राजस्व 18% बढ़कर 90 अरब डॉलर के पार, Azure की मजबूत ग्रोथ से निवेशकों में उत्साह; शेयरों में रिकॉर्ड उछाल
वॉशिंगटन, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का राजस्व 18% बढ़कर 90.01 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि प्रति शेयर आय 4.74 डॉलर रही, जो बाजार के अनुमान से बेहतर है। कंपनी के क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कारोबार ने इस प्रदर्शन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि उसका क्लाउड प्लेटफॉर्म Azure लगातार मजबूत गति से बढ़ रहा है। कंपनी के अनुसार, Azure ने 100 अरब डॉलर का वार्षिक कारोबार पार कर लिया, जबकि पूरे Microsoft Cloud का वार्षिक राजस्व 214 अरब डॉलर से अधिक हो गया। कंपनी का कहना है कि AI सेवाओं और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से यह वृद्धि संभव हुई।
माइक्रोसॉफ्ट ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों पर बड़े निवेश जारी रखने की बात कही है। कंपनी ने तिमाही के दौरान दुनिया भर में कई नए डेटा सेंटर शुरू किए और कहा कि AI आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का AI पर किया गया बड़ा निवेश अब बेहतर वित्तीय परिणाम देने लगा है।
बेहतर नतीजों के बाद माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में जोरदार उछाल आया। कंपनी के शेयर एक दिन में 15% से अधिक चढ़ गए, जिससे उसके बाजार पूंजीकरण में करीब 450 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। यह किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी एकदिवसीय मार्केट वैल्यू बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है।
कंपनी ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि क्लाउड कंप्यूटिंग, AI और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर की मजबूत मांग भविष्य में भी उसके कारोबार को गति देती रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: अनिल अग्रवाल की मेटल और माइनिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयरों में शुक्रवार, 31 जुलाई को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद शेयर एक समय एक फीसदी से अधिक गिरकर ₹263.20 के स्तर तक पहुंच गया। इससे निवेशकों के बीच सवाल उठने लगा कि आखिर शानदार प्रदर्शन के बाद भी शेयर में कमजोरी क्यों आई और आगे इसकी दिशा क्या हो सकती है। वेदांता ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए थे। आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 72 फीसदी बढ़कर ₹5,473 करोड़ हो गया। कंपनी के मुनाफे में यह तेज बढ़ोतरी उसके ऑपरेशनल प्रदर्शन में मजबूती को दिखाती है। EBITDA में 98 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी वेदांता का प्रदर्शन सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं रहा। पहली तिमाही में कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर करीब 98 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड ₹8,469 करोड़ पहुंच गया। कॉपर कारोबार को छोड़कर कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 985 बेसिस पॉइंट्स की मजबूती के साथ 57 फीसदी हो गया। यह कंपनी की ऑपरेशनल दक्षता और बेहतर मार्जिन प्रोफाइल की ओर इशारा करता है। वहीं, कंपनी के ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू में भी जोरदार वृद्धि हुई। पहली तिमाही में यह सालाना आधार पर 54 फीसदी बढ़कर ₹24,205 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹15,754 करोड़ था। मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर क्यों फिसला? मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद शेयर में शुरुआती गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। पिछले कारोबारी सत्र में BSE पर वेदांता का शेयर ₹267.70 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह ₹269 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में बिकवाली के दबाव में ₹263.20 तक फिसल गया। बाजार में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि मजबूत नतीजों की उम्मीद पहले से शेयर की कीमत में शामिल हो जाती है। ऐसे में वास्तविक नतीजे अच्छे होने के बावजूद निवेशकों की मुनाफावसूली या भविष्य की संभावनाओं को लेकर सावधानी शेयर पर दबाव डाल सकती है। ब्रोकरेज की नजर में ₹333 तक जा सकता है शेयर वेदांता के आगे के प्रदर्शन को लेकर ब्रोकरेज हाउस का रुख पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। नुवामा ने शेयर पर 'Buy' रेटिंग देते हुए ₹333 का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा स्तरों के मुकाबले यह करीब 24 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत देता है। दूसरी ओर, मोतीलाल ओसवाल ने वेदांता पर 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखी है और ₹290 का टारगेट प्राइस तय किया है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक कंपनी का रेवेन्यू अनुमान के अनुरूप रहा। इसमें LME, प्रीमियम और फॉरेक्स से मिले फायदे का योगदान रहा है। निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है? वेदांता के तिमाही आंकड़े कंपनी की मजबूत कमाई और बेहतर मार्जिन की तस्वीर पेश करते हैं। हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी स्टॉक का भविष्य सिर्फ एक तिमाही के नतीजों से तय नहीं होता। कमोडिटी कीमतों, वैश्विक बाजार की स्थिति, कंपनी के कर्ज, कैपिटल एक्सपेंडिचर और आने वाली तिमाहियों के प्रदर्शन जैसे कई कारक शेयर की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस को संभावित बाजार अनुमान के तौर पर देखना चाहिए, न कि निश्चित रिटर्न की गारंटी के रूप में। निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए।
राजस्व 18% बढ़कर ₹20,048 करोड़ पहुंचा, खाद्य और एफएमसीजी कारोबार की मजबूत मांग से मिला फायदा नई दिल्ली, एजेंसियां। खाद्य एवं एफएमसीजी कंपनी AWL Agri Business ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के शानदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) 48% बढ़कर ₹351 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में यह लगभग ₹238 करोड़ था। वहीं, परिचालन राजस्व 18% बढ़कर ₹20,048 करोड़ पहुंच गया। EBITDA और मार्जिन में भी मजबूत सुधार कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA बढ़कर ₹693 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹366 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी 2.14% से बढ़कर 3.46% हो गया। कंपनी ने बताया कि बेहतर उत्पाद मिश्रण, लागत नियंत्रण और परिचालन दक्षता के कारण लाभप्रदता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। तीनों प्रमुख कारोबारों में दर्ज हुई बढ़त AWL के एडिबल ऑयल, फूड एवं FMCG और इंडस्ट्री एसेंशियल्स—तीनों प्रमुख व्यवसायों में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। फूड एवं एफएमसीजी कारोबार की आय में 22% की बढ़ोतरी हुई, जबकि इंडस्ट्री एसेंशियल्स सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी ने बताया कि कुल वॉल्यूम ग्रोथ 7% रही। भविष्य की रणनीति पर रहेगा फोकस कंपनी ने कहा कि आने वाले महीनों में वह अपने फूड ब्रांड पोर्टफोलियो, वितरण नेटवर्क और क्विक कॉमर्स तथा ई-कॉमर्स जैसे नए बिक्री चैनलों के विस्तार पर जोर देगी। प्रबंधन का मानना है कि मजबूत मांग और परिचालन सुधार के दम पर आगे भी लाभदायक वृद्धि जारी रहेगी।
तिमाही नतीजों में 34% कम हुआ घाटा, रेवेन्यू में 37% की बढ़ोतरी; इंस्टामार्ट की कमाई और मार्जिन में सुधार बेंगलुरु, एजेंसियां। ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स कंपनी स्विगी (Swiggy) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर ₹791 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹1,197 करोड़ के मुकाबले लगभग 34% कम है। वहीं, कंपनी का परिचालन राजस्व 37% बढ़कर ₹6,812 करोड़ पहुंच गया। इंस्टामार्ट के प्रदर्शन से मिला बड़ा सहारा स्विगी के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट ने तिमाही के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी का कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन -1.8% से सुधरकर -0.2% पर पहुंच गया, जो इस कारोबार के मुनाफे की दिशा में बढ़ने का संकेत माना जा रहा है। यह सुधार विज्ञापन आय, दोबारा खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ने और उत्पादों की विस्तृत रेंज की वजह से संभव हुआ। नए स्टोर खोलने की तैयारी स्विगी ने बताया कि फिलहाल इंस्टामार्ट के 1,171 डार्क स्टोर 131 शहरों में संचालित हो रहे हैं। कंपनी सितंबर तिमाही में 75 नए स्टोर खोलने की योजना बना रही है, ताकि क्विक डिलीवरी नेटवर्क को और मजबूत किया जा सके। प्रतिस्पर्धा के बीच मुनाफे पर फोकस स्विगी के सीईओ श्रीहर्ष मजेटी ने कहा कि कंपनी अब केवल विस्तार पर नहीं, बल्कि लाभप्रदता (Profitability) पर भी बराबर ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि आने वाली तिमाहियों में इंस्टामार्ट का कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन 0% से -1% के बीच बनाए रखने का लक्ष्य है। कंपनी की प्रतिस्पर्धा फिलहाल ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और बिगबास्केट जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों से है। निवेशकों ने किया स्वागत बेहतर तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने स्विगी के प्रदर्शन का सकारात्मक स्वागत किया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इंस्टामार्ट की यूनिट इकॉनॉमिक्स में इसी तरह सुधार जारी रहा, तो कंपनी आने वाले समय में मुनाफे के और करीब पहुंच सकती है।