राष्ट्रीय

कांवड़ यात्रा 2026: 12 फीट से ऊंची कांवड़ पर रोक, डीजे और सुरक्षा को लेकर प्रशासन की नई गाइडलाइन

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन की नई गाइडलाइन और सुरक्षा व्यवस्था
Kanwar Yatra 2026 New Guidelines Security DJ Restrictions

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा 2026 को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए आगरा प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट से अधिक नहीं होगी और डीजे का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार ही किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।

 

पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समन्वय बैठक में यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने कांवड़ मार्गों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तृत योजना बनाई।

 

कांवड़ मार्ग पर मीट की दुकानें रहेंगी बंद

 

प्रशासन ने निर्देश दिया है कि कांवड़ मार्गों और प्रमुख शिव मंदिरों के आसपास मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। वहीं, खाद्य एवं औषधि विभाग होटल, ढाबों और खाद्य दुकानों की जांच करेगा तथा सभी दुकानों पर रेट सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।

 

संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल

 

कांवड़ मार्गों की मैपिंग कर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। हाथीघाट, पोइया और बटेश्वर जैसे प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। साथ ही रूट डायवर्जन, यातायात नियंत्रण, एंबुलेंस, क्रेन और मेडिकल सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

 

सोशल मीडिया पर 24 घंटे निगरानी

 

प्रशासन ने अफवाहों पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया की 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और बिजली विभाग को कांवड़ मार्गों की मरम्मत, जलभराव की समस्या दूर करने तथा ट्रांसफॉर्मर, बिजली के पोल और झूलते तारों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

राष्ट्रीय

View more
Anti-Paper Leak Bill
एंटी पेपर लीक विधेयक पर लोकसभा में घमासान, सरकार ने बताया परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम

विधेयक के प्रावधानों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने   नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर जोरदार बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। वहीं, विपक्ष ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी जरूरत है।   सरकार ने बताया सख्त कानून की जरूरत   बहस के दौरान सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। सरकार का दावा है कि नए कानून से परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत होगी।    विपक्ष ने उठाए कई सवाल   विपक्षी दलों ने विधेयक का समर्थन करते हुए भी इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना था कि पेपर लीक रोकने के लिए केवल सख्त सजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने, तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की भी आवश्यकता है।    छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं   पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित लाखों अभ्यर्थियों की नजर अब इस विधेयक पर टिकी है। यदि यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना और परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा कायम रखना है।   

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Lightning

छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली का कहर, पांच लोगों की मौत; अगले 24 घंटे के लिए IMD का अलर्ट

Security personnel patrolling Nepal's Sunsari district after communal violence as curfew remains in force near the India-Nepal border

नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा: भारत सीमा से सटे सुनसरी में कर्फ्यू बढ़ा, पुलिस फायरिंग में 1 की मौत

Telegram founder Pavel Durov faces legal action after Russia places him on its international wanted list over terrorism-related allegations

रूस का बड़ा कदम: टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में शामिल, FSB ने लगाए आतंकवाद में मदद के आरोप

असम में बाढ़ का कहर, 75 लोगों की मौत और 622 गांव जलमग्न
असम में बाढ़ का कहर जारी: 75 की मौत, 622 गांव जलमग्न; हिमंता सरकार ने बढ़ाया मुआवजा

गुवाहाटी, एजेंसियां। असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। पिछले 24 घंटे में सात और लोगों की मौत के बाद राज्य में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल राज्य के सात जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जहां 622 गांव जलमग्न हैं और करीब 3.32 लाख लोग प्रभावित हैं।   सात जिले अब भी बाढ़ की चपेट में   बाढ़ से शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, सोनितपुर और कामरूप महानगरपालिका क्षेत्र प्रभावित हैं। इनमें चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां लगभग 1.42 लाख लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं। इसके बाद शिवसागर और जोरहाट का स्थान है।   सरकार ने बढ़ाई अनुग्रह राशि   मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि बढ़ाकर ₹9 लाख प्रति परिवार करने की घोषणा की है। साथ ही, लापता लोगों के मामलों में यदि एक महीने के भीतर शव नहीं मिलता है, तो संबंधित परिवार को भी इस सहायता का लाभ दिया जाएगा।   राहत और बचाव अभियान जारी   राज्य में 81 राहत शिविर और 34 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां 32 हजार से अधिक विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं।   फसल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान   बाढ़ के कारण 45,341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। इसके अलावा कई घरों, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य सार्वजनिक ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए शिवसागर में इंट्रा-सर्कल रोमिंग सुविधा की अवधि भी बढ़ा दी गई है।   बच्चों और प्रभावित परिवारों पर विशेष फोकस   मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राहत शिविरों में बच्चों के लिए पढ़ाई और खेलकूद की व्यवस्था की जा रही है, ताकि आपदा का उनके बचपन पर कम से कम असर पड़े। वहीं, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के सबसे अधिक प्रभावित परिवारों को घरेलू जरूरतों के लिए ₹15,000 की अंतरिम सहायता भी दी जाएगी।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
Assam Flood

असम बाढ़ से हालात गंभीर, मृतकों की संख्या 75 पहुंची; मुख्यमंत्री ने राहत पैकेज का ऐलान किया

West Bengal Government 's  Big Decision

NEET प्रदर्शन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी

कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन की नई गाइडलाइन और सुरक्षा व्यवस्था

कांवड़ यात्रा 2026: 12 फीट से ऊंची कांवड़ पर रोक, डीजे और सुरक्षा को लेकर प्रशासन की नई गाइडलाइन

US President Donald Trump speaking about Iran, warning of possible strikes on bridges and power plants if negotiations fail
US-Iran War: ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- डील नहीं हुई तो पुल और पावर प्लांट होंगे निशाने पर

US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान अमेरिका के साथ समझौता करने में विफल रहता है, तो अमेरिकी सेना दोबारा सैन्य कार्रवाई करेगी। ट्रंप के मुताबिक, इस बार हमलों का लक्ष्य ईरान के रणनीतिक पुल, बिजली संयंत्र और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे हो सकते हैं। "एक घंटे में ज्यादातर पुल नष्ट कर सकता हूं" समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका एक घंटे से भी कम समय में ईरान के अधिकांश पुलों को तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी देश के पुल और बिजलीघर उसकी आर्थिक और रणनीतिक रीढ़ होते हैं और इनके नष्ट होने के बाद दोबारा निर्माण में कई वर्ष लग जाते हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई हुई तो ईरान को ऐसा नुकसान होगा, जिससे उबरने में उसे लंबा समय लग सकता है। परमाणु ठिकानों पर भी दी कार्रवाई की चेतावनी ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें ईरान के कथित 'पिकएक्स माउंटेन' परमाणु स्थल पर चल रही गतिविधियों की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले भी ईरान के कई परमाणु ठिकानों को निशाना बना चुका है और यदि समझौता नहीं हुआ तो भविष्य में इस स्थल पर भी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दोबारा मजबूत नहीं होने देना चाहता। बिजली संयंत्र निशाने पर, लेकिन आम नागरिकों को बचाने का दावा ट्रंप ने कहा कि बिजली संयंत्र भी संभावित सैन्य कार्रवाई के दायरे में हो सकते हैं क्योंकि इन्हें दोबारा स्थापित करना बेहद कठिन होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डीसैलिनेशन प्लांट को निशाना नहीं बनाएगा, क्योंकि उससे सीधे आम नागरिक प्रभावित होंगे। उनका दावा था कि अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक और सैन्य क्षमता को कमजोर करना होगा। नेतन्याहू पर भी साधा निशाना इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक बयान देने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि अमेरिका पहले से ही ईरान की गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए है। व्हाइट हाउस बैठक से पहले बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब व्हाइट हाउस में उनकी इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच ईरान, लेबनान, मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति और अब्राहम समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ट्रंप के ताजा बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं, लेकिन ट्रंप की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Search Operation in Uri Sector

LoC पर बारूदी सुरंग विस्फोट में सेना के दो जवान घायल, उरी सेक्टर में सर्च ऑपरेशन तेज

Farmers protest in Bhopal demanding 100% government procurement of moong and an end to the token system for fertilizer distribution

Bhopal Farmers Protest: भोपाल में Gen-Z किसानों का बड़ा आंदोलन, CM हाउस मार्च की तैयारी; मूंग खरीदी और खाद वितरण पर अड़े किसान

Mallikarjun Kharge and JP Nadda during a heated debate in the Rajya Sabha over the CJP protest

राज्यसभा में CJP प्रदर्शन पर घमासान, खरगे-नड्डा आमने-सामने; बोले- 'एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाना पड़ेगा'

0 Comments

Top week

Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?