स्वास्थ्य

5 Pre-Workout Supplements That Work

Pre-Workout के लिए ये 5 Supplements सच में काम करते हैं (फैंसी चीज़ों से बेहतर)

surbhi मार्च 17, 2026 0
Science-backed pre-workout supplements like Creatine, Caffeine, Beta-Alanine, Citrulline, and EAAs for muscle growth.
Top 5 Effective Pre-Workout Supplements

आजकल मार्केट में हर हफ्ते नया प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट आ जाता है, लेकिन सच यह है कि हर प्रोडक्ट उतना असरदार नहीं होता जितना दावा किया जाता है। अगर आप सच में परफॉर्मेंस, स्ट्रेंथ और मसल्स बढ़ाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए 5 साइंस-बैक्ड सप्लीमेंट्स ज्यादा भरोसेमंद हैं।

 

1. Creatine Monohydrate

  • सबसे ज्यादा रिसर्च किया गया सप्लीमेंट
  • मसल स्ट्रेंथ और साइज बढ़ाने में मददगार
  • शरीर में ATP (एनर्जी) बढ़ाता है
  • भारी वजन उठाने और बेहतर परफॉर्मेंस में मदद

किसके लिए: जो लोग स्ट्रेंथ और मसल्स बनाना चाहते हैं 

2. Caffeine

  • नैचुरल स्टिमुलेंट (कॉफी में भी मिलता है)
  • फोकस, एनर्जी और पावर आउटपुट बढ़ाता है
  • 20–30 मिनट में असर दिखता है

डोज: लगभग 3–6 mg प्रति kg बॉडी वेट
किसके लिए: सुबह वर्कआउट करने वालों के लिए खास फायदेमंद

3. Beta-Alanine

  • मसल्स में थकान देर से लाता है
  • 8–12 रेप्स वाले वर्कआउट (हाइपरट्रॉफी) में मददगार
  • ज्यादा रेप्स करने में मदद

डोज: 4–6 ग्राम रोज
हल्की झनझनाहट (tingling) हो सकती है – नॉर्मल है

4. Citrulline Malate

  • ब्लड फ्लो बढ़ाता है (बेहतर “पंप”)
  • मसल्स तक ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर
  • वर्कआउट के बाद soreness कम करने में मदद

डोज:

  • 6g (एंड्योरेंस)
  • 8g (वेट ट्रेनिंग)

5. Essential Amino Acids

  • मसल ब्रेकडाउन कम करने में मदद
  • खासतौर पर खाली पेट वर्कआउट में उपयोगी

ध्यान रखें:
अगर आपका रोज का प्रोटीन इंटेक सही है, तो EAAs जरूरी नहीं

क्या ध्यान रखें?

  • हर सप्लीमेंट हर व्यक्ति पर अलग असर करता है
  • ओवरडोज से बचें
  • बेसिक्स (डाइट + स्लीप + ट्रेनिंग) सबसे जरूरी हैं
  • सप्लीमेंट सिर्फ “सपोर्ट” हैं, मैजिक नहीं
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

स्वास्थ्य

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30 दिन चीनी छोड़ने पर शरीर में दिख सकते हैं ये बड़े बदलाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में मीठा हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। सुबह की चाय या कॉफी से लेकर दिनभर के स्नैक्स और रात के डेज़र्ट तक, चीनी का सेवन अक्सर हमारी ज़रूरत से कहीं ज्यादा हो जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 30 दिनों के लिए चीनी या अतिरिक्त शुगर का सेवन कम या बंद कर दे, तो उसके शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यही बात विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सीमित समय के लिए शुगर कंट्रोल करने से स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है।   ऊर्जा स्तर में आता है सुधार चीनी छोड़ने के शुरुआती कुछ दिनों में शरीर थोड़ा अलग प्रतिक्रिया दे सकता है। व्यक्ति को थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द या मीठा खाने की तीव्र इच्छा महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर बार-बार मिलने वाली शुगर की आदत का आदी हो चुका होता है। हालांकि, करीब एक हफ्ते बाद शरीर इस बदलाव को स्वीकारने लगता है। ब्लड शुगर लेवल अधिक स्थिर होने लगता है, जिससे दिनभर की सुस्ती कम होती है और ऊर्जा अधिक संतुलित महसूस होती है।   वजन कंट्रोल करने में मिलती है मदद चीनी कम करने का सबसे जल्दी दिखने वाला असर वजन पर पड़ सकता है। अतिरिक्त शुगर अक्सर अनावश्यक कैलोरी के रूप में शरीर में जमा होती है। जब इसे कम किया जाता है, तो कुल कैलोरी सेवन घटता है और शरीर धीरे-धीरे अतिरिक्त फैट को कम करने लगता है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी पर इसका असर देखने को मिल सकता है। यदि इसके साथ संतुलित खानपान और हल्का व्यायाम भी जोड़ा जाए, तो परिणाम और बेहतर हो सकते हैं।   त्वचा दिख सकती है ज्यादा साफ और हेल्दी बहुत अधिक मीठा खाने का असर त्वचा पर भी पड़ता है। इससे स्किन डल दिख सकती है, एक्ने बढ़ सकते हैं और समय से पहले एजिंग के संकेत भी उभर सकते हैं। चीनी कम करने पर शरीर में सूजन कम हो सकती है, जिसका असर चेहरे पर भी दिखाई देता है। कुछ ही हफ्तों में त्वचा ज्यादा साफ, फ्रेश और ग्लोइंग महसूस हो सकती है।   दिल, लिवर और मानसिक स्वास्थ्य को भी फायदा ज्यादा शुगर का सेवन फैटी लिवर, ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने और दिल की बीमारियों के जोखिम से जुड़ा माना जाता है। 30 दिनों तक शुगर से दूरी बनाने पर इन जोखिमों में कमी आ सकती है। साथ ही, मूड स्विंग्स, बेचैनी और खराब नींद जैसी समस्याओं में भी सुधार महसूस हो सकता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में ठंडक और ताजगी के लिए छाछ एक पारंपरिक और हेल्दी विकल्प है। यह दही से बनाई जाती है और हल्के मसालों के मिश्रण से इसे और स्वादिष्ट बनाया जाता है। छाछ केवल ताजगी ही नहीं देती, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी मजबूत करती है और भारी भोजन के बाद इसे पीने से आराम मिलता है। बाजार में मिलने वाली छाछ की तरह स्वादिष्ट और हेल्दी ड्रिंक अब आप घर पर ही मिनटों में तैयार कर सकते हैं।   छाछ बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: • 1 कप दही  • 2 कप ठंडा पानी  • 1/2 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर  • 1/4 छोटा चम्मच काला नमक  • स्वादानुसार नमक  • 5-6 पुदीने की पत्तियां (बारीक कटी)  • 1 हरी मिर्च (बारीक कटी, वैकल्पिक)  • 1 चम्मच धनिया पत्ती (बारीक कटी हुई)    छाछ बनाने की आसान विधि 1. सबसे पहले दही को एक बाउल में अच्छी तरह फेंट लें ताकि यह स्मूद और क्रिमी हो जाए।  2. अब इसमें ठंडा पानी डालकर अच्छे से मिक्स करें। पानी का मात्रा दही के घोल को पतला करने के लिए जरूरी है, जिससे छाछ हल्की और पीने में ताज़गी देने वाली बने।  3. इसके बाद इसमें भुना जीरा पाउडर, काला नमक और स्वादानुसार साधारण नमक डालें। जीरा और काला नमक छाछ को विशेष स्वाद और सुगंध देते हैं।  4. अब इसमें पुदीना, धनिया पत्ती और बारीक कटी हरी मिर्च डालें। यह मसाले और हरी मिर्च स्वाद को बढ़ाते हैं और पेट को ठंडक देते हैं।  5. सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर 5 मिनट के लिए ठंडा होने दें। इससे छाछ का स्वाद और मसालों की खुशबू पूरी तरह मिश्रित हो जाती है।  6. तैयार छाछ को गिलास में डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें।  इस घरेलू मसाला छाछ का फायदा यह है कि यह शरीर को हाइड्रेट रखती है, गर्मी से राहत देती है और पाचन को सुधारती है। इसके अलावा, यह ड्रिंक हेल्दी और बिना किसी एडिटिव के होती है। आप इसे भोजन के बाद या दोपहर की गर्मी में पी सकते हैं। छाछ को घर पर बनाना न केवल आसान है, बल्कि यह आपके परिवार और मेहमानों के लिए भी हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प साबित होता है। यह गर्मियों में ताजगी और ऊर्जा का संचार करती है।

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Early Signs before Serious Illness: रिपोर्ट नॉर्मल, फिर भी थकान? जानें असली वजह

कई लोग दिनभर थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस करते हैं, जबकि मेडिकल चेकअप में सब कुछ नॉर्मल आता है। ऐसे में अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकते हैं। KIMS अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, शरीर अचानक बीमार नहीं होता, बल्कि पहले से ही छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर देता है। इन्हें समय रहते समझना बेहद जरूरी है। ये लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज न करें हर समय थकान और सुस्ती रहना चक्कर आना नींद पूरी न होना बिना कारण शरीर में दर्द ध्यान और सोचने की क्षमता में कमी ये सभी संकेत किसी अंदरूनी समस्या की शुरुआत हो सकते हैं। रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी क्यों होती है परेशानी? ज्यादातर टेस्ट बड़ी बीमारियों को पकड़ने के लिए होते हैं शुरुआती बदलाव जैसे: मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी थायरॉइड असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस पाचन संबंधी समस्या ये शुरुआती स्टेज पर टेस्ट में साफ नहीं दिखते ICMR और NIH के अनुसार, कई बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होती हैं। छिपी हुई आम समस्याएं विटामिन B12 और D की कमी डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) नींद की खराब गुणवत्ता थायरॉइड में हल्के बदलाव  ये छोटी दिखने वाली समस्याएं शरीर की ऊर्जा और मूड पर बड़ा असर डालती हैं। क्या करें? बार-बार टेस्ट नहीं, लाइफस्टाइल सुधारें डॉक्टरों के अनुसार, बार-बार टेस्ट कराने से ज्यादा जरूरी है: पर्याप्त और अच्छी नींद संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम तनाव कम करना साथ ही अपने शरीर के संकेतों को समझें-कब, क्यों और कितनी देर तक लक्षण रहते हैं। कब डॉक्टर से मिलें? अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।  

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