बॉलीवुड में इन दिनों Dhurandhar The Revenge को लेकर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है। Ranveer Singh स्टारर इस स्पाई-थ्रिलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है और फिल्म लगातार बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन कर रही है। इसी बीच Vicky Kaushal ने भी फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि व्यस्त शेड्यूल के कारण वह अभी तक फिल्म नहीं देख पाए हैं, लेकिन उन्होंने जल्द ही इसे बड़े पर्दे पर देखने की इच्छा जताई है। “बेहतरीन कास्ट और शानदार निर्देशन” दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान विक्की कौशल ने कहा कि उन्हें फिल्म के पहले पार्ट से काफी लगाव रहा है और दूसरे पार्ट को लेकर भी उनकी उत्सुकता काफी ज्यादा है। उन्होंने निर्देशक Aditya Dhar की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने एक शानदार कास्ट को साथ लाकर बेहतरीन फिल्म बनाई है। साथ ही उन्होंने फिल्म को मिल रहे दर्शकों के प्यार पर खुशी जताई। बॉक्स ऑफिस पर कायम है दबदबा फिल्म की रिलीज के बाद से ही इसका प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि फिल्म की कमाई आने वाले हफ्तों में भी जारी रह सकती है, जिससे अन्य फिल्मों पर इसका असर पड़ सकता है। ‘भूत बंगला’ से संभावित टक्कर वहीं, Bhooth Bangla 10 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में Akshay Kumar मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। अक्षय कुमार ने फिल्म की टक्कर को लेकर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि दो फिल्मों के बीच तीन हफ्तों का अंतर इंडस्ट्री के लिए अच्छा होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहां ‘धुरंधर द रिवेंज’ एक एक्शन आधारित फिल्म है, वहीं ‘भूत बंगला’ एक फैमिली और फैंटेसी हॉरर फिल्म है, जो अलग दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
Ranveer Singh की फिल्म Dhurandhar: The Revenge इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। सिनेमाघरों में फिल्म के शो हाउसफुल जा रहे हैं और दर्शकों की भारी भीड़ इसे देखने पहुंच रही है। इसी बीच Akshay Kumar की बहुप्रतीक्षित फिल्म Bhooth Bangla 10 अप्रैल 2026 को रिलीज के लिए तैयार है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या धुरंधर की सफलता ‘भूत बंगला’ के कारोबार पर असर डालेगी? इस मुद्दे पर खुद अक्षय कुमार ने अपनी राय रखी है। एक मीडिया बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि किसी भी फिल्म के लिए तीन हफ्ते यानी करीब 21 दिन का समय काफी होता है। उन्होंने कहा कि “यह इंडस्ट्री के लिए अच्छा संकेत है कि फिल्में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। इससे कलाकारों और फिल्मों को प्रमोशन के बेहतर मौके भी मिलते हैं।” अक्षय कुमार ने Dhurandhar: The Revenge की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को एक नए स्तर पर पहुंचाया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों फिल्मों का जॉनर पूरी तरह अलग है। जहां ‘धुरंधर’ एक एक्शन-प्रधान एडल्ट फिल्म है, वहीं ‘भूत बंगला’ एक फैमिली और बच्चों के लिए बनाई गई हॉरर-कॉमेडी है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘भूत बंगला’ को किसी ट्रेंड को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया, बल्कि कहानी को प्राथमिकता दी गई। “हमने सिर्फ यह देखा कि कहानी अच्छी है या नहीं, उसी आधार पर फिल्म बनाई,” अक्षय ने कहा। ‘भूत बंगला’ खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें अक्षय कुमार एक बार फिर निर्देशक Priyadarshan के साथ लंबे समय बाद काम कर रहे हैं। फिल्म में Paresh Rawal, Rajpal Yadav, Tabu और Wamiqa Gabbi भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘धुरंधर’ की मजबूत पकड़ के बीच ‘भूत बंगला’ बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करती है।
बॉलीवुड में लंबे समय बाद किसी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तूफान खड़ा किया है, जिसने सभी पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है। धुरंधर 2: द रिवेंज ने रिलीज के पहले ही दिन ऐतिहासिक कमाई करते हुए हिंदी सिनेमा के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। रणवीर सिंह की इस स्पाई थ्रिलर ने पहले दिन ही 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो अब तक किसी भी हिंदी फिल्म के लिए संभव नहीं हो पाया था। फिल्म का कुल ओपनिंग कलेक्शन (पेड प्रिव्यू समेत) 146 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसने इसे बॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनर फिल्म बना दिया है। पेड प्रिव्यू से ही मचा दिया तहलका फिल्म ने रिलीज से पहले ही बुधवार शाम को पेड प्रिव्यू के जरिए जबरदस्त शुरुआत की। सिर्फ इन प्रिव्यू शो से ही फिल्म ने करीब 43 करोड़ रुपये की कमाई कर ली। इससे पहले यह रिकॉर्ड ‘स्त्री 2’ के नाम था, जिसने लगभग 10 करोड़ का प्रिव्यू कलेक्शन किया था। ‘धुरंधर 2’ ने इस रिकॉर्ड को चार गुना से भी ज्यादा अंतर से तोड़ दिया। पहले दिन 100 करोड़ के पार पेड प्रिव्यू के दमदार कलेक्शन के चलते फिल्म ने पहले दिन ही उड़ान भर ली। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने गुरुवार को घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 103 करोड़ रुपये की कमाई की। इस तरह कुल मिलाकर पहले दिन का कलेक्शन 146 करोड़ तक पहुंच गया। बड़े-बड़े रिकॉर्ड्स हुए ध्वस्त ‘धुरंधर 2’ ने कई सुपरहिट फिल्मों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया: ‘स्त्री 2’ – 54 करोड़ ‘पठान’ – 57 करोड़ ‘एनिमल’ – 64 करोड़ ‘जवान’ – 75 करोड़ सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के स्तर पर भी इस फिल्म ने बड़ा मुकाम हासिल किया है। इसकी ओपनिंग ‘बाहुबली 2’ (121 करोड़) और ‘RRR’ (133 करोड़) से भी आगे निकल गई है। अब यह ‘पुष्पा 2’ (164 करोड़) के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर बन गई है। निर्देशन और स्टारकास्ट बनी ताकत फिल्म का निर्देशन आदित्य धर ने किया है, जो पहले ही अपने दमदार कंटेंट के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ आर माधवन अर्जुन रामपाल संजय दत्त सारा अर्जुन जैसे सितारों की मजबूत टीम नजर आ रही है। क्या टूटेगा ‘धुरंधर’ का भी रिकॉर्ड? गौरतलब है कि ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट दुनियाभर में 1300 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर चुका है। जिस तरह से इसके सीक्वल ने शुरुआत की है, उससे साफ है कि यह फिल्म जल्द ही अपने ही पहले पार्ट का रिकॉर्ड भी तोड़ सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।