हॉलीवुड के सुपरहीरो जॉनर में एक नया और दिलचस्प ट्विस्ट आने वाला है। Spider-Noir, जो लंबे समय से चर्चा में थी, अब अपनी रिलीज डेट के साथ तैयार है। यह लाइव-एक्शन सीरीज 27 मई 2026 से डिजिटल प्लेटफॉर्म Amazon Prime Video पर स्ट्रीम होगी।
इस सीरीज की कहानी 1930 के दशक की पृष्ठभूमि में सेट है, जहां एक उम्रदराज प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर और पूर्व सुपरहीरो अपने अतीत से जूझता नजर आएगा।
मुख्य भूमिका में Nicolas Cage नजर आएंगे, जो ‘बेन रेली’ नाम के किरदार को निभा रहे हैं। यह किरदार कभी शहर का इकलौता सुपरहीरो था, लेकिन अब उसे फिर से खतरनाक साजिशों और माफिया से टकराना होगा।
सीरीज में दर्शकों को एक्शन, थ्रिल और नॉयर स्टाइल का अनोखा मिश्रण देखने को मिलेगा। कहानी में बेन रेली को अपने पुराने दौर को वापस पाने और शहर को बचाने के लिए फिर से मैदान में उतरना पड़ेगा।
इसमें खतरनाक विलेन जैसे सिल्वरमेन और फ्लिंट मार्को से टक्कर भी देखने को मिलेगी, जो कहानी को और रोमांचक बनाते हैं।
इस सीरीज का निर्देशन Harry Bradbeer ने किया है।
कास्ट में निकोलस केज के अलावा Brendan Gleeson, Lamorne Morris, Jack Huston और Li Jun Li जैसे कलाकार शामिल हैं।
सीरीज का म्यूजिक माइकल डीन पार्सन्स और क्रिस बोवर्स ने तैयार किया है, जो इसके माहौल को और प्रभावी बनाता है।
यह सीरीज पारंपरिक सुपरहीरो कहानियों से अलग है। इसमें क्लासिक फिल्म-नोयर स्टाइल, डार्क टोन और पुरानी दुनिया का माहौल देखने को मिलेगा, जो इसे बाकी मार्वल-प्रेरित कहानियों से अलग बनाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हैदराबाद, एजेंसियां। भारतीय सिनेमा का भविष्य अब 2027 की ओर देख रहा है, जहां साउथ इंडस्ट्री की कई मेगा बजट और पैन-इंडिया फिल्में बड़े पर्दे पर धमाका करने के लिए तैयार हैं। दमदार कहानियों, हाई-ऑक्टेन एक्शन और ग्लोबल लेवल के विजुअल्स के साथ ये फिल्में दर्शकों को एक नया सिनेमाई अनुभव देने का वादा कर रही हैं। पैन-इंडिया फिल्मों का बढ़ता क्रेज पिछले कुछ वर्षों में साउथ फिल्मों ने पूरे देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत की है। 2027 में रिलीज होने वाली फिल्में इस ट्रेंड को और आगे बढ़ाने वाली हैं। बड़े स्टार्स और दिग्गज निर्देशकों के साथ ये प्रोजेक्ट्स भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में हैं। ‘स्पिरिट’ में दिखेगा नया अवतार Spirit एक हाई-वोल्टेज एक्शन ड्रामा है, जिसमें Prabhas का अब तक का अलग अंदाज देखने को मिलेगा। इसे Sandeep Reddy Vanga डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म में Triptii Dimri और Vivek Oberoi जैसे कलाकार भी नजर आएंगे, जिससे इसकी चर्चा और बढ़ गई है। ‘NTRNeel’ में एक्शन का तड़का NTRNeel में Jr. NTR और Prashanth Neel की जोड़ी नजर आएगी। यह फिल्म 11 जून 2027 को रिलीज होगी और इसे एक हाई-ऑक्टेन एक्शन थ्रिलर के रूप में पेश किया जा रहा है। फिल्म में Anil Kapoor भी अहम भूमिका निभाएंगे। ‘वाराणसी’ से ग्लोबल लेवल पर नजर Varanasi एक भव्य एक्शन-एडवेंचर फिल्म है, जिसका निर्देशन S. S. Rajamouli कर रहे हैं। इस फिल्म में Mahesh Babu, Priyanka Chopra Jonas और Prithviraj Sukumaran जैसे बड़े सितारे नजर आएंगे। यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को रिलीज होगी। दर्शकों को मिलेगा नया अनुभव इन फिल्मों के जरिए न सिर्फ बड़े बजट का प्रदर्शन होगा, बल्कि कहानी कहने का तरीका भी बदलता नजर आएगा। शानदार तकनीक, दमदार एक्टिंग और भव्य प्रस्तुति के साथ 2027 सिनेमा प्रेमियों के लिए एक यादगार साल साबित हो सकता है।
फिल्म इंडस्ट्री के अनुभवी अभिनेता Annu Kapoor ने दिवंगत दिग्गज कलाकार Om Puri को लेकर एक भावुक और विवादित बयान दिया है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने अपनी बहन सीमा कपूर के वैवाहिक जीवन से जुड़े दर्दनाक अनुभव साझा करते हुए ओम पुरी पर धोखा देने का आरोप लगाया। “मेरी बहन की जिंदगी बर्बाद हो गई” अन्नू कपूर ने कहा कि ओम पुरी एक महान अभिनेता थे, लेकिन एक पति के रूप में उन्होंने उनकी बहन के साथ न्याय नहीं किया। उनके मुताबिक, जब उनकी बहन सीमा गर्भवती थीं, उसी दौरान ओम पुरी का एक पत्रकार Nandita Puri के साथ संबंध बन गया, जो बाद में उनकी दूसरी पत्नी बनीं। अन्नू कपूर ने कहा कि इस घटना ने उनकी बहन की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया और वह आज तक उस दर्द को नहीं भूल पाए हैं। इंटरव्यू में छलका भाई का दर्द एक बेबाक बातचीत के दौरान अन्नू कपूर ने स्वीकार किया कि इस पूरे मामले को याद कर उनके अंदर का “भाई” आज भी भावुक हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर वह पूरी कहानी विस्तार से बताएंगे, तो मामला और बिगड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि ओम पुरी के आखिरी दिनों में उनकी बहन सीमा ने ही उनकी देखभाल की थी, बावजूद इसके कि उनके रिश्ते में पहले काफी उतार-चढ़ाव रहे थे। ओम पुरी के लिए सम्मान, लेकिन निजी पीड़ा बरकरार अन्नू कपूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ओम पुरी की अभिनय प्रतिभा का सम्मान करते हैं और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री का बेहतरीन कलाकार मानते हैं। हालांकि, निजी जीवन में हुई घटनाओं को लेकर उनके मन में गहरा दुख अब भी कायम है। उन्होंने कहा कि अब उनके मन में किसी के लिए द्वेष नहीं है, लेकिन अपनी बहन के जीवन को लेकर उन्हें अफसोस जरूर है। रिश्ते की शुरुआत और विवाद रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीमा कपूर और ओम पुरी की मुलाकात तब हुई थी जब सीमा महज 19 साल की थीं। दोनों के बीच करीब 11 साल का उम्र का अंतर था। कई सालों तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने 1990 में शादी की। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही ओम पुरी का नंदिता पुरी के साथ रिश्ता सामने आया, जिससे यह विवाह विवादों में आ गया।
साउथ सुपरस्टार Allu Arjun और निर्देशक Atlee की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Raaka’ को लेकर चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। अभिनेत्री Deepika Padukone की दूसरी प्रेग्नेंसी की खबर सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि फिल्म में उनका रोल छोटा कर दिया जाएगा या उन्हें रिप्लेस किया जा सकता है। अब फिल्म के निर्माताओं ने इन सभी अफवाहों को खारिज कर दिया है। मेकर्स ने दी सफाई फिल्म से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ‘Raaka’ की शूटिंग तय योजना के अनुसार जारी है और दीपिका पादुकोण इस प्रोजेक्ट में एक बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। टीम के अनुसार, सेट पर काम पूरी ऊर्जा के साथ चल रहा है और किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी जारी शूटिंग दीपिका पादुकोण ने हाल ही में अपने पति Ranveer Singh के साथ दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की, जिससे उनके फैंस काफी खुश हैं। इसके बावजूद, वह ‘Raaka’ की शूटिंग जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेत्री फिल्म में एक्शन सीक्वेंस भी शूट कर रही हैं, हालांकि सभी जरूरी सावधानियों के साथ। पहले भी प्रेग्नेंसी में किया काम यह पहली बार नहीं है जब दीपिका प्रेग्नेंसी के दौरान काम कर रही हैं। इससे पहले, 2024 में अपनी पहली प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने फिल्म Kalki 2898 AD की शूटिंग की थी और प्रमोशनल इवेंट्स में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। ‘Raaka’ में दूसरी बार Atlee के साथ सहयोग ‘Raaka’ में दीपिका और Atlee की यह दूसरी साझेदारी है। फिल्म का अनाउंसमेंट वीडियो पहले ही रिलीज हो चुका है, जिसमें दीपिका के दमदार एक्शन अवतार की झलक देखने को मिली थी। वहीं, हाल ही में अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फिल्म से उनका फर्स्ट लुक भी सामने आया, जिसमें उनका फियरस अंदाज नजर आया। इसके अलावा, दीपिका जल्द ही Shah Rukh Khan की फिल्म ‘King’ के कुछ हिस्सों की शूटिंग भी पूरी करेंगी।