मुंबई, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज हुई इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने अपने ओपनिंग वीकेंड में ही 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं, सनी देओल स्टारर ‘बटवारा 1947’ की कमाई इसके मुकाबले काफी कम रही। दोनों फिल्में 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थीं।
नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी ‘आवारापन 2’ ने पहले दिन घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 22 करोड़ रुपये के साथ शानदार शुरुआत की। दूसरे दिन 15 अगस्त की छुट्टी का फायदा फिल्म को मिला और इसकी कमाई बढ़कर 33.75 करोड़ रुपये हो गई।
रविवार को फिल्म ने 26 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इस तरह तीन दिनों में भारत में फिल्म का नेट कलेक्शन 81.75 करोड़ रुपये हो गया है। ओवरसीज मार्केट में भी फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया है और तीन दिनों में करीब 12 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया।
वर्ल्डवाइड कमाई की बात करें तो ‘आवारापन 2’ ने ओपनिंग वीकेंड में 110.10 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी ‘बटवारा 1947’ को दर्शकों से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म ने रिलीज के पहले दिन 5.75 करोड़ रुपये कमाए थे। दूसरे दिन स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी पर इसकी कमाई बढ़कर 13.50 करोड़ रुपये पहुंची।
तीसरे दिन फिल्म ने 7.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। तीन दिनों में भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 26.50 करोड़ रुपये हो गई है। ओवरसीज कलेक्शन करीब 2 करोड़ रुपये रहा। फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन तीन दिनों में 37.11 करोड़ रुपये बताया गया है।
‘आवारापन 2’ और ‘बटवारा 1947’ के क्लैश ने बॉक्स ऑफिस मुकाबले को खास बना दिया है। इमरान हाशमी और सनी देओल इससे पहले 2007 में भी बॉक्स ऑफिस पर आमने-सामने आए थे। उस समय सनी देओल की ‘अपने’ और इमरान हाशमी की ‘आवारापन’ एक ही दौर में रिलीज हुई थीं।
इस बार शुरुआती वीकेंड में इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ ने बढ़त काफी मजबूत कर ली है। ‘आवारापन 2’ जहां 100 करोड़ के क्लब में पहुंच चुकी है, वहीं ‘बटवारा 1947’ अभी 40 करोड़ के आंकड़े के आसपास है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हैदराबाद, एजेंसियां। बॉलीवुड फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस अनन्या राज का 35 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके परिवार ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए उनके निधन की पुष्टि की। परिवार के मुताबिक, अनन्या का निधन 15 जुलाई की सुबह नींद में शांति से हुआ था। एक्ट्रेस पिछले एक साल से अधिक समय से शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रही थीं। परिवार ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी अनन्या राज के परिवार ने 16 अगस्त को उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक नोट साझा कर निधन की जानकारी दी। परिवार ने बताया कि अनन्या ने लंबे समय तक अपनी परेशानियों से उबरने के लिए संघर्ष किया। परिवार के बयान में कहा गया कि अनन्या ने मुश्किल दौर का मजबूती से सामना किया और वह मजबूत इरादों वाली महिला थीं। परिवार ने प्रशंसकों से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की और इस कठिन समय में निजता बनाए रखने का अनुरोध किया। अनन्या के निधन से फैंस सदमे में एक्ट्रेस के अचानक निधन की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने दुख जताया। कई लोगों ने कमेंट कर अनन्या को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। अनन्या के निधन की खबर से उनके चाहने वाले हैरान हैं। सोशल मीडिया पर फैंस उनकी तस्वीरें और फिल्मों से जुड़े पोस्ट साझा कर उन्हें याद कर रहे हैं। इन फिल्मों और म्यूजिक वीडियो में आई थीं नजर अनन्या राज को ‘7 आवर्स टू गो’ (2016), ‘द फाइनल एग्जिट’ (2017) और ‘घोस्ट’ (2019) जैसी फिल्मों में काम करने के लिए जाना जाता था। इसके अलावा वह कई म्यूजिक वीडियो में भी नजर आई थीं। उन्होंने टी-सीरीज, जी म्यूजिक और टाइम्स म्यूजिक जैसे प्रमुख म्यूजिक लेबल के प्रोजेक्ट्स में काम किया था। अनन्या ने तेलुगु फिल्म ‘ठगड़े ले’ में भी अभिनय किया था, जिसे श्रीनिवास राजू ने लिखा और निर्देशित किया था। अनन्या राज के निधन से उनके प्रशंसकों और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।
मुंबई, एजेंसियां। इमरान हाशमी और दिशा पाटनी की फिल्म ‘आवारापन 2’ ने 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने पहले दिन भारत में करीब ₹21.50-23.40 करोड़ नेट की कमाई की। अलग-अलग ट्रेड रिपोर्टों में शुरुआती आंकड़ों में थोड़ा अंतर है, लेकिन इस बात पर सहमति है कि फिल्म ने इमरान हाशमी के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की है। दो दिनों में 50 करोड़ के पार स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी का फिल्म को बड़ा फायदा मिला। दूसरे दिन इसकी कमाई में करीब 50 फीसदी का उछाल देखने को मिला और भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹50 करोड़ के पार पहुंच गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, दो दिनों में फिल्म ने भारत में करीब ₹55 करोड़ नेट और दुनिया भर में ₹72 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया। ‘बंटवारा 1947’ से मुकाबले में काफी आगे 14 अगस्त को ही रिलीज हुई सनी देओल और प्रीति जिंटा की ‘बंटवारा 1947’ के साथ ‘आवारापन 2’ का सीधा बॉक्स ऑफिस मुकाबला है। शुरुआती दो दिनों के आंकड़ों में इमरान हाशमी की फिल्म काफी आगे निकल गई है। ‘आवारापन 2’ को 2007 की मूल फिल्म की लोकप्रियता और उसके संगीत से जुड़ी पुरानी यादों का भी फायदा मिल रहा है। इमरान हाशमी के लिए बड़ी बॉक्स ऑफिस वापसी ‘आवारापन 2’ की सफलता इमरान हाशमी के लिए खास मानी जा रही है। फिल्म ने रिलीज के सिर्फ दो दिनों में उनके अब तक के सबसे बड़े ओपनिंग प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया है। 2007 की फिल्म में निभाए गए शिवम पंडित के किरदार की वापसी ने पुराने प्रशंसकों के बीच भी खास उत्साह पैदा किया है। फिल्म की कहानी, एक्शन और पुराने ‘आवारापन’ से जुड़ी भावनात्मक अपील के साथ-साथ ‘तेरा मेरा रिश्ता’ और ‘तो फिर आओ’ जैसे लोकप्रिय गानों के नए संस्करण भी चर्चा में हैं। आगे बढ़ सकती है कमाई फिल्म को स्वतंत्रता दिवस के बाद रविवार और सप्ताहांत का भी फायदा मिलने की उम्मीद है। शुरुआती प्रदर्शन को देखते हुए ‘आवारापन 2’ के लिए ₹100 करोड़ क्लब की संभावना मजबूत हुई है, हालांकि अंतिम आंकड़े आने के बाद ही इसकी वास्तविक बॉक्स ऑफिस स्थिति स्पष्ट होगी।
चेन्नई, एजेंसियां। साउथ सुपरस्टार सूर्या की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘विश्वनाथ एंड संस’ (Vishwanath & Sons) आज 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। वेंकी अट्लूरी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सूर्या के साथ मामिता बैजू, राधिका सरथकुमार और रवीना टंडन अहम भूमिकाओं में हैं। सूर्या के अभिनय की हो रही तारीफ फिल्म के सिनेमाघरों में पहुंचते ही दर्शकों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करनी शुरू कर दी हैं। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में सूर्या और मामिता बैजू के अभिनय की तारीफ देखने को मिल रही है। दर्शक फिल्म को भावनात्मक और मनोरंजक पारिवारिक कहानी बता रहे हैं। कार्ति ने भी की फिल्म की तारीफ सूर्या के भाई और अभिनेता कार्ति ने भी फिल्म देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने निर्देशक वेंकी अट्लूरी के लेखन और कलाकारों के अभिनय की तारीफ करते हुए सूर्या के प्रदर्शन को खास बताया। चेन्नई में रिलीज को लेकर आखिरी वक्त पर परेशानी फिल्म की रिलीज के दिन चेन्नई के कुछ सिनेमाघरों में स्क्रीनिंग को लेकर आखिरी वक्त पर दिक्कत सामने आई। कुछ थिएटरों में बुकिंग शुरू नहीं हुई थी, जबकि रोहिणी सिल्वर स्क्रीन ने फिल्म की स्क्रीनिंग नहीं करने की घोषणा की।