जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की चाकू से गोदकर हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मंगलवार देर रात टीएमएच से शव को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां रात करीब 3 बजे पोस्टमार्टम किया गया। हालांकि, प्रशासन द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। घटना के बाद शहर के कई प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धालभूम के एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, एमजीएम और मानगो थाना क्षेत्रों में लागू है। इसके तहत किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, जुलूस, घेराव और हथियार लेकर चलने पर रोक लगा दी गई है। सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, बार परिसर सील पुलिस जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि घायल हिमांशु सड़क पर बैठा हुआ है, जबकि उसका साथी पास में पड़ा हुआ है। घटना के बाद प्रशासन ने डबल डाउन बार को सील कर दिया है और मामले की जांच तेज कर दी गई है। परिजनों का आक्रोश, एनकाउंटर की मांग मृतक के पिता ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके बेटे की नृशंस हत्या की गई है और अपराधियों का एनकाउंटर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमांशु सामाजिक कार्यों से जुड़े थे और उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। पिता ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि जब तक मुख्य आरोपी पकड़े या मारे नहीं जाते, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी परिजनों से मुलाकात कर सरकार से त्वरित कार्रवाई और पीड़ित परिवार को नौकरी देने की मांग की है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन (DD) बार के बाहर हुए चर्चित हत्याकांड के बाद झारखंड सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। साथ ही क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जमशेदपुर के छह थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। कानून-व्यवस्था में लापरवाही पर सरकार की बड़ी कार्रवाई राज्य सरकार ने बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अपराध पर नियंत्रण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार कैंप कर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं। छह थाना क्षेत्रों में लागू हुई धारा 163 प्रशासन ने संभावित विरोध-प्रदर्शन और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बिष्टुपुर, साकची, जुगसलाई, सोनारी, सीतारामडेरा और गोलमुरी थाना क्षेत्रों में BNSS की धारा 163 लागू की है। इसके तहत बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। हत्याकांड से भड़का था जनाक्रोश यह कार्रवाई उस समय हुई जब DD बार के बाहर चाकूबाजी में घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद शहर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। मामले में पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। इससे पहले चार पुलिसकर्मियों को भी कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत से वाहन चालक परेशान हैं। शहर के अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई हो चुके हैं और कई प्रमुख पंपों पर ताले लटक गए हैं। दिनभर शहर के अलग-अलग इलाकों में ईंधन को लेकर अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। कहां क्या रही स्थिति सिदगोड़ा स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल पूरी तरह खत्म हो गया, केवल डीजल उपलब्ध था। बिष्टुपुर के तिवारी बेचर पेट्रोल पंप पर दोनों ईंधन मिलने से भारी भीड़ उमड़ पड़ी और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बिष्टुपुर गोल चक्कर, कदमा और बर्मा माइंस स्थित पंपों पर ईंधन न होने से सन्नाटा पसरा रहा। इथेनॉल ब्लेंडिंग पंप में खराबी असली वजह प्रशासन और पंप संचालकों के अनुसार यह संकट तेल की कमी से नहीं, बल्कि बोकारो डिपो के इथेनॉल ब्लेंडिंग पंप में आई तकनीकी खराबी से उत्पन्न हुआ है। सरकारी नियमों के तहत पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जाता है, लेकिन मिक्सिंग पंप खराब होने से इथेनॉल और पेट्रोल अलग-अलग हो गए। नमी के संपर्क में आने पर इथेनॉल पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर टंकी में नीचे बैठ गया, जिसे लोग पेट्रोल में पानी समझने लगे। गुणवत्ता जांच तक सप्लाई बंद पेट्रोल पंप डीलरों और ट्रांसपोर्टर्स ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुणवत्ता जांच पूरी होने तक डिपो से तेल लेने से इनकार कर दिया है। इससे सप्लाई चेन में दो दिनों का गैप आ गया है। हालांकि पंप संचालकों को उम्मीद है कि डिपो का मिक्सिंग पंप ठीक होते ही एक से दो दिनों में सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
जमशेदपुर। झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच हवाई संपर्क को बड़ा झटका लगा है। इंडिया वन एयर ने जमशेदपुर-कोलकाता के बीच संचालित अपनी सीधी उड़ान सेवा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने इस फैसले के पीछे पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) बंद किए जाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने को प्रमुख वजह बताया है। इस निर्णय से दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। तीन साल बाद खत्म हुआ वीजीएफ सपोर्ट एयरलाइन के अनुसार यह उड़ान केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN)-रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के तहत शुरू की गई थी। इस योजना में चयनित क्षेत्रीय मार्गों पर तीन वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद एयरलाइन को बिना सरकारी सहायता के सेवा संचालित करनी थी। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वीजीएफ सहायता आगे नहीं बढ़ाने और परिचालन लागत बढ़ने के कारण इस रूट पर उड़ान जारी रखना आर्थिक रूप से कठिन हो गया। व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए बढ़ेगी परेशानी जमशेदपुर-कोलकाता सीधी उड़ान का सबसे अधिक लाभ व्यवसायियों, छात्रों, मरीजों और पर्यटकों को मिलता था। यह सेवा झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर को पूर्वी भारत के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कोलकाता से जोड़ती थी। उड़ान बंद होने से नियमित यात्रियों को अब सड़क या रेल मार्ग का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे। फरवरी 2023 में हुई थी शुरुआत इस उड़ान सेवा की शुरुआत फरवरी 2023 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की थी। इसे झारखंड के क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया था। फिलहाल एयरलाइन ने सेवा दोबारा शुरू करने की कोई समयसीमा घोषित नहीं की है। इस बीच क्षेत्रीय हवाई मार्गों के लिए सरकारी वित्तीय सहायता जारी रखने की मांग फिर से तेज हो गई है।
सोनारी मारपीट कांड जमशेदपुर। जमशेदपुर की कुख्यात लेडी डॉन चटनी एक बार फिर पुलिस के हत्थे चढ़ गई है। जमशेदपुर के सोनारी थाना क्षेत्र में हुई मारपीट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात अपराधी प्रिया सिंह उर्फ चटनी डॉन को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसे दबोचा। SSP पीयूष पांडेय के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 15 जून को दर्ज सोनारी थाना कांड संख्या-49/2026 में शिकायतकर्ता पूजा देवी ने आरोप लगाया था कि उनके पति ओम प्रकाश सिंह घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार सड़क किनारे खेल रहे बच्चे के बेहद करीब से गुजरी। इस पर आपत्ति जताने को लेकर कार चालक पवन यादव और ओम प्रकाश सिंह के बीच कहासुनी हो गयी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर कार में मौजूद प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ ने अपने साथियों को बुला लिया। कुछ ही देर में हथियारों से लैस कई लोग मौके पर पहुंच गये और शिकायतकर्ता पक्ष पर हमला कर दिया। रंगदारी वसूलने के आरोप हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। घटना के बाद इलाके में भय और तनाव का माहौल बन गया था। जांच के दौरान पुलिस को मिले साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट में प्रिया सिंह उर्फ चटनी डॉन की भूमिका सामने आई, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी की गई। पुलिस का दावा है कि वह सोनारी समेत आसपास के इलाकों में लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रिया सिंह उर्फ चटनी डॉन के खिलाफ मारपीट, लूट, छिनतई, रंगदारी, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और एससी-एसटी एक्ट समेत कुल 15 मामले दर्ज हैं। उस पर व्यवसायियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने के आरोप भी लगते रहे हैं। जिला बदर भी की जा चुकी है उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले उसे झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2002 के तहत एक वर्ष के लिए जिला बदर भी किया था। पुलिस फिलहाल इस मामले में फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
जमशेदपुर। जमशेदपुर के मानगो स्थित ओलिडीह थाना क्षेत्र की खड़िया बस्ती में बीती देर रात शराब पार्टी के दौरान फायरिंग हुई। इसमें एक युवक की गोली लगने स मौत हो गई। मृतक की पहचान सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर निवासी 30 वर्षीय देवदास गौड़ के रूप में हुई है। उसे गर्दन में गोली लगी थी। गंभीर हालत में उसे एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस भी तुरंत हरकत में आ गई। ASI समेत तीन लोगों को पुलिस ने लिया हिरासत मे मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सरायकेला-खरसावां जिले के आरआईटी थाना में तैनात एएसआई पंकज कुमार, देवाशीष पोद्दार और नीरज प्रधान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया एक देसी कट्टा, नशा करने में उपयोग की जाने वाली सामग्री और एक थार वाहन भी जब्त किया है। पुलिस अब पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि खड़िया बस्ती में सभी लोग देर रात शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे थे। इसी दौरान देवदास गौड़ और देवाशीष पोद्दार के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि देवाशीष ने कथित तौर पर देसी कट्टा निकालकर फायरिंग कर दी। गोली सीधे देवदास की गर्दन में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल पहुंचे, फिर निकलने की कर रहे थे कोशिश गोली लगने के बाद मौके पर मौजूद लोग घायल देवदास को लेकर एमजीएम अस्पताल पहुंचे। लेकिन, पुलिस के मुताबिक अस्पताल में भर्ती कराने के बाद आरोपी वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस ने तुरंत तीनों को हिरासत में ले लिया और पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में आरोपियों ने घटना स्थल और पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग बयान दिए। वे लगातार अपनी बात बदल रहे थे। हालांकि जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने खड़िया बस्ती में गोली चलने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद देवाशीष पोद्दार की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया देसी कट्टा भी बरामद कर लिया। जमीन विवाद का एंगल भी खंगाल रही पुलिस जांच के दौरान जब्त की गई थार गाड़ी से जमीन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। इसके बाद पुलिस अब जमीन विवाद के एंगल से भी मामले की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि मामला केवल शराब पार्टी के दौरान हुए विवाद तक सीमित नहीं हो सकता। इसके पीछे किसी पुराने जमीन विवाद या रंजिश की भी भूमिका हो सकती है। इसी वजह से जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ाई जा रही है। निजी कंपनी में करता था काम बुधवार सुबह देवदास गौड़ के परिजन एमजीएम अस्पताल पहुंचे। जानकारी के अनुसार देवदास आदित्यपुर स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत था और परिवार का सहारा था। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और आरोपियों से पूछताछ के बाद पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो जाएगी।
जमशेदपुर। झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में अनियमितताओं पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में जांच के दौरान 4,068 ऐसे लाभुकों की पहचान की गई है, जिन्होंने गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या तथ्य छिपाकर योजना का लाभ लिया। अब इन सभी से अब तक प्राप्त पूरी राशि की वसूली की जाएगी। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि गंभीर मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले मामले विभागीय जांच और भौतिक सत्यापन के दौरान जिले में कुल 6,974 लाभुकों के नाम योजना की सूची से हटाए गए हैं। इनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जो योजना की पात्रता पूरी नहीं करते थे। कुछ मामलों में लाभुकों की मृत्यु के बाद भी उनके नाम पर भुगतान जारी था। वहीं, पहले एक पुरुष द्वारा योजना की राशि लेने का मामला भी सामने आया था, जिससे पूरी राशि वापस कराई गई। इसके अलावा, बिहार की मूल निवासी 142 महिलाओं को भी चिह्नित किया गया है, जो नियमों के विपरीत पूर्वी सिंहभूम से योजना का लाभ ले रही थीं। प्रशासन ने इनके खिलाफ भी राशि वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तीन लाख से अधिक लाभुकों का सत्यापन जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत कुल 3,07,071 लाभुक पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 2,89,019 लाभुकों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। अधिकांश लाभुक पात्र पाए गए हैं, जबकि 11,078 लाभुकों का सत्यापन अभी शेष है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। फर्जी लाभुकों पर होगी कार्रवाई सामाजिक सुरक्षा विभाग की प्रभारी सहायक निदेशक रूपा रानी तिर्की ने बताया कि जिले में लगभग 90 प्रतिशत सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत जांच पूरी होने के बाद अयोग्य लाभुकों से राशि की रिकवरी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में नॉन-डीबीटी संबंधी तकनीकी समस्याएं मिली हैं, उनका भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए सत्यापन अभियान लगातार जारी रहेगा। फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि पात्र लाभुकों को योजना का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाले शातिर बदमाशों ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह को अपना निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि अधिवक्ता की सतर्कता और कानूनी समझ के कारण ठग अपनी योजना में सफल नहीं हो सके और पकड़े जाने के डर से मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। कोर्ट से लौटते समय रोका रास्ता जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह कोर्ट से काम खत्म कर मोटरसाइकिल से मानगो स्थित अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मानगो बस स्टैंड गोलचक्कर के पास बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों ने उनका पीछा किया और कुछ दूर जाकर उन्हें रोक लिया। आरोपियों में से एक ने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि आगे हत्या की घटना हुई है और क्षेत्र का माहौल खराब है। इसके बाद उसने अधिवक्ता को डराते हुए सोने की चेन और अंगूठी उतारकर सुरक्षित रखने की सलाह दी, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। अधिवक्ता के जवाब से भाग निकले ठग बदमाशों की बात सुनते ही अधिवक्ता विद्या सिंह को उनके इरादों पर शक हो गया। उन्होंने बेखौफ अंदाज में कहा कि वह अधिवक्ता हैं और किसी से डरने वाले नहीं हैं। यह सुनते ही दोनों आरोपी तुरंत बुलेट पर सवार होकर वहां से फरार हो गए। अधिवक्ता ने बताया कि दोनों की वेशभूषा और कद-काठी ऐसी थी कि वे पहली नजर में असली पुलिसकर्मी प्रतीत हो रहे थे। सीसीटीवी के आधार पर जांच, सक्रिय गिरोह पर शक घटना की सूचना मिलते ही साकची और बिष्टुपुर थाना पुलिस जांच में जुट गई। पुलिस ने मानगो पुल, बस स्टैंड गोलचक्कर और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। प्रारंभिक आशंका है कि वारदात के पीछे वही गिरोह सक्रिय है, जिसने हाल के दिनों में पुलिस अधिकारी बनकर शहर के कई बुजुर्गों से लाखों रुपये के गहने और नकदी ठगी थी। पुलिस आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
चक्रधरपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रैक मरम्मत कार्य के कारण 14 जून तक कई मेमू ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे प्रशासन महालीमोरूप और सीनी स्टेशनों के बीच ट्रैक रिन्यूअल मशीन (टीआरटी) के माध्यम से पुराने स्लीपर बदलने का कार्य करा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा और रेल संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे इस कार्य के चलते विभिन्न तिथियों में छह मेमू ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। 12 से 14 जून तक चलेगा ट्रैक रिन्यूअल कार्य रेलवे अधिकारियों के अनुसार महालीमोरूप और सीनी स्टेशनों के बीच डाउन लाइन पर 12 से 14 जून तक स्लीपर बदलने का कार्य किया जाएगा। इस दौरान 12 और 14 जून को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक, यानी लगभग तीन घंटे 45 मिनट का टीआरटी ब्लॉक लिया जाएगा। इस अवधि में संबंधित रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे का कहना है कि समय-समय पर ट्रैक का रखरखाव यात्रियों की सुरक्षा और सुचारु रेल संचालन के लिए आवश्यक है। इन मेमू ट्रेनों का संचालन रहेगा प्रभावित मरम्मत कार्य के कारण कई महत्वपूर्ण मेमू ट्रेनों का संचालन अलग-अलग तिथियों में रद्द रहेगा। 13 जून तक चाकुलिया-टाटानगर और टाटानगर-बड़बिल मेमू ट्रेनें नहीं चलेंगी। वहीं 12 और 14 जून को बड़बिल-टाटानगर तथा टाटानगर-चाकुलिया मेमू ट्रेनों का परिचालन भी रद्द रहेगा। इसके अलावा 12 जून को राउरकेला-टाटानगर और टाटानगर-राउरकेला मेमू ट्रेनों का संचालन भी स्थगित किया गया है। डेली पैसेंजरों की बढ़ेगी परेशानी ट्रेनों के रद्द होने से सबसे अधिक असर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। छात्र, नौकरीपेशा कर्मचारी, छोटे व्यापारी और अन्य दैनिक यात्री इन मेमू ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उन्हें वैकल्पिक परिवहन का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति अवश्य जांच लें। अधिकारियों का कहना है कि ट्रैक मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद रेल सेवाएं सामान्य रूप से बहाल कर दी जाएंगी और इससे भविष्य में यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में ऑटो का सफर महंगा हो सकता है। शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक-संचालक संघ ने विभिन्न रूटों पर ऑटो किराए में 5 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। हालांकि, इस बढ़ी हुई दर पर अंतिम निर्णय प्रशासन की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा। डीसी को सौंपा पत्र संघ ने इस संबंध में उपायुक्त को पत्र सौंपकर संशोधित किराया लागू करने की जानकारी दी है। संघ के अध्यक्ष श्याम किनकर झा ने बताया कि डीजल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि, वाहन रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन खर्च बढ़ने के कारण किराया बढ़ाना आवश्यक हो गया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद यह पहली बार है जब किराए में संशोधन किया गया है। महीने में करीब 300 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा किराए में वृद्धि से शहर के हजारों दैनिक यात्रियों, छात्रों और कर्मचारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। नई दरें लागू होने पर यदि कोई यात्री रोजाना आने-जाने के लिए दो बार ऑटो का उपयोग करता है, तो उसे प्रतिदिन लगभग 10 रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इस हिसाब से महीने में करीब 300 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में परीक्षा संचालन से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर केवल सरकारी कर्मियों को ही इनविजिलेटर (वीक्षक) के रूप में नियुक्त किया जाएगा। पूरी परीक्षा प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रवेश से पहले सघन फ्रिस्किंग की जाएगी और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके अलावा परीक्षा से एक दिन पहले सभी परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज कर सील कर दिया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके। भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परीक्षा के दिन शहर में सुचारु यातायात और भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख चौक-चौराहों तथा परीक्षा केंद्रों के बाहर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। 8 केंद्रों पर होगी परीक्षा, 4 हजार से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल जिले के छह शिक्षण संस्थानों में कुल आठ परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 4,000 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षार्थियों को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश मिलेगा। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इन केंद्रों पर आयोजित होगी परीक्षा परीक्षा एलबीएसएम कॉलेज करनडीह, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी, द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेंस, राजकीय आदिवासी हाई स्कूल सीतारामडेरा और एलबीएसएम कॉलेज गोलमुरी सहित कुल आठ केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। अधिकारियों ने की तैयारियों की समीक्षा बैठक में सिटी एसपी ललित मीणा, एसडीएम धालभूम अर्णव मिश्रा, एएसपी ऋषभ त्रिवेदी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राहुलजी आनंदजी समेत विभिन्न कॉलेजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और कदाचारमुक्त तरीके से संपन्न कराना है।
रांची। झारखंड में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान रिम्स रांची में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में रिम्स प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है। केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए प्रति सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत रिम्स में UG सीटों को 180 से बढ़ाकर 250, PG सीटों को 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटों को 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है। MGM और धनबाद मेडिकल कॉलेज को मिल चुकी मंजूरी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, धनबाद मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 100 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 19 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को भी भारत सरकार की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। PPP मॉडल पर बनेंगे नए छात्रावास रिम्स-टू परियोजना के तहत छात्रावास निर्माण के लिए नई रणनीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हॉस्टल निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के वायबिलिटी गैप फंड (VGF) से सहायता लेने की योजना है। इससे सरकारी खर्च कम होगा और छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा। चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम सीटों में बढ़ोतरी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से झारखंड में मेडिकल शिक्षा को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे राज्य के छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के परसुडीह थाना क्षेत्र स्थित करनडीह लाइन टोला में अवैध संबंध के शक ने एक युवक की जान ले ली। मंगलवार देर रात हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में 35 वर्षीय मोहन हांसदा की मौत हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी जयराम मुर्मू को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अवैध संबंध के शक में बढ़ा विवाद पुलिस के अनुसार मृतक मोहन हांसदा मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला था और उसकी जयराम मुर्मू से अच्छी दोस्ती थी। इसी कारण वह अक्सर जयराम के घर आया-जाया करता था। इस दौरान जयराम को अपनी पत्नी और मोहन के बीच अवैध संबंध होने का संदेह होने लगा, जिससे घर में अक्सर तनाव और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। मंगलवार रात भी मोहन हांसदा जयराम के घर पहुंचा था। इसी दौरान तीनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते गंभीर झगड़े में बदल गई। गुस्से में जयराम ने पहले अपनी पत्नी के साथ मारपीट की और उसे घर से बाहर निकाल दिया। महिला अपने दोनों बच्चों को लेकर रात में ही दूसरे स्थान पर चली गई। गुस्से में किया जानलेवा हमला पत्नी के जाने के बाद जयराम और मोहन के बीच विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में आकर जयराम ने घर में रखी भारी स्टील की डेकची उठाकर मोहन पर हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोट लगने से मोहन की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलने पर परसुडीह पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन, खून से सनी स्टील की डेकची समेत कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं। परसुडीह थाना के सब-इंस्पेक्टर रितेश ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आसपास के लोगों और आरोपी की पत्नी से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
पूर्वी सिंहभूम। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जिले में उत्पादित होने वाले रसीले और गुणवत्तापूर्ण आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की तैयारी में हैं। जिला प्रशासन ने स्थानीय किसानों के आमों को विदेशों में निर्यात (एक्सपोर्ट) करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। इस कदम से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है और जिले की पहचान देश-विदेश में मजबूत होगी। कई किस्मों के आमों की होती है खेती पूर्वी सिंहभूम के बोड़ाम, पटमदा, घाटशिला और मुसाबनी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है। यहां लंगड़ा, आम्रपाली, मल्लिका, हिमसागर, बैंगनपल्ली, देसी और बनाना आम जैसी कई लोकप्रिय किस्मों का उत्पादन होता है। इन आमों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण अब विदेशी व्यापारियों की भी रुचि बढ़ने लगी है। जिले में आयोजित आम महोत्सव के माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर पहचान दिलाने और खरीदारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस मंच से किसानों को नए बाजार मिलेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी। ‘बनाना आम’ को मिला नया नाम पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि जिले में उत्पादित होने वाले बनाना आम का नाम बदलकर स्थानीय आदिवासी संस्कृति से जुड़ा नया नाम "कायरा आम" रखा गया है। इससे स्थानीय पहचान को बढ़ावा मिलेगा और उत्पाद की ब्रांडिंग भी मजबूत होगी। यूरोपीय देशों तक पहुंचाने की तैयारी जिला प्रशासन का लक्ष्य पूर्वी सिंहभूम के आमों को यूरोपीय संघ सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाना है। इसके लिए किसानों को आधुनिक खेती, फसल संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि प्रशासन की इस पहल से उन्हें नया बाजार मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात की प्रक्रिया सफल रही तो पूर्वी सिंहभूम जल्द ही देश के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि झारखंड के कृषि उत्पादों को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
जमशेदपुर। जमशेदपुर के मानगो स्थित आजादनगर थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ओल्ड पुरुलिया रोड नंबर-1 पर सड़क किनारे खड़ी एक यात्री बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कुछ ही मिनटों में पूरी बस धू-धू कर जलने लगी। आग की ऊंची लपटों और धुएं के गुबार को देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और तत्काल पुलिस, अग्निशमन विभाग तथा बिजली विभाग को सूचना दी गई। कुछ ही देर में बस जलकर हुई खाक प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस रोजाना की तरह रात में ड्यूटी समाप्त होने के बाद सड़क किनारे खड़ी की गई थी। बुधवार सुबह अचानक बस से धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। जब तक दमकल की टीम मौके पर पहुंचती, तब तक बस लगभग पूरी तरह जल चुकी थी। आग बुझाने के बाद बस का केवल लोहे का ढांचा ही बचा रह गया। बिजली व्यवस्था भी हुई प्रभावित बस में लगी आग की चपेट में पास का बिजली पोल और बिजली के तार भी आ गए। आग की गर्मी और लपटों से बिजली के उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए, जिसके कारण आसपास के इलाके की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। घटना के बाद बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षति का आकलन शुरू किया। विभाग के कर्मचारी जल्द से जल्द बिजली बहाल करने में जुटे हुए हैं। बड़ा हादसा टला, नहीं हुई कोई जनहानि राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय बस में कोई यात्री या चालक मौजूद नहीं था। इसके कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आग आसपास की दुकानों और रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच सकती थी, लेकिन समय रहते दमकल कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। आग लगने के कारणों की जांच शुरू घटना के बाद आजादनगर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी या फिर इसके पीछे किसी असामाजिक तत्व की भूमिका है। फिलहाल अधिकारियों ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू कर दी है।
जमशेदपुर। जमशेदपुर समेत पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले में भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिले में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिसके कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सुबह 10 बजे के बाद से ही तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। बढ़ते तापमान को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल समेत कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हीट केयर सेंटर शुरू किए हैं। लू की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत भीषण गर्मी के बीच जिले में लू लगने की आशंका से एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में पोटका थाना क्षेत्र की एक महिला, कपाली का एक पुरुष और मानगो क्षेत्र का एक व्यक्ति शामिल है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन शुरुआती जांच में लू लगने की संभावना जताई जा रही है। अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या गर्मी और हीटवेव का असर अस्पतालों में भी साफ दिखाई दे रहा है। सदर अस्पताल में रोजाना 25 से 30 मरीज लू, डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। वहीं एमजीएम अस्पताल में प्रतिदिन 30 से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष व्यवस्था की है। ORS, AC और 24 घंटे डॉक्टरों की व्यवस्था हीट केयर सेंटर में मरीजों के लिए ORS, ठंडे पेयजल और एसी की व्यवस्था की गई है। अस्पताल के सभी वार्डों में एयर कंडीशनर लगाए गए हैं ताकि मरीजों को राहत मिल सके। इसके अलावा मरीजों के लिए वाहन सुविधा और 24×7 डॉक्टरों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है। बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें पूर्वी सिंहभूम के जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शाहिर पाल ने लोगों से अपील की है कि तेज धूप में बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। बाहर निकलते समय पानी, शरबत या ORS का सेवन करते रहें और खाली पेट बाहर जाने से बचें। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर लोग तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
जमशेदपुर। झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में पेट्रोल और डीजल की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। गुरुवार सुबह से ही कदमा, मानगो, बिष्टुपुर, साकची और गोलमुरी समेत कई इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हालात ऐसे हो गए कि कई मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। कदमा स्थित भारत पेट्रोलियम पंप पर सुबह पांच बजे से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। पेट्रोल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए दोपहिया वाहनों को केवल 200 रुपये और चारपहिया वाहनों को 500 रुपये तक का ही पेट्रोल दिया जा रहा है। कई पेट्रोल पंपों पर “नो स्टॉक” के बोर्ड भी लगा दिए गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पैनिक बाइंग से और बिगड़ी स्थिति शहर में तेल आपूर्ति कम होने और अनिश्चितकालीन संकट की अफवाहों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के साथ-साथ बोतलों और डब्बों में भी पेट्रोल भरने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पेट्रोल पंप संचालकों ने सुरक्षा कारणों से डब्बों में तेल देने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते कई जगह विवाद की स्थिति भी बन रही है। प्रशासन की अपील बेअसर जिला प्रशासन लगातार लोगों से संयम बरतने और पैनिक बाइंग से बचने की अपील कर रहा है, लेकिन इसका असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। पंप संचालकों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा खरीदारी के कारण कृत्रिम संकट पैदा हो गया है। वहीं अफवाहों के चलते लोगों में भय का माहौल बना हुआ है, जिससे हालात सामान्य होने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में गुरुवार को भाजपा और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच जिला उपायुक्त कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। दोनों दलों ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान जिला मुख्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, जिसे देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। भाजपा ने राज्य सरकार को घेरा प्रदर्शन के दौरान झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। भीषण गर्मी के बीच गांव से लेकर शहर तक लोग अनियमित बिजली आपूर्ति और जल संकट से परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खराब बिजली व्यवस्था के कारण अस्पतालों में मरीजों की जान तक जा रही है और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह “आईसीयू” में पहुंच चुका है। अधूरी योजनाओं का उठाया मुद्दा रघुवर दास ने जमशेदपुर की बागबेड़ा ग्रामीण बृहत जलापूर्ति योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत वर्ष 2018 तक लोगों को पानी की आपूर्ति शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन आज तक योजना पूरी नहीं हो सकी। भाजपा नेताओं ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए जनहित की योजनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। जेएमएम ने केंद्र सरकार को ठहराया जिम्मेदार दूसरी ओर झामुमो नेताओं ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। पूर्व विधायक Lakshman Tudu ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम जनता आर्थिक दबाव झेल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है, जबकि आम लोगों की परेशानियों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने बढ़ती रसोई गैस कीमतों और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। अलग-अलग अंदाज में प्रदर्शन प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ता मिट्टी के घड़े लेकर पहुंचे, जबकि झामुमो कार्यकर्ता लकड़ियां लेकर विरोध जताते नजर आए। दोनों दलों ने अपने-अपने तरीके से जनता की समस्याओं को उठाने का प्रयास किया। राजनीतिक माहौल हुआ गरम इस विरोध प्रदर्शन ने जिले की राजनीति को गर्मा दिया है। सत्ता और विपक्ष दोनों ही जनता के मुद्दों को लेकर एक-दूसरे को घेरने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
जमशेदपुर। जमशेदपुर की चर्चित महिला अपराधी प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ को अदालत से बड़ी राहत मिली है। जिला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के बाद उसे जमानत दे दी। इस फैसले के बाद वह जेल से बाहर आ सकेगी। तड़ीपार आदेश तोड़ने पर हुई थी गिरफ्तारी प्रिया सिंह को पहले सीसीए (क्रिमिनल लॉ) के तहत जिला बदर यानी तड़ीपार किया गया था। इसके बावजूद वह अवैध रूप से शहर में प्रवेश कर रही थी। बीते 10 मार्च को सोनारी थाना पुलिस और सशस्त्र बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्वाला बस्ती में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे घाघीडीह सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। जमानत के लिए दिए गए अहम तर्क बचाव पक्ष के अधिवक्ता आनंद झा ने कोर्ट में जमानत के लिए कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि तड़ीपार उल्लंघन के मामले में अधिकतम सजा पांच साल से कम है और आरोपी पहले ही करीब दो महीने जेल में बिता चुकी है। इसके अलावा मानवीय आधार पर यह भी बताया गया कि प्रिया सिंह का छोटा बच्चा बीमार है। कोर्ट में बच्चे के इलाज से जुड़े मेडिकल दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अपराध जगत में है पहचान सोनारी क्षेत्र की रहने वाली प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ पर रंगदारी, मारपीट और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े सात से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना में थी।
जमशेदपुर। जमशेदपुर की छात्रा शांभवी तिवारी ने ICSE-ISC 2026 परीक्षा में इतिहास रचते हुए 100 प्रतिशत अंक हासिल कर नेशनल टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है। Council for the Indian School Certificate Examinations (CISCE) द्वारा जारी परिणामों में झारखंड के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। कोल्हान क्षेत्र का दबदबा इस बार कोल्हान क्षेत्र, खासकर जमशेदपुर और चाईबासा के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया। ICSE 10वीं में चितेश सरकार, वेदांग वत्सल, अहान राय और प्रज्ञा सिंह ने 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर संयुक्त रूप से टॉप किया। वहीं धनबाद की अंशिका मोदी और कोशिकी दत्ता ने भी 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। डॉक्टर बनने का सपना शांभवी तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। फिलहाल वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही हैं और भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं। रांची के स्कूलों का भी शानदार प्रदर्शन राजधानी रांची के स्कूलों ने भी बेहतरीन परिणाम दिए। लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल की प्रभलीन कौर ने 98.8 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि अन्य छात्रों ने भी 97 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। संत थॉमस स्कूल की अंशिका गुप्ता ने 99 प्रतिशत अंक लाकर सिटी टॉपर का खिताब जीता। डिजिटल माध्यम से मिला रिजल्ट रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया, लेकिन छात्रों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से अपने परिणाम देखे। कई स्कूलों ने भी अपने स्तर पर रिजल्ट उपलब्ध कराया। ICSE-ISC 2026 के नतीजों ने साबित कर दिया कि झारखंड के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
जमशेदपुर। शहर में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग को लेकर समय सीमा का मुद्दा उठने लगा है। जुगसलाई नगर परिषद के पार्षद और भाजपा नेता अनिल मोदी ने बिष्टुपुर स्थित जी टाउन ओपन जिम और मैदान के संचालन समय को बढ़ाने की मांग की है। व्यावसायिक क्षेत्र के लोगों को हो रही दिक्कत अनिल मोदी का कहना है कि जुगसलाई क्षेत्र के अधिकांश लोग व्यवसाय से जुड़े हैं, जिनका काम देर शाम तक चलता है। ऐसे में मौजूदा समय सीमा के कारण वे जिम और मैदान की सुविधा का उपयोग नहीं कर पाते। नौकरीपेशा और विद्यार्थियों के लिए भी कम समय उन्होंने बताया कि दिनभर काम करने के बाद लोग शाम के समय ही व्यायाम या टहलने के लिए समय निकाल पाते हैं। सीमित समयावधि के चलते नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को इस सुविधा का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र पार्षद ने कहा कि जी टाउन ओपन जिम और मैदान केवल व्यायाम का स्थान नहीं है, बल्कि यह शहरवासियों के लिए स्वास्थ्य, मानसिक सुकून और सामाजिक मेलजोल का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां प्रतिदिन युवा, महिलाएं और बुजुर्ग विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। रात्रि 10 बजे तक समय बढ़ाने की मांग अनिल मोदी ने टाटा प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस सुविधा की समय सीमा बढ़ाकर रात 10 बजे तक की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। स्वास्थ्य जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा उन्होंने यह भी कहा कि समय सीमा बढ़ाने से शहर में फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और यह एक सकारात्मक पहल साबित होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।