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Abhijeet Bhattacharya's Instagram Post Sparks Debate

अभिजीत भट्टाचार्य के इंस्टा पोस्ट पर छिड़ी बहस, लिखा- '1947 से शुरू हुआ जिहाद', शिक्षा मंत्रियों की सूची की शेयर

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Singer Abhijeet Bhattacharya's Instagram post sparks online debate over claims about India's education history
Abhijeet Bhattacharya's Instagram Post Triggers Debate on Education History

Abhijeet Bhattacharya Instagram Post: बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य के एक इंस्टाग्राम पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। अभिजीत ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर 1947 से 1977 तक भारत के शिक्षा मंत्रियों की तस्वीरों और उनके कथित कार्यकाल की एक सूची साझा की। इस पोस्ट के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, "Jih#d began from 1947..." और इसके साथ #VandeMataram, #JaiShreeRam तथा #HarHarMahadev जैसे हैशटैग भी जोड़े। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

पोस्ट में क्या लिखा गया?

अभिजीत भट्टाचार्य द्वारा साझा की गई पोस्ट में दावा किया गया है कि आजादी के बाद भारत की शिक्षा व्यवस्था को एक विशेष सोच के तहत संचालित किया गया। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि बाबर, हुमायूं और अकबर को इतिहास में "महान" क्यों बताया गया, जबकि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और कई ऐतिहासिक तथ्यों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया। पोस्ट में लोगों से "जागो, सोचो और सच्चाई को पहचानो" जैसी अपील भी की गई है।

पोस्ट में किन शिक्षा मंत्रियों का किया गया जिक्र?

पोस्ट में 1947 से 1977 तक के शिक्षा मंत्रियों की एक सूची भी साझा की गई है। इसमें मौलाना अबुल कलाम आजाद, हुमायूं कबीर, एम.सी. छागला (मो. करीम छागला के रूप में उल्लेख), फखरुद्दीन अली अहमद, प्रो. सैयद नूरुल हसन समेत कई नाम शामिल किए गए हैं। पोस्ट में इन नेताओं के कार्यकाल भी दर्शाए गए हैं।

हालांकि, पोस्ट में दी गई सूची और कार्यकाल को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों और सरकारी रिकॉर्ड में शिक्षा मंत्रियों के कार्यकाल इससे अलग बताए गए हैं। कई नाम और तिथियां आधिकारिक दस्तावेजों से मेल नहीं खातीं। इसलिए पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इतिहास और शिक्षा व्यवस्था पर लगाए गए आरोप

पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्वतंत्रता के बाद इतिहास की पुस्तकों में कुछ शासकों को महिमामंडित किया गया, जबकि भारतीय परंपरा, संस्कृति और कई ऐतिहासिक घटनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। इसमें शिक्षा के राजनीतिकरण, इतिहास को एक विशेष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से दूर करने जैसे दावे भी किए गए हैं।

हालांकि, ये सभी दावे सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्त विचार हैं। इनकी पुष्टि किसी आधिकारिक सरकारी दस्तावेज या स्वतंत्र ऐतिहासिक अध्ययन से नहीं हुई है। इतिहासकारों और विशेषज्ञों के बीच इन विषयों पर लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

अभिजीत भट्टाचार्य का यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने पोस्ट में किए गए दावों की तथ्यात्मकता पर सवाल उठाए। फिलहाल अभिजीत भट्टाचार्य ने इस पोस्ट को लेकर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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असम में भीषण बाढ़ से जलमग्न इलाके और राहत-बचाव कार्य
असम बाढ़ से तबाही, 3 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित; 13 हजार घरों में बिजली गुल

लगातार बारिश से हालात गंभीर, मृतकों की संख्या 78 पहुंची; IMD ने फिर जारी किया भारी बारिश का अलर्ट   गुवाहाटी, एजेंसियां। असम में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य में 3 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि करीब 13 हजार घरों में पिछले 11 दिनों से बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। कई जिलों में सड़कें, पुल और बिजली ढांचा क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।   मृतकों की संख्या 78 पहुंची   राज्य सरकार के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़े हादसों में अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक नुकसान चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में हुआ है। केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का आकलन पूरा कर लिया है।   IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट   भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कई हिस्सों में 1 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके चलते ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है और लोगों को नदी-नालों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।   राहत और पुनर्वास अभियान जारी   राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य एजेंसियां राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटी हैं। प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में भोजन, चिकित्सा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि बिजली और सड़क नेटवर्क को जल्द बहाल करने का प्रयास जारी है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
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उत्तराखंड में भारी बारिश से नदियां उफान पर, 8 जिलों में हाई अलर्ट

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ओडिशा में महानदी का जलस्तर बढ़ा, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा; कई जिलों में हाई अलर्ट

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2020 दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई
उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस, हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब

यूएपीए मामले में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई, अदालत ने पुलिस से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा   नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई जवाब मिलने के बाद होगी।   जमानत की मांग पर हुई सुनवाई   उमर खालिद की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और मुकदमे की सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है। बचाव पक्ष ने नियमित जमानत देने की मांग करते हुए विभिन्न कानूनी आधार अदालत के सामने रखे।   दिल्ली पुलिस ने मांगा समय   सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। इस पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए पुलिस को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया।   UAPA के तहत दर्ज है मामला   उमर खालिद पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है। उन पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। हालांकि, उमर खालिद ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
मुस्लिमों में बहुविवाह पर रोक की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करता सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिमों में बहुविवाह पर रोक की मांग वाली याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

हल्द्वानी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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CCS की बैठक में पश्चिम एशिया संकट पर समीक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस

Shaheed Udham Singh
शहीद ऊधम सिंह का 87वां शहादत दिवस, देशभर में वीर क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि

जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने वाले अमर शहीद को राष्ट्र ने किया नमन, विभिन्न राज्यों में आयोजित हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम   नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह का 87वां शहादत दिवस पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कई स्थानों पर उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण, स्मृति सभाओं और देशभक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।   जलियांवाला बाग नरसंहार का लिया था बदला   13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने ऊधम सिंह को भीतर तक झकझोर दिया था। उन्होंने इस नरसंहार के जिम्मेदार माने जाने वाले पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'ड्वायर की 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।   31 जुलाई 1940 को दी गई थी फांसी   माइकल ओ'ड्वायर की हत्या के मामले में ब्रिटिश अदालत ने ऊधम सिंह को मृत्युदंड सुनाया। उन्हें 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में फांसी दी गई। आजादी के बाद वर्ष 1974 में उनके पार्थिव अवशेष भारत लाए गए, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।   युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा   87वें शहादत दिवस पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने उनके जीवन और बलिदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए। वक्ताओं ने कहा कि ऊधम सिंह का साहस, देशभक्ति और बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

abhishek singh जुलाई 31, 2026 0
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