Income Tax Department ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जारी किए गए नए ITR फॉर्म (ITR-1 से ITR-7) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये बदलाव उन सभी टैक्सपेयर्स के लिए अहम हैं जो 31 जुलाई 2026 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले हैं। यह फॉर्म वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए लागू होंगे।
इस बार सबसे बड़ा बदलाव टैक्सपेयर्स की पर्सनल डिटेल्स से जुड़ा है, खासकर एड्रेस और संपर्क जानकारी को लेकर।
नए ITR फॉर्म में अब टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो पते (Primary और Secondary Address) देने का विकल्प दिया गया है।
इसके साथ ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को भी अब दो भागों में बांटा गया है:
इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स विभाग के पास बेहतर और वैकल्पिक संपर्क जानकारी उपलब्ध कराना है।
अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य की ओर से ITR भरता है, तो उसे “प्रतिनिधि” कहा जाता है।
पहले जहां प्रतिनिधि से कई तरह की जानकारियां मांगी जाती थीं, वहीं अब प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है। अब सिर्फ तीन डिटेल्स देनी होंगी:
इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली हो गई है।
नए फॉर्म में डुअल रिपोर्टिंग (दोहरी जानकारी) की व्यवस्था खत्म कर दी गई है।
पहले कैपिटल गेन को ट्रांसफर की तारीख के आधार पर अलग-अलग दिखाना पड़ता था, लेकिन अब:
इससे फॉर्म भरना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा।
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य:
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Indian Railway News: भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने पहली बार नेपाल के लिए सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी चलाई है। इस मालगाड़ी ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक का सफर पूरा किया। इस ऐतिहासिक मालगाड़ी में 40 टैंक वैगन में कैनोला तेल लदा था। अभी तक दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में माल की आवाजाही सड़क मार्ग यानी ट्रकों के जरिए होती रही है। ऐसे में सीधी रेल सेवा शुरू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है। कोलकाता पोर्ट से विराटनगर तक पहुंचा माल रेलवे की इस पहली सीधी कमर्शियल सेवा ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक माल पहुंचाया। रेल मंत्रालय के मुताबिक, नई व्यवस्था से माल की आवाजाही में लगने वाला समय, लॉजिस्टिक्स लागत और कार्गो हैंडलिंग का समय कम होने की उम्मीद है। यह सुविधा जोगबनी-विराटनगर ब्रॉडगेज रेल लिंक पर आधारित है, जिसे जून 2023 में शुरू किया गया था। अब इस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल सीधे कमर्शियल कंटेनर कार्गो के लिए भी किया जा रहा है। भारत-नेपाल व्यापार को कैसे होगा फायदा? सीधी मालगाड़ी सेवा दोनों देशों के व्यापार के लिए कई स्तरों पर फायदेमंद साबित हो सकती है। पहला फायदा ट्रांजिट टाइम में कमी का है। सड़क मार्ग की तुलना में रेल के जरिए बड़ी मात्रा में माल को व्यवस्थित तरीके से भेजना आसान हो सकता है। इससे सप्लाई चेन अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। दूसरा फायदा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी का हो सकता है। माल को कई अलग-अलग परिवहन माध्यमों में ट्रांसफर करने की जरूरत कम होने से अतिरिक्त हैंडलिंग और परिवहन खर्च घट सकता है। तीसरा फायदा कार्गो हैंडलिंग में कमी का है। कम हैंडलिंग पॉइंट होने से माल को बार-बार उतारने और चढ़ाने की जरूरत कम होगी, जिससे समय की बचत के साथ नुकसान का जोखिम भी घट सकता है। आयात-निर्यात को मिल सकती है नई रफ्तार रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस सेवा से भारत और नेपाल के बीच आयात-निर्यात कार्गो की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। रेल परिवहन बड़े पैमाने पर माल ढुलाई के लिए अपेक्षाकृत तेज, लागत-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प बन सकता है। इससे खासतौर पर उन कारोबारियों को फायदा मिल सकता है जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में माल भारत से नेपाल या नेपाल से भारत भेजते हैं। नवंबर 2025 के समझौते के बाद खुला रास्ता सीधी कमर्शियल रेल सेवा शुरू होने की दिशा में नवंबर 2025 में संशोधित Letter of Exchange (LoE) पर हस्ताक्षर महत्वपूर्ण कदम रहा। इसके बाद विराटनगर के लिए सीधी वाणिज्यिक रेल सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हुआ। यह कदम केवल परिवहन व्यवस्था में बदलाव नहीं है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भारत-नेपाल कनेक्टिविटी में नया अध्याय भारत और नेपाल के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और कारोबारी संबंध हैं। ऐसे में सीधी मालगाड़ी सेवा दोनों देशों की सीमा-पार सप्लाई चेन को और मजबूत कर सकती है। अगर यह मॉडल आगे सफल रहता है और ज्यादा तरह के माल को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो आने वाले समय में भारत-नेपाल व्यापार के लिए रेल परिवहन एक अहम विकल्प बन सकता है। कुल मिलाकर, पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी सिर्फ एक नई रेल सेवा की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच व्यापार को अधिक तेज, व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुंबई, एजेंसियां। पुणे स्थित Poojaa Precision Engineering Ltd. का SME IPO आज यानी 28 जुलाई से निवेशकों के लिए खुल गया है। कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए ₹159.83 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। निवेशक इस इश्यू में 30 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। प्राइस बैंड और निवेश की जानकारी कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड ₹285 से ₹301 प्रति शेयर तय किया है। यह 100% फ्रेश इश्यू है, यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। IPO के तहत कुल 53.10 लाख इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। रिटेल निवेशकों को कितना निवेश करना होगा? यह IPO BSE SME प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होगा। एक लॉट में 400 शेयर हैं, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन 2 लॉट (800 शेयर) का रखा गया है। ऊपरी प्राइस बैंड ₹301 के हिसाब से न्यूनतम निवेश ₹2,40,800 होगा। कहां होगा पैसों का उपयोग? कंपनी IPO से प्राप्त राशि का उपयोग नई मशीनरी खरीदने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कार्यशील पूंजी (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। Poojaa Precision Engineering ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रिसीजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स का निर्माण करती है और पिछले तीन दशकों से इस क्षेत्र में कार्यरत है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में CKYC 2.0 (Central Know Your Customer 2.0) की नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की परेशानी से राहत देना है। इस नई प्रणाली में ग्राहक की सत्यापित जानकारी एक केंद्रीय रजिस्ट्री में सुरक्षित रहेगी और उनकी सहमति के बाद बैंक, बीमा कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान इसका उपयोग कर सकेंगे। एक ही KYC से कई वित्तीय सेवाओं का लाभ अभी तक अलग-अलग बैंक, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों में खाता खोलने या सेवा लेने के लिए अलग-अलग KYC प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। CKYC 2.0 के लागू होने के बाद ग्राहक की जानकारी केंद्रीय रिकॉर्ड से प्राप्त की जा सकेगी। इससे नया बैंक खाता खोलने, बीमा लेने या निवेश शुरू करने की प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद है। ग्राहक की सहमति से साझा होगी जानकारी CKYC 2.0 में ग्राहक की गोपनीयता को ध्यान में रखा गया है। वित्तीय संस्थान ग्राहक की जानकारी तभी प्राप्त कर पाएंगे, जब ग्राहक इसकी अनुमति देगा। नई व्यवस्था में डेटा की गुणवत्ता जांचने के लिए रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा सिस्टम भी शामिल किया जा रहा है, जिससे गलत जानकारी और धोखाधड़ी की संभावना कम करने में मदद मिलेगी। बैंक और बीमा कंपनियां पहले जुड़ेंगी नई CKYC 2.0 व्यवस्था में शुरुआत में बैंक और बीमा कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद म्यूचुअल फंड, ब्रोकरेज और कैपिटल मार्केट से जुड़े संस्थानों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस पहल को RBI, SEBI और IRDAI जैसी वित्तीय नियामक संस्थाओं के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। डिजिटल दस्तावेज सत्यापन भी होगा आसान CKYC 2.0 में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। DigiLocker जैसी सुविधाओं के साथ दस्तावेजों के सत्यापन को आसान बनाने की योजना है, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और KYC अपडेट तेजी से हो सकेगा। ग्राहकों को क्या फायदा होगा? बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होगी खाता खोलने और वित्तीय सेवाएं लेने की प्रक्रिया तेज होगी फर्जी पहचान और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान होगी CKYC 2.0 को भारत की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह बैंकिंग, बीमा और निवेश सेवाओं को अधिक सरल और तेज बना सकता है।