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BPCL भर्ती 2026: 154 तकनीशियन और ऑपरेटर पदों पर निकली भर्ती, जानें योग्यता और चयन प्रक्रिया

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
BPCL Recruitment
BPCL Recruitment 2026

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने गैर-प्रबंधकीय (Non-Executive) पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती अभियान के तहत मुंबई और कोच्चि रिफाइनरी में कुल 154 पदों पर तकनीशियन और ऑपरेटर की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

 

154 पदों पर होगी भर्ती

 

भर्ती के तहत मुंबई रिफाइनरी में प्रोसेस टेक्नीशियन (केमिकल) के 60 पद भरे जाएंगे। वहीं, कोच्चि रिफाइनरी में प्रोसेस ऑपरेटर (केमिकल) के 64, टेक्नीशियन/ऑपरेटर (मैकेनिकल) के 13 और टेक्नीशियन (इलेक्ट्रिकल) के 17 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

 

योग्यता और आयु सीमा

 

केमिकल, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग/टेक्नोलॉजी में संबंधित डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। साथ ही संबंधित क्षेत्र में कम से कम एक वर्ष का कार्य अनुभव या अप्रेंटिसशिप अनिवार्य है। उम्मीदवार की आयु 1 जुलाई 2026 के अनुसार 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी।

 

ऐसे होगा चयन

 

चयन प्रक्रिया के पहले चरण में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित होगी। परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे और इसकी अवधि 120 मिनट होगी। इसमें नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। CBT में सफल उम्मीदवारों को स्किल/प्रोफिशिएंसी टेस्ट और इसके बाद मेडिकल परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन मेडिकल फिटनेस और निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा।

 

इतना मिलेगा वेतन

 

चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति NG-2 ग्रेड में की जाएगी। उन्हें ₹26,500 से ₹34,000 के वेतनमान में ₹26,500 प्रति माह शुरुआती मूल वेतन मिलेगा। इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA) और कंपनी के नियमों के अनुसार अन्य भत्ते एवं सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (IBPS) ने क्लर्क भर्ती 2026 के लिए शॉर्ट नोटिस जारी कर दिया है। यह भर्ती CRP CSA-XVI (Customer Service Associate) के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में क्लर्क पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित की जाएगी।   1 अगस्त से शुरू होगा ऑनलाइन आवेदन   IBPS Clerk Recruitment 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्त 2026 से शुरू होगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 21 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि भी 21 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।   अक्टूबर में होगी प्रारंभिक परीक्षा   भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। मुख्य परीक्षा दिसंबर 2026 में आयोजित होने की संभावना है।   मार्च 2027 में होगा प्रोविजनल अलॉटमेंट   IBPS के शेड्यूल के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम नवंबर 2026 में जारी किया जाएगा। इसके बाद मुख्य परीक्षा के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। प्रोविजनल अलॉटमेंट मार्च 2027 में किया जाएगा।   किन पदों पर होगी भर्ती?   इस भर्ती के माध्यम से कस्टमर सर्विस एसोसिएट (CSA) यानी क्लर्क पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। चयनित उम्मीदवारों को देश के विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम करने का अवसर मिलेगा।   तीन चरणों में पूरी होगी चयन प्रक्रिया   IBPS Clerk Recruitment 2026 की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी:   प्रारंभिक ऑनलाइन परीक्षा मुख्य ऑनलाइन परीक्षा प्रोविजनल अलॉटमेंट   अंतिम चयन मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।   विस्तृत नोटिफिकेशन में मिलेंगी जरूरी जानकारियां   IBPS ने फिलहाल केवल शॉर्ट नोटिस जारी किया है। विस्तृत अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों को राज्यवार और श्रेणीवार रिक्तियों, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न, सिलेबस, वेतनमान और आरक्षण से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी।   परीक्षा की तैयारी में जुटे उम्मीदवारों के लिए अहम मौका   IBPS Clerk भर्ती हर साल बड़ी संख्या में बैंकिंग उम्मीदवारों को नौकरी का अवसर देती है। इस बार भी हजारों अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आवेदन से जुड़ी सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें।  

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IIT Dhanbad Assistant Professor Recruitment 2026: बिना NET भी बन सकते हैं असिस्टेंट प्रोफेसर, IIT धनबाद में 30 पदों पर भर्ती

IIT Dhanbad Assistant Professor Vacancy 2026: प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) धनबाद ने असिस्टेंट प्रोफेसर (ग्रेड-I और ग्रेड-II) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि UGC NET या CSIR NET पास होना अनिवार्य नहीं है। योग्य अभ्यर्थी 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए बेहतरीन अवसर है जो उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्यापन और शोध के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। 30 पदों पर होगी भर्ती आईआईटी धनबाद इस भर्ती अभियान के तहत कुल 30 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों को भरेगा। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति ग्रेड-I और ग्रेड-II के पदों पर संस्थान की आवश्यकता और पात्रता के अनुसार की जाएगी। किन-किन विभागों में निकली हैं वैकेंसी? भर्ती संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के लिए की जा रही है। इनमें प्रमुख विभाग शामिल हैं— अप्लायड जियोलॉजी अप्लायड जियोफिजिक्स केमिकल इंजीनियरिंग केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी सिविल इंजीनियरिंग कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एनवायरमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग फ्यूल, मिनरल्स एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग माइनिंग इंजीनियरिंग पेट्रोलियम इंजीनियरिंग फिजिक्स अन्य संबंधित विभाग आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर ही स्वीकार किए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय में प्रथम श्रेणी के साथ पीएचडी अथवा समकक्ष शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। साथ ही उम्मीदवार का अकादमिक रिकॉर्ड भी उत्कृष्ट होना चाहिए। अनुभव की शर्त असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-II: पीएचडी के बाद तीन वर्ष से कम का शिक्षण, शोध या औद्योगिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-I: पीएचडी के बाद कम से कम तीन वर्ष का प्रासंगिक अनुभव आवश्यक है। NET अनिवार्य नहीं इस भर्ती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि UGC NET या CSIR NET की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। यदि उम्मीदवार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें पूरी करते हैं, तो वे आवेदन के पात्र हैं। आयु सीमा आवेदक की अधिकतम आयु 35 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों (OBC, SC, ST एवं PwD) को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी। वेतन और सुविधाएं चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार आकर्षक वेतन मिलेगा। असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-II: बेसिक वेतन ₹70,900 से शुरू होगा। भत्तों सहित मासिक वेतन लगभग ₹1,49,262 तक हो सकता है। असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-I: भत्तों सहित मासिक वेतन लगभग ₹2,11,196 तक पहुंच सकता है। इसके अलावा चयनित फैकल्टी को मेडिकल सुविधा, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), महंगाई भत्ता (DA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, रिसर्च सपोर्ट ग्रांट, फैकल्टी डेवलपमेंट अलाउंस, टेलीफोन बिल प्रतिपूर्ति और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। आवेदन शुल्क इस भर्ती के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं रखा गया है। सभी पात्र उम्मीदवार निशुल्क आवेदन कर सकते हैं। आवेदन कैसे करें? IIT धनबाद के फैकल्टी भर्ती पोर्टल fr.iitism.ac.in पर जाएं। ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें। लॉगइन कर आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र, शोध प्रकाशन, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेज अपलोड करें। सभी जानकारी जांचने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन का प्रिंटआउट सुरक्षित रखें। भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी आगे की जानकारी और इंटरव्यू संबंधी सूचना उम्मीदवारों को ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी।  

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