1755 - ब्रिटिश जनरल एडवर्ड ब्रैडॉक, फ्रेंच और भारतीय युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए।
1766 - ब्रिटिश प्रीमियर रॉकिंगहाउस ने इस्तीफा दिया।
1780 - डेनमार्क ने तटस्थता की घोषणा की।
1793 - अपर कैनेडा में दासता के खिलाफ अधिनियम पारित किया गया।
1805 - मुहम्मद अली पाशा ने अपने राजवंश को मिस्र में पाया।
1810 - नेपोलियन ने हॉलैंड के राज्य पर कब्जा किया।
1815 – अमेरिका में पहले प्राकृतिक गैस के कुएं की खोज की गई।
1815 - चार्ल्स मौरिस द टैलेरांड पेरिगोर्ड, बनावेंट के राजकुमार फ्रांस के प्रधानमंत्री चुने गए।
1816 – दक्षिणी अमेरिकी देश अर्जेटीना ने स्पेन से स्वतंत्रता हासिल की।
1842 - नोटरी स्टैम्प लॉ को मंजूरी मिली।
1852 – कनाडा के मांट्रियल शहर में 1100 निर्माणाधीन स्थल भयानक आग की चपेट में आने से खाक हो गये।
1868 - संयुक्त राज्य संविधान के चौदहवें संशोधन को स्वीकृति दी गई।
1875 – बम्बई स्टाॅक एक्सचेंज की स्थापना हुई। यह देश का पहला स्टॉक एक्सचेंज था।
1877 – पहली विंबल्डन टेनिस प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
1889 – अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल का प्रकाशन शुरू हुआ।
1893 – डेनियल विलियम्स ने पहली बार बिना ऐनिस्थिसिया के ओपन हार्ट सर्जरी की।
1944 – नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी ने भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र कराने के लिए आजाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व स्वीकार किया था।
1944 - अमेरिका ने सायपन की लड़ाई जीत में हासिल की।
1951 – भारत की प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) की शुरुआत हुई।
1969 – वन्यजीव बोर्ड की तरफ से शेर को देश का राष्ट्रीय पशु चुना गया।
1972 – सोवियत संघ ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
1982 – लंदन में भारत के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड के ऑलराउंडर इयान बॉथम ने अपने करियर का सर्वोच्च स्कोर 208 रन बनाया। यह मैच ड्रॉ समाप्त हुआ।
1991 – दक्षिण अफ्रीका को ओलंपिक खेलों में दोबारा भाग लेने की अनुमति मिली।
2000 - फिजी में जार्ज स्पीट तथा सैन्य नेताओं के मध्य समझौता सम्पन्न।
2001 - भारत द्वारा पाक सीमा पर दो चौकियां स्थापित करने की घोषणा।
2002 - आर्गेनाइजेशन आफ़ अफ़्रीकन यूनिटी का नाम बदलकर अफ़्रीकन यूनियन किया गया।
2002 – इथोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में अफ्रीकी संघ की स्थापना। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो म्बेकी इसके पहले अध्यक्ष बने।
2004 - एशियाई विकास बैंक ने आतंकवाद से लड़ने हेतु अपने 42 सदस्य देशों के लिए एक कोष बनाया।
2006 – साइबेरिया के इरकुर्त्सक हवाई अड्डे के रनवे पर शिबिर एयरलाइंस ए 310 के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से कम से कम 122 लोगों की मौत।
2007 - भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक हिमांशु जैन को ग्लास साइंस के क्षेत्र में ध्यातत्व कार्य हेतु ओट्टो स्कॉट रिसर्च पुरस्कार प्रदान किया गया।
2008 - ईरान ने लम्बी एवं मध्यम दूरी तक प्रहार क्षमता वाले नौ प्रक्षेपास्त्रों का परीक्षण किया।
2011 – अफ्रीका का सूडान दो हिस्सों में बंट गया। दक्षिणी हिस्सा रिपब्लिक ऑफ साउथ सूडान बना।
2019 - शेख हसीना नेशनल बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी इंस्टीट्यूट नाम के दुनिया के सबसे बड़े जलने और प्लास्टिक सर्जरी इंस्टीट्यूट ने ढाका, बांग्लादेश में अपना कामकाज शुरू किया।
2020 - अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के बावजूद स्कूलों को फिर से खोलने का आदेश दिया और ऐसा नहीं करने पर फंड रोकने की चेतावनी भी दी है।
2020 - ऑस्ट्रेलिया ने चीन का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने के विरोध में हांगकांग के साथ प्रत्यर्पण संधि को खत्म करने का एलान किया।
2020 - चीन ने शीचांग सैटेलाइट लांच सेंटर, शीचुआन से वाणिज्यिक संचार उपग्रह 'APSTAR-6D' को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
2021 - भारतीय युद्धपोत ने केप ट्रैफलगर में स्पैनिश नौसेना के साथ अभ्यास किया।
2022 - भारत में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के निधन पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया गया।
2022 - श्रीलंका के प्रधानमंत्री राणिल विक्रमसिंघे ने देश में सर्वदलीय सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की।
2023 - आय से अधिक संपत्ति मामले में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM ओपी सोनी विजिलेंस ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किए गए।
2023 - उत्तर - मध्य नाइजीरिया के सुदूर इलाके में बंदूकधारियों ने 24 ग्रामीणों की हत्या की।
2023 - तीसरी जी20 संस्कृति समूह (सीडब्ल्यूजी) बैठक कर्नाटक के हम्पी में शुरू हुई।
2023 - अमेरिका और चीनी के आर्थिक नेताओं ने बीजिंग में दो दिनों की वार्ता समाप्त की।
2024 - बेंगलुरु में चलती बस में आग लगी जिसमें 30 पैसेंजर्स सवार थे, सभी सुरक्षित निकले।
2024 - बिहार पुलिस में पुलिस अवर निरीक्षक प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी , भारत की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा बनीं मानवी मधु।
2025 - गुजरात के वडोदरा–आणंद को जोड़ने वाला 40 साल पुराना गंभीर पुल अचानक ढहने से 20 से अधिक लोगों की मौत व अनेक घायल हुए।
2025 - राजस्थान के चूरू जिले में भारतीय वायुसेना का Jaguar ट्रेनर विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से दोनों पायलटों की मृत्यु।
1845 - लॉर्ड मिण्टो द्वितीय - 1905 से 1910 ई. तक भारत का वाइसराय तथा गवर्नर-जनरल रहा।
1900 - सत्य नारायण सिन्हा - 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' के राजनेता, संसदीय मामलों के मंत्री तथा मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल।
1923 - मानकभाई अग्रवाल - दूसरी लोकसभा के सदस्य।
1925 – हिंदी फिल्मों के कलाकार / अभिनेता गुरुदत्त का बेंगलुरू में जन्म हुआ।
1930 - के. बालाचंदर, फ़िल्म निर्माता निर्देशक और पटकथा लेखक।
1938 - संजीव कुमार - भारतीय अभिनेता।
1944 - तबस्सुम हिन्दी फ़िल्मों की अभिनेत्री ।
1948 - राधाबिनोद कोइजम - भारतीय राजनीतिज्ञ।
1962 - सुखबीर सिंह बादल पंजाब के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ।
1991 - शेरी भोपाली - एक सुप्रसिद्ध शायर।
2010 - जेसिका मार्गरेट एंडरसन एक ऑस्ट्रेलियाई उपन्यासकार और लघु कथाकार थीं।
2011 - डाबर समूह के अशोक बर्मन की लंदन में मृत्यु।
2015 - शायरी के जरिए लोगों का दिल जीतने वाले पद्मभूषण सरदार अंजुम (71) ने आखिरी सांस ली।
2022 - समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता (62) का गुडंगांव के मेदांता अस्पताल में निधन हुआ।
2022 - भारत में 'इंटरनेट के जनक' व विदेश संचार निगम लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन ब्रिजयेंद्र कुमार सिंघल (82) का देर रात निधन हुआ।
2023 - स्पेनिश फुटबॉल खिलाड़ी लुइस सुआरेज़ (88) का निधन हुआ।
2024 - अमेरिकी देशी गायक जो बोंसाल (76) का ALS की जटिलताओं से निधन हुआ।
2024 - अमेरिकी राजनीतिज्ञ और जलवायु परिवर्तन पर संदेह करने वाले जिम इनहोफे (89) का स्ट्रोक से निधन हुआ।
भगवान नमिनाथ जी जन्म - तप कल्याणक (जैन , आषाढ़ कृष्ण दशमी अनुसार)।
अभिनेता श्री संजीव कुमार जयन्ती।
अभिनेता श्री गुरु दत्त जयन्ती।
राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस भारत (National Students' Day Bharat)।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।" आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।
कानपुर, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित पनकी रेलवे स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। यह उद्घाटन देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों के एक साथ लोकार्पण कार्यक्रम का हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री पंजाब के जालंधर कैंट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ पनकी स्टेशन करीब ₹24.5 करोड़ की लागत से विकसित पनकी रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। स्टेशन पर नया भवन, बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक टिकटिंग व्यवस्था, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, लिफ्ट, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल सूचना प्रणाली, आकर्षक फसाड और यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिलेगा। कानपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मिलेगा लाभ रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन के आधुनिकीकरण से पनकी और आसपास के औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए स्टेशन पर बेहतर आवागमन और सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। अमृत भारत स्टेशन योजना का हिस्सा पनकी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास केंद्र सरकार की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और उन्हें स्थानीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप विकसित करना है। आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न राज्यों के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का भी वर्चुअल उद्घाटन करेंगे।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे ने एक छात्र के परिवार से 5 लाख रुपये लेकर परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह जानकारी सीबीआई ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखी। दो अन्य डॉक्टरों को भी नेटवर्क से जोड़ने का आरोप सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरुरे ने इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में दो अन्य डॉक्टरों की मुलाकात सह-आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से कराई थी। जांच के अनुसार, इन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला और परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध कराया गया था। अप्रैल में ही दिखाया गया था प्रश्नपत्र जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से पहले, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही केमिस्ट्री का मूल प्रश्नपत्र दिखाया था। सीबीआई का आरोप है कि छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा की तैयारी कराई गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिल सके। जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।