झारखंड

सावन में पहाड़ी मंदिर में शीशे- मेटल की पूजन सामग्री पर लगी रोक

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Pahari Mandir
Pahari Mandir Ranchi

रांची। सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में प्रशासन ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर में शीशे और मेटल की पूजन सामग्री के उपयोग पर रोक लगा दी है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने रविवार को पहाड़ी मंदिर पहुंचकर तैयारियों और विकास कार्यों का निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए।

 

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त को स्पष्ट निर्देश दिया


निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे श्रद्धालुओं को शीशे में पैक कोई भी पूजन सामग्री न बेचें। साथ ही, भक्तों से भी अपील की गई कि वे पूजा-अर्चना के दौरान शीशे या धातु (मेटल) से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें। प्रशासन का मानना है कि इससे भीड़ के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनी रहेगी।

 

उपायुक्त ने मंदिर परिसर में चल रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने पहाड़ी बाबा मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियों की स्थिति, शौचालय निर्माण, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, रास्तों में लगाए जा रहे पेवर ब्लॉक, विद्युत आपूर्ति और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सावन शुरू होने से पहले सभी कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।

 

डीसी ने क्या कहा ?


डीसी ने कहा कि सावन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन, पूजा और अन्य सुविधाओं में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ भीड़ प्रबंधन, साफ-सफाई, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।


निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने पहाड़ी बाबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना भी की। इस अवसर पर एसडीओ कुमार रजत, सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह, मंदिर समिति के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का लक्ष्य है कि सावन में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची गैंगरेप केस में 7 साल बाद इंसाफ, मुख्य आरोपी को 20 साल की सजा

रांची। सात साल पहले चलती बोलेरो पिकअप वैन में इंटर की छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में रांची की अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायायुक्त ए.के. मिश्रा की अदालत ने दोषी चालक दीपक कुमार महतो पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने इस मामले में फरार चल रहे दूसरे आरोपी एवं खलासी छोटू उर्फ गुड्डू कुमार चौहान को भी 20 साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है तथा उसकी गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया है।   यह घटना 10 जनवरी 2019 की है पीड़िता डालटनगंज जाने के लिए सड़क किनारे बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान बोलेरो पिकअप वैन चालक और उसके खलासी ने उसे लिफ्ट देने का झांसा देकर वाहन में बैठा लिया। आरोप है कि दोनों उसे सुनसान इलाके में ले गए, जहां उसके हाथ-पैर और मुंह बांधकर चलती गाड़ी में ही सामूहिक दुष्कर्म किया गया।   घटना के बाद क्या हुआ ? घटना के बाद आरोपियों ने छात्रा को गंभीर हालत में सड़क किनारे फेंक दिया और फरार हो गए। संयोगवश वहां से गुजर रही पुलिस की पीसीआर टीम की नजर पीड़िता पर पड़ी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के बाद पीड़िता के बयान के आधार पर रांची के सदर थाना में दोनों आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई।   मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। मुख्य आरोपी दीपक कुमार महतो पहले से न्यायिक हिरासत में था, जिसे अब सजा काटने के लिए केंद्रीय कारागार भेजा जाएगा। वहीं फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को शीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।   करीब सात वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद आए इस फैसले को पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के फैसले से गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश भी गया है।

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रांची में SIR फॉर्म बना सिरदर्द, 150 से ज्यादा BLO को शोकॉज नोटिस

रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने का कार्य जारी है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई मतदाताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रांची समेत कई क्षेत्रों से शिकायतें मिली हैं कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराने और उसे भरने की सही जानकारी देने में लापरवाही बरत रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्हें या तो फॉर्म मिला ही नहीं, या केवल फॉर्म थमा दिया गया, लेकिन उसे भरने की प्रक्रिया नहीं समझाई गई। इस कारण बड़ी संख्या में मतदाता भ्रम की स्थिति में हैं।   जानकारी के अभाव में बढ़ीं फॉर्म भरने की गलतियां बीएलओ से संपर्क नहीं हो पाने के कारण कई मतदाताओं ने अनुमान के आधार पर एन्यूमरेशन फॉर्म भर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में फॉर्म में त्रुटियां सामने आ रही हैं। कई लोग अपने नाम की जगह माता-पिता का विवरण दर्ज कर रहे हैं, जबकि कुछ ऐसे कॉलम भी भर रहे हैं जिन्हें उनकी स्थिति में खाली छोड़ना चाहिए था। बाद में इन गलतियों को सुधारने के लिए व्हाइटनर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है या फिर ऑनलाइन डेटा एंट्री के दौरान बीएलओ को स्वयं सुधार करना पड़ रहा है।   150 से अधिक बीएलओ को नोटिस चुनाव प्रक्रिया में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए रांची जिला प्रशासन ने 150 से अधिक बीएलओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों पर डोर-टू-डोर सत्यापन और मतदाताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने का आरोप है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   प्रशासन ने मतदाताओं से की अपील प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि फॉर्म भरने में किसी प्रकार की दिक्कत हो तो वे संबंधित बीएलओ, विशेष शिविर या निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें। अधिकारियों का कहना है कि सही जानकारी के साथ फॉर्म भरना बेहद जरूरी है, ताकि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे और भविष्य में मतदान के दौरान किसी भी नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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झारखंड Weather Update: 21 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट, IMD ने जारी किया येलो अलर्ट

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Jharkhand Weather: झारखंड में मानसून सक्रिय, पांच जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट

रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग, रांची ने मंगलवार को राज्य के पांच जिलों रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगामें भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में कई स्थानों पर मेघगर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।   22 और 23 जुलाई को भी जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 22 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। रांची, बोकारो, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, कोडरमा और चतरा के अलावा पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में वर्षा गतिविधियां तेज रह सकती हैं। हालांकि इस दिन भारी बारिश का अलग से अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा बना रहेगा।   23 जुलाई को भी मानसून का असर पूरे राज्य में देखने को मिलेगा। देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज सहित मध्य और दक्षिणी झारखंड के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने इस दिन भी वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।   सामान्य से 33 प्रतिशत कम हुई बारिश राज्य में मानसून सक्रिय होने के बावजूद अब तक वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी कम है। 1 जून से 20 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में औसतन 391.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 261.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यानी राज्य में अब तक 33 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों और भूजल स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब आगामी बारिश पर टिकी हुई है।

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