झारखंड

रांची में सरहुल की धूम, मांदर पर थिरके मुख्यमंत्री

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 21, 2026 0
सरहुल पर्व में पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते लोग और मुख्यमंत्री
सरहुल उत्सव रांची मुख्यमंत्री

रांची। राजधानी रांची में सरहुल पर्व के अवसर पर उत्साह और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ करमटोली स्थित आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर पहुंचे। यहां आयोजित सरहुल महोत्सव में उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।

 

पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक उत्सव

महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी परंपराओं के अनुसार पूजा में भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जहां मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों ने माहौल को जीवंत बना दिया। सीएम खुद मांदर बजाते और लोगों के साथ उत्सव में शामिल होते नजर आए, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और बढ़ गया।

 

प्रकृति को बताया जीवन का आधार

अपने संबोधन में हेमंत सोरेन ने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ही जीवन का आधार है सभी जीव-जंतुओं और मानव अस्तित्व की जड़ें प्रकृति से ही जुड़ी हैं।

 

परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों द्वारा दी गई समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भी इन सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। आधुनिक जीवनशैली के बीच प्रकृति से जुड़ाव बनाए रखना समय की जरूरत है।

 

प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

सीएम ने कहा कि अगर प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की। सरहुल जैसे पर्व समाज को एकजुट कर प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश देते हैं।

 

शुभकामनाएं और सहभागिता

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी राज्यवासियों को सरहुल की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और लोगों के सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

View more
Jharkhand IAS officers election
झारखंड के 34 आईएएस बने चुनाव प्रेक्षक, प्रशासनिक कार्य प्रभावित

रांची। झारखंड में इन दिनों शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की कमी महसूस दिख रही है। यह स्थिति पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा एवं उपचुनावों के लिए केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा झारखंड कैडर के 34 वरिष्ठ अधिकारियों को ऑब्जर्वर नियुक्त किए जाने के कारण बनी है। राज्य में कार्यरत हैं 161 आईएएस राज्य में कार्यरत कुल 161 आईएएस अधिकारियों में से सचिव और विशेष सचिव रैंक के 34 अधिकारी लगभग 52 दिनों तक राज्य से बाहर रहेंगे। इनमें से अधिकांश अधिकारी 17 मार्च से ही बाहर हैं और उनके 7 मई के बाद लौटने की संभावना है। ऐसे में करीब डेढ़ महीने से अधिक समय तक राज्य का प्रशासनिक ढांचा सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहा है। नये वित्तीय वर्ष की शुरुआत पर असर स्थिति यह है कि कई विभागीय प्रधानों का तो दूसरे अधिकारियों का प्रभार भी नहीं दिया जा सका है। इसका सबसे अधिक असर वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत पर पड़ा है। सामान्यतः मार्च में योजनाओं के खर्च का निपटारा, बजट उपयोग की समीक्षा और नई योजनाओं की रूपरेखा तय की जाती है, लेकिन इस बार कई विभागों में निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।   किन राज्यों में गए अधिकारी   राज्य आईएएस प. बंगाल 24 तमिलनाडु 05 पुडुचेरी 02 केरल 02 इन विभागों पर असर ज्यादा अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबित हैं और नीतिगत फैसले टल रहे हैं। इधर, मुख्यमंत्री पिछले एक सप्ताह से असम चुनाव में व्यस्त हैं और उनके 8 अप्रैल को लौटने की संभावना है। हालांकि, सरकार के शीर्ष स्तर पर यह बात संज्ञान में है कि मार्च-अप्रैल जैसे महत्वपूर्ण समय में बड़ी संख्या में अधिकारियों की अनुपस्थिति से कामकाज प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से कल्याण, कृषि, वन, ग्रामीण विकास, श्रम, वाणिज्य कर और भूराजस्व जैसे विभागों पर इसका अधिक असर देखा जा रहा है। हालांकि यह पुरानी परंपरा है कि विधानसभा चुनाव में प्रेक्षक के तौर पर दूसरे राज्यों के आईएएस अधिकारियों की तैनाती भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की जाती है। लेकिन, इस बार संख्या ज्यादा होने से झारखंड में प्रशासनिक दबाव बढ़ा है। ये वरीय अधिकारी दूसरे राज्यों में भेजे गए एचटीआई के निदेशक मनीष रंजन, वन सचिव अबूबकर सिद्दीख पी., खाद्य आपूर्ति के सचिव राजेश कुमार शर्मा, कल्याण सचिव कृपानंद झा, ग्रामीण विकास सचिव मनोज कुमार, रांची के प्रमंडलीय आयुक्त मनोज कुमार, श्रम सचिव जितेंद्र कुमार सिंह, भू राजस्व सचिव चंद्रशेखर, वाणिज्य कर सचिव अमित कुमार, पेयजल सचिव अबु इमरान, भू-राजस्व विभाग के विशेष सचिव ए. दोड्‌डे, रिम्स के अपर निदेशक वाघमारे प्रसाद कृष्णा, श्रमायुक्त संदीप सिंह, सिविल डिफेंस कमिश्नर घोलप रमेश गोरख, मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय कुमार बरनवाल, पशुपालन निदेशक आदित्य कुमार आनंद, सुडा निदेशक, सूरज कुमार, समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी, झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक शशि रंजन, कृषि निदेशक भोर सिंह यादव, जिडको एमडी वरुण रंजन, पेयजल स्वच्छता विभाग के अपर सचिव शशि रंजन, नगरीय प्रशासन निदेशक नैंसी सहाय, जेपीएससी के सचिव संदीप कुमार, आदिवासी कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी, उद्यान निदेशक माधवी मिश्रा, कौशल विकास के सीईओ एसके लाल, भवन निर्माण के विशेष सचिव विधान चंद्र चौधरी, समाज कल्याण के विशेष सचिव अभयनंदन अंबष्ट, उत्पाद आयुक्त लोकेश मिश्र, पर्यटन निदेशक विजया नारायण राव और उद्योग निदेशक विशाल सागर व अन्य।   विभागों में अतिरिक्त प्रभार से बढ़ा दबाव वरीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी में कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार दूसरे अधिकारियों को दिया गया है। जिससे एक-एक अधिकारी के पास दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी आ गई है। नतीजतन, फाइलों के निष्पादन में देरी हो रही है।   योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर:  राज्य सरकार की कई प्रमुख योजनाएं इस समय क्रियान्वयन की प्रक्रिया में हैं। लेकिन, मॉनिटरिंग और निर्णय लेने वाले अधिकारियों के बाहर रहने से जमीनी स्तर पर भी इसका असर दिख रहा है। जिलों से आने वाले प्रस्तावों और रिपोर्ट पर समय पर निर्णय नहीं हो पा रहा है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Radhakrishna Kishore Budhapahar

बूढ़ापहाड़ पहुंचे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, विकास कार्यों का लिया जायजा

Jharkhand Bar Council election

झारखंड बार काउंसिल चुनाव में मतगणना जारी, गड़बड़ी के आरोपों को अधिकारियों ने किया खारिज

coal mafia crackdown

झारखंड में कोयला माफियाओं पर एक्शन, दर्जनों अवैध मुहाने ध्वस्त

Minor girl sexual abuse
यौन शोषण की शिकार नाबालिग बच्ची गर्भवती, अभ्युक्त फरार

गिरिडीह। गिरिडीह जिले के गावां थाना क्षेत्र के एक गांव में  यौन शोषण की शिकार 13 वर्षीय बच्ची के गर्भवती होने का मामला प्रकाश में आया है। मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवार द्वारा थाना में आवेदन दिया गया है। आवेदन में उन्होंने गावां निवासी 36 वर्षीय नकुल चौधरी पर यौन शोषण एवं धमकाने का आरोप लगाया है।  न्याय की गुहार लगा रहे परिजन पीड़िता के परिजन गावां थाना पहुंचे और आवेदन देते हुए न्याय की गुहार लगाया, जिसके बाद पुलिस में मामले की जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की और पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए गिरिडीह मातृत्व स्वास्थ्य केंद्र भेजा। मामले में गावां के SI डीके सिंह ने ने कहा कि पीड़िता के परिजनों से आवेदन प्राप्त हुआ है। प्राथमिकी दर्ज की गई और पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए गिरिडीह भेजा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Jharkhand Film Festival

Ranchi में 26 से 28 जून तक आयोजित होगा झारखंड फिल्म फेस्टिवल

Dark clouds over Jharkhand city with heavy rain and lightning during sudden weather change

झारखंड में बदला मौसम: रांची-कोडरमा में झमाझम बारिश, 13 जिलों में अलर्ट जारी

Hazaribagh gas agency

हजारीबाग में गैस एजेंसी पर मनमानी का आरोप, प्रशासन के दबाव के बाद शुरू हुआ वितरण

Ranchi electricity outage
रांची के इन इलाकों में घंटों नहीं रहेगी बिजली

रांची। रांची के लोगों के लिए शनिवार का दिन बिजली कटौती के लिहाज से अहम है। शहर के कई इलाकों में आज निर्धारित समय के अनुसार बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। बिजली विभाग ने बताया है कि आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में पुराने तारों को बदलने, कवर केबल लगाने और नए पोल खड़े करने का कार्य किया जा रहा है। इसी कारण अलग-अलग डिवीजन में कुछ घंटों के लिए बिजली बंद रखी जाएगी।   कोकर इलाके में 6 घंटे तक बिजली रहेगी बाधित कोकर डिवीजन के आरएमसीएच सब डिवीजन अंतर्गत बड़गाईं और न्यू मोरहाबादी फीडर से जुड़े क्षेत्रों में सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक बिजली नहीं रहेगी। इस कटौती का असर कृष्णा पुरी कॉलोनी, हरिहर सिंह रोड, प्रगतिशील कॉलोनी और महावीर नगर जैसे इलाकों में देखने को मिलेगा। विभाग के अनुसार, यहां पुराने खुले तारों को हटाकर कवर केबल लगाने का काम किया जाएगा।   ओरमांझी और इरबा क्षेत्र में भी बिजली कटौती रांची (पूर्वी) डिवीजन के ओरमांझी सब डिवीजन में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। इरबा बाजार टांड़ और आसपास के इलाकों में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली बंद रहेगी। वहीं शिवाजी नगर और बूटी क्षेत्र में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आपूर्ति ठप रहेगी। इन इलाकों में 11 केवी ओरमांझी-1, ओरमांझी-2 और बूटी फीडर पर काम होना है।   डोरंडा डिवीजन में भी असर डोरंडा डिवीजन के अनंतपुर और एचएसएल फीडर से जुड़े क्षेत्रों में भी सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।   बिजली विभाग की अपील विभाग ने कहा है कि यह काम भविष्य में बेहतर, सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे तय समय के अनुसार अपने जरूरी कार्य पहले ही निपटा लें और विभाग का सहयोग करें।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Vishayavaar paathy yojana

विषयवार पाठ्य योजना नहीं देने वाले स्कूली शिक्षक होंगे वेतन से वंचित

Ramgarh elephant attack

रामगढ़ में हाथियों ने 3 लोगों को कुचलकर ले ली जान

Ramgarh water shortage

रामगढ़ में पानी को लेकर बवाल, बाल्टी-बर्तन लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण

0 Comments

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?