1586 – सर वॉल्टर रालेह वजींनिया से लंदन में तंबाकू लाने वाले व्यक्ति बने।
1655 – नीदरलैंड और ब्रांडेनबर्ग ने सैन्य संधि पर हस्ताक्षर किये।
1709 - सम्राट इम्पेरर नाकमिकादो जापान के सिंहासन पर बैठे।
1713 – रूस और तुर्की ने शांति संधि पर हस्ताक्षर किये।
1714 - ब्रिटिश रानी ऐनी ने प्रीमियर रॉबर्ट हेली को खारिज किया।
1720 - रूसी नौसेना की दूसरी महत्वपूर्ण जीत - गेंग्मम की लड़ाई।
1724 - पीटर द वाइल्ड बॉय 'हनोवर में हैवेनसेन के पास पकड़ा गया।
1772 – तीन बड़ी शक्तियों रुस, ऑस्ट्रिया और फ़्रांस के प्रतिनिधियों ने पोलैंड के पहले विभाजन के समझौते पर हस्ताक्षर किये।
1789 – अमेरिकी कांग्रेस ने विदेश मामलों के विभाग द डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स की स्थापना की।
1795 – स्पेन और फ्रांस ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
1836 – दक्षिण आस्ट्रेलिया में एडीलेड की स्थापना हुई।
1844 - आग ने चार्लोट और उत्तरी केरोलिना के अमेरिकी टकसाल को नष्ट कर दिया।
1862 – अमेरिकी शहर कैंटन में हरिकेन तूफान का कहर हुआ, जिसमें 40 हजार लोगों की मौत हुई।
1888 – फिलिप प्राट ने पहला इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल का प्रदर्शन किया।
1889 – इंडियन नेशनल कांग्रेस की शाखा ब्रिटिश इंडिया कमिटी को लंदन में दादाभाई नैरोजी, विलियम वेडरबर्न, डब्ल्यू एस कैन और विलियम डिग्बी के नेतृत्व में खोला गया।
1897 – बाल गंगाधर तिलक पहली बार गिरफ्तार किये गये।
1921 – टोरंटो यूनिवर्सिटी के दो वैज्ञानिकों फ्रेडरिक बैंटिंग और चार्ल्स बेस्ट ने इंसुलिन नाम के हार्मोन को अलग करने में सफलता पाई।
1922 – ब्रूसेल्स में अंतर्राष्ट्रीय भौगोलिक संघ का गठन हुआ।
1935 – चीन के यांग जी और होआंग नदी में आई बाढ़ से दो लाख लोगों की मौत हुई।
1939 – केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की स्थापना हुई।
1962 – अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकारों के संघर्ष के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर जार्जिया के अल्बानी जेल में बंद हुए।
1965 - एडवर्ड हीथ ब्रिटिश कंजर्वेटिव पार्टी के नेता बने।
1985 – तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इस पद पर रहते हुए 11 साल में पहली बार अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर गई।
1987 – खोजकर्ताओं ने 1912 में अपनी पहली यात्रा में डूबे जहाज टाइटेनिक का मलबा खोजा था।
2002 - उक्रेन में एक विमान दुर्घटना में 70 व्यक्ति मारे गये।
2003 - संयुक्त राज्य अमेरिका ने यमन को स्कड मिसाइल बेचने वाली उत्तर कोरियाई कंपनी पर नये प्रतिबंध लगाये।
2006 - रूसी प्रक्षेपण यान नेपर ज़मीन पर गिरा।
2006 – इंटेल कॉर्प ने कोर 2 डॅयू माइक्रोप्रोसेसर्स पेश किया।
2007 - आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने लगभग 40,000 साल पहले पाये जाने वाले विशालकाय जीव वोमबैट के जवड़े का जीवाश्म मिलने का दावा किया।
2008 - सीपीएन-यूएमएल नेता सुभाष नेमवांग को नेपाली राष्ट्रपति रामबरन यादव ने नवर्निवाचित संविधान सभा के अध्यक्ष पद की शपथ दिलाई।
2019 - केंद्रीय बलों ने महाराष्ट्र में बाढ़ में फंसे महालक्ष्मी एक्सप्रेस से 900 लोगों को सफलतापूर्वक निकाला।
2019 - अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने भारतीय वायुसेना को अपाचे गार्डियन हेलिकॉप्टर की आपूर्ति शुरू की।
2020 - भारत ने बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आवागमन को बढावा देने के लिए उसे दस ब्रॉडगेज डीजल रेल इंजन भेंट किए।
2020 - भारत और इंडोनेशिया के बीच नई दिल्ली में रक्षा मंत्री संवाद आयोजित किया गया।
2020 - रूस ने चीन को सतह से हवा में मार करने वाले एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की डिलीवरी रोक दी।
2021 - गुजरात में हड़प्पा काल का नगर धौलावीरा यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल हुआ। जिसके बाद भारत में विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 40 हुई।
2022 - राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक - 2021 लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ।
2022 - केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मध्य हिंद महासागर में 5270 मीटर की गहराई पर डीप-सी माइनिंग सिस्टम वाले विश्व के पहले लोकोमोशन परीक्षण के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिकों की प्रशंसा की।
2023 - इटली ने पलाज़ो डेला रोवरे के प्रांगण के नीचे रोमन सम्राट नीरो के निजी थिएटर की खोज की घोषणा की।
2023 - प्रधानमंत्री मोदी ने राजकोट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा राष्ट्र को समर्पित किया।
2023 - जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2023 लोकसभा में पारित हुआ।
2023 - भारतीय तटरक्षक बल ने कारवार तट के पास राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के अनुसंधान पोत पर सवार 8 वैज्ञानिकों सहित 36 चालक दल को बचाया।
2023 - फिलीपींस में एक नाव पलट जाने से लगभग 27 लोगों की मौत हुई।
2023 - सीरिया के शिया मस्जिद में बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत व 20 से अधिक लोग घायल हुए।
2024 - नीति आयोग की नौवीं गवर्निंग काउंसिल (शासी परिषद) बैठक का आयोजन नई दिल्ली मे शुरू हुआ।
2024 - संतोष कुमार गंगवार को झारखंड का , रेमन डेका को छत्तीसगढ़ का , गुलाब चंद कटारिया को पंजाब का , सीपी राधाकृष्णनन को महाराष्ट्र का व सीएच विजयंशकर को मेघालय का राज्यपाल बनाया गया।
2024 - नई दिल्ली राजेंद्र नगर स्थित रॉउस IAS स्टडी सर्किल के बेसमेंट में पानी जमा होकर डूबने से 3 छात्रों की मौत हुई।
2025 - हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़ में लगभग छह लोगों की मौत व दर्जनों श्रद्धालु घायल हुए।
2025 - छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 17 लाख के 4 इनामी नक्सली मुठभेड़ में मारे गए व भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए।
1824 – फ़्रांस के प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार एलेग्ज़ेन्डर डोमास फ़िल्स कनिष्ठ का पेरिस में जन्म हुआ।
1913 - कल्पना दत्त - आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाली महिला क्रांतिकारियों में से एक।
1940 - भारती मुखर्जी - भारतीय मूल की प्रसिद्ध लेखिका थीं, जिन्होंने अमरीका में कई पुरस्कार जीते थे।
1960 - उद्धव ठाकरे, भारतीय राजनीतिज्ञ तथा महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री।
1963 - कृष्णन नायर शान्तिकुमारी चित्रा एक भारतीय पार्श्व गायिका।
1967 – इंग्लैंड के क्रिकेट खिलाड़ी नील स्मिथ का जन्म वारविकशायर में हुआ। वे दाएं हाथ के बल्लेबाज व ऑफ ब्रैक गेंदबाज थे।
1983 - सीमा पूनिया अंतिल एक भारतीय महिला डिस्कस थ्रोअर।
1990 - कृति सैनन एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री एवं मॉडल।
1844 – डेल्टन गैसों के मिश्रण के नियम के जनक ब्रिटेन के वैज्ञानिक जान डेल्टन का निधन हुआ।
1891 - राजेन्द्रलाल मित्रा - भारत विद्या से संबंधित विषयों के प्रख्यात विद्वान।
1933 - कल्याण सिंह कालवी - नौवीं लोकसभा के सदस्य।
1944 - पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल - हिन्दी के ख्यातिप्राप्त साहित्यकार और विद्वान् आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के सहयोगी।
1970 - पत्तम थानु पिल्लई - आधुनिक केरल प्रदेश के प्रमुख नेता।
1972 – नक्सल आंदोलन के मास्टरमाइंड चारू मजूमदार का जेल में निधन हुआ।
1987 - सालिम अली, एक भारतीय पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी।
1992 - अमजद ख़ान, प्रसिद्ध अभिनेता।
1999 - आई. के. कुमारन - माही क्षेत्र से फ़्राँसीसियों का शासन हटाने वाले प्रमुख व्यक्ति थे।
2002 - कृष्णकांत
भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति।
2003 – अमेरिका में बहुचर्चित हास्य कलाकार बॉब होप का निधन हो हुआ।
2006 - शिवदीन राम जोशी - अपने समय के जाने-माने कवि।
2015 – भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम जी का शिलांग में निधन हुआ।
2016 - लच्छू महाराज - भारत के जानेमाने तबला वादक।
2017 - एन॰ धरम सिंह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री।
2020 - बॉलीवुड के जाने माने एक्शन डायरेक्टर परवेज खान का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
2022 - असम के प्रसिद्ध साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता साहित्यकार अतुलानंद गोस्वामी (87) का निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी , कोच व स्काउट माइक गिडिंग्स (89) का निधन हुआ।
2023 - भारतीय राजनेता व पूर्व लोकसभा सदस्य बापूसाहेब परुलेकर (95) का निधन हुआ।
2023 - ट्यूनीशियाई मानवाधिकार कार्यकर्ता व राजनीतिज्ञ, सांसद अली बेन सलेम (91) का निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी उपन्यासकार , संगीतकार व शिक्षक लॉयड एडवर्ड क्रॉप (86) का निधन हुआ।
2023 - ऑस्ट्रेलियाई राजनीतिज्ञ, वकील और मजिस्ट्रेट आर्थर गॉर्डन डीन (81) का निधन हुआ।
2023 - डच लेखिका व बच्चों के साहित्य चित्रकार मार्गिएट हेयमान्स (90) का निधन हुआ।
2023 - नार्वेजियन फुटबॉल खिलाड़ी रूने रिचर्डसन (60) का निधन हुआ।
2024 - कोस्टा रिकन फुटबॉल गोलकीपर कार्लोस अल्वाराडो का 96 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
श्री उद्धव ठाकरे जन्म दिवस।
श्री एन॰ धरम सिंह स्मृति दिवस।
डॉ. ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम स्मृति दिवस।
अभिनेता अमजद खान स्मृति दिवस।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस ) 20वां स्थापना दिवस।
केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) स्थापना दिवस।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मेरठ। कांवड़ यात्रा 2026 को देखते हुए मेरठ पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार 29 जुलाई की रात 12 बजे से 12 अगस्त तक दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (गाजियाबाद से मेरठ दिशा) और चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, 5 अगस्त की रात से 12 अगस्त तक दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हरिद्वार-मुजफ्फरनगर-मेरठ दिशा में यातायात पूरी तरह बंद किया जा सकता है। भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गाजियाबाद, नोएडा और उत्तराखंड की ओर आने-जाने वाले भारी वाहनों को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग-344 सहित अन्य वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जाएगा। इससे कांवड़ मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम रखा जा सकेगा। गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों का भी बदलेगा रूट गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को सिंभावली और बिजौली कट से नीचे उतारकर राष्ट्रीय राजमार्ग-9, हापुड़, डासना, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और अन्य निर्धारित मार्गों से उनके गंतव्य तक भेजा जाएगा। मेरठ आने वाले वाहनों के लिए भी अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। कांवड़ियों के लिए अलग लेन की व्यवस्था मेरठ-मुजफ्फरनगर-हरिद्वार मार्ग पर 2 अगस्त की रात से हल्के और मध्यम वाहन केवल बाईं लेन से दो-तरफा चलेंगे, जबकि दाहिनी लेन हरिद्वार से लौटने वाले कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ यात्रा गंगा एक्सप्रेसवे या दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नहीं, बल्कि पारंपरिक मार्गों से ही संचालित होगी। स्थिति के अनुसार बदलेगा ट्रैफिक प्लान पुलिस अधिकारियों के अनुसार कांवड़ियों की संख्या और मौके की परिस्थितियों को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में जरूरत पड़ने पर बदलाव किया जा सकता है। लोगों से यात्रा से पहले रूट डायवर्जन की जानकारी लेकर ही सफर करने की अपील की गई है।
कोलकाता, एजेंसियां। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार की चक्रवात अम्फान राहत योजना को लेकर कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में राहत वितरण, नुकसान के आकलन और लाभार्थियों के चयन में गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हुए व्यवस्था में सुधार के लिए कई सिफारिशें की गई हैं। राहत वितरण और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। साथ ही लाभार्थियों की सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की दोहराव, संदिग्ध भुगतान और राहत वितरण की निगरानी व्यवस्था में खामियां भी सामने आईं। CAG ने दी छह प्रमुख सिफारिशें सीएजी ने आपदा से हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन, लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता, राहत राशि जारी करने से पहले रिकॉर्ड की अनिवार्य जांच, राहत सामग्री के भंडारण और वितरण की बेहतर निगरानी तथा संदिग्ध भुगतान की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जैसी छह प्रमुख सिफारिशें राज्य सरकार को दी हैं। नुकसान के दावों पर भी सवाल रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार ने अम्फान के दौरान करीब 24 लाख मकानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा करते हुए 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। हालांकि, केंद्र की मूल्यांकन टीम को कई मामलों में दावों के अनुरूप नुकसान के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, जिसके बाद नुकसान के आकलन में संशोधन किया गया। राज्य ने मांगे थे 35,018 करोड़, मंजूर हुए 2,707 करोड़ सीएजी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से 35,018 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की थी। केंद्र सरकार की जांच और मूल्यांकन के बाद 2,707 करोड़ रुपये की सहायता की सिफारिश की गई। सुधारों का होगा फील्ड वेरिफिकेशन प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-II) मनीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने सुधार लागू करने का दावा किया है, लेकिन सीएजी केवल दावों पर निर्भर नहीं रहेगा। ऑडिट टीम मौके पर जाकर यह सत्यापित करेगी कि सिफारिशों को वास्तव में लागू किया गया है या नहीं।
Parliament Session 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CJP के 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पत्र में सवाल उठाया कि 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश किसने दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया और सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने गृह मंत्री से पूछे कई सवाल राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हुए। कांग्रेस सांसद के अनुसार, इस कार्रवाई में कुछ लोगों के हाथ, पैर और पसलियां टूट गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 'अगर अमित शाह ने आदेश नहीं दिया तो किसने दिया?' राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि छात्रों पर बल प्रयोग और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूरी गृह मंत्री अमित शाह ने नहीं दी, तो फिर इसकी अनुमति किस अधिकारी या एजेंसी ने दी। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की। 19 वर्षीय छात्र का किया जिक्र राहुल गांधी ने अपने पत्र में 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि साहिल कथित तौर पर पैलेट गन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसकी एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। धर्मेंद्र प्रधान के बाद विपक्ष का अगला निशाना अमित शाह NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष अब गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि आंदोलन खत्म होने के बावजूद छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद और सड़क दोनों जगह उठाया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को इस मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय करनी चाहिए। संसद में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा सुधार, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और CJP मार्च का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। विपक्ष इन मामलों पर सरकार से विस्तृत जवाब और चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और नए कानूनों के जरिए व्यवस्था मजबूत करने की बात कह रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।