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Kant Questions Cuts in Tourism Promotion Budget

Tourism Revenue: पर्यटन प्रचार बजट में कटौती से भारत को अरबों डॉलर का नुकसान, अमिताभ कांत ने उठाए सवाल

surbhi जून 9, 2026 0
Amitabh Kant speaking about tourism policy and foreign visitor revenue in India.
Amitabh Kant Raises Concerns Over Tourism Budget Cuts

नई दिल्ली: नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भारत की विदेशी पर्यटन नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि विदेशों में पर्यटन प्रचार (टूरिज्म मार्केटिंग) के बजट में भारी कटौती करने से भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। उनके मुताबिक इस फैसले का सीधा असर विदेशी पर्यटकों की संख्या पर पड़ा और देश अरबों डॉलर के संभावित राजस्व से वंचित रह गया।

इकोनॉमिक टाइम्स में लिखे अपने लेख में अमिताभ कांत ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में पर्यटन ऐसा क्षेत्र है, जो विदेशी मुद्रा अर्जित करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने का सबसे तेज माध्यम बन सकता है।

2019 के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाया भारत

अमिताभ कांत के अनुसार पिछले चार वर्षों में भारत का विदेशी पर्यटन मार्केटिंग बजट लगभग समाप्त कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में भारत में करीब 99 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे, जो कोविड-19 महामारी से पहले वर्ष 2019 के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कम है।

उन्होंने दावा किया कि भारत के कई प्रतिस्पर्धी देश महामारी से पहले के स्तर को पार कर चुके हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

एक विदेशी पर्यटक से मिलता है ज्यादा आर्थिक लाभ

कांत के अनुसार एक विदेशी पर्यटक भारत की जीडीपी में औसतन 3,000 डॉलर (करीब 2.87 लाख रुपये) का योगदान देता है, जबकि एक घरेलू पर्यटक का योगदान केवल 75 डॉलर (करीब 7,000 रुपये) के आसपास होता है।

उन्होंने कहा कि यदि भारत विदेशी पर्यटन प्रचार पर 200 मिलियन डॉलर का निवेश करे, तो लगभग 10 लाख अतिरिक्त विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।

इससे—

  • 3.6 अरब डॉलर की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होगी।
  • लगभग 400 मिलियन डॉलर का GST संग्रह होगा।
  • करीब 2.83 लाख नए रोजगार पैदा होंगे।

अमिताभ कांत के मुताबिक मार्केटिंग पर खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर पर लगभग 18 गुना रिटर्न प्राप्त हो सकता है।

दूसरे देशों के उदाहरण भी दिए

अपने लेख में उन्होंने कई देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन प्रचार में निवेश बढ़ाने से वहां विदेशी पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में तेजी आई।

मलेशिया

  • मार्केटिंग बजट: 7 करोड़ डॉलर
  • विदेशी पर्यटक: 31% वृद्धि के साथ 2.73 करोड़
  • राजस्व: 22 अरब डॉलर

थाईलैंड

  • मार्केटिंग बजट: 12 करोड़ डॉलर
  • विदेशी पर्यटक: 26% वृद्धि के साथ 3.55 करोड़
  • राजस्व: 48 अरब डॉलर

ब्राजील

  • मार्केटिंग खर्च: 9 करोड़ डॉलर
  • विदेशी पर्यटकों में 22% की वृद्धि

सऊदी अरब

  • लगभग 3 करोड़ अतिरिक्त पर्यटक
  • 41 अरब डॉलर का राजस्व

अमेरिका

  • Brand USA अभियान के तहत 24 करोड़ डॉलर का निवेश
  • हर एक डॉलर पर लगभग 25 डॉलर का रिटर्न

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारत की मौजूदगी कमजोर

अमिताभ कांत ने कहा कि आज वैश्विक पर्यटन उद्योग सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल कंटेंट पर आधारित हो चुका है, लेकिन भारत इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देता है।

उन्होंने बताया कि "Incredible India" के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉलोअर्स तो हैं, लेकिन एंगेजमेंट काफी कम है। इसके मुकाबले कई अन्य देश डिजिटल प्रचार के जरिए करोड़ों लोगों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।

क्या दिए सुझाव?

अमिताभ कांत ने पर्यटन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव दिए—

  • होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए नियमों को सरल बनाया जाए।
  • मल्टीपल लाइसेंस व्यवस्था की जगह यूनिफाइड लाइसेंस सिस्टम लागू किया जाए।
  • ऑटोमैटिक रिन्यूअल व्यवस्था शुरू की जाए।
  • ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को रणनीतिक साझेदार माना जाए।

उनका मानना है कि किसी वास्तविक यात्री का अनुभव साझा करने वाला वीडियो, पारंपरिक सरकारी विज्ञापनों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित होता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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110 अरब डॉलर की मेगा डील को अमेरिकी मंजूरी, पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स विलय के रास्ते की बड़ी बाधा दूर

अमेरिकी न्याय विभाग ने दी हरी झंडी, मनोरंजन उद्योग में होगा बड़ा बदलाव अमेरिका के मनोरंजन जगत में एक ऐतिहासिक बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने पैरामाउंट स्काइडांस द्वारा वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के 110 अरब डॉलर के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। करीब आठ महीने तक चली विस्तृत जांच के बाद विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि यह सौदा प्रतिस्पर्धा को कमजोर करने के बजाय और मजबूत करेगा। इस फैसले के बाद दुनिया के सबसे बड़े मीडिया और मनोरंजन समूहों में से एक बनने की दिशा में यह डील तेजी से आगे बढ़ सकती है। आठ महीने तक हुई जांच, लाखों दस्तावेजों की समीक्षा न्याय विभाग के एंटीट्रस्ट डिवीजन ने बताया कि इस विलय के संभावित प्रभावों का आकलन करने के लिए 80 से अधिक स्रोतों से जानकारी जुटाई गई और 20 लाख से ज्यादा दस्तावेजों की समीक्षा की गई। जांच में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, पारंपरिक टेलीविजन नेटवर्क, फिल्म उद्योग और डिजिटल मीडिया क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया गया। विभाग का मानना है कि यह विलय उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और पूरे मनोरंजन उद्योग के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। स्ट्रीमिंग बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा डीओजे के अनुसार, पैरामाउंट+ और HBO Max के एक साथ आने से स्ट्रीमिंग बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी उभरेगा, जो मौजूदा दिग्गज कंपनियों को कड़ी चुनौती दे सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विलय से कंटेंट निर्माण, तकनीकी निवेश और दर्शकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प और गुणवत्तापूर्ण कंटेंट मिलने की संभावना बढ़ेगी। टीवी और फिल्म कारोबार पर भी सकारात्मक असर रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक टेलीविजन क्षेत्र में पहले से ही खेल, समाचार और मनोरंजन कंटेंट को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा मौजूद है। ऐसे में यह विलय बाजार में एकाधिकार की स्थिति पैदा नहीं करेगा। फिल्म उद्योग को लेकर भी विभाग ने सकारात्मक राय दी है। उसका कहना है कि वार्नर ब्रदर्स और पैरामाउंट को न केवल पारंपरिक हॉलीवुड स्टूडियो से बल्कि नई कंपनियों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से भी चुनौती मिल रही है। इसलिए यह सौदा प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों को लेकर उठे सवाल हालांकि इस डील पर अभी एक और महत्वपूर्ण मंजूरी बाकी है। अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) को उन विदेशी निवेशकों की भागीदारी पर फैसला लेना है, जिनमें सऊदी अरब, कतर और अबू धाबी के संप्रभु संपत्ति कोष शामिल हैं। कुछ अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है कि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विदेशी निवेशकों को केवल गैर-मताधिकार (Non-Voting) शेयर दिए जाएंगे और संपादकीय फैसलों में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। हॉलीवुड में बढ़ी चिंता जहां एक तरफ निवेशक और कंपनी प्रबंधन इस सौदे का स्वागत कर रहे हैं, वहीं हॉलीवुड के कई अभिनेता, निर्देशक, लेखक और निर्माता इसे लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि इतनी बड़ी मीडिया कंपनियों के विलय से रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं और कंटेंट में विविधता पर असर पड़ सकता है। कई रचनात्मक पेशेवरों ने आशंका जताई है कि बड़े कॉरपोरेट ढांचे में छोटे और प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है। राज्यों की कानूनी चुनौती अभी बाकी हालांकि संघीय स्तर पर मंजूरी मिल गई है, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क समेत कुछ अमेरिकी राज्य इस डील को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल ने संकेत दिया है कि उनके कार्यालय की जांच अभी जारी है और भविष्य में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मनोरंजन उद्योग की सबसे बड़ी डील्स में शामिल 110 अरब डॉलर का यह सौदा हाल के वर्षों की सबसे बड़ी मीडिया डील्स में से एक माना जा रहा है। यदि सभी नियामकीय मंजूरियां मिल जाती हैं, तो नई कंपनी स्ट्रीमिंग, टीवी और फिल्म उद्योग में वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली खिलाड़ी बनकर उभरेगी।  

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Gold and silver coins and bars representing falling precious metal prices in global market.
Gold Silver Price Today: गिरते-गिरते छह महीने के निचले स्तर पर पहुंचा सोना, चांदी भी हुई सस्ती

नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। गुरुवार, 11 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं घरेलू बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है स्थिति? स्पॉट गोल्ड कारोबार के दौरान 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोने की कीमत 0.2 फीसदी गिरकर 4,063.87 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि स्पॉट सिल्वर 0.9 फीसदी की गिरावट के साथ 63.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। एमसीएक्स पर सोना और चांदी घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम से फिसलकर 1,46,444 रुपये तक पहुंच गया। 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2,35,505 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,30,493 रुपये तक आ गई। प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 मुंबई ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 कोलकाता ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 चेन्नई ₹1,47,280 ₹1,35,000 ₹1,13,100 लखनऊ ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 पटना ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,380 जयपुर ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 भोपाल ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,280 सर्राफा बाजार में भी बड़ी गिरावट गुड रिटर्न्स के अनुसार, 24 कैरेट सोना ₹2,130 सस्ता होकर ₹1,45,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 22 कैरेट सोने में ₹1,950 की गिरावट आई और इसका भाव ₹1,33,500 प्रति 10 ग्राम रह गया। 18 कैरेट सोना ₹1,600 टूटकर ₹1,09,230 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी का भाव करीब ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। सोने और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट से खरीदारों को राहत मिल सकती है। हालांकि निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है।  

surbhi जून 11, 2026 0
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Gold - Silver Price Today

Gold-Silver Price Today: सोना और चांदी हुए सस्ते

Sensex Nifty Update

शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक गिरा, निफ्टी 23150 से नीचे

Share Market News
मामूली बढ़त के साथ बंद  हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां।  घरेलू शेयर बाजार में बुधवार का कारोबार सुस्त और मिला-जुला रुख लेकर बंद हुआ। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक अलग-अलग दिशा में बंद हुए, जहां सेंसेक्स ने मामूली बढ़त दर्ज की, वहीं निफ्टी दबाव में लाल निशान पर बंद हुआ।   सेंसेक्स में 64 अंकों की बढ़त बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 64.42 अंकों की हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ। यह 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,983.18 के स्तर पर स्थिर रहा। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने मामूली बढ़त के साथ निवेशकों को सीमित राहत दी।   निफ्टी में गिरावट, लाल निशान में बंद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स कमजोर रुख के साथ बंद हुआ। यह 27.15 अंकों की गिरावट यानी 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,214.95 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में दिनभर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह लाल निशान में फिसल गया।   प्रमुख शेयरों में मिला-जुला प्रदर्शन बाजार में सेक्टोरल और स्टॉक आधारित मूवमेंट देखने को मिला। एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी एचयूएल के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसने बाजार को कुछ सहारा दिया। वहीं, मेटल सेक्टर की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को के शेयरों में 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ।   रुपये में मजबूती विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। रुपया 14 पैसे की बढ़त के साथ डॉलर के मुकाबले 95.27 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व बैंक की संभावित हस्तक्षेप नीति ने रुपये को सपोर्ट दिया।   बाजार में सतर्कता का माहौल कुल मिलाकर, बाजार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा। सेंसेक्स की मामूली बढ़त और निफ्टी की गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में चुनिंदा खरीदारी और बिकवाली का दबाव समान रूप से बना रहा।

abhishek singh जून 10, 2026 0
Stock Market

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