दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री Trisha Krishnan लंबे समय से तमिल और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए हैं। अपने करियर की निरंतर सफलता और लोकप्रियता के दम पर उन्होंने न सिर्फ फिल्मी दुनिया में ऊंचा मुकाम हासिल किया है, बल्कि करोड़ों की संपत्ति भी अर्जित की है। आज उनका नाम उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल है, जिनकी पहचान क्षेत्रीय सिनेमा से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तृषा कृष्णन की कुल संपत्ति करीब 85 करोड़ रुपये आंकी जाती है। उनकी कमाई का प्रमुख स्रोत फिल्में हैं, जहां वह एक फिल्म के लिए करोड़ों रुपये फीस चार्ज करती हैं। इसके अलावा ब्रांड एंडोर्समेंट, विज्ञापन और सोशल मीडिया प्रमोशन से भी उनकी आय का बड़ा हिस्सा आता है।
तृषा अपनी शानदार लाइफस्टाइल के लिए भी जानी जाती हैं। चेन्नई में उनका एक भव्य घर है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जाती है। इसके अलावा हैदराबाद में भी उन्होंने प्रीमियम प्रॉपर्टी में निवेश किया हुआ है।
लग्जरी कारों के प्रति उनका खास शौक है और उनके कलेक्शन में Mercedes-Benz, BMW और Range Rover जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। यही वजह है कि उनकी लाइफस्टाइल अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है।
तृषा ने अपने करियर की शुरुआत 1999 में की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान Varsham से मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई सफल फिल्मों का हिस्सा बनीं।
उनकी चर्चित फिल्मों में Ghilli, Ponniyin Selvan और Leo शामिल हैं। हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है, जिसके चलते उनकी फीस और डिमांड दोनों बढ़ी हैं।
तृषा और Vijay की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रही है। दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं और उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया जाता है।
हालांकि, निजी रिश्तों को लेकर दोनों के बीच अफवाहें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन इस पर कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
तृषा कृष्णन का करियर इस बात का उदाहरण है कि लगातार मेहनत, सही फिल्म चयन और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस किसी भी कलाकार को इंडस्ट्री में लंबे समय तक बनाए रख सकता है। वह आज भी नए प्रोजेक्ट्स के साथ अपने करियर को आगे बढ़ा रही हैं और फैंस के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हॉलीवुड अभिनेत्री Rebel Wilson ने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर बड़ी खुशखबरी साझा की है। उन्होंने अपनी पत्नी Ramona Agruma के साथ दूसरी बेटी का स्वागत किया है। कपल ने अपनी नवजात बच्ची का नाम Rose Estelle रखा है और सोशल मीडिया पर उसकी पहली तस्वीर भी शेयर की है। परिवार में आई नई खुशी 4 मई 2026 को इस खुशखबरी की घोषणा करते हुए कपल ने बताया कि अब उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह उनके लिए बेहद खास और भावुक पल है। पोस्ट के साथ शेयर की गई तस्वीर में उनकी बड़ी बेटी Royce Lillian अपनी नवजात बहन को गोद में लिए नजर आ रही हैं, जो फैंस को बेहद पसंद आ रही है। “Our little angels” – मां का इमोशनल पोस्ट रिबेल विल्सन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी दोनों बेटियों की तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “Our little angels” बताया। इस तस्वीर में दोनों बहनों की बॉन्डिंग साफ झलकती है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया। पहले भी सरोगेसी से बनी थीं मां कपल की पहली बेटी Royce Lillian का जन्म नवंबर 2022 में सरोगेसी के जरिए हुआ था। अब दूसरी बेटी के आगमन के साथ उनका परिवार और भी पूरा हो गया है। प्यार से शादी तक का सफर रिबेल और रमौना का रिश्ता जून 2022 में सार्वजनिक हुआ था। फरवरी 2023 में सगाई मार्च 2023 में ऑस्कर पार्टी में पहली रेड कार्पेट अपीयरेंस नवंबर 2024 में इटली में शादी उनकी लव स्टोरी काफी तेजी से आगे बढ़ी और अब वे दो बच्चों के साथ खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। फैंस दे रहे बधाइयां जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर फैंस और सेलेब्रिटीज ने कपल को बधाइयों से भर दिया। रिबेल विल्सन की यह नई पारी उनके जीवन के सबसे खूबसूरत अध्यायों में से एक मानी जा रही है।
चेन्नई, एजेंसियां। साउथ सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन ने अपने 43वें जन्मदिन की शुरुआत आध्यात्मिक माहौल में की। इस खास मौके पर वह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सुबह-सुबह मंदिर पहुंची तृषा का यह अंदाज फैंस को काफी पसंद आया। सादगी भरे लुक ने जीता दिल मंदिर परिसर से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में तृषा बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आईं। उन्होंने व्हाइट फ्लोरल आउटफिट पहना था और चेहरे पर मुस्कान के साथ फैंस का अभिवादन किया। उनका शांत और सौम्य व्यवहार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस से की मुलाकात, मिली ढेरों शुभकामनाएं दर्शन के दौरान तृषा ने वहां मौजूद फैंस से मुलाकात भी की। उन्होंने लोगों से बातचीत की और जन्मदिन की शुभकामनाएं स्वीकार कीं। उनके इस विनम्र व्यवहार ने लोगों का दिल जीत लिया। पहले ही दे दिया था संकेत मंदिर जाने से पहले तृषा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक छोटा वीडियो शेयर किया था, जिसमें ‘तिरुपति’ का बोर्ड दिखाई दे रहा था। इससे उन्होंने फैंस को पहले ही इशारा दे दिया था कि वह अपने जन्मदिन पर भगवान के दर्शन करने जा रही हैं। सेलिब्रिटीज के लिए खास आस्था का केंद्र तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां कई फिल्मी सितारे समय-समय पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। तृषा से पहले भी कई बड़े सितारे यहां आकर आशीर्वाद ले चुके हैं।
हैदराबाद: भीषण गर्मी और बढ़ती पानी की किल्लत के बीच फिल्म इंडस्ट्री को भी अब संसाधनों की सीमाओं का सामना करना पड़ रहा है। मशहूर निर्देशक S. S. Rajamouli की मेगा बजट फिल्म ‘वाराणसी’ की शूटिंग के लिए 150 पानी के टैंकरों की मांग को Hyderabad Metropolitan Water Supply and Sewerage Board ने खारिज कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब शहर में पानी की मांग पहले ही चरम पर है और आम जनता गर्मी से जूझ रही है। क्या थी फिल्म निर्माताओं की मांग? फिल्म का निर्माण Sri Durga Arts के बैनर तले किया जा रहा है। प्रोडक्शन टीम ने जल बोर्ड से 10,000 लीटर क्षमता वाले 150 टैंकर पानी की मांग की थी। यह पानी Hyderabad Film City Studio में बनाए गए कृत्रिम तालाब में अंडरवॉटर सीन्स की शूटिंग के लिए इस्तेमाल किया जाना था। शूटिंग 18 मई को प्रस्तावित है और पानी को शुद्ध करने की भी मांग की गई थी। प्रशासन ने क्यों किया इनकार? जल बोर्ड के प्रबंध निदेशक के. अशोक रेड्डी ने स्पष्ट किया कि शहर में पहले से ही पानी की भारी मांग है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में प्राथमिकता आम नागरिकों की जरूरतों को दी जाएगी, न कि फिल्म शूटिंग जैसे प्रोजेक्ट्स को। गर्मी और पानी संकट ने बढ़ाई मुश्किलें हैदराबाद में तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई इलाकों में पानी की आपूर्ति पर दबाव है। टैंकरों की मांग भी अचानक बढ़ गई है, जिससे सप्लाई मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में प्रशासन का यह फैसला यह दर्शाता है कि संसाधनों के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी हो गया है। फिल्म ‘वाराणसी’ क्यों है खास? राजामौली की यह फिल्म एक भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कहानी पर आधारित है, जिसमें Mahesh Babu और Priyanka Chopra मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी अंटार्कटिका से अफ्रीका तक फैली है और अंत में वाराणसी में आकर जुड़ती है। यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।