झारखंड

Jharkhand Weather Swings Between Rain & Heat

Jharkhand में अप्रैल की शुरुआत में बदला मौसम का मिजाज, कहीं बारिश तो कहीं गर्मी-अगले कुछ दिन रहेंगे उतार-चढ़ाव भरे

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Dark clouds and rain over Jharkhand city with strong winds and changing weather conditions
Jharkhand Weather Change April Rain Storm

Jharkhand में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का अलग-अलग रूप देखने को मिल रहा है-कहीं तेज हवा और बारिश हो रही है तो कहीं धूल भरी आंधी और गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस बार मौसम खुद ही लोगों के साथ “अप्रैल फूल” खेलता नजर आ रहा है।

मंगलवार शाम आई तेज आंधी और बारिश ने लोगों को चौंका दिया। कई जिलों में हुई इस बारिश के बाद बुधवार को भी आसमान में बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी मौसम का यह अस्थिर रुख जारी रह सकता है।

राज्य के कई जिलों में मंगलवार को अच्छी बारिश दर्ज की गई। बोकारो में 17 मिमी वर्षा हुई, जबकि जमशेदपुर में 1.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं बरही में पिछले 24 घंटों के दौरान 35.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सबसे अधिक रही। इस बारिश और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। बोकारो में 8.7 डिग्री सेल्सियस, जमशेदपुर में 4.7 डिग्री, चाईबासा में 6.2 डिग्री और मेदिनीनगर में 1.6 डिग्री तक तापमान गिरा। इससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली है।

राजधानी Ranchi में भी मौसम ने अचानक रंग बदला। मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हुई, जिससे दिनभर की गर्मी के बाद शाम का मौसम सुहाना हो गया। यहां अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन और रात के तापमान में यह अंतर लोगों के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल को राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहेंगे। इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर तेज हवा चलने की संभावना है। यह बदलाव किसानों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

हालांकि 2 और 3 अप्रैल को मौसम के साफ रहने का अनुमान है। इन दिनों आसमान साफ रहेगा और तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ेगा।

इसके बाद 4 अप्रैल से मौसम फिर करवट ले सकता है। उत्तरी झारखंड में तेज हवा, गरज और बारिश की संभावना है, जबकि 5 और 6 अप्रैल को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मेघ गर्जन, वज्रपात और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम विभाग ने खासतौर पर वज्रपात के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।

मंगलवार को राज्य में सबसे अधिक तापमान मेदिनीनगर में 38.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि जमशेदपुर में दिनभर उमस के बाद शाम को हुई बारिश ने राहत दी। यहां अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री और न्यूनतम 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

लगातार बदलते मौसम ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कभी तेज गर्मी, कभी बारिश और कभी तेज हवाएं-इन सबके बीच लोगों को अपने स्वास्थ्य और कामकाज दोनों का ध्यान रखने की जरूरत है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले एक सप्ताह तक इसी तरह का उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नक्सलियों के सरेंडर पर CM हेमंत बोले-मुख्यधारा से जुड़ रहें लोग

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एकसाथ 27 नक्सलियों के सरेंडर पर कहा कि लोग तेजी से मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं। यह सरकार मुख्यालय से नहीं, बल्कि राज्य के सुदूर गांवों से चल रही है। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बात कहकर राज्य में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच बिल्कुल स्पष्ट है, हर व्यक्ति का विकास और हर व्यक्ति की भागीदारी। सरकार की नजर और आवाज गांव के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही है। हर व्यक्ति सरकार के साथ जुड़ रहा है। आज उसी का परिणाम है कि लोग तेजी से मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं। शहीदों के सपनों का झारखंड इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय दुर्गा सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण ऐसे ही कर्मठ युवाओं और आंदोलनकारियों की शहादत व लंबे संघर्ष की बदौलत हुआ है। अपने महान नेताओं पर पूरे राज्य को गर्व है और उनके दिखाएं रास्ते पर चलकर ही एक सशक्त और भयमुक्त झारखंड का निर्माण हो रहा है। हमें अपने नेताओं पर गर्व है। इनके मार्गदर्शन और संघर्ष की बदौलत मंजिल पाई। अलग राज्य बना। उन सभी लोगों की शहादत और संघर्ष की बदौलत ये राज्य है। हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

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DAV Kadru Principal
डीएवी कडरू के प्रिंसिपल एमके सिन्हा दोषी करार, 22 मई को सुनाई जायेगी सजा

रांची। सिविल कोर्ट ने गुरुवार को डीएवी स्कूल, कडरू के प्रिंसिपल एमके सिन्हा को दोषी करार दिया है। उन्हें कल शुक्रवार को सजा सुनाई जायेगी। मामले में अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया। नर्स ने लगाए थे गंभीर आरोप मामला मई 2022 का है, जिसमें स्कूल की एक महिला स्टाफ नर्स ने एमके सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का आरोप था कि प्रिंसिपल बीपी चेक करने के बहाने उन्हें अपने कमरे में बुलाते थे और अश्लील हरकत करते थे। साथ ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव भी बनाते थे। इन आरोपों के आधार पर पीड़िता ने अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एमके सिन्हा फरार हो गए थे। करीब चार दिनों तक फरार रहने के बाद पुलिस ने उन्हें जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हाईकोर्ट से मिली जमानत हुई रद्द बाद में 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। फिर पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत रद्द करने की मांग की।  मामले पर सुनवाई करते हुए 20 जून 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।  सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली बेल सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और एक सप्ताह के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। आदेश के बाद उन्होंने सिविल कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद से वह जेल में बंद हैं।

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रांची। राजधानी रांची के कोकर इलाके से 9 मई से लापता 18 माह की मासूम अदिति पांडेय की सकुशल बरामदगी की मांग को लेकर सदर थाना के समक्ष JLKM ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी ने सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार के द्वारा एसएसपी राकेश रंजन के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में जेएलकेएम पार्टी के केन्द्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो, अदिति की माता अंकिता पांडेय,  पिता मनीष पांडेय और बड़ी संख्या में महिला, सामाजिक कार्यकर्ता, युवाओं एवं आम नागरिकों ने भाग लेकर मासूम बच्ची की सुरक्षित वापसी की मांग को बुलंद किया।  कानून व्यवस्था पर सवाल इस दौरान झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि पिछले 12  दिनों से एक 18 माह की मासूम बच्ची का लापता रहना अत्यंत गंभीर विषय है। यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज और कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल है

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