Rajasthani Dhokla Kadhi Recipe: अगर आप रोज-रोज एक जैसा खाना खाकर बोर हो चुके हैं और कुछ नया, स्वादिष्ट व पौष्टिक ट्राई करना चाहते हैं, तो राजस्थान की पारंपरिक ढोकला कढ़ी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। देखने में यह ढोकले बिल्कुल बाटी जैसे लगते हैं, लेकिन इन्हें गेहूं का आटा, बेसन, लौकी और देसी मसालों से तैयार कर भाप में पकाया जाता है। जब इन नरम ढोकलों को गरमा-गरम मसालेदार कढ़ी के साथ परोसा जाता है, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।
यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर माना जाता है। खास बात यह है कि इसे घर पर बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है।
राजस्थान का पारंपरिक भोजन अपने अनोखे स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है। दाल-बाटी-चूरमा की तरह ढोकला कढ़ी भी कई घरों में पसंद की जाती है। इसमें लौकी, बेसन और गेहूं के आटे का उपयोग होने के कारण यह फाइबर, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत मानी जाती है।
तैयारी का समय: 20 मिनट
पकाने का समय: 25 मिनट
कुल समय: लगभग 45 मिनट
सर्विंग: 4–5 लोग
एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, बेसन और कद्दूकस की हुई लौकी डालें। इसमें प्याज, लहसुन, हरी मिर्च और सभी मसाले मिलाएं। फिर मोयन के लिए तेल और मीठा सोडा डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।
लौकी अपने आप पानी छोड़ती है, इसलिए शुरुआत में पानी न डालें। जरूरत महसूस होने पर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर मध्यम सख्त आटा तैयार करें।
छोटी-छोटी लोइयां बनाकर हल्का चपटा करें और बीच में उंगली से एक छेद बना दें। इससे ढोकले अंदर तक अच्छी तरह पकते हैं।
स्टीमर या कढ़ाही में पानी गर्म करें। जाली पर हल्का तेल लगाकर ढोकले रखें और ढक्कन बंद करके लगभग 20–22 मिनट तक मध्यम आंच पर स्टीम करें।
ढोकले तैयार होने पर ऊपर थोड़ा देसी घी डालें और गरमा-गरम कढ़ी, प्याज व हरी मिर्च के साथ सर्व करें।
मानसून के दौरान लोग गरम और हल्का भोजन पसंद करते हैं। गरमा-गरम कढ़ी शरीर को आराम देने का काम करती है, जबकि स्टीम्ड ढोकले हल्के होने के कारण आसानी से पच सकते हैं। लौकी, बेसन और मसालों का संतुलित मिश्रण इसे बारिश के मौसम के लिए स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प बनाता है।
ध्यान दें: यदि आपको ग्लूटेन एलर्जी, बेसन से एलर्जी या किसी विशेष डाइट का पालन करना है, तो इस रेसिपी में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दही भारतीय रसोई का ऐसा सुपरफूड है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना माना जाता है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल रायता, लस्सी और कढ़ी बनाने में किया जाता है, लेकिन इससे कई स्वादिष्ट स्नैक्स भी तैयार किए जा सकते हैं। अगर अचानक मेहमान आ जाएं या शाम की चाय के साथ कुछ अलग खाने का मन हो, तो दही से बनी रेसिपीज़ बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं। दही ब्रेड रोल दही में बारीक कटी सब्जियां, पनीर, काली मिर्च और चाट मसाला मिलाकर स्टफिंग तैयार करें। इसे ब्रेड में भरकर हल्का तेल लगाकर तवे या एयर फ्रायर में सेंक लें। यह स्नैक चाय के साथ और बच्चों के टिफिन के लिए शानदार विकल्प है। दही सूजी टिक्की सूजी, दही और बारीक कटी सब्जियों को मसालों के साथ मिलाकर गाढ़ा मिश्रण तैयार करें। छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर नॉन-स्टिक तवे पर हल्के तेल में सेंक लें। यह हल्का और पौष्टिक शाम का नाश्ता है। दही सैंडविच दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा, गाजर, शिमला मिर्च, नमक, काली मिर्च और हर्ब्स मिलाकर स्प्रेड तैयार करें। इसे ब्राउन ब्रेड पर लगाकर टोस्ट करें या बिना टोस्ट किए परोसें। यह हल्का और पौष्टिक स्नैक है। दही आलू चाट उबले हुए आलू पर फेंटा हुआ दही डालें और ऊपर से हरी चटनी, इमली की चटनी, भुना जीरा, लाल मिर्च, चाट मसाला, अनार के दाने और सेव डालकर परोसें। यह स्वाद और रंग दोनों में शानदार होती है। दही ओट्स कटलेट ओट्स, दही, उबली सब्जियां और मसालों को मिलाकर कटलेट तैयार करें। इन्हें कम तेल में तवे पर सेंकें या एयर फ्रायर में पकाएं। यह हेल्दी स्नैक फिटनेस पसंद लोगों और बच्चों दोनों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है।
Weight Loss Tips: वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बेस्वाद डाइट की वजह से बार-बार हार मान जाते हैं? अगर हां, तो लौकी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। ज्यादातर लोग लौकी का नाम सुनते ही मुंह बना लेते हैं, लेकिन सही तरीके से बनाई गई लौकी की रेसिपीज न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि वजन घटाने में भी मददगार साबित हो सकती हैं। लौकी में लगभग 92 प्रतिशत पानी, कम कैलोरी और भरपूर फाइबर होता है। यही कारण है कि इसे वेट लॉस डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है। फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की संभावना कम हो सकती है। क्यों फायदेमंद है लौकी? कम कैलोरी और हाई फाइबर लगभग 92% पानी, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद पाचन को बेहतर बनाने में सहायक हेल्दी वेट मैनेजमेंट में मददगार 1. लौकी का चीला तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी ½ कप बेसन ¼ चम्मच हल्दी ½ चम्मच अजवाइन 1 बारीक कटी हरी मिर्च स्वादानुसार नमक थोड़ा पानी 1 चम्मच तेल बनाने की विधि कद्दूकस की हुई लौकी में बेसन, हल्दी, अजवाइन, हरी मिर्च और नमक मिलाएं। जरूरत अनुसार पानी डालकर गाढ़ा बैटर तैयार करें। तवे पर हल्का तेल लगाकर बैटर फैलाएं और दोनों तरफ सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें। 2. लौकी का रायता तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 8 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी 1 कप ताजा दही ½ चम्मच भुना जीरा पाउडर काला नमक हरा धनिया बनाने की विधि लौकी को हल्का उबालकर ठंडा करें। अब दही में उबली हुई लौकी मिलाएं। ऊपर से भुना जीरा, काला नमक और हरा धनिया डालकर सर्व करें। 3. लौकी का सूप तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कटी हुई लौकी 1 टमाटर 1 छोटा टुकड़ा अदरक 2–3 लहसुन की कलियां काली मिर्च नींबू का रस बनाने की विधि लौकी, टमाटर, अदरक और लहसुन को कुकर में एक सीटी आने तक पकाएं। ठंडा होने पर पीस लें। मिश्रण को उबालें और ऊपर से काली मिर्च व नींबू का रस मिलाकर गर्मागर्म पिएं। 4. जीरा लौकी की सब्जी तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 2 कप कटी हुई लौकी 1 चम्मच जीरा चुटकीभर हींग 1 हरी मिर्च ½ चम्मच हल्दी स्वादानुसार नमक 1 चम्मच तेल या देसी घी बनाने की विधि पैन में तेल या घी गर्म करें। जीरा, हींग और हरी मिर्च का तड़का लगाएं। अब लौकी, हल्दी और नमक डालकर ढक दें। लौकी अपने ही पानी में पक जाएगी। कम मसालों वाली यह सब्जी वेट लॉस डाइट के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। वजन घटाने के लिए रखें ये बातें ध्यान रोजाना संतुलित आहार लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित एक्सरसाइज या वॉक करें। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से बचें। पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें: केवल लौकी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है या विशेष डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
अगर खाना खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन करता है, लेकिन बाजार की अधिक चीनी और घी वाली मिठाइयों से बचना चाहते हैं, तो मूंगदाल बर्फी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। खास बात यह है कि इस रेसिपी में न तो दाल को घंटों भिगोने की जरूरत है और न ही मावा या चाशनी बनाने की। कम समय में तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद के साथ-साथ पौष्टिकता का भी अच्छा संतुलन देती है। यह आसान रेसिपी लोकप्रिय फूड एक्सपर्ट निशा मधुलिका द्वारा साझा की गई है, जिसे घर पर बेहद आसानी से बनाया जा सकता है। भुनी हुई मूंग दाल, ताजी मलाई, केसर और इलायची की खुशबू इस बर्फी को खास स्वाद देती है। मूंगदाल बर्फी बनाने के लिए सामग्री 1 कप मूंग दाल 1 कप ताजी मलाई 15–20 केसर के धागे 1 कप पिसी हुई चीनी 6 छोटी इलायची बारीक कटे बादाम और काजू (गार्निश के लिए) ऐसे बनाएं मूंगदाल बर्फी स्टेप 1: दाल भूनें मूंग दाल को पहले साफ कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें। अब कढ़ाई में मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए हल्का सुनहरा और खुशबूदार होने तक भूनें। स्टेप 2: पाउडर तैयार करें भुनी हुई दाल को पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद मिक्सर में बारीक पीस लें और छलनी से छान लें। स्टेप 3: मिश्रण तैयार करें कढ़ाई में ताजी मलाई गर्म करें। इसमें केसर डालें। अब मूंग दाल का पाउडर मिलाकर अच्छी तरह भूनें। स्टेप 4: मिठास मिलाएं अब इसमें पिसी हुई चीनी और दरदरी कुटी इलायची डालकर लगातार चलाते हुए मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं। स्टेप 5: सेट करें एक ट्रे या प्लेट में हल्का घी लगाएं। तैयार मिश्रण फैलाएं और ऊपर से कटे हुए बादाम व काजू डालकर हल्का दबा दें। स्टेप 6: फ्रिज में रखें करीब 1 घंटे के लिए फ्रिज में सेट होने दें। इसके बाद मनचाहे आकार में काटकर सर्व करें। तैयारी में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 20–25 मिनट सेट होने का समय: 1 घंटा कुल समय: लगभग 1 घंटा 35 मिनट अनुमानित पोषण (प्रति पीस) कैलोरी: लगभग 140–180 kcal प्रोटीन: 4–6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 14–18 ग्राम फैट: 7–10 ग्राम (कैलोरी सामग्री के अनुसार बदल सकती है।) फिटनेस लवर्स कैसे खाएं? यदि आप फिटनेस फ्रीक हैं, तो इस बर्फी का सेवन सीमित मात्रा में करें। एक बार में 1 पीस पर्याप्त है। वर्कआउट के बाद या सुबह स्नैक के रूप में खा सकते हैं। चीनी की मात्रा कम रखें या स्टीविया/एरिथ्रिटोल जैसे स्वीटनर का इस्तेमाल करें। लो-फैट मलाई या कम फैट वाले डेयरी विकल्प चुन सकते हैं। डायबिटीज़ मरीजों के लिए जरूरी सलाह यदि आपको डायबिटीज़ है, तो यह रेसिपी सामान्य चीनी के साथ उपयुक्त नहीं मानी जाती। डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के बाद ही सेवन करें। चीनी की जगह डायबिटिक-फ्रेंडली स्वीटनर का उपयोग करें। छोटी मात्रा (आधा या एक छोटा पीस) ही लें। भोजन के कुल कार्बोहाइड्रेट सेवन का ध्यान रखें। एक्सपर्ट टिप्स दाल को धीमी आंच पर ही भूनें ताकि स्वाद बेहतर आए। मिश्रण को लगातार चलाते रहें, इससे गुठलियां नहीं बनेंगी। सेट होने के बाद ही बर्फी काटें। एयरटाइट कंटेनर में रखकर 4–5 दिन तक फ्रिज में सुरक्षित रख सकते हैं। ध्यान रखें: यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन का अच्छा स्रोत भी है, लेकिन इसमें चीनी और फैट मौजूद होते हैं। इसलिए संतुलित मात्रा में ही सेवन करें।