Tomato Basil Pasta Recipe: अगर आप शाम की हल्की भूख या क्विक डिनर के लिए कुछ स्वादिष्ट, हेल्दी और झटपट बनने वाली डिश ढूंढ रहे हैं, तो टोमैटो बेसिल पास्ता बेहतरीन विकल्प हो सकता है। ताजे टमाटरों की हल्की खटास, भुने हुए लहसुन की खुशबू और तुलसी की ताजगी इस पास्ता को रेस्तरां जैसा फ्लेवर देती है। अच्छी बात यह है कि इसे सिर्फ 15 मिनट में घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।
अगर आपके पास इटैलियन बेसिल उपलब्ध नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं है। कुछ आसान बदलावों के साथ आप भारतीय किचन में मौजूद सामग्री से भी इस रेसिपी का शानदार स्वाद पा सकते हैं।
यह रेसिपी कम समय में तैयार होने के साथ हल्की, स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर मानी जाती है। इसमें ताजे टमाटर, लहसुन, ऑलिव ऑयल और तुलसी का इस्तेमाल होता है, जो इसे फ्रेश और फ्लेवरफुल बनाते हैं।
सबसे पहले पास्ता को नमक वाले पानी में पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार उबाल लें और थोड़ा सा उबला हुआ पानी अलग रख दें।
अब एक पैन में ऑलिव ऑयल गर्म करें और उसमें लहसुन की कलियां डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद कटे हुए टमाटर डालें और धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक वे नरम होकर सॉस जैसी बनावट न ले लें।
भुने हुए लहसुन को हल्का मैश करके दोबारा टमाटर की ग्रेवी में मिला दें। अब इसमें उबला हुआ पास्ता और थोड़ा पास्ता पानी डालकर अच्छी तरह टॉस करें, ताकि सॉस पास्ता पर अच्छी तरह कोट हो जाए।
अंत में कसा हुआ चीज़, ताजी बेसिल की पत्तियां, काली मिर्च और थोड़ा ऑलिव ऑयल डालकर गरमा-गरम सर्व करें।
यदि आपके पास इटैलियन बेसिल उपलब्ध नहीं है, तो इन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है—
ध्यान दें: भारतीय तुलसी का स्वाद इटैलियन बेसिल की तुलना में अधिक तीखा और औषधीय होता है, इसलिए इसकी मात्रा बहुत कम रखें और इसे पकाते समय नहीं बल्कि अंत में डालें।
ध्यान दें: यदि आपको डेयरी, ग्लूटेन या किसी अन्य खाद्य सामग्री से एलर्जी है, तो अपनी जरूरत के अनुसार सामग्री में बदलाव करें या विशेषज्ञ की सलाह लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Tomato Basil Pasta Recipe: अगर आप शाम की हल्की भूख या क्विक डिनर के लिए कुछ स्वादिष्ट, हेल्दी और झटपट बनने वाली डिश ढूंढ रहे हैं, तो टोमैटो बेसिल पास्ता बेहतरीन विकल्प हो सकता है। ताजे टमाटरों की हल्की खटास, भुने हुए लहसुन की खुशबू और तुलसी की ताजगी इस पास्ता को रेस्तरां जैसा फ्लेवर देती है। अच्छी बात यह है कि इसे सिर्फ 15 मिनट में घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। अगर आपके पास इटैलियन बेसिल उपलब्ध नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं है। कुछ आसान बदलावों के साथ आप भारतीय किचन में मौजूद सामग्री से भी इस रेसिपी का शानदार स्वाद पा सकते हैं। क्यों खास है Tomato Basil Pasta? यह रेसिपी कम समय में तैयार होने के साथ हल्की, स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर मानी जाती है। इसमें ताजे टमाटर, लहसुन, ऑलिव ऑयल और तुलसी का इस्तेमाल होता है, जो इसे फ्रेश और फ्लेवरफुल बनाते हैं। तैयारी का समय तैयारी: 5 मिनट पकाने का समय: 10 मिनट कुल समय: 15 मिनट सर्विंग: 2 लोग आवश्यक सामग्री 200 ग्राम पास्ता (स्पेगेटी या पेने) 2 बड़े टमाटर या 12–15 चेरी टमाटर 5–6 लहसुन की कलियां 2 बड़े चम्मच ऑलिव ऑयल 8–10 इटैलियन बेसिल की पत्तियां 2–3 बड़े चम्मच कसा हुआ पार्मेज़न या प्रोसेस्ड चीज़ स्वादानुसार नमक कुटी हुई काली मिर्च पास्ता का थोड़ा उबला हुआ पानी बनाने की आसान विधि सबसे पहले पास्ता को नमक वाले पानी में पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार उबाल लें और थोड़ा सा उबला हुआ पानी अलग रख दें। अब एक पैन में ऑलिव ऑयल गर्म करें और उसमें लहसुन की कलियां डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद कटे हुए टमाटर डालें और धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक वे नरम होकर सॉस जैसी बनावट न ले लें। भुने हुए लहसुन को हल्का मैश करके दोबारा टमाटर की ग्रेवी में मिला दें। अब इसमें उबला हुआ पास्ता और थोड़ा पास्ता पानी डालकर अच्छी तरह टॉस करें, ताकि सॉस पास्ता पर अच्छी तरह कोट हो जाए। अंत में कसा हुआ चीज़, ताजी बेसिल की पत्तियां, काली मिर्च और थोड़ा ऑलिव ऑयल डालकर गरमा-गरम सर्व करें। अगर Italian Basil न मिले तो क्या करें? यदि आपके पास इटैलियन बेसिल उपलब्ध नहीं है, तो इन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है— भारतीय तुलसी की 2–3 पत्तियां बारीक काटकर केवल गार्निशिंग में डालें। ताजा धनिया और थोड़ी पुदीना पत्तियां मिलाकर फ्रेश फ्लेवर दें। सूखी ओरेगानो और थोड़ी कसूरी मेथी का हल्का मिश्रण भी स्वाद बढ़ा सकता है। घर में उगाई गई स्वीट बेसिल उपलब्ध हो तो वही सबसे अच्छा विकल्प है। ध्यान दें: भारतीय तुलसी का स्वाद इटैलियन बेसिल की तुलना में अधिक तीखा और औषधीय होता है, इसलिए इसकी मात्रा बहुत कम रखें और इसे पकाते समय नहीं बल्कि अंत में डालें। इसे और हेल्दी कैसे बनाएं? मैदा पास्ता की जगह होल व्हीट या मल्टीग्रेन पास्ता चुनें। ज्यादा चीज़ की बजाय लो-फैट चीज़ का इस्तेमाल करें। इसमें शिमला मिर्च, पालक, मशरूम, ब्रोकली या कॉर्न जैसी सब्जियां मिलाएं। प्रोटीन बढ़ाने के लिए उबले चने, राजमा, टोफू या ग्रिल्ड पनीर भी डाल सकते हैं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 350–420 kcal प्रोटीन: 12–15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 48–55 ग्राम फैट: 10–14 ग्राम फाइबर: 5–7 ग्राम ध्यान दें: यदि आपको डेयरी, ग्लूटेन या किसी अन्य खाद्य सामग्री से एलर्जी है, तो अपनी जरूरत के अनुसार सामग्री में बदलाव करें या विशेषज्ञ की सलाह लें।
High Protein Meal Recipes: जिम जाने वाले लोगों के लिए सिर्फ वर्कआउट करना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही मात्रा में प्रोटीन लेना भी उतना ही जरूरी है। पर्याप्त प्रोटीन मांसपेशियों की रिकवरी, ताकत बढ़ाने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है। यदि आप भी रोजाना की प्रोटीन जरूरत पूरी करने के लिए आसान और हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो यहां दी गई एक शाकाहारी (Vegetarian) और एक नॉन-वेज (Non-Vegetarian) हाई-प्रोटीन रेसिपी आपकी डाइट का हिस्सा बन सकती हैं। ध्यान रखें कि किसी भी एक भोजन से फिटनेस लक्ष्य हासिल नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 1. नॉन-वेज हाई-प्रोटीन चिकन-चना सलाद यह रेसिपी वर्कआउट के बाद के भोजन (Post Workout Meal) के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। सामग्री 2 चिकन ब्रेस्ट (लगभग 350 ग्राम) 400 ग्राम उबले हुए चने 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल 1 नींबू का रस और कद्दूकस किया हुआ छिलका 2 हरे प्याज (बारीक कटे हुए) 10 चेरी टमाटर ¼ खीरा पुदीना और पार्सले 2 बड़े चम्मच ग्रीक योगर्ट या हल्की मेयोनीज मिक्स सलाद पत्तियां नमक और काली मिर्च बनाने की विधि सबसे पहले चिकन ब्रेस्ट पर नमक और काली मिर्च लगाकर ऑलिव ऑयल में अच्छी तरह ग्रिल या पैन-सीयर करें। दूसरी ओर उबले हुए चने, खीरा, चेरी टमाटर, हरा प्याज, पुदीना, पार्सले और नींबू का रस मिलाएं। अब चिकन के स्लाइस काटकर सलाद में मिलाएं और ऊपर से ग्रीक योगर्ट डालकर सर्व करें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) प्रोटीन: लगभग 65–68 ग्राम कैलोरी: लगभग 600–650 kcal 2. वेज हाई-प्रोटीन पनीर-चना पावर बाउल यह रेसिपी शाकाहारी लोगों के लिए शानदार हाई-प्रोटीन विकल्प है। सामग्री 200 ग्राम लो-फैट पनीर 1 कप उबले हुए चने ½ कप उबले सोयाबीन या एडामेम (वैकल्पिक) 1 खीरा 1 टमाटर 1 शिमला मिर्च 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल नींबू का रस भुना जीरा काली मिर्च नमक हरा धनिया बनाने की विधि पनीर को हल्का ग्रिल करें। सभी सब्जियों को काटकर उबले हुए चने और पनीर के साथ मिलाएं। ऊपर से ऑलिव ऑयल, नींबू का रस, भुना जीरा और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह टॉस करें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) प्रोटीन: लगभग 38–45 ग्राम कैलोरी: लगभग 500–580 kcal जिम जाने वालों के लिए हाई-प्रोटीन डाइट टिप्स हर भोजन में प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं। वर्कआउट के 30–60 मिनट के भीतर प्रोटीन युक्त भोजन लें। सफेद ब्रेड और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों से बचें। पर्याप्त नींद और रिकवरी पर भी ध्यान दें। किन लोगों के लिए उपयुक्त? जिम जाने वाले मसल्स गेन करने वाले वेट लॉस डाइट फॉलो करने वाले हाई-प्रोटीन डाइट लेने वाले युवा और वयस्क ध्यान रखें :- यदि आपको किडनी संबंधी बीमारी, लिवर की समस्या या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति के कारण हाई-प्रोटीन डाइट लेने में प्रतिबंध है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह अवश्य लें।
Paneer Nirvana Recipe: अगर आप रोज़ एक जैसी पनीर की सब्जी खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार घर पर रेस्टोरेंट स्टाइल पनीर निर्वाण जरूर बनाएं। नारियल के दूध, करी पत्ता, कच्चे आम और हल्के मसालों से तैयार यह दक्षिण भारतीय डिश स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल है। कम तेल में बनने वाली यह हाई-प्रोटीन रेसिपी लंच, डिनर या वीकेंड स्पेशल मील के लिए शानदार विकल्प है। पनीर निर्वाण दक्षिण भारत की पारंपरिक फिश निर्वाण से प्रेरित एक शाकाहारी डिश है। समय के साथ यह देशभर के कई प्रीमियम रेस्टोरेंट्स में बेहद लोकप्रिय हो चुकी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें पनीर को पहले मसालों में मैरिनेट किया जाता है और फिर नारियल के दूध के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद बेहद क्रीमी और रिच बन जाता है। पनीर निर्वाण की उत्पत्ति इस डिश की प्रेरणा केरल की पारंपरिक फिश निर्वाण रेसिपी से मानी जाती है। नारियल का दूध, केले का पत्ता और करी पत्ता दक्षिण भारतीय व्यंजनों की पहचान हैं, जो इस डिश को खास स्वाद और खुशबू देते हैं। सबसे ज्यादा कहां पसंद की जाती है? केरल तमिलनाडु कर्नाटक भारत के प्रीमियम साउथ इंडियन रेस्टोरेंट्स फाइन डाइनिंग और फ्यूजन रेस्टोरेंट्स आवश्यक सामग्री मैरिनेशन के लिए 200 ग्राम पनीर (मोटे स्लाइस) 1 छोटा चम्मच हल्दी 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच काली मिर्च स्वादानुसार नमक आधे नींबू का रस 1 छोटा चम्मच तेल करी पत्ता पकाने के लिए थोड़ा तेल 1 केला पत्ता ½ कप नारियल का दूध 2 हरी मिर्च 1 इंच अदरक थोड़ा कच्चा आम करी पत्ता 1 छोटा चम्मच काली मिर्च बनाने की आसान विधि स्टेप 1: सभी मसालों में पनीर को मिलाकर 10 मिनट तक मैरिनेट करें। स्टेप 2: हल्के तेल में पनीर को दोनों तरफ से हल्का सुनहरा होने तक सेक लें। स्टेप 3: मिट्टी के बर्तन या पैन में केले का पत्ता बिछाकर पनीर रखें। स्टेप 4: ऊपर से नारियल का दूध, अदरक, हरी मिर्च, कच्चा आम, करी पत्ता और काली मिर्च डालें। स्टेप 5: ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं। स्टेप 6: स्टीम्ड राइस, अप्पम, नीर डोसा या मलाबार परोट्टा के साथ गरमागरम सर्व करें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) कैलोरी: 320–380 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 8–12 ग्राम फैट: 24–28 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा (पोषण सामग्री उपयोग की गई सामग्री के अनुसार बदल सकती है।) तैयार होने में कितना समय लगेगा? तैयारी: 15 मिनट मैरिनेशन: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट कुल समय: लगभग 40 मिनट किन लोगों के लिए है बेहतर? हाई-प्रोटीन डाइट लेने वाले फिटनेस लवर्स शाकाहारी लोग फैमिली लंच और डिनर वीकेंड स्पेशल मील साउथ इंडियन फूड पसंद करने वाले जरूरी टिप्स पनीर को ज्यादा देर तक न पकाएं, इससे वह सख्त हो सकता है। नारियल का दूध हमेशा धीमी आंच पर पकाएं। केले के पत्ते का इस्तेमाल स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाता है। ऊपर से ताजा करी पत्ता और काली मिर्च डालकर सर्व करें। ध्यान रखें: अगर आप लो-फैट डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो लो-फैट पनीर और कम मात्रा में नारियल के दूध का इस्तेमाल करें।