झारखंड

DD बार हत्याकांड के बाद जमशेदपुर में सख्त कार्रवाई, SSP हटाए गए; छह थाना क्षेत्रों में BNSS की धारा 163 लागू

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
DD Bar murder case
DD Bar murder case

जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन (DD) बार के बाहर हुए चर्चित हत्याकांड के बाद झारखंड सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया  है। साथ ही क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जमशेदपुर के छह थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है।

 

कानून-व्यवस्था में लापरवाही पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

 

राज्य सरकार ने बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अपराध पर नियंत्रण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार कैंप कर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं।

 

छह थाना क्षेत्रों में लागू हुई धारा 163

 

प्रशासन ने संभावित विरोध-प्रदर्शन और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बिष्टुपुर, साकची, जुगसलाई, सोनारी, सीतारामडेरा और गोलमुरी थाना क्षेत्रों में BNSS की धारा 163 लागू की है। इसके तहत बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

 

हत्याकांड से भड़का था जनाक्रोश

 

यह कार्रवाई उस समय हुई जब DD बार के बाहर चाकूबाजी में घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद शहर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। मामले में पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। इससे पहले चार पुलिसकर्मियों को भी कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

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Jharkhand Weather Update
Jharkhand Weather Update: झारखंड में फिर सक्रिय होगा मानसून, मौसम विभाग ने पांच जिलों में भारी बारिश का जारी किया अलर्ट

रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 2 और 3 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से राज्य के कई जिलों में तेज हवा, वज्रपात और भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।   पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई को लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, राज्य के अन्य जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 3 और 4 जुलाई को भी अधिकांश क्षेत्रों में मौसम का यही रुख बना रहेगा। इसके अलावा 5 जुलाई को रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 6 जुलाई को भी रांची समेत कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।   तापमान में उतार-चढ़ाव, कई जगह हुई अच्छी बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान रांची के अधिकतम तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि मेदिनीनगर के तापमान में 1.2 डिग्री की गिरावट आई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है।   बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार को रामगढ़ में 60.5 मिमी, कोडरमा में 20 मिमी, जमशेदपुर में 4 मिमी और बहरागोड़ा में सर्वाधिक 84.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। हालांकि, 1 जून से 1 जुलाई तक राज्य में सामान्य 197.8 मिमी के मुकाबले केवल 99.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। रांची में अब भी 13 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जबकि गढ़वा और साहिबगंज में सबसे कम बारिश होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

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खत्म हुआ रांची में कैब हड़ताल, लेकिन बढ़े किराए से यात्री परेशान

रांची। रांची समेत पूरे झारखंड में चार दिनों से जारी कैब चालकों की हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। हालांकि हड़ताल खत्म होने के साथ ही यात्रियों को एक बड़ा झटका लगा है। कैब एग्रीगेटर कंपनियों उबर और रैपिडो ने अपने बेस किराए में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे रोजाना ऑफिस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य स्थानों तक सफर करने वाले लोगों को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा। वहीं, ओला के साथ अभी अंतिम सहमति नहीं बनने के कारण उसके चालकों का आंदोलन जारी है।   ओला, उबर और रैपिडो राज्य में ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े करीब 13 हजार चालक हड़ताल पर थे, जिनमें लगभग चार हजार चालक सिर्फ रांची के थे। चालक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित ओझा ने बताया कि रैपिडो ने नई दरें तत्काल लागू कर दी हैं, जबकि उबर ने सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद संशोधित किराया लागू करने का आश्वासन दिया है।   नई दरों के अनुसार नई दरों के अनुसार उबर की मिनी टैक्सी का बेस किराया 48 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये और सेडान का किराया 55 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। वहीं सेवन सीटर कैब का बेस किराया 65 रुपये से बढ़कर 120 रुपये हो गया है। दूसरी ओर, रैपिडो ने छोटी गाड़ियों का बेस किराया 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये और सेडान का किराया 60 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये कर दिया है।   यूनियन ने क्या कहा?  यूनियन का कहना है कि लंबे समय से कम बेस किराए के कारण चालक आर्थिक नुकसान झेल रहे थे। नई दरों से उनकी आय में सुधार होगा। हालांकि इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो कम दूरी के लिए कैब सेवाओं का उपयोग करते हैं। ओला ने फिलहाल किराए में 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी पर विचार करने की बात कही है, इसलिए उसके चालकों का आंदोलन अभी जारी रहेगा।

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अपराध पर जीरो टॉलरेंस! हेमंत सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के SSP और सरायकेला SP को हटाया

रांची। झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। देर रात जारी आदेश में पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (SP) को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने दोनों अधिकारियों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।   वरिष्ठ अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने चाईबासा आयुक्त और रांची के एडीजी को संबंधित क्षेत्र में कैंप कर प्रतिदिन हालात की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जमशेदपुर के डीआईजी को भी शहर में रहकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई की लगातार निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं।   जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के लिए जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी और कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर सरकार का जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को जवाबदेह बनाते हुए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को राज्य में पुलिस प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी यदि किसी जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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