शिक्षा

Top BTech Colleges in Greater Noida

ग्रेटर नोएडा के इन इंजीनियरिंग कॉलेजों में लें दाखिला, लाखों के पैकेज के साथ मिल सकती है शानदार नौकरी

surbhi जून 11, 2026 0
Students at an engineering campus in Greater Noida with placement highlights and career opportunities.
Top Engineering Colleges in Greater Noida

नई दिल्ली: 12वीं के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए सही कॉलेज चुनना हर छात्र और अभिभावक के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होता है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में बेहतरीन बीटेक कॉलेज की तलाश कर रहे हैं, तो ग्रेटर नोएडा आज देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल हो चुका है। यहां के कई संस्थान आधुनिक सुविधाओं, उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्था और शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं।

ग्रेटर नोएडा के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज और प्लेसमेंट रिकॉर्ड

कॉलेज का नाम

औसत पैकेज

उच्चतम पैकेज

प्रमुख भर्ती करने वाली कंपनियां

जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट

6.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष

40 से 57 लाख रुपये

अमेजन, पालो ऑल्टो, सिस्को, टीसीएस, कैपजेमिनी

गलगोटियास कॉलेज एवं विश्वविद्यालय

5.4 लाख रुपये प्रतिवर्ष

60 लाख रुपये

इंफोसिस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एक्सेंचर

शिव नादर विश्वविद्यालय

9.88 लाख रुपये प्रतिवर्ष

54.82 लाख रुपये

गोल्डमैन सैक्स, एडोबी, आईबीएम, ओरेकल, मैकिन्से

नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एनआईईटी)

6 लाख रुपये प्रतिवर्ष

44 लाख रुपये

माइक्रोसॉफ्ट, जेपी मॉर्गन, एचसीएल, विप्रो, टीसीएस

जीएनआईओटी समूह संस्थान

5.5 से 7.25 लाख रुपये प्रतिवर्ष

70 लाख रुपये

अमेजन, डेलॉइट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इन्फोगेन

कॉलेज चुनते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

फीस और प्लेसमेंट का संतुलन

कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले यह जरूर देखें कि चार वर्षों की पढ़ाई पर होने वाले खर्च के मुकाबले वहां का औसत प्लेसमेंट पैकेज कितना है। जीएल बजाज और एनआईईटी जैसे संस्थान बेहतर निवेश प्रतिफल (आरओआई) के लिए जाने जाते हैं, जबकि शिव नादर विश्वविद्यालय अपेक्षाकृत अधिक फीस के साथ उच्च औसत पैकेज प्रदान करता है।

आधुनिक और उद्योग आधारित पाठ्यक्रम

आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि कॉलेज में इन विषयों से जुड़े पाठ्यक्रम और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध हों।

स्थान का लाभ

ग्रेटर नोएडा का नॉलेज पार्क क्षेत्र नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम के सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों के नजदीक स्थित है। इसका फायदा छात्रों को इंटर्नशिप, व्यावहारिक परियोजनाओं और कैंपस प्लेसमेंट के रूप में मिलता है।

बेहतर करियर और आकर्षक वेतन पैकेज की तलाश कर रहे छात्रों के लिए ग्रेटर नोएडा के ये संस्थान बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में सब-इंस्पेक्टर बनने का शानदार मौका, 150 पदों पर भर्ती; ₹35,400 से ₹1.12 लाख तक सैलरी, 9 अगस्त तक करें आवेदन

BPSSC SI Vacancy 2026: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने गृह विभाग की विशेष शाखा में पुलिस सब-इंस्पेक्टर (Special Branch SI) के 150 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 9 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और अभ्यर्थी 9 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को Pay Level-6 के तहत ₹35,400 से ₹1,12,400 प्रति माह तक वेतन के साथ अन्य सरकारी भत्तों का लाभ मिलेगा। कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 1 अगस्त 2025 तक स्नातक (Graduation) या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य है। आयु सीमा सामान्य वर्ग (पुरुष): 20 से 37 वर्ष सामान्य वर्ग (महिला): 20 से 40 वर्ष BC/EBC (पुरुष एवं महिला): 20 से 40 वर्ष SC/ST (पुरुष एवं महिला): 20 से 42 वर्ष चयन प्रक्रिया भर्ती तीन चरणों में होगी— प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) मुख्य परीक्षा (Mains Exam) शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) एवं शारीरिक मापदंड परीक्षण PET केवल क्वालिफाइंग होगा। शारीरिक मापदंड पुरुष (General/OBC): न्यूनतम लंबाई 165 सेमी पुरुष (EBC/SC/ST): न्यूनतम लंबाई 160 सेमी महिला: न्यूनतम लंबाई 155 सेमी महिला का न्यूनतम वजन: 48 किलोग्राम यदि आप बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनने का सपना देख रहे हैं, तो अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द आवेदन करें। विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन अवश्य देखें।  

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Pralhad Joshi
प्रह्लाद जोशी बने देश के नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को सौंप दी है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दी।   प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का कामकाज   प्रह्लाद जोशी पहले से ही केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।   शिक्षा मंत्रालय ऐसे समय में प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया है, जब परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, छात्रों की मांगों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा में हैं। नए शिक्षा मंत्री के सामने छात्रों का भरोसा बहाल करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार बड़ी चुनौती होगी।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ बदलाव   धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद सरकार ने तेजी से मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपने का फैसला किया।   कौन हैं प्रह्लाद जोशी?   प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से लोकसभा सांसद हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह इससे पहले संसदीय कार्य, कोयला और खनन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें केंद्र सरकार में एक अनुभवी नेता माना जाता है।   शिक्षा क्षेत्र में होंगी बड़ी चुनौतियां   प्रह्लाद जोशी के सामने नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नए शिक्षा मंत्री किन प्राथमिकताओं के साथ मंत्रालय का संचालन करते हैं।

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PMRC Scheme 2026: भारतीय वैज्ञानिकों के लिए सुनहरा मौका, 5 करोड़ रुपये तक का रिसर्च ग्रांट; आवेदन की अंतिम तिथि 15 अगस्त तक बढ़ी

PMRC Scheme 2026: भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर (PMRC) स्कीम 2026 के तहत देश और विदेश में कार्यरत योग्य भारतीय शोधकर्ताओं को भारत के शीर्ष शिक्षण संस्थानों और राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं में शोध करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही चयनित उम्मीदवारों को 5 करोड़ रुपये तक का रिसर्च ग्रांट, आकर्षक फेलोशिप और अन्य वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का अवसर देने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 अगस्त 2026 कर दी है। क्या है PMRC Scheme 2026? प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर (PMRC) स्कीम का उद्देश्य दुनिया भर में कार्यरत भारतीय मूल के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भारत में उच्च स्तरीय अनुसंधान के लिए आकर्षित करना है। इस योजना के माध्यम से सरकार देश के अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति देना चाहती है। चयनित उम्मीदवारों को IIT, IISc, NIT, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और विभिन्न राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध करने का अवसर मिलेगा। आवेदन की अंतिम तिथि आवेदन शुरू: 1 जून 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अगस्त 2026 आयु सीमा (Age Limit) PMRC Scheme 2026 के लिए कोई निर्धारित अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है। उम्मीदवारों का चयन मुख्य रूप से उनकी पीएचडी के बाद का शोध अनुभव, वैज्ञानिक उपलब्धियां, शोध प्रकाशन, पेटेंट, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और रिसर्च योगदान के आधार पर किया जाएगा। कौन कर सकता है आवेदन? यह योजना भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए है, जो देश या विदेश में रिसर्च से जुड़े हैं। अनुभव के आधार पर तीन श्रेणियां बनाई गई हैं— 1. यंग रिसर्च फेलो (YRF) पीएचडी के बाद 5 वर्ष तक का अनुभव 2. सीनियर फेलो (SF) पीएचडी के बाद 5 से 10 वर्ष का अनुभव 3. रिसर्च चेयर (RC) पीएचडी के बाद 10 वर्ष या उससे अधिक का अनुभव उम्मीदवारों के पास उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशन, पेटेंट, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, सिटेशन और उत्कृष्ट रिसर्च उपलब्धियों का रिकॉर्ड होना चाहिए। कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता? यंग रिसर्च फेलो (YRF) वार्षिक फेलोशिप: 15–20 लाख रुपये रिसर्च ग्रांट: 1–1.5 करोड़ रुपये आवास एवं चिकित्सा सहायता: 5 लाख रुपये प्रति वर्ष सीनियर फेलो (SF) वार्षिक फेलोशिप: 20–40 लाख रुपये रिसर्च ग्रांट: 1.5–2.5 करोड़ रुपये आवास एवं चिकित्सा सहायता: 9 लाख रुपये प्रति वर्ष स्थानांतरण सहायता: 40 लाख रुपये संस्थागत ओवरहेड: 30 लाख रुपये प्रति वर्ष रिसर्च चेयर (RC) वार्षिक फेलोशिप: 40–60 लाख रुपये रिसर्च ग्रांट: 3–5 करोड़ रुपये आवास एवं चिकित्सा सहायता: 15 लाख रुपये प्रति वर्ष स्थानांतरण सहायता: 50 लाख रुपये संस्थागत ओवरहेड: 1 करोड़ रुपये प्रति वर्ष किन संस्थानों में मिलेगा अवसर? चयनित उम्मीदवारों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध करने का अवसर मिलेगा, जिनमें शामिल हैं— NIRF ओवरऑल या इंजीनियरिंग रैंकिंग के टॉप 100 संस्थान NIRF रिसर्च कैटेगरी के टॉप 50 संस्थान CSIR की राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं DBT, DST और ICMR के अंतर्गत आने वाले अनुसंधान संस्थान चयनित उम्मीदवारों की जिम्मेदारियां PMRC Scheme के तहत चयनित वैज्ञानिकों को— उच्च स्तरीय और मौलिक शोध करना शिक्षण कार्य में सहयोग देना नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम विकसित करना पीएचडी एवं पोस्टग्रेजुएट छात्रों का मार्गदर्शन करना अंतरराष्ट्रीय रिसर्च सहयोग बढ़ाना उद्योगों के साथ साझेदारी विकसित करना शोध को पेटेंट और तकनीकी नवाचार में बदलने की दिशा में कार्य करना समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज अपडेटेड CV शोध प्रकाशनों की सूची पेटेंट और पुरस्कारों का विवरण नागरिकता/वीजा/निवास संबंधी दस्तावेज शोध उपलब्धियों के प्रमाण पसंदीदा होस्ट संस्थान का नाम और चयन का कारण PMRC Scheme 2026 के प्रमुख फायदे 5 करोड़ रुपये तक का रिसर्च ग्रांट आकर्षक वार्षिक फेलोशिप भारत के शीर्ष संस्थानों में रिसर्च का अवसर अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च सुविधाएं उद्योग और अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोग युवा शोधकर्ताओं को करियर में नई दिशा भारत के रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने में योगदान ध्यान रखें: आवेदन करने से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देश, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी अवश्य जांच लें। यह योजना भारतीय मूल के प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं को भारत में विश्वस्तरीय अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

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