स्वास्थ्य

बरसात में होने वाली 10 आम बीमारियां, लक्षण और बचाव के आसान उपाय

abhishek singh जून 25, 2026 0
Monsoon Diseases
Monsoon Health Diseases

नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान पानी जमा होने, नमी बढ़ने और दूषित भोजन एवं पानी के कारण संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि बरसात में कौन-कौन सी बीमारियां सबसे ज्यादा होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।

 

1. डेंगू  


लक्षण

 

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • आंखों के पीछे दर्द
  • शरीर और जोड़ों में तेज दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते


बचाव

 

  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
  • मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें।
  • पूरे बाजू के कपड़े पहनें।


2. मलेरिया 


लक्षण

 

  • तेज बुखार
  • ठंड लगना
  • कंपकंपी
  • पसीना आना
  • कमजोरी


बचाव

 

  • साफ-सफाई रखें।
  • मच्छरों से बचाव करें।
  • पानी जमा न होने दें।


3. चिकनगुनिया 


लक्षण

 

  • तेज बुखार
  • जोड़ों में असहनीय दर्द
  • सिरदर्द
  • शरीर पर दाने


बचाव

 

  • मच्छरों से बचें।
  • घर और आसपास सफाई रखें।


4. वायरल फीवर


लक्षण

 

  • बुखार
  • गले में दर्द
  • खांसी
  • सिरदर्द
  • कमजोरी


बचाव

 

  • भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलें।
  • पर्याप्त आराम करें।
  • गर्म पानी पिएं।


5. टाइफाइड 


लक्षण

 

  • लगातार बुखार
  • पेट दर्द
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी


बचाव

 

  • केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं।
  • बाहर का दूषित भोजन खाने से बचें।
  • हाथ धोने की आदत रखें।


6. हैजा 


लक्षण

 

  • बार-बार दस्त
  • उल्टी
  • शरीर में पानी की कमी
  • कमजोरी


बचाव

 

  • स्वच्छ पानी पिएं।
  • साफ-सुथरा भोजन करें।
  • ORS का उपयोग करें और समय पर डॉक्टर से मिलें।


7. फूड पॉइजनिंग


लक्षण

 

  • उल्टी
  • दस्त
  • पेट दर्द
  • बुखार


बचाव

 

  • बासी भोजन न खाएं।
  • खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
  • फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं।


8. त्वचा संक्रमण 


लक्षण

 

  • खुजली
  • लाल चकत्ते
  • फंगल इंफेक्शन
  • दाद


बचाव

 

  • शरीर को सूखा रखें।
  • भीगे कपड़े तुरंत बदलें।
  • साफ कपड़े पहनें।


9. आंखों का संक्रमण 


लक्षण

 

  • आंख लाल होना
  • पानी आना
  • जलन
  • खुजली


बचाव

 

  • आंखों को बार-बार न छुएं।
  • साफ तौलिया इस्तेमाल करें।
  • संक्रमित व्यक्ति की चीजें साझा न करें।


10. सर्दी-खांसी और फ्लू


लक्षण

 

  • नाक बहना
  • खांसी
  • गले में दर्द
  • हल्का बुखार


बचाव

 

  • बारिश में भीगने से बचें।
  • गर्म पेय पदार्थ लें।
  • हाथों की सफाई का ध्यान रखें।


बरसात में स्वस्थ रहने के 10 जरूरी टिप्स

  • केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं।
  • बाहर का कटा हुआ फल और स्ट्रीट फूड कम खाएं।
  • बारिश में भीगने के बाद तुरंत नहाकर सूखे कपड़े पहनें।
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
  • मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं।
  • ताजा और गर्म भोजन करें।
  • हाथों को साबुन से बार-बार धोएं।
  • पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम करें।
  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

बुखार, लगातार दस्त, सांस लेने में तकलीफ या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

 

  • छोटे बच्चे
  • गर्भवती महिलाएं
  • बुजुर्ग
  • मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज
  • हृदय रोगी
  • कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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रात में बार-बार खुलती है नींद? हो सकता है दिमाग को नहीं मिल रही पर्याप्त ऑक्सीजन, जानिए स्लीप एपनिया कितना खतरनाक

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग रात में बार-बार नींद टूटने, खर्राटे आने या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करने जैसी समस्याओं से जूझते हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्लीप एपनिया केवल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे दिमाग की कार्यक्षमता, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है। क्या है स्लीप एपनिया? ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय श्वसन मार्ग बार-बार आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है। इसके कारण सांस लेने में रुकावट आती है और व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती रहती है। कई बार मरीज को इसका एहसास भी नहीं होता, लेकिन उसका शरीर पूरी रात इस समस्या से जूझता रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुकावट एक रात में दर्जनों या यहां तक कि सैकड़ों बार भी हो सकती है। दिमाग को कैसे पहुंचता है नुकसान? ऑक्सीजन की कमी बनती है सबसे बड़ा खतरा स्लीप एपनिया के दौरान शरीर और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस स्थिति को "इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया" कहा जाता है। दिमाग को लगातार ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब बार-बार ऑक्सीजन की कमी होती है, तो मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। खासकर वे हिस्से जो याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बिना इलाज वाले स्लीप एपनिया से हिप्पोकैम्पस और फ्रंटल कॉर्टेक्स जैसे महत्वपूर्ण ब्रेन क्षेत्रों में बदलाव हो सकते हैं। याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों में अक्सर ये समस्याएं देखी जाती हैं— चीजें भूलना ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई निर्णय लेने में परेशानी मानसिक प्रतिक्रिया की गति धीमी होना पढ़ाई और काम में प्रदर्शन प्रभावित होना नींद की रिकवरी प्रक्रिया हो जाती है प्रभावित हर बार सांस रुकने पर शरीर हल्की अवस्था में जाग जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में "अराउजल" कहा जाता है। इससे गहरी नींद और REM Sleep बार-बार बाधित होती है। यही वे चरण हैं जिनमें— दिमाग खुद की मरम्मत करता है यादें मजबूत होती हैं भावनात्मक संतुलन बनता है सीखने की क्षमता बेहतर होती है जब ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पातीं, तो व्यक्ति दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और सुस्ती महसूस करता है। बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार स्लीप एपनिया केवल नींद की बीमारी नहीं है, बल्कि यह रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित करता है। बार-बार ऑक्सीजन की कमी और फिर अचानक ऑक्सीजन मिलने की प्रक्रिया से— सूजन बढ़ती है ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता है हृदय रोगों की संभावना बढ़ती है इन सभी कारणों से स्ट्रोक और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। अल्जाइमर और डिमेंशिया से भी जुड़ सकता है संबंध हाल के शोध बताते हैं कि लंबे समय तक अनुपचारित स्लीप एपनिया अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। नींद में लगातार व्यवधान आने से दिमाग में जमा होने वाले हानिकारक प्रोटीन, जैसे बीटा-एमिलॉयड, ठीक तरह से साफ नहीं हो पाते। यही प्रोटीन आगे चलकर डिमेंशिया और अल्जाइमर से जुड़े पाए गए हैं। किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें? यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है— तेज खर्राटे आना रात में बार-बार नींद खुलना सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होना सुबह सिरदर्द होना दिनभर अत्यधिक नींद आना लगातार थकान महसूस होना ध्यान और याददाश्त कमजोर होना क्या है इसका इलाज? अच्छी बात यह है कि स्लीप एपनिया का इलाज संभव है। विशेषज्ञ इसके लिए कई उपाय सुझाते हैं— CPAP (Continuous Positive Airway Pressure) थेरेपी वजन नियंत्रित करना नियमित व्यायाम धूम्रपान और शराब से दूरी ओरल डिवाइस का उपयोग सोने की सही पोजीशन अपनाना समय पर पहचान और उपचार से न केवल नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि दिमाग को होने वाले लंबे समय के नुकसान से भी बचा जा सकता है।  

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क्या आप भी डिनर के बाद रोज खाते हैं आइसक्रीम? बढ़ सकता है ब्लोटिंग और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा

नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में रात के खाने के बाद ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाना कई लोगों की पसंद होती है। कुछ लोग इसे दिनभर की थकान दूर करने का तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए यह डेजर्ट का अहम हिस्सा होती है। लेकिन क्या रोजाना डिनर के बाद आइसक्रीम खाना सेहत के लिए सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन अगर इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए तो इससे पाचन, वजन, ब्लड शुगर और नींद पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। डिनर के बाद आइसक्रीम खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? आइसक्रीम में शुगर, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। जब भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन किया जाता है, तो शरीर को एक साथ ज्यादा फैट और शुगर को पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म दिन की तुलना में थोड़ा धीमा हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर शरीर में जमा होने लगती है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन प्रक्रिया हो सकती है धीमी अगर आपने ऑयली या भारी भोजन किया है और उसके तुरंत बाद आइसक्रीम खा लेते हैं, तो इससे: पेट भारी लगना गैस बनना ब्लोटिंग एसिडिटी पेट दर्द सुस्ती महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैट और शुगर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन को पूरी तरह पचने में अधिक समय लग सकता है। ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर सामान्य आइसक्रीम में मौजूद अधिक शुगर ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए रात में मीठी आइसक्रीम का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। ब्लड शुगर अचानक बढ़ने और फिर गिरने की वजह से: देर रात भूख लगना थकान महसूस होना सुस्ती बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित रात में हाई-फैट और हाई-शुगर फूड खाने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पेट में गैस, एसिडिटी या भारीपन की वजह से नींद बार-बार टूट सकती है। कुछ लोगों में ठंडी चीजें खाने के बाद शरीर की अलर्टनेस भी बढ़ जाती है, जिससे आसानी से नींद नहीं आती। किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? रात में आइसक्रीम खाने से इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: लैक्टोज इनटॉलरेंस से पीड़ित लोग डायबिटीज के मरीज मोटापे से परेशान लोग एसिडिटी या गैस की समस्या वाले लोग कमजोर पाचन वाले लोग क्या पूरी तरह आइसक्रीम छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर के बाद कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन रोजाना और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन पाचन, वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको पहले से डायबिटीज, मोटापा या पाचन संबंधी समस्या है, तो रात में हाई-कैलोरी और अधिक मीठे डेजर्ट से दूरी बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।  

surbhi जून 24, 2026 0
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Red skin rashes and itching after sun exposure indicating possible sun allergy symptoms.
धूप में निकलते ही होने लगती है खुजली और लाल चकत्ते? जानिए कहीं यह सन एलर्जी का संकेत तो नहीं

गर्मी के मौसम में तेज धूप से बचने की सलाह हर किसी को दी जाती है, क्योंकि इससे सनबर्न, टैनिंग और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए धूप सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर त्वचा समस्या का कारण बन जाती है। यदि धूप में निकलते ही आपकी त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, तो यह सन एलर्जी (Sun Allergy) का संकेत हो सकता है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, सन एलर्जी केवल धूप से होने वाली सामान्य परेशानी नहीं है, बल्कि यह शरीर के इम्यून सिस्टम की सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया होती है। इससे त्वचा में सूजन, रैशेज और अन्य लक्षण विकसित हो सकते हैं। क्या होती है सन एलर्जी? सन एलर्जी ऐसी स्थिति है, जिसमें सूर्य की किरणों के संपर्क में आने के बाद त्वचा जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगती है। इसका सबसे सामान्य प्रकार पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (Polymorphous Light Eruption) कहलाता है, जिसमें धूप के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर खुजली वाले लाल दाने दिखाई देते हैं। सन एलर्जी के प्रमुख प्रकार 1. पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (PMLE) यह सन एलर्जी का सबसे आम प्रकार है। इसमें हाथ, गर्दन और छाती जैसे हिस्सों पर खुजली वाले लाल दाने निकल आते हैं। यह समस्या महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है। 2. एक्टिनिक प्रुरिगो इस स्थिति में त्वचा पर अत्यधिक खुजली वाले दाने हो सकते हैं और यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। 3. फोटोएलर्जिक रिएक्शन कुछ सनस्क्रीन, परफ्यूम या स्किनकेयर उत्पाद धूप के साथ मिलकर त्वचा पर एलर्जी पैदा कर सकते हैं। 4. सोलर अर्टिकेरिया (Sun Hives) यह सन एलर्जी का गंभीर रूप है, जिसमें धूप के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों के भीतर त्वचा पर पित्ती या उभरे हुए खुजलीदार निशान दिखाई देने लगते हैं। 5. दवाओं के कारण होने वाली संवेदनशीलता कुछ एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं और मुंहासों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं। किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा? हल्के रंग की त्वचा वाले लोग जिनके परिवार में सन एलर्जी का इतिहास हो कुछ विशेष दवाओं का सेवन करने वाले लोग ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित मरीज सन एलर्जी के सामान्य लक्षण धूप में जाने के बाद खुजली होना त्वचा पर लाल चकत्ते या रैशेज सूजन और जलन छोटे दाने या छाले कुछ मामलों में पित्ती (Hives) ये लक्षण मुख्य रूप से चेहरे, गर्दन, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर दिखाई देते हैं। कब लें डॉक्टर की सलाह? यदि धूप में जाने के बाद बार-बार त्वचा पर रैशेज या एलर्जी की समस्या हो रही है और इससे आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर उपचार और उचित सावधानियों से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय तेज धूप में निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करें। दोपहर की तेज धूप से बचें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें। यदि कोई स्किनकेयर प्रोडक्ट एलर्जी पैदा कर रहा हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें। त्वचा पर धूप के कारण होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से सन एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और त्वचा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
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