सदियों पुरानी आस्था, हर साल भव्य आयोजन
धनबाद: भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी को लेकर पूरे देश में उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन धनबाद के चिटाही धाम स्थित रामराज मंदिर की अलग ही पहचान है। यहां बीते करीब 100 वर्षों से रामनवमी का पर्व बेहद भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है।
यह मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ पूजा का स्थल नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
चिटाही धाम के रामराज मंदिर का इतिहास काफी पुराना और रोचक है। शुरुआत में यहां एक पेड़ के नीचे भगवान राम की पूजा की जाती थी। धीरे-धीरे लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई और यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया।
बाद में बाघमारा क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधि ढुल्लू महतो के प्रयासों से मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा वर्ष 2019 में हुई, जिसके बाद इसकी प्रसिद्धि और अधिक बढ़ गई।
रामनवमी के दिन मंदिर में भगवान श्रीराम और माता सीता का विशेष शृंगार किया जाता है। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक तरीके से सजाया जाता है, जिससे माहौल भक्तिमय हो उठता है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। दूर-दराज से आने वाले भक्त भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं।
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा ध्वज परिवर्तन है। जहां अन्य जगहों पर रामनवमी के दिन जुलूस या अखाड़ा निकाला जाता है, वहीं यहां विशाल राम ध्वज को बदला जाता है, जो आस्था का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
इसके साथ ही मंदिर परिसर में भव्य महाभंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं और सेवा भाव से जुड़ते हैं।
रामनवमी के इस आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी विशेष भागीदारी होती है। धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो मुख्य यजमान के रूप में शामिल होते हैं।
उनकी उपस्थिति में पूजा-अर्चना संपन्न होती है, जिससे आयोजन को और अधिक भव्य स्वरूप मिलता है।
चिटाही धाम का रामराज मंदिर अब धनबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर साल रामनवमी के मौके पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
यह बढ़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि मंदिर की धार्मिक महत्ता और लोगों की आस्था दिन-ब-दिन मजबूत होती जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। आज मंगलवार की सुबह राजधानी रांची में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य कारण अपनी पहचान, पेंशन, अस्मिता और अन्य लंबित मांगों को लेकर आंदोलनकारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आवास का घेराव करने निकले । हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रशासन ने उन्हें मोहराबादी इलाके में ही रोक दिया, जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र होकर नारेबाजी कर रहे हैं। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए आंदोलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मोहराबादी मैदान से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, डीएसपी, थाना प्रभारियों सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन के अनुसार सुरक्षा के मद्देनजर करीब 600 सुरक्षाकर्मियों को विभिन्न स्थानों पर लगाया गया है। इनमें तीन कंपनियां रैपिड एक्शन पुलिस, एसआईआरबी, जैप और इको बल के जवान शामिल हैं। हथियारबंद जवानों के साथ-साथ लाठी पार्टी भी तैनात की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। ब्रज वाहन, फायर ब्रिगेड वाहन, रंगीन पानी इसके अलावा मोहराबादी मैदान और मुख्यमंत्री आवास के आसपास ब्रज वाहन, फायर ब्रिगेड वाहन, रंगीन पानी के टैंकर और आंसू गैस स्क्वॉड को भी तैयार रखा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों को मोहराबादी क्षेत्र तक सीमित रखना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण कई मार्गों पर आवाजाही भी प्रभावित हुई है। प्रदर्शन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
रांची। झारखंड के चर्चित पूर्व मंत्री और तमाड़ के तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट ने मामले के आरोपी राम मोहन सिंह मुंडा को जमानत दे दी है। अदालत ने उनकी ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में आरोपी पक्ष और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत में आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि वह अब इस मामले में सरकारी गवाह (एप्रूवर) बन चुका है और उसकी गवाही भी पूरी हो चुकी है। साथ ही मुकदमे की सुनवाई अभी जारी है। 2008 में हुई थी पूर्व मंत्री की हत्या यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 65/2008 से जुड़ा हुआ है। 9 जुलाई 2008 को तमाड़ के तत्कालीन विधायक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था। मामले की प्राथमिकी बुंडू थाना में दर्ज की गई थी। एनआईए ने संभाली थी जांच हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई थी। जांच के दौरान एनआईए ने कई अहम साक्ष्य जुटाए और साजिश से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। इसी क्रम में 8 जुलाई 2016 को राम मोहन सिंह मुंडा को गिरफ्तार किया गया था। 2017 में बने सरकारी गवाह मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 23 नवंबर 2017 को एनआईए ने राम मोहन सिंह मुंडा को एप्रूवर घोषित कर दिया। इसके बाद उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया और अदालत में अपनी गवाही भी दर्ज कराई। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी, जबकि राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें मामले के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
बड़कागांव। हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना में काम कर रही सुश्री इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी एक बार फिर अपराधियों के निशाने पर आ गई है। सोमवार देर रात परियोजना क्षेत्र में कंपनी के वाहनों पर फायरिंग की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित प्रेस बयान में कुख्यात राहुल दुबे गैंग ने हमले की जिम्मेदारी ली है और कंपनी प्रबंधन को खुली चेतावनी दी है। जानकारी के अनुसार, सोमवार रात करीब 10 बजे अज्ञात अपराधियों ने परियोजना क्षेत्र में खड़े कंपनी के वाहनों पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद अपराधी मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। हालांकि फायरिंग में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सोशल मीडिया पर जारी बयान से बढ़ी चिंता घटना के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर एक प्रेस बयान वायरल हुआ, जिसमें राहुल दुबे गैंग ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई कंपनी प्रबंधन को चेतावनी देने के उद्देश्य से की गई है। गैंग की ओर से दावा किया गया कि फायरिंग सिर्फ कंपनी अधिकारियों तक संदेश पहुंचाने के लिए की गई। कर्मचारियों को बनाया निशाना बनाने की धमकी वायरल बयान में गैंग ने आगे और गंभीर चेतावनी दी है। कहा गया है कि यदि कंपनी प्रबंधन उनकी शर्तों को नहीं मानता है तो अगली बार कंपनी के वाहनों के बजाय साइट पर कार्यरत कर्मचारियों और हाईवा चालकों को निशाना बनाया जाएगा। बयान में यह भी कहा गया कि गैंग गरीब मजदूरों और ड्राइवरों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता, लेकिन कंपनी प्रबंधन के रवैये में बदलाव नहीं होने पर कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। पुलिस कर रही जांच फिलहाल पुलिस फायरिंग की घटना और वायरल बयान दोनों की सत्यता की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, जबकि स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में भय का माहौल बना हुआ है।