रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बेहद संवेदनशील मामले से सहम गई है। यहां अज्ञात शरारती तत्वों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के दफ्तर को निशाना बनाने का प्रयास किया। चुटिया थाना क्षेत्र स्थित आरएसएस कार्यालय परिसर में देर रात करीब साढ़े बारह बजे दो संदिग्ध बोतलें फेंकी गईं, जिन्हें पेट्रोल बम बताया जा रहा है। इस घटना के बाद से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस के आला अधिकारी तुरंत दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, ये पूरी घटना देर रात लगभग 12:30 बजे की है, जब कार्यालय के आसपास सन्नाटा था। अपराधियों ने दफ्तर को नुकसान पहुंचाने की नीयत से ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि फेंके गए दो पेट्रोल बमों में से एक में विस्फोट भी हुआ, जिससे वहां मौजूद लोग सहम गए।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। शुरुआती जांच और मौके की स्थिति के आधार पर पुलिस ने घटना को लेकर शुरुआती जानकारियां साझा की हैं। रांची पुलिस के अनुसार, देर रात इस वारदात को अंजाम देने में दो अज्ञात अपराधी शामिल थे। आरोपियों ने सॉस (Sauce) की दो बोतलों में पेट्रोल भरकर उसे आरएसएस दफ्तर के अंदर फेंकने की कोशिश की थी।
राहत की बात ये रही कि दोनों बोतलें कार्यालय के मुख्य भवन तक नहीं पहुंच पाईं और बाउंड्री से ठीक पहले ही जमीन पर गिर गईं। फिलहाल, पुलिस इसे एक सोची-समझी साजिश मानकर चल रही है और सभी संभावित एंगल से इसकी बारीकी से जांच की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गोड्डा। गोड्डा में एक प्रेम कहानी की खूब चर्चा हो रही है। 26 साल की एक विवाहित महिला आरती देवी को 19 साल के सचिन से प्यार हो गया। सचिन के साथ रहने के लिए आरती ने पति और 3 बच्चों को छोड़ दिया। इधर, सचिन के घरवालों ने आरती को अपनाने से इनकार कर दिया और सचिन उससे मुंह मोड़ लिया। अब आरती का पति भी उसे वापस रखने को तैयार नहीं है। आरती अब पुलिस की शरण में पहुंच कर न्याय मांग रही है। यह मामला गोड्डा जिले के बलबड्डा थानाक्षेत्र अंतर्गत घोरीकित्ता गांव का है। स्थानीय लोग भी इश्क और बेवफाई की इस सच्ची कहानी से हैरान हैं। पति और 3 बच्चों को छोड़कर भागी थी महिला बिहार के भागलपुर जिला स्थित गौराडीह थानाक्षेत्र की रहने वाली आरती की शादी 8 साल पहले झारखंड के गोड्डा जिला में हनवारा थानाक्षेत्र अंतर्गत रामकोल गांव के नकुल तांती से हुई थी। दंपति को 3 बच्चे हुए। कुछ साल पहले नकुल तांती, पत्नी आरती और बच्चों को लेकर काम की तलाश में हरियाणा गया था। आरती भी घर-परिवार के लिए कमाने के इरादे से रिलायंस ब्यूटी पार्लर में काम करने लगी। यहीं उसकी मुलाकात रिलायंस मॉल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करने वाले 19 साल के सचिन से हुई। एक ही जगह काम करने की वजह से दोनों में बातचीत होने लगी और फिर मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। मुलाकातें, प्रेम में बदली तो आरती और सचिन ने साथ रहने का फैसला किया। दोनों ने दिल्ली में की शादी जानकारी के अनुसार आरती, पति और 3 बच्चों को छोड़कर सचिन के साथ दिल्ली चली गई। यहां, सचिन ने आरती को अपनी चाची के घर पर रखा और उसकी मांग में सिंदूर भरकर पत्नी बना लिया। दिल्ली में शादी करने के बाद दोनों हरियाणा गए और वहीं मॉल में नौकरी करने लगे। सचिन और आरती 1 महीने तक साथ रहे। प्रेमी ने छोड़ा और पति भी अपनाने को तैयार नही समय के साथ आरती और सचिन के रिश्तों में खटास आने लगी। दरअसल, सचिन के घरवालों को आरती, बहू के रूप में स्वीकार्य नहीं है। वहीं, नकुल तांती भी अब उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है। महिला अब बलबड्डा थाने में गुहार लगा रही है कि उसे, उसके प्रेमी के साथ रहने दिया जाए। थाना प्रभारी पंकज सिंह ने कहा कि लड़के को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। लड़की पक्ष की ओर से अभी कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है। लड़का, महिला को रखना चाहता है, लेकिन घरवाले तैयार नहीं है।
रांची। जेएससीए स्टेडियम में खेले गए सातवें दिन के मुकाबलों ने लीग का रोमांच चरम पर पहुंचा दिया है। एक तरफ रांची टाइटंस ने विशाल लक्ष्य को आसानी से भेदकर नंबर-1 का ताज पहना, तो वहीं संथाल स्ट्राइकर्स ने सीजन की अपनी पहली जीत का स्वाद चखा। टी-20 क्रिकेट की असली खूबसूरती उसकी अनिश्चितता और हर दिन बदलने वाले समीकरणों में है। रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में चल रहे 'झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग 2026' के सातवें दिन दर्शकों को कुछ ऐसा ही रोमांच देखने को मिला। बुधवार को हुए दो अहम मुकाबलों ने टूर्नामेंट के पॉइंट्स टेबल की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी है। रांची टाइटंस की दमदार रनों की भूख दिन के सबसे अहम मुकाबले में रांची टाइटंस के सामने धनबाद डायमंड्स द्वारा खड़ा किया गया 192 रनों का विशाल लक्ष्य था। अमूमन इतने बड़े स्कोर का पीछा करते हुए टीमें दबाव में बिखर जाती हैं, लेकिन रांची के सलामी बल्लेबाजों का इरादा कुछ और ही था। आर्यन हुड्डा और शिखर मोहन की जोड़ी ने मैदान पर उतरते ही धनबाद के गेंदबाजों पर चौतरफा हमला बोल दिया। इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 134 रनों की एक मजबूत नींव रखी, जिसने मैच को एकतरफा बना दिया। आर्यन हुड्डा ने महज 55 गेंदों पर नाबाद 94 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली, जबकि शिखर मोहन ने 37 गेंदों में 62 रन ठोके। इस आक्रामक शुरुआत की बदौलत रांची ने 18.3 ओवर में ही जीत का परचम लहरा दिया और सीधे अंक तालिका के शीर्ष पर अपनी जगह पक्की कर ली। धनबाद का संघर्ष और प्रिंस मुर्मू की कसी हुई गेंदबाजी इससे पहले, धनबाद डायमंड्स की शुरुआत भी किसी मायने में कमतर नहीं थी। राम रौशन शरण ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए सिर्फ 24 गेंदों में 58 रन जड़ दिए। आदित्य सिंह (26 रन) और विशेष दत्ता (24 रन) के साथ मिलकर टीम ने 191 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था। धनबाद की पारी शायद 200 के पार चली जाती, लेकिन रांची के गेंदबाज प्रिंस अनुराग मुर्मू ने अपने 4 ओवर के स्पेल में महज 20 रन देकर 3 अहम विकेट चटकाए और रनों की रफ्तार पर लगाम कसी। धनबाद के कप्तान राजदीप सिंह और युवराज कुमार ने भी अपनी टीम के लिए दो-दो विकेट निकाले, लेकिन वे रांची की जीत को टाल नहीं सके। संथाल स्ट्राइकर्स ने किया बड़ा उलटफेर सातवें दिन का एक और बड़ा आकर्षण संथाल स्ट्राइकर्स की जबरदस्त वापसी रही। टूर्नामेंट में अब तक शानदार प्रदर्शन कर रही और शीर्ष पर काबिज कोयलांचल सुपर किंग्स को संथाल स्ट्राइकर्स ने 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले बल्लेबाजी करने उतरी कोयलांचल सुपर किंग्स की टीम शरनदीप सिंह भाटिया (58 रन) और रॉबिन मिंज (40 रन) की पारियों के सहारे 148/8 का ही सम्मानजनक स्कोर बना सकी। संथाल के प्रत्यूष कुमार ने बेहतरीन गेंदबाजी (3/17) कर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया। जवाब में, विवेक कुमार (64 रन) और कुमार सूरज (34 रन) की संयमित पारियों के दम पर संथाल स्ट्राइकर्स ने 18.2 ओवर में 154/3 रन बनाकर टूर्नामेंट में अपना खाता खोल लिया। आगे क्या? लीग के समीकरण अब और भी दिलचस्प हो गए हैं। बुधवार को दर्शकों को दो और कड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे। दिन के पहले मैच में आत्मविश्वास से भरी संथाल स्ट्राइकर्स का सामना जमशेदपुर स्टीलर्स से होगा। वहीं, शाम 6:30 बजे के 'प्राइम टाइम' मुकाबले में छोटानागपुर रॉयल्स की टक्कर कोयलांचल सुपर किंग्स से होगी, जो अपनी हार को भुलाकर दोबारा लय में लौटने की कोशिश करेगी।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। गोला प्रखंड के कोरांबे गांव निवासी जलेश्वर महतो अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण पत्र बांटकर लौट रहे थे। उनके साथ हेंसापोड़ा पंचायत के पूर्व मुखिया विशाल करमाली भी बाइक पर सवार थे। रास्ते में दूसरी बाइक से आमने-सामने की टक्कर में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में जलेश्वर महतो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विशाल करमाली ने रांची में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कार्ड बांटकर लौटते समय हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, जलेश्वर महतो की बेटी की शादी 2 जुलाई को होनी थी। इसी सिलसिले में वे विशाल करमाली के साथ विष्णुगढ़-बगोदर क्षेत्र में शादी के कार्ड बांटने गए थे। सोमवार देर शाम घर लौटते समय विष्णुगढ़-गोमिया मुख्य मार्ग पर जमनीजारा के पास उनकी बाइक की सामने से आ रही दूसरी बाइक से जोरदार टक्कर हो गई। रांची में इलाज के दौरान हुई दूसरी मौत हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल विशाल करमाली को प्राथमिक उपचार के बाद रांची स्थित रिम्स रेफर किया, जहां मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गांव में पसरा मातम विशाल करमाली हेंसापोड़ा पंचायत के पूर्व मुखिया थे, जबकि वर्तमान में उनकी पत्नी गीतांजलि कुमारी तिर्की पंचायत की मुखिया हैं। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं। वहीं जलेश्वर महतो अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। बेटी की शादी की तैयारियों के बीच पिता की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। इस हादसे के बाद कोरांबे गांव और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने दोनों दिवंगतों को श्रद्धांजलि देते हुए इसे क्षेत्र की अपूरणीय क्षति बताया।