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LIC ने सरकार को सौंपा ₹12,207 करोड़ का लाभांश, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी डिविडेंड की राशि

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ₹12,207 करोड़ का लाभांश चेक सौंपते एलआईसी के सीईओ
LIC Dividend Check Nirmala Sitharaman Finance Ministry

70वें स्थापना वर्ष में सरकार को मिला बड़ा राजस्व, AGM में मंजूर हुआ लाभांश

 

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) ने केंद्र सरकार को ₹12,207.25 करोड़ का लाभांश (डिविडेंड) सौंपा है। एलआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक आर. दोरईस्वामी ने केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण को यह डिविडेंड चेक सौंपा। यह राशि सरकार की हिस्सेदारी के अनुरूप है, जिसे 27 जुलाई को हुई कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में मंजूरी दी गई थी।

 

सरकार के गैर-कर राजस्व को मिलेगा बड़ा सहारा

 

एलआईसी की ओर से मिला यह लाभांश केंद्र सरकार के गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) को मजबूत करेगा। सरकार एलआईसी की सबसे बड़ी शेयरधारक है, इसलिए कंपनी के मुनाफे का बड़ा हिस्सा लाभांश के रूप में सरकार को प्राप्त होता है।

 

70 साल पूरे होने पर मजबूत वित्तीय स्थिति

 

एलआईसी इस वर्ष अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रही है। कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक उसका कुल एसेट बेस ₹59.03 लाख करोड़ रहा, जिससे वह भारतीय जीवन बीमा बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है।

 

निवेशकों और बाजार की नजर आगे के प्रदर्शन पर

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को मिला यह बड़ा लाभांश एलआईसी की मजबूत वित्तीय स्थिति और स्थिर मुनाफे का संकेत है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों और भविष्य की विकास रणनीति पर रहेगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Gold and silver prices on July 30, 2026, with 24K gold at ₹14,350 per gram and silver above ₹2.34 lakh per kilogram
Gold Silver Rate Today: 30 जुलाई को फिर बदले सोने-चांदी के भाव, 24 कैरेट ₹14,350 और चांदी ₹2.34 लाख के पार

नई दिल्ली: अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले 30 जुलाई 2026 के ताजा भाव जरूर जान लें। घरेलू बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में मामूली नरमी देखने को मिली है। 24 कैरेट सोना ₹14,350 प्रति ग्राम, जबकि चांदी ₹2,34,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों कीमती धातुओं में तेजी का रुख देखने को मिला। घरेलू बाजार में सोने की कीमत में पिछले क्लोजिंग के मुकाबले ₹1 प्रति ग्राम और चांदी में ₹100 प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। 24, 22 और 18 कैरेट सोने का आज का भाव 30 जुलाई को 24 कैरेट सोना ₹14,350 प्रति ग्राम, 22 कैरेट ₹13,154 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना ₹10,762 प्रति ग्राम पर है। शुद्धता आज का भाव कल का भाव बदलाव 24 कैरेट, 1 ग्राम ₹14,350 ₹14,351 -₹1 22 कैरेट, 1 ग्राम ₹13,154 ₹13,155 -₹1 18 कैरेट, 1 ग्राम ₹10,762 ₹10,763 -₹1 यानी तीनों प्रमुख कैटेगरी में सोने की कीमत में केवल ₹1 प्रति ग्राम की मामूली गिरावट आई है। पटना से दिल्ली तक सोने के भाव प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत की बात करें तो पटना में यह ₹14,355 प्रति ग्राम और लखनऊ व दिल्ली में ₹14,365 प्रति ग्राम है। रांची, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भाव ₹14,350 प्रति ग्राम दर्ज किया गया है। शहर 24 कैरेट सोना, 1 ग्राम पटना ₹14,355 लखनऊ ₹14,365 रांची ₹14,350 दिल्ली ₹14,365 मुंबई ₹14,350 कोलकाता ₹14,350 चेन्नई ₹14,350 बेंगलुरु ₹14,350 चांदी का भाव भी थोड़ा फिसला चांदी की कीमत में भी आज मामूली गिरावट दर्ज की गई। 1 ग्राम चांदी का भाव ₹234.90, जबकि 1 किलोग्राम चांदी ₹2,34,900 पर है। पिछले दिन के मुकाबले इसमें ₹100 प्रति किलोग्राम की कमी आई है। मात्रा आज का भाव कल का भाव बदलाव 1 ग्राम ₹234.90 ₹235.00 -₹0.10 1 किलोग्राम ₹2,34,900 ₹2,35,000 -₹100 प्रमुख शहरों में चांदी की कीमत पटना, लखनऊ, रांची, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में 1 किलो चांदी का भाव ₹2,34,900 है। कोलकाता में यह थोड़ा कम होकर ₹2,34,800 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों बढ़ी कीमत? अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी के पीछे कई वैश्विक कारक बताए जा रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किए जाने के बाद निवेशकों की नजर अब अमेरिका के PCE महंगाई आंकड़ों पर है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव और मिस्र में गैस टैंकर पर हमले की खबरों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी। इससे COMEX पर सोने की कीमत करीब 1.23% और चांदी की कीमत करीब 1.10% तक बढ़ी। वैश्विक बाजार की यह तेजी आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय बुलियन मार्केट को भी प्रभावित कर सकती है। खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान सोने-चांदी के ऊपर दिए गए भाव शुरुआती अपडेट और पिछले क्लोजिंग सेशन के आधार पर हैं। ज्वेलरी खरीदते समय वास्तविक कीमत में मेकिंग चार्ज, GST और ज्वेलर के अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से अंतिम कीमत और शुद्धता की पुष्टि जरूर करें।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Banks collected ₹7,100 crore in minimum average balance penalties, with HDFC Bank leading the list

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E20 petrol concerns for older BS-III vehicles as rubber parts and gaskets may need replacement
E20 Petrol: पुरानी गाड़ियों के लिए बढ़ी चिंता, BS-III वाहनों के रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं; संसद में गडकरी ने दी जानकारी

नई दिल्ली: E20 पेट्रोल को लेकर देश में जारी बहस के बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में पुराने वाहनों से जुड़ी एक अहम जानकारी दी है। सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से वाहनों की कुल परफॉर्मेंस पर कोई बड़ा नकारात्मक असर सामने नहीं आया है, लेकिन 2005 से 2016 के बीच बने कुछ BS-III वाहनों में ईंधन के संपर्क में आने वाले रबर पार्ट्स और गैस्केट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। E20 पेट्रोल पर क्या बोले नितिन गडकरी? राज्यसभा में सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने बताया कि E20 फ्यूल को लेकर इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, SIAM और ARAI समेत संबंधित संस्थानों की स्टडीज की गई हैं। इन अध्ययनों के मुताबिक E20 के इस्तेमाल से वाहनों की ड्राइविंग क्षमता, स्टार्ट होने की क्षमता और समग्र प्रदर्शन में कोई बड़ा असामान्य बदलाव सामने नहीं आया। सरकार के मुताबिक BS-VI वाहनों को E20 के साथ टेस्ट करने पर वे निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा करते हैं और कार या दोपहिया वाहनों के इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पाई गई। पुराने BS-III वाहनों के लिए क्या है चिंता? सबसे महत्वपूर्ण बात पुराने BS-III वाहनों को लेकर सामने आई है। गडकरी के मुताबिक 2005 से 2016 के बीच बने कुछ BS-III वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के दौरान कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि E20 इस्तेमाल करते ही हर पुरानी गाड़ी का इंजन खराब हो जाएगा। चिंता मुख्य रूप से उन कंपोनेंट्स को लेकर है जो लंबे समय तक ईंधन के संपर्क में रहते हैं। इनमें रबर आधारित सील, गैस्केट और अन्य फ्यूल-सिस्टम पार्ट्स शामिल हो सकते हैं। ARAI की रिपोर्ट ने भी उठाए थे सवाल E20 को लेकर पहले सामने आई ARAI की एक रिपोर्ट में भी E10-कंपैटिबल वाहनों के फ्यूल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले कुछ रबर कंपोनेंट्स के लंबे समय तक E20 के संपर्क में रहने पर खराब होने की संभावना जताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार होज, गैस्केट, सील और O-rings जैसे पार्ट्स को समय के साथ बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस अध्ययन में धातु के कंपोनेंट्स पर E20 का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया था। क्या E20 से माइलेज कम हो रहा है? E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों की सबसे बड़ी शिकायतों में माइलेज कम होना भी शामिल है। सरकार ने हालांकि माइलेज में बदलाव को केवल E20 से जोड़ने से बचते हुए कई दूसरे कारणों का भी उल्लेख किया है। ड्राइविंग स्टाइल, वाहन का रखरखाव, इंजन ऑयल और एयर फिल्टर की स्थिति, टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और AC के इस्तेमाल जैसी चीजें भी ईंधन दक्षता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी वाहन का माइलेज कम होने पर केवल पेट्रोल के ब्लेंड को जिम्मेदार मानने के बजाय वाहन की पूरी स्थिति की जांच करना जरूरी है। नई और पुरानी गाड़ियों में क्या फर्क है? E20 के मामले में सबसे अहम अंतर वाहन की उम्र और उसकी फ्यूल-कंपैटिबिलिटी का है। नई पीढ़ी के E20-कंपैटिबल वाहनों को इस तरह के ईंधन के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जबकि पुराने वाहनों में इस्तेमाल सामग्री और फ्यूल सिस्टम अलग हो सकते हैं। इसी वजह से पुराने BS-III या E10-कंपैटिबल वाहन मालिकों को अपने वाहन के फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स, सील और गैस्केट की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। E20 विवाद में सामने आया नया सवाल E20 पेट्रोल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार की बड़ी वजह पेट्रोल में घरेलू एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और उत्सर्जन से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है। सरकार ने हाल में भी E20 की सुरक्षा और प्रदर्शन को लेकर वैज्ञानिक परीक्षणों का हवाला दिया है। लेकिन पुराने वाहनों के रबर कंपोनेंट्स को लेकर सामने आई चिंता ने बहस को एक नया आयाम दे दिया है। अब सवाल सिर्फ इंजन की परफॉर्मेंस या माइलेज का नहीं, बल्कि लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान फ्यूल-सिस्टम पार्ट्स की टिकाऊ क्षमता का भी है। इसलिए वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी गाड़ी की मैन्युफैक्चरिंग ईयर, BS नॉर्म्स और निर्माता की E20-कंपैटिबिलिटी जानकारी को ध्यान में रखें। किसी भी तरह की खराबी या फ्यूल सिस्टम में असामान्य लक्षण दिखने पर अधिकृत सर्विस सेंटर से जांच कराना बेहतर होगा।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ₹12,207 करोड़ का लाभांश चेक सौंपते एलआईसी के सीईओ
LIC ने सरकार को सौंपा ₹12,207 करोड़ का लाभांश, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी डिविडेंड की राशि

70वें स्थापना वर्ष में सरकार को मिला बड़ा राजस्व, AGM में मंजूर हुआ लाभांश   नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) ने केंद्र सरकार को ₹12,207.25 करोड़ का लाभांश (डिविडेंड) सौंपा है। एलआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक आर. दोरईस्वामी ने केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण को यह डिविडेंड चेक सौंपा। यह राशि सरकार की हिस्सेदारी के अनुरूप है, जिसे 27 जुलाई को हुई कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में मंजूरी दी गई थी।   सरकार के गैर-कर राजस्व को मिलेगा बड़ा सहारा   एलआईसी की ओर से मिला यह लाभांश केंद्र सरकार के गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) को मजबूत करेगा। सरकार एलआईसी की सबसे बड़ी शेयरधारक है, इसलिए कंपनी के मुनाफे का बड़ा हिस्सा लाभांश के रूप में सरकार को प्राप्त होता है।   70 साल पूरे होने पर मजबूत वित्तीय स्थिति   एलआईसी इस वर्ष अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रही है। कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक उसका कुल एसेट बेस ₹59.03 लाख करोड़ रहा, जिससे वह भारतीय जीवन बीमा बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है।   निवेशकों और बाजार की नजर आगे के प्रदर्शन पर   विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को मिला यह बड़ा लाभांश एलआईसी की मजबूत वित्तीय स्थिति और स्थिर मुनाफे का संकेत है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों और भविष्य की विकास रणनीति पर रहेगी।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
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