अगर आपकी सुबहें हमेशा जल्दी-जल्दी तैयार होने की दौड़ में गुजरती हैं, तो हेयर स्टाइलिंग सबसे ज्यादा समय लेने वाला काम बन जाता है। लेकिन अब नई जनरेशन के स्मार्ट हेयर टूल्स इस परेशानी का समाधान बन रहे हैं। ये न सिर्फ स्टाइलिंग टाइम कम करते हैं, बल्कि हीट डैमेज को भी घटाते हैं और एक ही टूल से कई काम करने की सुविधा देते हैं।
कम समय, बेहतर स्टाइल–क्या है खास?
आज के आधुनिक हेयर टूल्स इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे बालों की नेचुरल टेक्सचर के साथ काम करें, न कि उसके खिलाफ। इससे बालों को बार-बार ‘फिक्स’ करने की जरूरत नहीं पड़ती और स्टाइलिंग ज्यादा आसान हो जाती है।
1. Philips One Stroke Hair Straightener 5000
यह स्ट्रेटनर एक ही स्ट्रोक में बालों को स्मूद कर देता है, जिससे समय की बचत होती है। आर्गन ऑयल और आयोनिक टेक्नोलॉजी फ्रिज को कम करती है और बालों में शाइन बनाए रखती है।
2. Dyson Supersonic Nural Hair Dryer
इंटेलिजेंट हीट कंट्रोल के साथ यह ड्रायर तेजी से बाल सुखाता है और स्कैल्प को सुरक्षित रखता है। यह एक साथ स्मूदिंग और फ्रिज कंट्रोल भी करता है।
3. Ikonic Professional Pro Waver
ट्रिपल-बैरल डिजाइन के साथ यह टूल कुछ ही मिनटों में सॉफ्ट वेव्स देता है। अलग-अलग हेयर टाइप के लिए इसमें टेम्परेचर सेटिंग्स भी मिलती हैं।
4. Mermade Hair Blow Dry Brush
यह 3-इन-1 टूल है जो बालों को ड्राई, डिटैंगल और वॉल्यूमाइज एक साथ करता है। घर पर ही सैलून जैसा ब्लोआउट लुक देना इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है।
5. GHD Duet Style Professional
यह टूल बालों को एक साथ ड्राई और स्ट्रेट करता है, जिससे अलग-अलग डिवाइस की जरूरत खत्म हो जाती है। कम तापमान पर भी शानदार रिजल्ट देता है।
6. BBlunt Wet-To-Dry Air Smoothing Brush
गीले बालों को सीधे स्मूद स्टाइल में बदलने वाला यह टूल रोजाना इस्तेमाल के लिए आदर्श है। यह कम मेहनत में फ्रिज-फ्री लुक देता है।
7. Alan Truman Airflow Curl-N-Straight
कर्ल और स्ट्रेट–दोनों स्टाइल एक ही टूल से बनाए जा सकते हैं। 360° एयरफ्लो और आयोनिक टेक्नोलॉजी बालों को लंबे समय तक सेट रखती है।
क्यों करें इन टूल्स में निवेश?
ये सभी टूल्स समय की बचत के साथ-साथ बालों को कम नुकसान पहुंचाते हैं। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह बेहद उपयोगी हैं जो रोजाना स्टाइलिंग करते हैं लेकिन ज्यादा समय नहीं दे पाते।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बॉलीवुड फिल्मों से प्रेरित फैशन ट्रेंड्स हमेशा लोगों की पसंद का हिस्सा रहे हैं। इन दिनों येलो और ब्लैक आउटफिट कॉम्बिनेशन कपल्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। डेट नाइट, प्री-वेडिंग शूट, पार्टी और खास मौकों पर कई कपल इस रंग संयोजन को अपनाकर अपने स्टाइल और केमिस्ट्री को खास अंदाज में पेश कर रहे हैं। रोमांस का नया फैशन ट्रेंड बना येलो-ब्लैक कॉम्बिनेशन फिल्मों में हीरो-हीरोइन के पीले और काले रंग के आउटफिट्स ने इस ट्रेंड को नई पहचान दी है। अब यह कॉम्बिनेशन सिर्फ बड़े पर्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं की वार्डरोब का भी हिस्सा बन चुका है। फैशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह रंगों का मेल आकर्षण और एलिगेंस का संतुलित संयोजन पेश करता है। क्या दर्शाते हैं ये दोनों रंग? विशेषज्ञों के अनुसार, पीला रंग खुशी, ऊर्जा, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। वहीं काला रंग आत्मविश्वास, सादगी, परिपक्वता और स्टाइल को दर्शाता है। जब कपल्स इन दोनों रंगों को एक साथ पहनते हैं तो उनका लुक अधिक आकर्षक और संतुलित नजर आता है। फैशन से बढ़कर बन रहा है एक्सप्रेशन फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि येलो-ब्लैक ट्रेंड केवल कपड़ों का मेल नहीं, बल्कि एक स्टाइल स्टेटमेंट है। यह कपल्स के बीच तालमेल, आत्मविश्वास और रोमांटिक बॉन्डिंग को भी दर्शाता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इस कलर कॉम्बिनेशन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। हर खास मौके के लिए बन रहा पसंदीदा विकल्प डेट, कैजुअल आउटिंग, फेस्टिव सेलिब्रेशन, प्री-वेडिंग शूट और पार्टी जैसे अवसरों पर येलो और ब्लैक कॉम्बिनेशन तेजी से पसंद किया जा रहा है। स्टाइलिस्ट्स का कहना है कि सही एक्सेसरीज और फुटवियर के साथ यह रंग संयोजन किसी भी लुक को आकर्षक और ट्रेंडी बना सकता है।
गर्मियों में फ्लिप-फ्लॉप भले ही सबसे आरामदायक फुटवियर हों, लेकिन अगर आप अपने समर लुक में थोड़ा एलिगेंस और पॉलिश्ड टच जोड़ना चाहती हैं, तो फ्लैट लेदर सैंडल्स एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं। ये सैंडल्स फ्लिप-फ्लॉप जैसी हल्की और आरामदायक होती हैं, लेकिन उनका क्लीन और सोफिस्टिकेटेड डिजाइन इन्हें कैजुअल से लेकर स्मार्ट आउटफिट्स तक के लिए परफेक्ट बनाता है। फैशन की दुनिया में इन दिनों मिनिमल फ्लैट सैंडल्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। बेहद पतली सोल, सिंपल स्ट्रैप और प्रीमियम लेदर फिनिश वाली ये सैंडल्स बिना ज्यादा मेहनत के पूरे लुक को स्टाइलिश बना देती हैं। फ्लैट सैंडल्स क्यों हैं समर की परफेक्ट चॉइस? फ्लैट लेदर सैंडल्स की सबसे खास बात है इनका सिंपल लेकिन टाइमलेस डिजाइन। इन्हें लिनेन पैंट्स, कॉटन शर्ट, लॉन्ग समर ड्रेस, बैगी जींस या बेसिक टैंक टॉप के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है। ऑफिस से लेकर वीकेंड आउटिंग, शॉपिंग और वेकेशन तक, सही डिजाइन वाली फ्लैट सैंडल्स कई मौकों पर काम आ सकती हैं। इस सीजन के 8 Chic Flat Sandals 1. Toteme Textured Leather Slides मिनिमल और प्रीमियम लुक पसंद करने वालों के लिए टेक्सचर्ड लेदर स्लाइड्स एक शानदार विकल्प हैं। कीमत करीब ₹56,975 बताई गई है। 2. Massimo Dutti Flat Woven Leather Sandals वोवन लेदर डिजाइन इन्हें क्लासिक और एलिगेंट बनाता है। इनकी कीमत करीब ₹13,900 है। 3. Charles & Keith Yara Canvas Strappy Sandals स्ट्रैपी डिजाइन के साथ ये सैंडल्स समर आउटिंग और कैजुअल लुक के लिए अच्छी पसंद हो सकती हैं। कीमत करीब ₹9,999 है। 4. Zara Multi-strap Flat Sandals टॉपस्टिचिंग वाले मल्टी-स्ट्रैप सैंडल्स बजट में ट्रेंडी लुक पाने का विकल्प हैं। कीमत करीब ₹2,950 है। 5. Bottega Veneta Riva Intrecciato Leather Sandals इंट्रेचियाटो लेदर डिजाइन के साथ यह लग्जरी ऑप्शन है। इसकी कीमत करीब ₹1,36,740 बताई गई है। 6. Tory Burch Ines Single-band Slides सिंगल-बैंड डिजाइन इसे बेहद क्लीन और सोफिस्टिकेटेड लुक देता है। कीमत करीब ₹32,999 है। 7. Slomotion Milo Sandals सिंपल और आरामदायक डिजाइन वाली Milo sandals रोजमर्रा के समर लुक के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। कीमत करीब ₹5,600 है। 8. Hermès Oran Sandals फ्लैट सैंडल्स की दुनिया में Hermès Oran एक आइकॉनिक नाम है। इसका सिग्नेचर 'H' कट-आउट स्ट्रैप इसे तुरंत पहचान देने वाला डिजाइन बनाता है। यह 1997 से लग्जरी समर फुटवियर का लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है। कैसे करें फ्लैट सैंडल्स को स्टाइल? अगर आप effortless chic लुक चाहती हैं, तो फ्लैट सैंडल्स को लूज लिनेन पैंट और oversized shirt के साथ पहन सकती हैं। लॉन्ग, हल्की समर ड्रेस के साथ ये सैंडल्स आपको Mediterranean-inspired लुक देंगी। वहीं, बैगी जींस और व्हाइट टैंक टॉप के साथ इन्हें पहनकर आप बेहद आसान लेकिन स्टाइलिश कैजुअल लुक पा सकती हैं। फ्लिप-फ्लॉप की तुलना में फ्लैट लेदर सैंडल्स आपके लुक को ज्यादा structured और sophisticated बनाती हैं। हालांकि इन्हें पहनने से पहले पैरों की grooming का भी ध्यान रखना जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बालों और स्कैल्प से जुड़ी कई समस्याएं भी साथ लाता है। बारिश, बढ़ी हुई नमी, पसीना और प्रदूषण के कारण स्कैल्प जल्दी ऑयली हो जाता है, जिससे हेयर फॉल, डैंड्रफ, खुजली और बदबू जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में बालों को सही समय पर और सही तरीके से धोना बेहद जरूरी माना जाता है। मानसून में बाल धोने का सही समय हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार, मानसून में सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच या दोपहर के समय बाल धोना सबसे बेहतर होता है। इस दौरान बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने का पर्याप्त समय मिल जाता है। वहीं रात में बाल धोकर सोने से बचना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक गीले रहने से स्कैल्प में फंगल इंफेक्शन, डैंड्रफ और बाल झड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हफ्ते में कितनी बार धोएं बाल? बारिश के मौसम में स्कैल्प जल्दी ऑयली हो जाता है, इसलिए सामान्य तौर पर सप्ताह में 2 से 3 बार बाल धोना पर्याप्त माना जाता है। यदि आप रोज बाहर निकलते हैं या अधिक पसीना आता है, तो जरूरत के अनुसार बाल धो सकते हैं। हालांकि, जरूरत से ज्यादा शैंपू करने से बालों का प्राकृतिक तेल कम हो सकता है। बाल धोने का सही तरीका विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाल धोने से पहले उन्हें अच्छी तरह सुलझा लें। इसके बाद हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी का इस्तेमाल करें। शैंपू को सीधे स्कैल्प पर लगाने के बजाय उसमें थोड़ा पानी मिलाकर लगाएं और उंगलियों के पोरों से हल्के हाथों से मसाज करें। बाल धोने के बाद कंडीशनर केवल बालों की लंबाई और सिरों पर लगाएं, स्कैल्प पर नहीं। बारिश में भीगने के बाद क्या करें? यदि बारिश में बाल भीग जाएं, तो घर पहुंचते ही उन्हें साफ पानी से धो लेना चाहिए। बारिश के पानी में मौजूद धूल और प्रदूषक तत्व स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बाद माइक्रोफाइबर तौलिए से बालों को हल्के हाथों से सुखाएं और गीले बालों को जोर से रगड़ने या कसकर बांधने से बचें। मानसून में बालों को स्वस्थ रखने के टिप्स विशेषज्ञ सल्फेट-फ्री शैंपू का इस्तेमाल करने, सप्ताह में एक बार डीप कंडीशनिंग हेयर मास्क लगाने और गीले बालों में कंघी करने से बचने की सलाह देते हैं। चौड़े दांतों वाली कंघी का उपयोग करें, स्कैल्प को साफ और सूखा रखें तथा हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें। सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर मानसून के दौरान भी बालों को मजबूत, स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।