नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखने को मिल रही है। इस संकट का असर भारतीय रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी पड़ा है। स्थिति से निपटने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने कई वर्षों बाद फिर से चलती ट्रेनों में खाना पकाने की व्यवस्था शुरू कर दी है।
हालांकि इस बार पारंपरिक गैस चूल्हों की जगह इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा कारणों से रेलवे ने चरणबद्ध तरीके से चलती ट्रेनों में खाना पकाने की व्यवस्था बंद कर दी थी और बेस किचन मॉडल अपनाया था। लेकिन एलपीजी की मौजूदा किल्लत के कारण IRCTC को वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ी है।
अब LHB पैंट्री कारों में बिजली की मदद से खाना तैयार किया जा रहा है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी अधिकांश प्रीमियम ट्रेनें LHB कोच के साथ संचालित होती हैं।
IRCTC देशभर में करीब 1,400 ट्रेनों में खानपान सेवाएं उपलब्ध कराती है। हर साल लगभग 58 करोड़ यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि प्रतिदिन यह संख्या करीब 17 लाख तक पहुंचती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य कैटरिंग सुविधाओं को संचालित करने के लिए प्रतिदिन लगभग 1,000 कमर्शियल LPG सिलेंडरों की आवश्यकता होती है।
IRCTC के CMD संजय कुमार जैन के अनुसार, सभी LHB पैंट्री कारों में पहले से सुरक्षा सुविधाएं मौजूद हैं, इसलिए वहां इंडक्शन आधारित कुकिंग की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा दिया गया है। फ़ूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार आउटलेट संचालकों को माइक्रोवेव और इंडक्शन कुकर के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं।
वर्तमान में रेलवे किचन में तैयार होने वाले लगभग 60 प्रतिशत भोजन को बिजली की मदद से पकाया जा रहा है।
बढ़ती इनपुट लागत का असर IRCTC के मुनाफे पर भी दिखाई देने लगा है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कैटरिंग सेगमेंट का EBIT मार्जिन घटकर 6.3 प्रतिशत रह गया, जबकि इससे पहले यह 10.4 प्रतिशत था।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि लागत का दबाव जारी रहता है तो भविष्य में कीमतों में बदलाव या सेवा मॉडल में सुधार की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि IRCTC ने स्पष्ट किया है कि कैटरिंग की कीमतें तय करने का अधिकार रेलवे मंत्रालय के पास है।
संसदीय आंकड़ों के मुताबिक देश की लंबी दूरी की 341 ट्रेनों में अभी भी पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मौजूदा संकट ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियों को भी सामने ला दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। देश की प्रमुख अस्पताल श्रृंखलाओं में शामिल मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज (Manipal Health Enterprises) अपना पहला आईपीओ (IPO) लाने जा रही है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब ₹9,275 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर के सबसे बड़े आईपीओ में से एक माना जा रहा है। 29 जुलाई से खुलेगा IPO, ₹560-590 तय किया गया प्राइस बैंड मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने अपने आईपीओ के लिए ₹560 से ₹590 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी का आईपीओ 29 जुलाई 2026 को खुलेगा और सार्वजनिक निवेशकों के लिए यह प्रक्रिया 31 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 5 अगस्त 2026 को बीएसई और एनएसई पर होने की संभावना है। इस आईपीओ में कंपनी करीब ₹8,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू जारी करेगी, जबकि लगभग ₹1,275 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल होगा। इसके जरिए मौजूदा निवेशक अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचेंगे। IPO से जुटाई रकम का इस्तेमाल कर्ज घटाने और विस्तार में होगा कंपनी आईपीओ से मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा अपने कर्ज को कम करने और कारोबार विस्तार में इस्तेमाल करेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब ₹5,378 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या पहले से लिए गए कर्ज को कम करने में किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी अपनी सहायक कंपनी में हिस्सेदारी खरीद और अन्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए भी राशि का उपयोग करेगी। मणिपाल हेल्थ का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना भी है। कंपनी ने बेड क्षमता विस्तार और नए अस्पतालों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना बनाई है। देशभर में फैला है मणिपाल अस्पतालों का नेटवर्क मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज देश की बड़ी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल श्रृंखलाओं में शामिल है। कंपनी का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और यह हृदय रोग, कैंसर उपचार, न्यूरोलॉजी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित कई विशेष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराती है। हेल्थकेयर सेक्टर में बढ़ती मांग, मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और निजी अस्पतालों में निवेश बढ़ने के कारण इस क्षेत्र में कंपनियों की वैल्यूएशन लगातार बढ़ रही है। मणिपाल का आईपीओ इसी बढ़ते बाजार का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। हेल्थकेयर सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह IPO मणिपाल अस्पताल का आईपीओ भारत के हेल्थकेयर उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे अस्पताल क्षेत्र में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है और अन्य स्वास्थ्य सेवा कंपनियों को भी पूंजी बाजार से जुड़ने का प्रोत्साहन मिल सकता है। कंपनी की मजबूत मौजूदगी, बड़े अस्पताल नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए निवेशकों की नजर अब इस आईपीओ पर टिकी हुई है। भारत में बच्चों में बढ़ रहा मोटापा, ICMR ने जताई चिंता; जंक फूड और अस्वस्थ खानपान पर सख्ती की तैयारी नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़े नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) ने बच्चों के बीच बढ़ते ओवरवेट और मोटापे की समस्या से निपटने के लिए नई नीति रूपरेखा जारी की है। इसमें जंक फूड, गलत खानपान और बच्चों को लक्षित विज्ञापनों पर नियंत्रण जैसे कदमों का सुझाव दिया गया है। 4.1 करोड़ बच्चों पर मोटापे का खतरा, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 4.1 करोड़ (41 मिलियन) बच्चे और किशोर ओवरवेट या मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बढ़ता वजन भविष्य में डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। ICMR-NIN के नेतृत्व में तैयार नीति दस्तावेज में कहा गया है कि बच्चों के खानपान के माहौल में बदलाव करना जरूरी है, क्योंकि केवल व्यक्तिगत स्तर पर खानपान सुधारने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जंक फूड पर नियंत्रण और स्कूल कैंटीन के लिए नए नियमों का सुझाव ICMR की ओर से तैयार प्रस्ताव में स्कूलों के आसपास और स्कूल कैंटीन में ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को नियंत्रित करने की बात कही गई है। इसके अलावा स्कूलों में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे अक्सर विज्ञापनों और आसानी से उपलब्ध फास्ट फूड के कारण अस्वस्थ खानपान की ओर आकर्षित होते हैं। इसलिए बच्चों को लक्षित करने वाले खाद्य विज्ञापनों पर भी सख्ती की जरूरत बताई गई है। जंक फूड महंगा करने और आसान लेबलिंग की सिफारिश ICMR-NIN की नीति रूपरेखा में जंक फूड पर अतिरिक्त टैक्स लगाने, खाद्य पदार्थों के लेबल को आसान भाषा में समझने योग्य बनाने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने जैसे सुझाव शामिल हैं। इसका उद्देश्य लोगों को ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में मोटापे को रोकने के लिए परिवार, स्कूल और सरकार तीनों स्तरों पर प्रयास जरूरी हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और स्क्रीन टाइम कम करना भी महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों के सामने बड़ी चुनौती बच्चों में बढ़ता मोटापा अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ सकता है। ICMR की नई पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए ऐसा खाद्य वातावरण तैयार करना है, जहां उन्हें स्वस्थ विकल्प आसानी से मिल सकें और कम उम्र से ही बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
Adani Group Airline Update: हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप भारत में अपनी नई एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि समूह ने इसके लिए सरकार से नियमों में बदलाव का अनुरोध किया है। हालांकि अब अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइन कारोबार में उतरने से जुड़ी सभी खबरें पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि फिलहाल समूह एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश करने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है। क्या था पूरा मामला? हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अडानी ग्रुप अपनी एयरलाइन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, समूह ने सरकार से उस नियम में बदलाव की मांग की थी, जो दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों के ऑपरेटरों को किसी निर्धारित (Scheduled) एयरलाइन में 10% से अधिक हिस्सेदारी रखने से रोकता है। चूंकि अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है, इसलिए इन खबरों ने एविएशन सेक्टर में हलचल पैदा कर दी थी। अडानी एंटरप्राइजेज ने क्या कहा? स्टॉक एक्सचेंज को भेजी गई सूचना में अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा कि— एयरलाइन शुरू करने की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। कंपनी एयरलाइन बिजनेस में प्रवेश करने की किसी योजना पर विचार नहीं कर रही है। मीडिया में चल रही अटकलों का कोई आधार नहीं है। कंपनी के इस स्पष्टीकरण के बाद एयरलाइन लॉन्च को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। क्यों उठी थी नियम बदलने की चर्चा? मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सरकार उस नियम की समीक्षा कर सकती है, जो एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी रखने से रोकता है। कयास लगाए जा रहे थे कि यदि नियमों में बदलाव होता है तो इससे भारतीय एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और एयर इंडिया तथा इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइनों के वर्चस्व को चुनौती मिल सकती है। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। एयरलाइन कंपनियों ने जताई थी आपत्ति इस संभावित बदलाव का कई एयरलाइन कंपनियों ने विरोध भी किया था। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा कि यदि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन का मालिक बनने की अनुमति दी जाती है, तो इससे हितों का टकराव (Conflict of Interest) पैदा हो सकता है और इसका नुकसान यात्रियों को उठाना पड़ सकता है। हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना था कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का बदलाव किया जाता है, तो उसमें आवश्यक सुरक्षा और नियामकीय प्रावधान शामिल किए जाएंगे। एविएशन सेक्टर में अडानी ग्रुप की मजबूत मौजूदगी भले ही अडानी ग्रुप ने एयरलाइन शुरू करने की खबरों का खंडन किया हो, लेकिन एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में उसकी मौजूदगी लगातार मजबूत होती जा रही है। वर्तमान में समूह— भारत का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत आठ हवाई अड्डों का संचालन करता है। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास भी कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में एविएशन वैल्यू चेन में लगातार निवेश बढ़ा चुका है। फिलहाल एयरलाइन लॉन्च की कोई योजना नहीं अडानी ग्रुप के आधिकारिक बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल कंपनी नई एयरलाइन शुरू करने की तैयारी नहीं कर रही है। हालांकि एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में उसका विस्तार जारी है, लेकिन एयरलाइन संचालन में उतरने की खबरों को कंपनी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
मुंबई, एजेंसियां। जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों का सीजन आज अपने सबसे व्यस्त दौर में पहुंच गया है। NTPC, SBI Life Insurance, Tata Consumer Products, Bank of Baroda, SAIL, REC, Hindustan Zinc, SBI Cards, Dalmia Bharat और Dr Lal PathLabs समेत 80 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां आज अपने अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करेंगी। निवेशकों की नजर इन कंपनियों की आय, मुनाफे, मार्जिन और भविष्य के कारोबारी अनुमान पर रहेगी। बाजार की चाल तय करेंगे कॉरपोरेट नतीजे विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी, बैंकिंग, बिजली, धातु और एफएमसीजी सेक्टर की बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशक केवल मुनाफे के आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों के प्रबंधन की भविष्य की रणनीति, मांग की स्थिति, पूंजीगत निवेश और संभावित डिविडेंड घोषणाओं पर भी खास नजर रखेंगे। कमजोर बाजार के बीच बढ़ी निवेशकों की उत्सुकता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में मजबूत तिमाही नतीजे चुनिंदा शेयरों को सहारा दे सकते हैं, जबकि उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आज घोषित होने वाले नतीजे मौजूदा अर्निंग सीजन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।