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EPFO 3.0: Instant PF Withdrawal via UPI & ATM

EPFO 3.0: अब ATM और UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा, जानें नए नियम

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Employees withdrawing PF money using UPI and ATM under EPFO 3.0 digital system
EPFO 3.0 UPI ATM PF Withdrawal

भारत में कर्मचारियों की बचत प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में Employees' Provident Fund Organisation ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘EPFO 3.0’ के तहत 2026 के मध्य तक पीएफ निकासी की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो जाएगी। इस बदलाव के बाद कर्मचारी अपने भविष्य निधि (PF) के पैसे को न केवल ऑनलाइन देख पाएंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर ATM और UPI के जरिए तुरंत निकाल भी सकेंगे।

डिजिटल युग में PF निकासी का नया मॉडल

नई व्यवस्था का उद्देश्य है कि कर्मचारियों को अपने ही पैसे के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। अभी जहां क्लेम प्रोसेस में कई दिन या हफ्ते लग जाते हैं, वहीं EPFO 3.0 आने के बाद यह प्रक्रिया लगभग तुरंत पूरी हो सकेगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सिस्टम भी अधिक भरोसेमंद बनेगा।

EPFO 3.0 की 3 सबसे बड़ी सुविधाएं

1. ATM और UPI से तुरंत निकासी
अब PF खाते को सीधे UPI से जोड़ा जाएगा। सदस्य किसी भी ATM से या UPI ऐप के जरिए अपने PF फंड का उपयोग कर सकेंगे। आपातकालीन स्थिति में यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होगी।

2. ऑटो-क्लेम सेटलमेंट और बैंक चयन
EPFO ने कई सरकारी और निजी बैंकों के साथ समझौता किया है, जिससे क्लेम प्रोसेस तेजी से पूरा होगा। सदस्य अपनी पसंद के बैंक खाते में सीधे पैसा ट्रांसफर करा सकेंगे।

3. UPI पर बैलेंस चेक की सुविधा
अब बार-बार पोर्टल लॉगिन करने की जरूरत नहीं होगी। सदस्य अपने UPI ऐप के माध्यम से ही PF बैलेंस देख सकेंगे, जिससे सुविधा और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

सुरक्षा के लिए जरूरी नियम और शर्तें

नई सुविधा के साथ कुछ सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं ताकि रिटायरमेंट फंड सुरक्षित बना रहे:

  • 50% निकासी सीमा: ATM या UPI के जरिए कुल PF बैलेंस का अधिकतम 50% ही निकाला जा सकेगा।
  • अनिवार्य KYC: UAN एक्टिव होना चाहिए और वह आधार, पैन और बैंक खाते से लिंक होना जरूरी है।
  • मोबाइल लिंक: UAN से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए।

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आवश्यकता

स्थिति

UAN

एक्टिव होना चाहिए

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UAN से लिंक और चालू

आधार और पैन

अपडेटेड

बैंक खाता

IFSC के साथ लिंक

क्या बदल जाएगा आम कर्मचारियों के लिए?

EPFO 3.0 के लागू होने के बाद PF निकासी प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। यह कदम खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए राहत भरा होगा जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत होती है। हालांकि, 50% निकासी सीमा यह सुनिश्चित करती है कि रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त बचत बनी रहे।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Happy Friendship Day
Happy Friendship Day 2026: दोस्ती के नाम खास दिन, सोशल मीडिया पर छाए शुभकामना संदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज 2 अगस्त 2026, रविवार को भारत में फ्रेंडशिप डे मनाया जा रहा है। अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने वाले इस खास दिन पर लोग अपने दोस्तों के साथ पुरानी यादें साझा कर रहे हैं और दोस्ती के रिश्ते के प्रति आभार जता रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी Happy Friendship Day के संदेश, तस्वीरें और शुभकामनाएं तेजी से साझा की जा रही हैं।   दोस्तों के साथ खास अंदाज में मना रहे दिन   फ्रेंडशिप डे पर दोस्त एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड पहनाने के साथ छोटे-छोटे उपहार देते हैं। कई लोग दोस्तों के साथ घूमने, साथ खाना खाने या पुरानी तस्वीरें साझा कर इस दिन को यादगार बना रहे हैं। युवा वर्ग में व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर दोस्ती से जुड़े संदेश और स्टेटस साझा करने का चलन भी खूब देखने को मिल रहा है।   दोस्ती के रिश्ते को समर्पित है दिन   फ्रेंडशिप डे का उद्देश्य जीवन में दोस्तों की भूमिका और दोस्ती के महत्व को याद करना है। मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले दोस्त जीवन के सुख-दुख को साझा करते हैं, इसलिए यह दिन उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर देता है। भारत में फ्रेंडशिप डे आमतौर पर अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस 30 जुलाई को मनाया जाता है।   सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की धूम   फ्रेंडशिप डे के मौके पर लोग अपने बचपन के दोस्तों, स्कूल-कॉलेज के साथियों और खास मित्रों के साथ तस्वीरें साझा कर रहे हैं। “Happy Friendship Day” और दोस्ती से जुड़े संदेश सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा में हैं। इस दिन का सबसे खास संदेश यही है कि सच्ची दोस्ती किसी एक दिन की मोहताज नहीं होती, लेकिन एक खास दिन दोस्त को यह बताने का अच्छा मौका जरूर देता है कि वह हमारी जिंदगी में कितना महत्वपूर्ण है।

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वंदे भारत ट्रेन बनी ‘ग्रीन कॉरिडोर’, पहली बार सूरत से अहमदाबाद पहुंचाया गया दिल

अहमदाबाद, एजेंसियां। भारतीय रेलवे ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए सूरत से अहमदाबाद एक दिल प्रत्यारोपण के लिए पहुंचाया गया। यह दिल मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से अहमदाबाद लाया गया और इसके बाद यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर पहुंचाया गया।   वंदे भारत से सूरत से अहमदाबाद पहुंचा दिल   यह महत्वपूर्ण अभियान ट्रेन नंबर 20901 मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए पूरा किया गया। अंग प्रत्यारोपण में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए रेलवे, पुलिस और मेडिकल टीमों ने मिलकर पूरे परिवहन की योजना तैयार की। दिल को तय समय सीमा के भीतर अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया गया।   अहमदाबाद स्टेशन से अस्पताल तक बना ग्रीन कॉरिडोर   अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से यूएन मेहता अस्पताल तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और गुजरात पुलिस ने रास्ते को निर्बाध रखने की व्यवस्था की, ताकि स्टेशन पहुंचने के बाद दिल को अस्पताल तक ले जाने में किसी तरह की देरी न हो।   रेलवे और मेडिकल टीमों के बीच रहा बेहतर तालमेल   इस पूरे अभियान में भारतीय रेलवे, RPF, गुजरात पुलिस, डॉक्टरों और अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों ने मिलकर काम किया। रेलवे के अनुसार, ऐसे जीवनरक्षक अभियानों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। सभी टीमों के बीच बेहतर तालमेल के कारण मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।   आपातकालीन चिकित्सा परिवहन में रेलवे की नई भूमिका   इस घटना ने दिखाया है कि तेज और विश्वसनीय रेल सेवा का इस्तेमाल गंभीर चिकित्सा जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है। भारतीय रेलवे की यह पहल भविष्य में अंगों और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री के समयबद्ध परिवहन में मददगार साबित हो सकती है।

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पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.एन. शर्मा का निधन, 96 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा (वी.एन. शर्मा) का शुक्रवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 96 वर्ष के थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे प्राकृतिक कारणों से अंतिम सांस ली। जनरल शर्मा भारतीय सेना के 14वें प्रमुख रहे और उन्होंने मई 1988 से जून 1990 तक सेना प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली।   स्वतंत्र भारत के बाद कमीशन पाने वाले पहले सेना प्रमुख   जनरल वी.एन. शर्मा का सैन्य करियर बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्हें वर्ष 1950 में 16 लाइट कैवेलरी में कमीशन मिला था। वह स्वतंत्रता के बाद कमीशन पाने वाले उन शुरुआती अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंच बनाई। सेना प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल मई 1988 से जून 1990 तक रहा।   1987 के भारत-चीन गतिरोध में निभाई अहम भूमिका   जनरल शर्मा को 1987 के सुमदोरोंग चू संकट के दौरान उनकी भूमिका के लिए भी याद किया जाता है। उस समय वह पूर्वी सेना कमान के कमांडर थे। भारत और चीन के बीच तनाव के दौरान उन्होंने वांगडुंग से भारतीय सैनिकों को पीछे हटाने से इनकार करते हुए मजबूत सैन्य रुख अपनाया था।   सैन्य सेवा के बाद भी रहा महत्वपूर्ण योगदान   जनरल वी.एन. शर्मा का सैन्य जीवन भारतीय सेना के महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा। उनके नेतृत्व में सेना ने सीमा सुरक्षा और रणनीतिक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया। उनके निधन पर सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोगों और पूर्व सैनिकों ने शोक व्यक्त किया है।   दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार   रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरल वी.एन. शर्मा का अंतिम संस्कार 2 अगस्त को दिल्ली के बराड़ स्क्वायर में किया जाएगा। उनके निधन से भारतीय सैन्य समुदाय में शोक की लहर है। देश के सैन्य इतिहास में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।    

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