मुंबई, एजेंसियां। इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘आवारापन 2’ को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। साल 2007 की चर्चित फिल्म ‘आवारापन’ के सीक्वल में इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
रिलीज से पहले निर्माताओं ने इमरान हाशमी के किरदार शिवम पंडित का नया मोशन पोस्टर जारी किया है। इसमें फिल्म के चर्चित गीत ‘तेरा मेरा रिश्ता पुराना’ की वापसी की झलक भी दिखाई गई है। नए पोस्टर और पुराने संगीत की वापसी ने पहली फिल्म के प्रशंसकों में पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।
‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी के साथ दिशा पाटनी और शबाना आजमी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है, जबकि कहानी और पटकथा से जुड़े काम में बिलाल सिद्दीकी का योगदान है। शबाना आजमी फिल्म में नफीसा नाम का किरदार निभा रही हैं और वह पहली बार नकारात्मक भूमिका में नजर आने वाली हैं।
‘आवारापन 2’ 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म 2007 में आई ‘आवारापन’ की कहानी की दुनिया को आगे बढ़ाएगी और शिवम के किरदार की भावनात्मक यात्रा को नए रूप में पेश करेगी।
फिल्म की रिलीज से पहले नए गाने और पोस्टर सामने आने के साथ दर्शकों के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें 14 अगस्त को फिल्म की बॉक्स ऑफिस शुरुआत पर रहेंगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
न्यूयॉर्क, एजेंसियां। हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विंसेंट पास्टर का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान HBO की चर्चित क्राइम ड्रामा सीरीज ‘द सोप्रानोज’ में साल्वातोरे “बिग पसी” बोनपेंसिएरो के किरदार से मिली थी। अभिनेता के निधन की खबर के बाद मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। ‘द सोप्रानोज’ के किरदार ने दिलाई पहचान विंसेंट पास्टर ने ‘द सोप्रानोज’ में टोनी सोप्रानो के करीबी दोस्त और माफिया सहयोगी बिग पसी की भूमिका निभाई थी। बाद में उनका किरदार एफबीआई के लिए मुखबिर बन जाता है। पास्टर ने इस जटिल भूमिका को प्रभावशाली तरीके से निभाया, जिससे उन्हें दुनियाभर में पहचान मिली। फिल्मों और टीवी में भी किया काम पास्टर ने अपने लंबे करियर में कई फिल्मों और टेलीविजन परियोजनाओं में काम किया। वह अक्सर माफिया और सख्त मिजाज किरदारों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने Goodfellas और Awakenings जैसी चर्चित फिल्मों में भी अभिनय किया था। घर में मिला शव रिपोर्टों के अनुसार, न्यूयॉर्क के सिटी आइलैंड स्थित उनके घर में पास्टर को मृत पाया गया। कुछ दिनों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाने के बाद उनके बारे में चिंता जताई गई थी। उनके निधन की खबर की पुष्टि उनके प्रतिनिधियों और संबंधित सूत्रों से हुई। सहकर्मियों ने जताया दुख पास्टर के निधन के बाद उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और सहयोगियों ने उन्हें याद किया। अभिनेता माइकल इम्पेरियोली, जो ‘द सोप्रानोज’ में उनके सह-कलाकार थे, ने भी पास्टर को श्रद्धांजलि दी और उन्हें करीबी मित्र के रूप में याद किया। पास्टर अपने पीछे बेटी रेनी को छोड़ गए हैं।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान और अभिनेता संजय दत्त की सालों पुरानी दोस्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। सलमान खान ने संजय दत्त के लिए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने अपने खास दोस्त को ‘बाबा’ कहकर संबोधित किया। सलमान की इस पोस्ट ने दोनों की पुरानी और मजबूत दोस्ती की यादें ताजा कर दी हैं। सलमान ने संजय दत्त के लिए लिखी खास बात सलमान खान ने संजय दत्त के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए उनके प्रति प्यार और सम्मान जाहिर किया। पोस्ट में उन्होंने संजय को हमेशा खुश रहने की दुआ दी। सलमान की इस भावुक पोस्ट के बाद प्रशंसकों के बीच दोनों अभिनेताओं की दोस्ती एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई। दशकों पुरानी है दोनों अभिनेताओं की दोस्ती सलमान खान और संजय दत्त की दोस्ती बॉलीवुड में लंबे समय से चर्चित रही है। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया है और पर्दे के बाहर भी एक-दूसरे के करीब रहे हैं। संजय दत्त पहले भी सलमान को अपना छोटा भाई बता चुके हैं और दोनों के रिश्ते को लेकर सामने आई विवादों की खबरों को खारिज कर चुके हैं। ‘7 डॉग्स’ में फिर साथ नजर आएंगे दोनों सितारे सलमान खान और संजय दत्त की दोस्ती के साथ उनकी पेशेवर जोड़ी भी प्रशंसकों का ध्यान खींचती रही है। दोनों अभिनेता अंतरराष्ट्रीय एक्शन फिल्म ‘7 डॉग्स’ में विशेष भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म के ट्रेलर में दोनों की मौजूदगी ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी थी। फैंस को पसंद है सलमान-संजय की ‘भाई-बाबा’ वाली बॉन्डिंग सलमान खान और संजय दत्त की दोस्ती को बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में गिना जाता है। दोनों की मुलाकातों और साथ नजर आने की तस्वीरें अक्सर प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित करती हैं। सलमान की हालिया पोस्ट ने एक बार फिर दिखाया कि फिल्मों से परे दोनों के बीच लंबे समय से मजबूत व्यक्तिगत रिश्ता बना हुआ है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत अपने हालिया विवादित बयान को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। युवा महिलाओं को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद कंगना ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी फिल्मों में निभाए गए किरदारों को उनके निजी विचारों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आलोचकों पर पलटवार करते हुए अपने अभिनय और निजी विचारों के बीच अंतर स्पष्ट किया। युवा महिलाओं पर टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद कंगना ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कुछ युवा महिलाओं और उनकी स्वतंत्रता को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने ऐसी महिलाओं को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। उनके बयान को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए और इसे महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी बताया। फिल्मी किरदारों को लेकर कंगना ने दी सफाई आलोचना के बीच कंगना ने अपनी फिल्मों के कुछ दृश्यों और किरदारों को लेकर हो रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्मों में कलाकार अलग-अलग काल्पनिक किरदार निभाते हैं और उन किरदारों के व्यवहार या संवादों को अभिनेता की व्यक्तिगत सोच नहीं माना जाना चाहिए। कंगना ने कहा कि वह फिल्मों में किरदार निभाने के लिए भुगतान लेती हैं और पर्दे पर दिखाई देने वाली भूमिका उनकी निजी विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करती। सोशल मीडिया पर लगातार हो रही प्रतिक्रिया कंगना के बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके बयान को लेकर आलोचना की, जबकि कंगना ने अपने जवाब में आलोचकों को ही निशाने पर लिया। इस पूरे विवाद के बीच उनका सोशल मीडिया पोस्ट एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। कंगना के बयानों पर पहले भी हो चुके हैं विवाद कंगना रनौत अपने बेबाक बयानों और राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर खुलकर राय रखने के लिए जानी जाती हैं। इससे पहले भी उनके कई सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक टिप्पणियां विवादों में रही हैं। इस बार युवा महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी और उसके बाद दी गई सफाई ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।