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झारखंड को खान एवं खनिज संशोधन विधेयक से बड़ा झटका! खनिज सेस पर रोक से ₹1,380 करोड़ के राजस्व पर संकट

anjali kumari अगस्त 13, 2026 0
Jharkhand Mines and Minerals Bill
Jharkhand Mines and Minerals Bill

रांची। लोकसभा में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद झारखंड के लिए चिंता बढ़ गई है। विधेयक में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीन पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने की शक्ति को सीमित करने का प्रावधान है। झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के लिए इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ सकता है।

 

झारखंड की खनिज सेस आय पर पड़ेगा असर

 

झारखंड सरकार को खनिज क्षेत्र से मिलने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में झारखंड को खनिज सेस से करीब ₹1,380 करोड़ की आय हुई थी। नए प्रावधान लागू होने पर इस तरह के सेस की वसूली पर रोक लग सकती है।

 

केंद्र के फैसले से राज्य सरकार की चिंता बढ़ी

 

विधेयक के अनुसार, राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर खनिज की मात्रा, कीमत, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर अपनी ओर से टैक्स अथवा सेस नहीं लगा सकेंगी, जब तक केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत इसकी अनुमति न हो।

 

झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसलिए राज्य के लिए खनिज आधारित राजस्व का महत्व काफी अधिक है।

 

योजनाओं की फंडिंग पर भी उठे सवाल

 

खनिज सेस से होने वाली आय का इस्तेमाल राज्य सरकार विभिन्न विकास और कल्याणकारी योजनाओं में करती है। ऐसे में सेस से होने वाली आय में कमी आने पर राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

केंद्र का तर्क-खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा

 

केंद्र सरकार का कहना है कि अलग-अलग राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त और अनिश्चित शुल्क से खनन की लागत बढ़ती है और निवेश प्रभावित होता है। विधेयक का उद्देश्य खनन क्षेत्र में समान और अनुमानित वित्तीय व्यवस्था बनाना, निवेश बढ़ाना तथा खनिज उत्पादन को प्रोत्साहित करना बताया गया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की 15 अगस्त तिरंगा यात्रा
15 अगस्त को छात्र निकालेंगे 'तिरंगा यात्रा', JPSC-JSSC आंदोलन के बीच बड़ा ऐलान

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकालने का ऐलान किया है। छात्रों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यह यात्रा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से निकाली जाएगी।   सुबह 7 बजे शुरू होगी यात्रा     JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के अनुसार, प्रस्तावित तिरंगा यात्रा 15 अगस्त की सुबह 7 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होगी। इसके बाद यात्रा कचहरी चौक, न्यूक्लियस मॉल, प्लाजा चौक और फिरायालाल चौक होते हुए वापस स्टेडियम पहुंचने की योजना है। हालांकि, यह रूट आयोजकों का प्रस्तावित मार्ग है और अंतिम रूट प्रशासन की अनुमति के बाद तय होगा।     भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग     प्रदर्शनकारी छात्र JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच समेत भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने कहा है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।     छात्रों ने FIR को लेकर भी जताई आपत्ति     आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि प्रदर्शन में शामिल वास्तविक अभ्यर्थियों के खिलाफ बिना जांच प्राथमिकी दर्ज न की जाए। छात्रों का कहना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई घटना हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।     15 अगस्त को भी जारी रहेगा आंदोलन     रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का आंदोलन 14 अगस्त को 21वें दिन में पहुंच गया है। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा के जरिए छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।  

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चमोली टनल हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत, 5 घायल अस्पताल में भर्ती; रेस्क्यू के बाद सामने आई पूरी जानकारी

रांची/चमोली: उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल में हुए भू-धंसाव ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। विष्णुगढ़-पीपलकोटि जल विद्युत परियोजना के तहत बन रही सुरंग में गुरुवार शाम अचानक मलबा गिरने से कई मजदूर अंदर फंस गए। हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें झारखंड के दो मजदूर भी शामिल हैं। वहीं, रेस्क्यू किए गए मजदूरों में झारखंड के पांच लोग घायल हैं, जिनका गोपेश्वर जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। सुरंग में अचानक हुआ भू-धंसाव जानकारी के अनुसार, टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगढ़-पीपलकोटि जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम करीब सात बजे अचानक भू-धंसाव हो गया। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा सुरंग के अंदर आ गया और कई मजदूर उसके बीच फंस गए। घटना के बाद राहत और बचाव दल ने तत्काल अभियान शुरू किया। सुरंग के भीतर मलबा अधिक होने के कारण रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 21 मजदूरों को निकाला गया बाहर रातभर चले बचाव अभियान के दौरान कुल 21 मजदूरों को सुरंग से बाहर निकाला गया। इनमें सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि 14 लोगों को इलाज के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में भर्ती कुछ मजदूरों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। सुरंग के अंदर अभी भी कुछ मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है और बचाव अभियान जारी है। झारखंड के दो मजदूरों ने गंवाई जान हादसे में झारखंड के विजय कुमार और जितेंद्र कुमार की मौत हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विजय कुमार की उम्र 28 वर्ष थी। जितेंद्र कुमार की उम्र की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। दोनों मजदूरों की मौत की खबर झारखंड पहुंचने के बाद उनके परिवारों में शोक का माहौल है। झारखंड के पांच मजदूर अस्पताल में भर्ती हादसे के बाद गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए घायलों में झारखंड के पांच मजदूर भी शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनमें खूंटी, गुमला और पूर्वी सिंहभूम जिले के मजदूर हैं। अस्पताल में भर्ती झारखंड के मजदूरों में: हाबिल गुड़िया, 27 वर्ष, तपरा कमड़ा, तपकरा, खूंटी निस्तर भिगंरा, 24 वर्ष, पायरा किंसू-टोली, तपकरा, खूंटी विनोद रावना, 46 वर्ष, गुमला दीना बेगरा, 26 वर्ष, तोरपा, खूंटी खेला राम बिसरा, 22 वर्ष, डुमरिया, पूर्वी सिंहभूम इन सभी का चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है। सीएम हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से की बात हादसे की जानकारी मिलने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। झारखंड सरकार की ओर से हादसे को लेकर हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। वहीं, उत्तराखंड सरकार भी राहत और बचाव अभियान पर लगातार नजर बनाए हुए है। मलबा हटाकर सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। रेस्क्यू अभियान में मलबा बना बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर बड़ी मात्रा में मलबा आने की वजह से बचाव कार्य प्रभावित हुआ है। राहत दल मशीनों की मदद से रास्ता साफ करने और अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हादसे के बाद प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है।  

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देवघर में कांवरियों की गाड़ी से बड़ी चोरी, 29 हजार रुपये और 3 मोबाइल लेकर चोर फरार

देवघर: सावन में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए उत्तर प्रदेश से देवघर पहुंचे कांवरिया श्रद्धालुओं के साथ चोरी की घटना सामने आई है. कुंडा थाना क्षेत्र के किसनीडीह गांव के पास अज्ञात चोरों ने श्रद्धालुओं की चारपहिया गाड़ी से एक बैग चोरी कर लिया. बैग में 29 हजार रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन रखे हुए थे. घटना गुरुवार देर रात की बतायी जा रही है. शुक्रवार सुबह नींद खुलने पर श्रद्धालुओं को चोरी की जानकारी हुई. राशन दुकान के पास खड़ी थी श्रद्धालुओं की गाड़ी पीड़ित कांवरियों के अनुसार, गुरुवार देर शाम वे किसनीडीह गांव के पास एक राशन दुकान के समीप पहुंचे थे. वहां उन्होंने अपनी चारपहिया गाड़ी खड़ी की और राशन दुकान से जरूरी सामान खरीदने के बाद खाना बनाया. भोजन करने के बाद कुछ श्रद्धालु गाड़ी के अंदर सो गये, जबकि कुछ लोग राशन दुकान के सामने जमीन पर सो गये. इसी दौरान अज्ञात चोरों ने मौका देखकर गाड़ी में रखा बैग चोरी कर लिया. श्रद्धालुओं को इसकी भनक तक नहीं लगी और वे सोते रहे. सुबह नींद खुली तो गायब मिला बैग शुक्रवार सुबह जब श्रद्धालुओं की नींद खुली तो उन्होंने गाड़ी की जांच की. इस दौरान वाहन से बैग गायब मिला. बैग में तीन मोबाइल फोन के साथ श्रद्धालुओं के पैसे रखे हुए थे. बाद में पता चला कि बैग में रखे 29 हजार रुपये नकद भी चोरी हो चुके हैं. चोरी की घटना सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया. उन्होंने आसपास के इलाके में बैग और मोबाइल की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. कुंडा थाना पहुंचकर दर्ज करायी शिकायत घटना के बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अलावलपुर गांव निवासी उदयवीर सिंह कुशवाहा, ओमकार गुप्ता, अखिलेश सिंह कुशवाहा, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा, दीपक कुमार समेत अन्य श्रद्धालु कुंडा थाना पहुंचे. उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज करायी. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है. आसपास के इलाके में छानबीन की जा रही है और चोरी की घटना से जुड़े संभावित सुराग जुटाये जा रहे हैं. पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के पीछे कौन लोग शामिल थे.  

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