रांची। झारखंड के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में निजी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का उल्लेख किया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रोहितश्य रॉय को राज्य का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया है। वहीं, अपर महाधिवक्ता अचुत्य केशव को पदोन्नत कर वरीय अपर महाधिवक्ता बनाया गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
राजीव रंजन फरवरी 2020 में झारखंड के महाधिवक्ता नियुक्त किए गए थे और तब से इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर कार्यरत थे। उनके इस्तीफे में स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कारणों का जिक्र किया गया है, लेकिन उनके अचानक पद छोड़ने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई अतिरिक्त आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
राजनीतिक हलकों में राजीव रंजन के इस्तीफे को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि उनकी नियुक्ति कांग्रेस नेतृत्व की सहमति से हुई थी और उन्होंने अतीत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पैरवी भी की थी। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस बदलाव को आगामी राज्यसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि महागठबंधन के भीतर चल रहे मतभेद और बदलते राजनीतिक समीकरण भी इसकी वजह हो सकते हैं। वहीं, एक हाई-प्रोफाइल मामले में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में हो रही है, हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महाधिवक्ता के इस्तीफे को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने आरोप लगाया कि झारखंड में शासन व्यवस्था की जगह "म्यूजिकल चेयर" का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहा है।
भाजपा ने सरकार से राजीव रंजन के पूरे कार्यकाल का श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। पार्टी ने पूछा है कि उनके कार्यकाल में राज्य सरकार ने कितने मुकदमे जीते और हारे, बाहरी वकीलों पर कितना खर्च किया गया और उससे राज्य को क्या लाभ मिला। भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि यदि उनका कार्यकाल संतोषजनक था तो उनसे इस्तीफा क्यों लिया गया, और यदि प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था तो उन्हें इतने लंबे समय तक पद पर क्यों बनाए रखा गया।
फिलहाल, राज्य सरकार ने रोहितश्य रॉय की नियुक्ति के साथ कानूनी नेतृत्व में बदलाव कर दिया है, जबकि राजीव रंजन के इस्तीफे के वास्तविक कारणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं अभी भी जारी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस को खुली चुनौती देते हुए हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रनिया थाना क्षेत्र में एक युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। घटना ऐसे समय सामने आई, जब पुलिस एक अन्य हत्याकांड के आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेजकर लौटी थी। लगातार हो रही हत्याओं ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या है मामला? सोमवार सुबह रनिया थाना पुलिस को तांबा रोड के किनारे एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती तौर पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण करने पर हत्या की आशंका स्पष्ट हो गई। मृतक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान मिले, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने भारी पत्थर से हमला कर उसकी हत्या की और सबूत छिपाने के लिए शव को सड़क किनारे छोड़ दिया। जांच के दौरान मृतक की पहचान तोरपा निवासी 40 वर्षीय राधेश्याम साहू के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से रनिया में मोटर गैराज चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे। उनकी हत्या की खबर से परिवार और स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है। जमीन विवाद समेत सभी एंगल पर जांच तोरपा के डीएसपी विजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस आपसी रंजिश, व्यक्तिगत दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं से खूंटी जिले में लोगों के बीच भय का माहौल है। स्थानीय लोग अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
जमशेदपुर। झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में अनियमितताओं पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में जांच के दौरान 4,068 ऐसे लाभुकों की पहचान की गई है, जिन्होंने गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या तथ्य छिपाकर योजना का लाभ लिया। अब इन सभी से अब तक प्राप्त पूरी राशि की वसूली की जाएगी। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि गंभीर मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले मामले विभागीय जांच और भौतिक सत्यापन के दौरान जिले में कुल 6,974 लाभुकों के नाम योजना की सूची से हटाए गए हैं। इनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जो योजना की पात्रता पूरी नहीं करते थे। कुछ मामलों में लाभुकों की मृत्यु के बाद भी उनके नाम पर भुगतान जारी था। वहीं, पहले एक पुरुष द्वारा योजना की राशि लेने का मामला भी सामने आया था, जिससे पूरी राशि वापस कराई गई। इसके अलावा, बिहार की मूल निवासी 142 महिलाओं को भी चिह्नित किया गया है, जो नियमों के विपरीत पूर्वी सिंहभूम से योजना का लाभ ले रही थीं। प्रशासन ने इनके खिलाफ भी राशि वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तीन लाख से अधिक लाभुकों का सत्यापन जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत कुल 3,07,071 लाभुक पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 2,89,019 लाभुकों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। अधिकांश लाभुक पात्र पाए गए हैं, जबकि 11,078 लाभुकों का सत्यापन अभी शेष है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। फर्जी लाभुकों पर होगी कार्रवाई सामाजिक सुरक्षा विभाग की प्रभारी सहायक निदेशक रूपा रानी तिर्की ने बताया कि जिले में लगभग 90 प्रतिशत सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत जांच पूरी होने के बाद अयोग्य लाभुकों से राशि की रिकवरी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में नॉन-डीबीटी संबंधी तकनीकी समस्याएं मिली हैं, उनका भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए सत्यापन अभियान लगातार जारी रहेगा। फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि पात्र लाभुकों को योजना का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने की पुख्ता तैयारी कर ली है। पार्टी किसी भी तरह की चूक नहीं चाहती। इससे बचने के लिए पार्टी विधायकों पर विशेष नजर बनाए हुए है और संगठन के वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं को विधायकों के साथ लगातार संपर्क में रहने और मतदान प्रक्रिया को लेकर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। साथ ही विधायकों की समस्याओं और सुझावों को पार्टी आलाकमान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तय की गई है। मुख्यमंत्री आवास में रात्रिभोज कांग्रेस को झामुमो के समर्थन के बाद अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर भरोसा है। हालांकि पार्टी किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती और हर विधायक के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री आवास पर लगातार दो दिनों तक आयोजित रात्रिभोज की चर्चा भी तेज है। माना जा रहा है कि इन बैठकों के जरिए गठबंधन दलों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक आ रहे रांची राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक अजय शर्मा, नासिर हुसैन और प्रदेश प्रभारी के रांची पहुंचने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के साथ रात्रिभोज के दौरान उनकी महत्वपूर्ण बैठक भी हो सकती है, जिसमें चुनावी रणनीति और गठबंधन की मजबूती पर चर्चा होगी। विधायकों के संपर्क में प्रदीप यादव विधायक दल के नेता प्रदीप यादव लगातार कांग्रेस विधायकों के संपर्क में हैं। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि मतदान के दौरान कोई भी विधायक पार्टी लाइन से अलग न जाए। यही वजह है कि रांची से लेकर नई दिल्ली तक कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।