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APY Completes 11 Years with 9 Crore Subscribers

Atal Pension Yojana के 11 साल पूरे, करीब 9 करोड़ लोगों का बुढ़ापा हुआ सुरक्षित

surbhi मई 9, 2026 0
Senior citizens and workers promoting Atal Pension Yojana completing 11 years with 9 crore subscribers.
Atal Pension Yojana 11 Years Success

भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना Atal Pension Yojana को शुरू हुए 11 साल पूरे हो गए हैं। साल 2015 में शुरू की गई यह योजना अब करोड़ों लोगों के बुढ़ापे का सहारा बन चुकी है। खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले गरीब, मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे कामगारों के लिए यह योजना बड़ी राहत साबित हुई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक इस योजना से करीब 8.96 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 135.14 लाख नए सब्सक्राइबर शामिल हुए, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

2047 तक ‘Insurance for All’ लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम

Narendra Modi ने साल 2047 तक “Insurance for All” का लक्ष्य रखा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए 9 मई 2015 को Atal Pension Yojana की शुरुआत की गई थी।

धीरे-धीरे यह योजना भारत की सबसे बड़ी गारंटीकृत पेंशन योजनाओं में शामिल हो गई है। योजना के तहत जमा राशि और निवेश को देखें तो इसका Asset Under Management (AUM) अब ₹51,416 करोड़ तक पहुंच चुका है।

किन लोगों के लिए शुरू की गई थी योजना?

यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बनाई गई थी। ऐसे लोग जिनके पास रिटायरमेंट या बुढ़ापे में आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं होता, उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से इसे शुरू किया गया।

इसमें 18 से 40 वर्ष तक की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक, जिसके पास बैंक या डाकघर में खाता हो, शामिल हो सकता है। हालांकि 1 अक्टूबर 2022 से आयकरदाता लोगों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है।

योजना में क्या मिलते हैं फायदे?

Atal Pension Yojana के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर हर महीने ₹1,000 से लेकर ₹5,000 तक की गारंटीकृत पेंशन मिलती है। यह पेंशन केंद्र सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाती है।

योजना के प्रमुख लाभ:

  • 60 साल की उम्र के बाद आजीवन मासिक पेंशन
  • सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद पति या पत्नी को समान पेंशन
  • दोनों की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को जमा राशि वापस
  • ऑटो डेबिट सुविधा के जरिए आसान भुगतान
  • मासिक, त्रैमासिक और अर्धवार्षिक भुगतान विकल्प
  • जरूरत के अनुसार योगदान राशि बढ़ाने या घटाने की सुविधा

क्यों बढ़ रही है योजना की लोकप्रियता?

भारत तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अनुमान है कि साल 2050 तक देश की करीब 20% आबादी 60 वर्ष से अधिक आयु की हो जाएगी। ऐसे में बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Atal Pension Yojana जैसी योजनाएं भविष्य में करोड़ों लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभाएंगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में एक कारोबारी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि कथित रंगदारी की पूरी साजिश किसी बाहरी गैंगस्टर ने नहीं, बल्कि कारोबारी की पत्नी ने गोगी गैंग से जुड़े एक आरोपी के साथ मिलकर रची थी। पुलिस ने कारोबारी की पत्नी सपना जैन और गोगी गैंग से जुड़े राजत को गिरफ्तार कर लिया है।   अमेरिकी नंबर से मिली थी धमकी पुलिस के अनुसार, 14 जून को कारोबारी को अमेरिका के एक नंबर से कॉल और मैसेज आए थे। कॉल करने वाले ने खुद को गोगी गैंग का सदस्य बताते हुए 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। आरोपी ने कारोबारी के घर और दुकान की तस्वीरें तथा लोकेशन भेजकर रकम नहीं देने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। शिकायत मिलने के बाद मामला स्पेशल सेल को सौंपा गया।   तकनीकी जांच में खुली साजिश तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने सोनीपत निवासी राजत को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल फोन की जांच में कारोबारी की पत्नी सपना जैन और उसकी बहन से लगातार संपर्क के सबूत मिले। इसके बाद पुलिस ने सपना जैन को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें कथित साजिश का खुलासा हुआ।   पारिवारिक विवाद बना कथित वजह पुलिस के मुताबिक, कारोबारी और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। पूछताछ में महिला ने आरोप लगाया कि उसकी सास हमेशा बेटे का पक्ष लेती थीं। इसी नाराजगी के चलते उसने कथित तौर पर राजत की मदद से पहले पति से 50 लाख रुपये की उगाही और बाद में सास की हत्या तथा पति पर जानलेवा हमला कराने की योजना बनाई। पुलिस का दावा है कि महिला अपने पति की गतिविधियों और आवाजाही की जानकारी भी आरोपियों तक पहुंचा रही थी।   स्पेशल सेल के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी राजत पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है और गोगी गैंग के सदस्यों के संपर्क में था। पुलिस अब अमेरिका से संचालित कथित रंगदारी नेटवर्क, गैंग के अन्य सदस्यों और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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पश्चिम बंगाल के हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स प्लांट में भीषण आग, 35 कर्मचारी झुलसे

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के औद्योगिक शहर हल्दिया में मंगलवार तड़के बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (HPL) की नैफ्था पाइपलाइन में अचानक भीषण आग लगने से कम से कम 35 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया।   सुबह 5 बजे भड़की आग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सुबह करीब 5 बजे नैफ्था पाइपलाइन से उठी। नैफ्था अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया। उस समय आसपास काम कर रहे कई कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।   घायलों का अस्पताल में इलाज जारी जिला प्रशासन के मुताबिक, हादसे में झुलसे सभी घायलों को पहले हल्दिया सब-डिवीजनल अस्पताल ले जाया गया। इनमें से कई की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए तामलुक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है।   रेल सेवा प्रभावित, दमकल की 12 गाड़ियां मौके पर आग लगने का स्थान हल्दिया और पांसकुड़ा के बीच रेलवे ट्रैक के निकट होने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। आग पर काबू पाने के लिए शुरुआत में दो दमकल गाड़ियां भेजी गईं, लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए बाद में कुल 12 दमकल वाहन राहत कार्य में लगाए गए।   हादसे के कारणों की जांच जारी प्रारंभिक जांच में पाइपलाइन में रिसाव को आग की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, HPL प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार आग कंपनी परिसर के पास स्थित एक अनधिकृत नैफ्था चोरी बिंदु के आसपास लगी थी। कंपनी और प्रशासन की संयुक्त टीम मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे ज्वलनशील रसायनों से दूर रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

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