनाई है। इस निवेश का मकसद घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि भविष्य में इजराइल अपने स्वदेशी अत्याधुनिक फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में भी काम करेगा। ड्रोन खतरे से निपटने की तैयारी इजराइल ने बढ़ते ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए एक नई रक्षा परियोजना भी शुरू की है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए ड्रोन हमलों को रोकना और हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाना है। ईरान से तनाव बना बड़ी वजह हाल के महीनों में Iran के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और टकराव ने इजराइल को अपनी रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि हालिया घटनाओं से मिले अनुभवों ने यह साफ कर दिया है कि देश को अपनी सैन्य क्षमता और अधिक मजबूत करनी होगी। कितनी बढ़ेगी ताकत? इस डील के बाद इजराइल की वायुसेना में: F-35 Lightning II की संख्या करीब 100 तक पहुंच सकती है F-15EX Eagle II की संख्या लगभग 50 हो सकती है रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए F-35 विमानों की डिलीवरी 2028 तक और F-15IA की डिलीवरी 2031 से शुरू होने की संभावना है। दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा इजराइल का कहना है कि यह खरीद केवल मौजूदा हालात के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों तक क्षेत्रीय सैन्य बढ़त बनाए रखने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Oil tanker at sea representing global crude trade amid US decision to extend Russia oil purchase waiver
ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस से तेल पर छूट बढ़ाई, वैश्विक बाजार में राहत और विवाद दोनों

  अमेरिका ने फिर बढ़ाई रूस से तेल खरीद की अनुमति वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक अहम और चर्चित फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से प्रतिबंधित कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को एक बार फिर बढ़ा दिया है। इस निर्णय के तहत कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, सीमित समय के लिए रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद सकेंगे। यह छूट अब 16 मई तक प्रभावी रहेगी और इसे ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। किन शर्तों के साथ मिली छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह अनुमति केवल उन्हीं तेल शिपमेंट्स पर लागू होगी जो शुक्रवार तक जहाजों में लोड किए जा चुके हैं। इसके अलावा, इस छूट से ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी प्रकार के व्यापार को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका रूस से तेल व्यापार पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उसे सीमित और नियंत्रित तरीके से जारी रखना चाहता है। ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने की कोशिश यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस कदम के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति को अचानक झटके से बचाना चाहता है, ताकि कीमतें बहुत अधिक न बढ़ें। एशियाई देशों की मांग का असर रिपोर्ट्स के अनुसार, एशिया के कई देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाया था कि उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच दी जाए। भारत जैसे बड़े आयातक देशों ने रूस से सस्ती तेल आपूर्ति को जारी रखने की मांग की थी, ताकि घरेलू ऊर्जा कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। इसी दबाव और वैश्विक आपूर्ति संकट को देखते हुए अमेरिका ने यह अस्थायी राहत दी है। पहले के रुख से बदलाव दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ दो दिन पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने संकेत दिया था कि यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। लेकिन अचानक लिए गए इस फैसले ने अमेरिकी नीति में बदलाव को दर्शाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। तेल कीमतों में भारी गिरावट इसी बीच, ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से खोलने के बाद वैश्विक तेल बाजार में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। राजनीतिक विवाद भी तेज अमेरिकी संसद के कई सदस्यों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे रूस को आर्थिक रूप से फायदा मिलेगा, जबकि वह यूक्रेन युद्ध में शामिल है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने भी प्रतिबंधों में ढील देने का विरोध जताया है। ईरान युद्ध, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा नीति को नई दिशा दे सकता है। हालांकि यह फैसला अस्थायी राहत देता है, लेकिन इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव आने वाले समय में और अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
congressional proposal to limit presidential war powers against Iran.
अमेरिका में ट्रंप पर लगाम की तैयारी: ईरान पर हमले से पहले US कांग्रेस की मंजूरी जरूरी बनाने का प्रस्ताव

अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां Donald Trump के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने की तैयारी हो रही है। United States Congress में एक प्रस्ताव लाया जा रहा है, जिसके तहत ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति को संसद की मंजूरी लेनी होगी। डेमोक्रेट्स का बड़ा कदम डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता Chuck Schumer ने कहा कि मौजूदा हालात में कांग्रेस को अपने संवैधानिक अधिकारों को फिर से लागू करना चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रपति द्वारा बिना अनुमति के युद्ध जैसे फैसले लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। इसी कड़ी में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक नेता Hakeem Jeffries ने भी इस प्रस्ताव पर वोटिंग कराने की मांग की है। ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता हाल ही में Iran के साथ तनाव के बीच ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए धमकी दी थी कि अगर Strait of Hormuz नहीं खोला गया तो अमेरिका बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। उनके इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी। हालांकि बाद में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ, लेकिन ट्रंप की आक्रामक भाषा और नीति को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ है। संविधान क्या कहता है? अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध की घोषणा करने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है, न कि राष्ट्रपति के पास। हालांकि, आपातकालीन स्थितियों में राष्ट्रपति सीमित समय के लिए सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। आरोप है कि ट्रंप इसी प्रावधान का इस्तेमाल कर लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए हैं। रिपब्लिकन बनाम डेमोक्रेट टकराव कांग्रेस में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के पास मामूली बहुमत है, जिसके चलते इस तरह के प्रस्ताव पहले भी पारित नहीं हो पाए हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स लगातार इस मुद्दे को उठाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह प्रस्ताव सिर्फ ईरान नीति तक सीमित नहीं, बल्कि अमेरिका में राष्ट्रपति और संसद के बीच शक्तियों के संतुलन की बड़ी बहस का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि ट्रंप की सैन्य नीतियों पर लगाम लगती है या नहीं।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Strait of Hormuz oil tankers amid tension, UN Security Council debate on global crisis
होर्मुज संकट: UN में रूस-चीन का वीटो, फ्रांस ने भी रोका प्रस्ताव-क्या ट्रंप की रणनीति को झटका?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक राजनीति और कूटनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र में इस अहम समुद्री मार्ग को खोलने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया, जबकि हैरानी की बात यह रही कि नाटो सदस्य फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। क्या था UN में प्रस्ताव? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इस प्रस्ताव में जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने का भी प्रावधान शामिल था, ताकि तेल सप्लाई बहाल की जा सके। रूस-चीन ने क्यों लगाया वीटो? रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। चीन का कहना है कि सैन्य हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ सकते हैं रूस ने ईरान का समर्थन करते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया दोनों देशों का मानना है कि यह प्रस्ताव अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की सैन्य रणनीति को समर्थन देता है। फ्रांस का विरोध क्यों चौंकाने वाला? सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया। फ्रांस, नाटो का सदस्य होने के बावजूद अमेरिका के रुख से अलग नजर आया। इससे यह संकेत मिला कि पश्चिमी देशों के बीच भी इस मुद्दे पर एकजुटता नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं ट्रंप की रणनीति पर असर? डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित करना चाहता है। लेकिन UN में वीटो और सहयोगी देशों के मतभेद से: अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है वैश्विक समर्थन कमजोर होता दिख रहा है कूटनीतिक समाधान और मुश्किल हो सकता है आगे क्या? प्रस्ताव के पास होने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है तेल बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है बड़े देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Stock market screen showing sharp decline after Donald Trump statement on Iran tensions and rising oil prices.
ट्रम्प के बयान से बाजार में घबराहट, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद वैश्विक तनाव बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर “बेहद कड़ा हमला” कर सकता है, जिससे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है। सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2% की गिरावट कारोबार के दौरान: Nifty 50 1.95% गिरकर 22,236.80 पर पहुंच गया BSE Sensex 1.95% टूटकर 71,710.72 पर आ गया एशियाई बाजारों में भी लगभग 2% की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा। तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता ट्रम्प के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर Strait of Hormuz में संभावित बाधा को लेकर चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल आपूर्ति में बाधा आती है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रोकरेज ने घटाया भरोसा ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने भारतीय इक्विटी पर अपनी रेटिंग “ओवरवेट” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दी है। कारण: ऊंची क्रूड कीमतों से कमाई और वैल्यूएशन पर दबाव सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में बिकवाली का असर हर सेक्टर पर दिखा: बैंक और फाइनेंशियल शेयर करीब 2.5% गिरे PSU बैंक इंडेक्स 3.1% तक लुढ़का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करीब 3% की गिरावट RBI के नियमों का भी असर Reserve Bank of India (RBI) के नए फॉरेक्स डेरिवेटिव नियमों ने भी बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बैंकों को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है। फार्मा शेयरों पर भी दबाव फार्मा सेक्टर में करीब 3.75% की गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर असर पड़ सकता है।

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Stock market crash screen showing Sensex and Nifty falling sharply amid global tensions and oil surge
Stock Market Crash: ट्रंप की धमकी से मचा वैश्विक हड़कंप, सेंसेक्स 1400 अंक टूटा, निफ्टी भी धड़ाम

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के अरबों रुपये कुछ ही मिनटों में स्वाहा हो गए। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही BSE Sensex 1,474.56 अंक यानी करीब 2% की गिरावट के साथ 73,058.40 पर आ गया। वहीं Nifty 50 भी 433.70 अंक (1.88%) टूटकर 22,680.80 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पूरी तरह लाल निशान में डूबा नजर आया। क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट? इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनी मानी जा रही है। ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ खोलने को कहा है, अन्यथा ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी दी है। इस घटनाक्रम से वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है-WTI Crude Oil $100 के करीब पहुंच गया, जबकि Brent Crude Oil $112.17 के पार चला गया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने बाजार की घबराहट और बढ़ा दी। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? बाजार में आई इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर बड़े और दिग्गज शेयरों पर पड़ा। Hindalco Industries, Tata Steel, State Bank of India, Mahindra & Mahindra और HDFC Bank जैसे प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि गिरावट के इस माहौल में Max Healthcare और ONGC जैसे कुछ शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली। हर सेक्टर पर पड़ा असर इस गिरावट से कोई भी सेक्टर अछूता नहीं रहा। ऑटो, बैंकिंग, मेटल, मीडिया और PSU बैंक समेत सभी सेक्टोरल इंडेक्स 2% तक टूट गए। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में व्यापक कमजोरी का संकेत मिला। एशियाई बाजारों में भी ‘ब्लैक मंडे’ जैसा माहौल भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI 4.57% और जापान का Nikkei 4% से ज्यादा टूट गया। International Energy Agency के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि दुनिया कई दशकों के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर हो सकता है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Nifty index chart showing sharp decline amid Iran conflict and market volatility.
ईरान तनाव से बाजार पर दबाव: क्या 21,000 तक फिसल सकता है निफ्टी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

पश्चिम एशिया में जारी ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखने लगा है। Nifty 50 अपने हालिया उच्च स्तर से तेजी से फिसल चुका है, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है कि गिरावट आखिर कहां जाकर थमेगी।   26,350 से गिरकर 23,000 के करीब पहुंचा निफ्टी निफ्टी हाल ही में 26,350 के उच्च स्तर से गिरकर करीब 23,200 तक आ चुका है। यह गिरावट बाजार की मौजूदा कमजोरी और बदलते ट्रेंड का संकेत दे रही है। विशेषज्ञ इसे एक “मीनिंगफुल करेक्शन” यानी गंभीर गिरावट का दौर मान रहे हैं।   21,000–22,000 बन सकता है निचला स्तर मार्केट एक्सपर्ट अभिषेक पारख के मुताबिक, बाजार में गिरावट अक्सर उम्मीद से ज्यादा लंबी चलती है। टेक्निकल चार्ट के आधार पर निफ्टी फिलहाल एक पैरेलल चैनल में ट्रेड कर रहा है, जहां निचला स्तर 21,700–22,000 के आसपास बनता दिख रहा है। अगर यह पैटर्न जारी रहता है, तो इंडेक्स धीरे-धीरे इसी स्तर तक फिसल सकता है और वहीं स्थिर होने की कोशिश करेगा।   डबल टॉप पैटर्न से बढ़ी कमजोरी चार्ट पर 26,350 के आसपास “डबल टॉप” बनने के बाद आई तेज गिरावट ने बाजार के शॉर्ट टर्म ट्रेंड को कमजोर कर दिया है। इसका मतलब है कि किसी भी तेजी में फिलहाल रुकावट आ सकती है।   वैल्यूएशन अभी सस्ते नहीं निफ्टी का P/E रेशियो फिलहाल करीब 20.2 है, जो न तो बहुत महंगा है और न ही पूरी तरह आकर्षक। इतिहास के अनुसार, बाजार का मजबूत बॉटम आमतौर पर 15–19 P/E के बीच बनता है। ऐसे में 21,000–22,000 का स्तर वैल्यूएशन के लिहाज से ज्यादा बेहतर एंट्री जोन बन सकता है।   Fibonacci संकेत भी इसी स्तर की ओर टेक्निकल एनालिसिस में इस्तेमाल होने वाला Fibonacci रिट्रेसमेंट भी इसी दायरे की ओर इशारा कर रहा है: 22,100 (38.2% रिट्रेसमेंट) 20,800 (50% रिट्रेसमेंट) जब अलग-अलग संकेत एक ही स्तर की ओर इशारा करते हैं, तो वहां मजबूत सपोर्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है।   FII बिकवाली और महंगा क्रूड बना दबाव बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारण: विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली कच्चे तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता भारत में ऊंची वैल्यूएशन और मजबूत ग्लोबल थीम की कमी (जैसे US में AI रैली) भी बाजार को कमजोर कर रही है।   शॉर्ट टर्म में उछाल, लेकिन जोखिम बरकरार ब्रोकरेज हाउस Centrum Broking के अनुसार, बाजार ओवरसोल्ड जोन में पहुंच रहा है, जिससे बीच-बीच में उछाल (bounce) आ सकता है। हालांकि, इंडिया VIX 20 से ऊपर रहने के कारण वोलैटिलिटी ज्यादा बनी रह सकती है।   निवेशकों के लिए क्या रणनीति? विशेषज्ञों की सलाह है कि: बाजार के बिल्कुल बॉटम को पकड़ने की कोशिश न करें धीरे-धीरे (phased manner) निवेश करें अच्छे फंडामेंटल वाले स्टॉक्स पर फोकस रखें

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0