झारखंड

Jharkhand rain to cool heatwave

झारखंड में भीषण गर्मी के बीच राहत की उम्मीद, 24–26 अप्रैल के बीच बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Dark clouds and strong winds over Jharkhand as rain brings relief from extreme heatwave conditions
Jharkhand Weather Rain Heatwave Update

 

झारखंड में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी के बीच अब राहत के संकेत मिल रहे हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में India Meteorological Department (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान ने लोगों को कुछ राहत की उम्मीद दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, 24, 25 और 26 अप्रैल के दौरान राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, आंधी और तेज हवाओं की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आने के आसार हैं।

चार जिलों में लू का अलर्ट जारी
हालांकि राहत के संकेतों के बीच मौसम विभाग ने चार जिलों–दुमका, जामताड़ा, धनबाद और बोकारो–में लू (हीटवेव) को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तापमान काफी ऊंचा रहने की संभावना है, जिससे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।

कई क्षेत्रों में व्यापक बारिश की संभावना
पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 अप्रैल को उत्तर-पूर्वी झारखंड के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। वहीं 25 अप्रैल को उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में भी वर्षा की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि रविवार तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है।

तापमान में धीरे-धीरे आएगी गिरावट
आईएमडी रांची के उप निदेशक अभिषेक आनंद के अनुसार, अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन इसके बाद 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

डाल्टनगंज रहा सबसे गर्म
पिछले 24 घंटों में पलामू के डाल्टनगंज में सबसे अधिक 43.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा जमशेदपुर और चाईबासा में 42.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य में गर्मी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

मौसम का मिला-जुला असर
आने वाले दिनों में झारखंड में मौसम का मिश्रित प्रभाव देखने को मिलेगा। एक ओर लू की स्थिति बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर बारिश और तेज हवाएं राहत देने का काम करेंगी। यह बदलाव खासतौर पर किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे समय-समय पर मौसम अपडेट पर नजर रखें और आवश्यक सावधानियां बरतें, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

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हजारीबाग पुलिस का बड़ा एक्शन, 57 अपराधी एक दिन में गिरफ्तार

हजारीबाग। जिले में अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाते हुए एक ही दिन में 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। नए एसपी अमन कुमार के नेतृत्व में यह विशेष कार्रवाई फरार अपराधियों और वारंटियों के खिलाफ की गई, जिससे अपराध जगत में हड़कंप मच गया है।   छापेमारी के लिए बनाई गईं कई टीमें पुलिस ने 20-21 अप्रैल को जिलेभर में व्यापक अभियान चलाया। इसके लिए 69 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिनमें 253 पुलिस अधिकारी और जवान शामिल थे। इन टीमों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में करीब 200 संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान फरार आरोपियों की धरपकड़ के साथ-साथ कई मामलों में वारंट का निष्पादन भी किया गया।   मनचलों पर भी कड़ी कार्रवाई इसके अलावा 21-22 अप्रैल की रात अड्डेबाजी और मनचलों के खिलाफ भी अलग से अभियान चलाया गया। इस दौरान 50 टीमों ने 122 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें 69 लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें पीआर बांड पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।   118 मामलों का निष्पादन अभियान के दौरान पुलिस ने कुल 118 मामलों का निष्पादन किया, जिसमें वारंट, रिकॉल, जमानत और आत्मसमर्पण से जुड़े मामले शामिल हैं। साथ ही 11 इश्तिहार और कुर्की की कार्रवाई भी पूरी की गई।   अभियान जारी रखने की चेतावनी एसपी अमन कुमार ने साफ कहा है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि अपने आसपास संदिग्ध गतिविधियों या अपराधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। इस कार्रवाई को जिले में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे अपराधियों में डर का माहौल बना है।

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रांची। झारखंड अधिविद्य परिषद् (जैक) ने 10वीं यानी मैट्रिक परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस वर्ष का रिजल्ट न केवल उत्साहजनक रहा है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर राज्य के बढ़ते कदमों की तस्दीक भी करता है। 95.27% छात्र सफल कुल 95.27% छात्र-छात्राओं ने सफलता हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। इस वर्ष के परिणामों की सबसे बड़ी विशेषता प्रथम श्रेणी में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या है। कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में से 2,26,957 छात्र-छात्राओं ने प्रथम श्रेणी प्राप्त किया है। रिजल्ट: फैक्ट फाइल • कुल आवेदित परीक्षार्थी  4,24,001 • परीक्षा में सम्मिलित  4,22,109 • कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी  4,02,178 • प्रथम श्रेणी  2,26,957 • द्वितीय श्रेणी  1,60,673 • तृतीय श्रेणी  14,548 • पास प्रतिशत  95.278%

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ट्रेजरी घोटाले के कारण दो महीने से नहीं मिल रहे वेत, शिक्षकों काला बिल्ला पहनकर कर रहे विरोध

हजारीबाग। जिले में शिक्षकों ने दो महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन किया। ट्रेजरी घोटाले के बाद मार्च से सैलरी बंद होने के कारण शिक्षक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक अपने-अपने स्कूल पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।   समय पर वेतन की मांग तेज शिक्षक संगठनों का कहना है कि मार्च और अप्रैल जैसे महीनों में खर्च अधिक होता है, ऐसे में वेतन नहीं मिलने से उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने प्रशासन से जल्द वेतन भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रेजरी घोटाले से उनका कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है।   सहायक आचार्यों की स्थिति और खराब शिक्षकों के अनुसार, सहायक आचार्यों की नियुक्ति हुए करीब 9 महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनका वेतन शुरू नहीं हुआ है। इससे नए नियुक्त शिक्षक भी आर्थिक रूप से परेशान हैं। संगठनों ने इसे प्रशासन की लापरवाही बताया है।   आंदोलन तेज करने की चेतावनी शिक्षक नेताओं ने कहा कि यदि जल्द वेतन जारी नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। फिलहाल विरोध के पहले चरण में काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन किया गया है।   प्रशासन को दी गई जानकारी इस पूरे मामले की जानकारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है। शिक्षकों को उम्मीद है कि जल्द समाधान निकलेगा, अन्यथा आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकता है।

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